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पञ्चांग 01 अगस्त 2026 दिन शनिवार।।

Panchang 01 August 2026

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 01 अगस्त 2026 दिन शनिवार।।

मित्रों, तारीख 01 अगस्त 2026 दिन शनिवार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष कि तृतीया तिथि है। आज आदरणीय लोकमान्य बालगंगाधर तिलक जी की स्मृति दिवस है। आज जया-पार्वती व्रत का समापन होता है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं करती हैं। अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए होता है। यह व्रत श्रावण शुक्ल एकादशी से शुरू होकर कृष्ण पक्ष तृतीया तक चलता है। आज जया-पार्वती व्रत का उद्यापन किया जायेगा।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

Panchang 01 August 2026

आज का पञ्चांग 01 अगस्त 2026 दिन शनिवार।।
Aaj ka Panchang 01 August 2026.

विक्रम संवत् – 2083.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.

शक – 1948.

अयन – सौम्यायनम्.

गोल – याम्य.

ऋतु – ग्रीष्म.

मास – श्रावण.

पक्ष – कृष्ण.

गुजराती पंचांग के अनुसार – आषाढ़ कृष्ण पक्ष.

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तिथि – तृतीया 23:08 PM बजे तक उपरान्त चतुर्थी तिथि है।।

नक्षत्र – शतभिषा 20:46 PM तक उपरान्त पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र है।।

योग – शोभन 23:23 PM तक उपरान्त अतिगण्ड योग है।।

करण – वणिज 10:54 AM तक उपरान्त विष्टि 23:08 PM तक उपरान्त बव करण है।।

चन्द्रमा – कुम्भ राशि पर।।

सूर्य – कर्क राशि एवं पुष्य नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।

मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:14:29

मुम्बई सूर्यास्त – सायं 19:14:02

वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 05:24:35

वाराणसी सूर्यास्त – सायं 18:36:52

राहुकाल (अशुभ) – सुबह 09:30 बजे से 11:07 बजे तक।।

विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.32 बजे से 12.56 बजे तक।।

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तृतीया तिथि विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।।

तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।।

मित्रों, तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।।

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शतभिषा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- शतभिषा नक्षत्र में जन्मा जातक बहुत साहसी एवं मजबूत विचारों वाला होता है। अत्यधिक सामर्थ्य एवं स्थिर बुद्धि के होते हुए भी कभी-कभी जिद्दी और संवेदनहीन प्रतीत होते हैं। सभी प्रकार से ज्ञानी होते हुए भी आप आत्म केन्द्रित होते हैं। आप अधिक संतान वाले एवं दीर्घायु होते हैं। शतभिषा नक्षत्र के जातक रहस्यमय एवं समृद्धशाली व्यक्ति होते हैं। इनको अपने आस-पास के लोगों से सम्मान प्राप्त होता है।।

यदि आपका जन्म शतभिषा नक्षत्र में हुआ है तो आप अत्यंत आकर्षक और मजबूत व्यक्तित्व के स्वामी होंगे। आपकी उपस्थिति गरिमामय और प्रभावशाली होती है जो कि दूसरों को आपकी ओर आकर्षित होने को विवश कर देती हैं। चौड़ा माथा, तीखी नाक और सुंदर नेत्रों के कारण आप और भी आकर्षक दिखते हैं। तेज़ स्मरण शक्ति आपके व्यक्तित्व को और मजबूती देती है।।

शतभिषा नक्षत्र के जातकों में सकारात्मक और नकारात्मक पहलू का संतुलित समावेश रहता है। आप अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं और किसी भी कीमत पर उनसे समझौता नहीं करते। जिस कार्य को आप उचित नहीं समझते वह कार्य करने के लिए आपको कोई बाध्य नहीं कर सकता। आप सहृदय व्यक्ति होंगे जो कोमल स्वभाव के कारण सदा ही दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते हैं।।

आप किसी को हानि नहीं पहुंचाते जब तक की सामने वाला आपको नुक्सान न पहुंचाए। आप एक बुद्धिमान व्यक्ति हे जो इश्वर में पूर्ण आस्था रखते हैं। आप सादा जीवन ब्यतित करने में ही विश्वास रखते हैं। परन्तु आपके व्यक्तित्व से आकर्षित हुए बिना कोई नहीं रह सकता। आप जीवन में खूब प्रशंसा और सम्मान पाते हैं। अपने कार्यक्षेत्र में आप पूरी लगन और मेहनत के साथ काम करते हैं और निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहते हैं।।

अच्छी शिक्षा के कारण आप जीवन में बहुत पहले ही अपने करियर का आरंभ कर लेते हैं। 34 वर्ष तक आप संघर्षरत रहते हैं परन्तु उसके बाद का समय बिना किसी बड़ी रुकावट के आपको उन्नति देता है। आपका पारिवारिक जीवन आपके व्यावसायिक जीवन की भांति सुखपूर्वक नहीं होता है। आप अपने परिजनों के कारण जीवन में बहुत कठिनाइयाँ झेलते हैं। हालाँकि आपका व्यवहार उनके प्रति प्रेमपूर्ण ही रहता है।।

इस कारण शतभिषा नक्षत्र के जातक मानसिक रूप से अशांत रहते हैं। पिता की अपेक्षा माता से आपको अधिक लगाव रहता है। साथ ही आपको भी उनसे बहुत स्नेह भी मिलता है। शतभिषा के जातकों का दांपत्य जीवन सुखमय नहीं होता है। सब कुछ होते हुए भी आपका अपने जीवन साथी के साथ सदा ही मतभेद रहता है। शतभिषा नक्षत्र में जन्मी जातिकायें कर्मपरायण एवं परोपकारी होती हैं।।

शतभिषा नक्षत्र में जन्मी जातिकायें सादे किन्तु आकर्षक व्यक्तित्व के कारण लम्बे अरसे तक स्मरण रखी जाती है। शतभिषा नक्षत्र में जन्मे जातक बिगड़े हुए काम को भी बड़े सूझ-बूझ के साथ बना देते हैं। शतभिषा नक्षत्र के जातक ह्रदय रोग, उच्च रक्तचाप, मुख से सम्बंधित अथवा गुप्त रोगों के शिकार हो ही जाते हैं।।

प्रथम चरण:- शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। शतभिषा नक्षत्र में जन्म होने पर जन्म राशि कुंभ तथा राशि का स्वामी शनि, वर्ण शूद्र, वश्य नर, योनि अश्व, योनि महिष, गण राक्षस तथा नाड़ी आदि हैं। ऐसे जातक पर राहु और शनि का प्रभाव रहता है। इस शतभिषा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी बृहस्पति हैं। शतभिषा नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा जातक कुशल वक्ता होता है। शतभिषा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी बृहस्पति शनि का शत्रु है और राहु का भी शत्रु है। अतः बृहस्पति की दशा अपेक्षित फल नहीं देती है। बृहस्पति में राहु एवं शनि की अंतरदशा कष्टदायी होगा। परन्तु राहु की दशा उत्तम फल देती है।।

द्वितीय चरण:- शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस शतभिषा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शनि हैं। शतभिषा नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मा जातक अपने समाज के अग्रगण्य धनवानों में गिने जाते हैं। शतभिषा नक्षत्र के दूसरे चरण का स्वामी शनि लग्नेश भी है। अतः शनि की दशा शुभ फलदायी होती है। राहु की स्वतंत्र दशा उत्तम फल देगी, परन्तु राहु में शनि या शनि में राहु की अन्तर्दशा शत्रु तुल्य कष्ट देगी।।

तृतीय चरण:- शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस शतभिषा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शनि हैं। शतभिषा नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा जातक अपने समाज में सुखी एवं संपन्न व्यक्ति होता है। शतभिषा नक्षत्र के तीसरे चरण का स्वामी शनि लग्नेश भी है। अतः शनि की दशा शुभ फल देती है। राहु की स्वतंत्र दशा उत्तम फल देती है परन्तु राहु में शनि या शनि में राहु की अन्तर्दशा शत्रु तुल्य कष्ट देती है।।

चतुर्थ चरण:- शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस शतभिषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी बृहस्पति हैं। शतभिषा नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मे जातक का पुत्र योग प्रबल होता है। शतभिषा नक्षत्र के चौथे चरण का स्वामी बृहस्पति शनि का शत्रु है और राहु का भी शत्रु है। अतः बृहस्पति की दशा अपेक्षित फल नहीं देती है। लग्नेश शनि की दशा-अन्तर्दशा जातक को उत्तम स्वस्थ्य एवं उन्नत्ति देती है।।

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शनिवार को जूते-चप्पल, लोहे की बनी वस्तुयें, नया अथवा पुराना भी वाहन नहीं खरीदना चाहिये एवं नए कपड़े न खरीदना और ना ही पहली बार पहनना चाहिये।।

शनिवार का विशेष – शनिवार के दिन तेल मर्दन “मालिश” करने से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती हैं – (मुहूर्तगणपति)।।

शनिवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से आयुष्य की हानि होती है। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है।।

दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।।

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जिस व्यक्ति का जन्म शनिवार को होता है उस व्यक्ति का स्वभाव कठोर होता है। ये पराक्रमी एवं परिश्रमी होते हैं तथा इनके ऊपर दु:ख भी आये तो ये उसे भी सह लेना जानते हैं। ये न्यायी एवं गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा सेवा करना इन्हें काफी पसंद होता है।।

शनिवार को जन्म लेनेवाले जातक कुछ सांवले रंग के, साहसी, मैकेनिक अथवा चिकित्सक होते हैं। इनमें से कुछ अपने कार्य में सुस्त भी होते हैं, जैसे देर से जागना, देर तक सोना भी इनकी आदतों में शुमार होता है। पारिवारिक जिम्मेदारियां भी शुद्ध रहती है इसलिये ये एक मेहनतकश इंसान होते हैं। सफलता के मार्ग में रूकावटों का भी सामना करना पड़ता है।।

शनिवार को जन्मलेनेवाले जातकों के स्वभाव में साहस लक्षित होता है। सफलता के मार्ग में लाख रुकावटें आए, लेकिन ये इसे पार करके ही रहते हैं। ऐसे लोग अधिकांशतः सांवले रंग के होते हैं। इन जातकों को अपने कैरियर के लिये डॉक्टपर, इंजीनियर तथा मैकेनिक के क्षेत्र का चयन करना चाहिये। इनका शुभ अंक 3, 6 और 9 तथा इनका शुभ दिन शनिवार और मंगलवार होता है।।

आज का सुविचार – मित्रों, रात लम्बी और काली हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं होता कि सुबह होगी ही नहीं। ठीक उसी तरह असफलता का दौर लम्बा हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब ये कतई नहीं होता कि आपको अब कभी सफलता मिलेगी ही नहीं।।

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Panchang 31 July 2026

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