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पञ्चांग 02 अगस्त 2026 दिन रविवार।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 02 अगस्त 2026 दिन रविवार।।

मित्रों, तारीख 02 अगस्त 2026 दिन रविवार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। आज संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत है। आज अपने पुत्र की कुशलता-संपन्नता-सुख एवं आरोग्य हेतु माताओं को दिनभर उपवास के उपरांत सायंकाल में श्रीगणेश जी की पूजा के बाद उगते चन्द्रमा को अर्घ्य (चन्द्र उदय:- 09:36 PM बजे) देकर उपवास खोलना चाहिए। आज सर्वार्थसिद्धियोग है। आज यायिजययोग भी है। आप सभी सनातनियों को “संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत की” बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आपका आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।

वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

Panchang 02 August 2026

आज का पञ्चांग 02 अगस्त 2026 दिन रविवार।।
Aaj ka Panchang 02 August 2026.

विक्रम संवत् – 2083.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – सिद्धार्थ.

शक – 1948.

अयन – याम्यायनम्.

गोल – सौम्य.

ऋतु – ग्रीष्म.

मास – श्रावण.

पक्ष – कृष्ण.

गुजराती पंचांग के अनुसार – आषाढ़ कृष्ण पक्ष.

Panchang 02 August 2026

तिथि – चतुर्थी 23:16 PM बजे तक उपरान्त पञ्चमी तिथि है।।

नक्षत्र – पूर्वाभाद्रपद 21:38 PM तक उपरान्त उत्तराभाद्रपद नक्षत्र है।।

योग – अतिगण्ड 22:30 PM तक उपरान्त सुकर्मा योग है।।

करण – बव 11:16 AM तक उपरान्त बालव 23:16 PM तक उपरान्त कौलव करण है।।

चन्द्रमा – कुम्भ राशि पर 15:27 PM तक उपरान्त मीन राशि पर।।

सूर्य – कर्क राशि एवं पुष्य नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।

मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:14:50

मुम्बई सूर्यास्त – सायं 19:13:33

वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 05:25:40

वाराणसी सूर्यास्त – सायं 18:35:52

राहुकाल (अशुभ) – सायं 17:37 बजे से 19:15 बजे तक।।

विजय (शुभ) मुहूर्त – दोपहर 12.33 PM से 12.57 बजे तक।।

Panchang 02 August 2026

चतुर्थी तिथि विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।।

इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।।

मित्रों, ज्योतिष शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।।

Panchang 02 August 2026

पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में हुआ है तो आप मानवता में विश्वास रखते हुए केवल दूसरों के भले के बारे में ही सोचते हैं। आप एक दयालु और नेक दिल होने के साथ-साथ खुले विचारों वाले व्यक्ति होंगे। आप बहुत साहसी होंगे तथा दूसरों की मदद करने में सदा आगे रहेंगे। आप वाणी और विचारों से नम्र अवश्य होते हैं परन्तु व्यक्तित्व से नहीं।।

पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्मे जातक अपने आदर्शो और सिद्धांतों पर ही आजीवन चलना पसंद करते हैं। आप जीवन में कभी पथभ्रष्ट नहीं होते क्योंकि आपका दृष्टिकोण सही और साफ़ होता है। आप एक शांति प्रिय व्यक्ति होंगे परन्तु शीघ्र ही किसी छोटी से छोटी बात पर भी क्रोध कर लेंगे। आपको क्रोध जितनी जल्दी आता है उतनी जल्दी चला भी जाता है।।

दूसरों के साथ आपका व्यवहार स्नेही और प्रेमपूर्ण होता है। आप एक संवेदनशील व्यक्ति होंगे जो शीघ्र ही प्रभावित हो जाते है। परन्तु न तो आप डरपोक हैं और न ही जल्दी हार मानते हैं। पूर्वाभाद्रपद में जन्मे जातक आध्यात्मिक स्वभाव वाले होते हैं। परन्तु बंद आँखों से किसी भी बात को मान लेना और उनका अनुसरण करना इनके स्वभाव में नहीं होता है। आप सही और गलत में निर्णय लेने के बाद ही दूसरों का अनुसरण करते हैं।।

आप धन के मामलों में कंजूस कहे जाते हैं। आप जीवन में कई कठिनाईयों को झेलते हुए समाज में आदर एवं सम्मान प्राप्त करते हैं। अपनी कुशाग्र बुद्धि के कारण आप किसी भी प्रकार के कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के योग्य बन जाते हैं। आप केवल स्वभाव से ही नहीं अपितु सामाजिक और आर्थिक रूप से भी स्वतंत्र जीवन पसंद करते हैं। व्यावसायिक रूप से 24 से 33 वर्ष की आयु में आप अपने जीवन में सर्वाधिक सफलता प्राप्त करेंगे।।

40 से 54 वर्ष के आयु में अपने करियर की ऊँचाईयों को छुएंगे। पूर्वाभाद्रपद के जातकों को सरकारी नौकरी, बैंक, शिक्षा और लेखन, व्यापार, ज्योतिष एवं अभिनय के क्षेत्र में कार्य करते देखा गया है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक अपनी माता के स्नेह से वंचित रहता है। कारण जो भी हो पिता का संरक्षण और प्रेम आपको सदा प्राप्त होता है। पिता की उच्च एवं सम्माननीय स्तिथि के कारण आप सदा गौरवान्वित रहेंगे।।

परन्तु कुछ वैचारिक मतभेदों के कारण आपसी तनाव रहेगा। पूर्वाभाद्रपद में जन्मा जातक अक्सर स्त्रियों के वश में रहता है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्मी जातिकायें जादू टोने में विश्वास रखती हैं। निराशा और शोक मग्न चेहरा पूर्वाभाद्रपद में जन्मे जातकों की निशानी बन जाती है। पैर की हड्डी का दर्द, पैर का टूटना, मधुमेह और लकवा जैसी बीमारियाँ ऐसे जातकों को परेशान करती रहती है।।

प्रथम चरण:- वैदिक ज्योतिष के अनुसार पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी गुरु ग्रह है। इस पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी मंगल हैं। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा जातक शूरवीर होता है। जो वस्तु विनम्रता, प्रार्थना एवं खरीद से प्राप्त नहीं हो पाती उसे हरण करने में रूचि रखता है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति शनि का शत्रु है परन्तु मंगल का मित्र है। अतः मंगल की दशा शुभ फल एवं भौतिक सम्पन्नता देती है। परन्तु बृहस्पति की दशा में अपेक्षित शुभ फल नहीं मिल पाएगा। साथ ही शनि की दशा-अन्तर्दशा शुभ फल देती है।।

द्वितीय चरण:- पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी गुरु ग्रह है। इस पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण में जन्मा जातक अति बुद्धिमान होता है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति शुक्र का शत्रु है तथा शुक्र शनि का भी शत्रु है। अतः शुक्र की दशा अपेक्षित शुभ फल नहीं दे पाएगी। बृहस्पति की स्वतंत्र दशा में पराक्रम बढेगा। शनि की दशा में जातक की उन्नत्ति होगी।।

तृतीय चरण:- पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी गुरु ग्रह है। इस पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी बुध हैं। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण में जन्मे जातक का विकास और उन्नत्ति बड़े शहर में रहने के कारण होती है। छोटे गाँव कस्बों में जातक उन्नत्ति नहीं कर पायेगा। बुध की नक्षत्र स्वामी बृहस्पति से शत्रुता है। परन्तु लग्नेश शनि से मित्रता है अतः बुध की दशा शुभ फलदायी होगी। बृहस्पति की स्वतंत्र दशा में पराक्रम बढेगा। शनि की दशा में जातक की उन्नत्ति होगी।।

चतुर्थ चरण:- वैदिक ज्योतिष के अनुसार पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी गुरु ग्रह है। इस पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी चन्द्रमा हैं। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मा जातक भोगी होता है। लग्न नक्षत्र स्वामी और नक्षत्र चरण स्वामी में परस्पर मित्रता है। अतः लग्नेश गुरु की दशा अति उत्तम फल देगी। गुरु की दशा में जातक को रोजगार के शुभ अवसर प्राप्त होंगे। चन्द्रमा की दशा धार्मिक यात्राएं एवं भाग्योदय के उत्तम अवसर प्रदान करेंगी। लग्न बली न होने के कारण जातक के विकास में अडचने आएँगी।।

Panchang 02 August 2026

मित्रों, आज रविवार को सुबह भगवान सूर्य को ताम्बे के एक लोटे में लाल चन्दन, गुड़ और लाल फुल मिलाकर अर्घ्य इस मन्त्र से प्रदान करें। अथ मन्त्रः- एही सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते। अनुकम्प्य मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर।। अथवा गायत्री मन्त्र से भी सूर्यार्घ्य दे सकते हैं।।

इसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। भोजन में मीठा भोजन करना चाहिये नमक का परित्याग करना अत्यन्त श्रेयस्कर होता है। इस प्रकार से किया गया रविवार का पूजन आपको समाज में सर्वोच्च प्रतिष्ठा एवं अतुलनीय धन प्रदान करता है। क्योंकि सूर्य धन और प्रतिष्ठा का कारक ग्रह है।।

दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।।

रविवार का विशेष – रविवार के दिन तेल मर्दन करने से ज्वर (बुखार लगता) होता हैं – (मुहूर्तगणपति)।।

रविवार को क्षौरकर्म (बाल, दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से बुद्धि और धर्म की हानि होती है। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

विशेष जानकारी – मित्रों, रविवार के दिन, चतुर्दशी एवं अमावस्या तिथियों में तथा श्राद्ध एवं व्रत के दिन स्त्री सहवास नहीं करना चाहिये। साथ ही तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना भी शास्त्रानुसार मना है अर्थात ये सब नहीं करना चाहिये।।

Panchang 02 August 2026

रविवार ध्रुव प्रकृति का दिन माना जाता है। रविवार भगवान सूर्य का दिन होता है। यह भगवान विष्णु का दिन भी माना जाता है। वैदिक सनातन धर्म में इसे सर्वश्रेष्ठ वार माना गया है। अच्छा स्वास्थ्य व तेजस्विता पाने के लिए रविवार के दिन उपवास रखना चाहिए। प्रचलन से सप्ताह का पहला वार सोमवार को माना जाता है क्योंकि रविवार को छुट्टी का नाम घोषित है। परंतु सही मायने में तो रविवार सप्ताह का प्रथम वार ही है। परंतु रविवार को कुछ ऐसे कार्य जिसे यदि आप करते हैं तो इससे आपन नुकसान उठाना पड़ सकता है।।

रविवार के दिन पश्चिम और वायव्य दिशा में यात्रा न करें। इन दिशाओं में यात्रा करना जरूरी हो तो रविवार को दलिया, घी या पान खाकर या इससे पहले पांच कदम पीछे चलकर ही इस दिशा में जाएं क्योंकि इस दिन खासकर पश्चिरम में दिशा का शूल माना जाता है। रविवार को तांबे से निर्मित चीजों को बेचने से बचना चाहिए। तांबे के अलावा सूर्य से संबंधित अन्य धातु या वस्तुएं भी ना बेचें।।

रविवार के दिन नीले, काले, कत्थई और ग्रे कलर के कपड़े नहीं पहनना चाहिए। काले या नीले से मिलते जुलते कपड़े तो कदापि ना पहनें। रविवार को नमक नहीं खाना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और हर कार्य में बाधा आती है। खास कर सूर्यास्त के बाद तो नमक बिलकुल भी नहीं खाना चाहिए।।

रविवार को दिन में सहवास करना और मांस एवं मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन शनि से संबंधित पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिए। आमतौर पर लोग रविवार को ही बाल कटाते हैं परंतु इस दिन बाल कटाने से सूर्य कमजोर होता है। इस दिन शरीर में तेल मालिश भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह सूर्य का दिन होता है और तेल शनि का होता है।।

Panchang 02 August 2026

मित्रों, रविवार सप्ताह का प्रथम दिन होता है, इसके अधिष्ठात्री देव सूर्य को माना जाता है। इस दिन जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति तेजस्वी, गर्वीले और पित्त प्रकृति के होते है। इनके स्वभाव में क्रोध और ओज भरा होता है तथा ये चतुर और गुणवान होते हैं। इस दिन जन्म लेनेवाले जातक उत्साही और दानी होते हैं तथा संघर्ष की स्थिति में भी पूरी ताकत से काम करते हैं।।

रविवार को जन्म लेनेवाले जातक सुन्दर एवं गेंहूए रंग के होते हैं। इनमें तेजस्विता का गुण स्वाभाविक ही होता है। महत्वाकांक्षी होने के साथ ही प्रत्येक कार्य में जल्दबाजी करते है और सफल भी होते हैं। उत्साह इनमें कूट-कूट कर भरा होता है तथा ये परिश्रम से कभी भी घबराते नहीं हैं। ये हर कार्य में रूचि लेने वाले होते हैं परन्तु ये लोग समय के पाबंद नहीं होते। ये जातक अपना करियर किसी भी क्षेत्र में अपने कठिन परिश्रम से बनाने की क्षमता रखते हैं। इनका शुभ दिन रविवार तथा शुभ अंक 7 होता है।।

आज का सुविचार – मित्रों, गलती कबूल़ करने और गुनाह छोङने में कभी देर ना करना। क्योंकि सफर जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुशिकल हो जाती हैं। दुनिया में सिर्फ माँ-बाप ही ऐसे हैं जो बिना किसी स्वार्थ के प्यार करते हैं। कोई देख ना सका उसकी बेबसी जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों में डालकर।।

Panchang 02 August 2026

सूर्य की महादशा में मंगल विजय और बुध कुष्ठ रोग देता है ।।…. आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें:  & ब्लॉग पर पढ़ें:

“क्या बाबा के सर सज रही है, UP का ताज? क्या बाबा फिर CM बन सकते हैं।।” – My Latest video.
“क्या कहती है अखिलेश यादव की कुंडली? क्या मिलेगी सत्ता?।।” – My Latest video.
“शुक्र की महादशा में सूर्य अन्तर्दशा फलम्” – My Latest video.
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Panchang 02 August 2026

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