HomePanchangपञ्चांग 04 अक्टूबर 2026 दिन रविवार।।

पञ्चांग 04 अक्टूबर 2026 दिन रविवार।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 04 अक्टूबर 2026 दिन रविवार।।

मित्रों, तारीख 04 अक्टूबर 2026 दिन रविवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है। आज मातृ नवमी (अविधवा नवमी) या सौभाग्य नवमी के श्राद्ध का दिन है। आज सुबह 07:28 AM बजे के बाद ही जीवत्पुत्रिका व्रत का पारण किया जायेगा। आज सौभाग्यवती स्त्रियाँ जिनकी मृत्यु अपने पति के जीवित रहते ही हो गयी हो, उनके श्राद्ध का दिन मातृनवमी का पावन अवसर है। आज का श्राद्ध करने से पितृदोष निर्मूल हो जाता है। आज नवें दिन का श्राद्ध किया जायेगा। यदि आपके पिता का देहावसान किसी भी मास के नवमी तिथि को हुआ हो तो आपको आज ही पितरों का श्राद्ध भी करना चाहिए। मातृ नवमी और पितरों का श्राद्ध भी आज नवम दिवस का किया जायेगा। पुरुष पितरों का और स्त्रियाँ मातृनवमी का श्राद्ध करेंगे। आज यायिजययोग भी है। आज सर्वार्थसिद्धियोग भी है। आप सभी सनातनियों को ” नवम दिन के श्राद्ध और मातृनवमी के पावन अवसर” की हार्दिक शुभकामनायें।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

पञ्चांग 04 अक्टूबर 2026 दिन रविवार।। Panchang 04 October 2026

आज का पञ्चांग 04 अक्टूबर 2026 दिन रविवार।।
Aaj ka Panchang 04 October 2026.

विक्रम संवत् – 2083.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – सिद्धार्थ.

शक – 1948.

अयन – याम्यायनम्.

गोल – सौम्य.

ऋतु – वर्षा.

मास – अश्विन.

पक्ष – कृष्ण.

गुजराती पंचांग के अनुसार – भाद्रपद कृष्ण पक्ष.

#Panchang_04_October_2026

तिथि – अष्टमी 05:52 AM बजे तक उपरान्त नवमी तिथि है।।

नक्षत्र – आर्द्रा 01:30 AM तक उपरान्त पुनर्वसु नक्षत्र है।।

योग – परिघ 12:33 PM तक उपरान्त शिव योग है।।

करण – कौलव 05:22 AM तक उपरान्त तैतिल 16:52 PM तक उपरान्त गर करण है।।

चन्द्रमा – मिथुन राशि पर 18:32 PM तक उपरान्त कर्क राशि पर।।

सूर्य – कन्या राशि एवं हस्त नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।

मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:30:59

मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:22:15

वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 06:08:40

वाराणसी सूर्यास्त – सायं 17:52:52

राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:54 बजे से 18:23 बजे तक।।

विजय (शुभ) मुहूर्त – दोपहर 12.15 PM से 12.39 बजे तक।।

#Panchang_04_October_2026

नवमी तिथि विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।।

नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।।

आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।।

नवमी तिथि को जन्म लेने वाला व्यक्ति भाग्यशाली एवं धर्मात्मा होता है। इस तिथि का जातक धर्मशास्त्रों का अध्ययन कर शास्त्रों में विद्वता हासिल करता है। ये ईश्वर में पूर्ण भक्ति एवं श्रद्धा रखते हैं। धनी स्त्रियों से इनकी संगत रहती है तथा इसके पुत्र गुणवान होते हैं।।

#Panchang_04_October_2026

पुनर्वसु नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- पुनर्वसु नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति बेहद मिलनसार और दूसरों से प्रेमपूर्वक व्यवहार रखने वाले होते हैं। परन्तु बहुत कम लोग आपके स्नेहपूर्वक व्यवहार को समझ पाते हैं और प्रायः आपके व्यवहार को कायरता से जोड़ देतें हैं। आपके गुप्त शत्रुओं की संख्या अधिक होती है। आपको अधिक संतान की प्राप्ति भी होती है परन्तु उनका आपस में या आप के साथ व्यवहार सौहार्दपूर्ण नहीं होता है।।

सहयोगी, पडोसी या ससुराल पक्ष में आप के प्रति षड़यंत्र बनते रहते हैं। पुनर्वसु नक्षत्र में जन्मे जातकों को सबसे अधिक भय अपने निकटतम मित्रों से होता है। क्योंकि जीवन में कभी न कभी आप अपने मित्रों द्वारा ही विश्वासघात के शिकार होते हैं। आप स्वभाव से शांत प्रकृति के व्यक्ति होंगे। परन्तु आप देखने में सुन्दर और सुशील होते हैं। अपने दानी स्वभाव के कारण मित्रों और समाज में अधिक लोकप्रिय होते हैं।।

आजीवन धन और बल से युक्त रहते हैं। आपको समाज में मान-प्रतिष्ठा की कमी नहीं रहती। आप सहनशील एवं अपने भाई-बहनों से प्रेम करने वाले होते हैं। ईश्वर में पूर्ण आस्था एवं लोक-परलोक का विचार सदैव आपके मन में रहता है। इसलिए आप सदा ही सात्विक आचरण का समर्थन करते हैं। आप स्वभाव से सुन्दर एवं सात्विक आचरण वाले होंगे। आप खांसी, निमोनिया, सुजन, फेफड़ों में दर्द एवं कान से सम्बंधित रोग होने की संभावनायें होती है।।

प्रथम चरण:- पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इसके प्रथम चरण का स्वामी मंगल हैं। मंगल और बृहस्पति दोनों मित्र ग्रह हैं। फलस्वरूप ऐसा जातक अपने जीवन में अनेकों सुख भोगता है। लग्नेश बुध की दशा शुभ फल देगी। शनि की दशा में भाग्योदय होगा। बृहस्पति की दशा में गृहस्थ एवं नौकरी का सुख मिलेगा।।

द्वितीय चरण:- पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इसके द्वितीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। बृहस्पति देवगुरु हैं तथा शुक्राचार्य दैत्यों के आचार्य हैं। अतः दोनों आचार्यों, बृहस्पति एवं शुक्र से सम्बन्ध रखने वाला जातक विद्वान् होगा। लग्नेश बुध की दशा माध्यम फल देगी। बृहस्पति की दशा में जातक का भाग्योदय होगा।।

तृतीय चरण:- पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इसके तृतीय चरण का स्वामी बुध हैं। जो परस्पर विरोधी हैं। अतः पुनर्वसु नक्षत्र के तृतीय चरण में पैदा होने वाला जातक आजीवन रोगी होगा और कोई न कोई बीमारी उसे जीवन भर परेशान करेगी। बृहस्पति एवं बुध की दशाएं नेष्ट फल देंगी।।

चतुर्थ चरण:- पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इसके चतुर्थ चरण का स्वामी चन्द्र हैं। पुनर्वसु नक्षत्र के चौथे चरण में पैदा होने वाला जातक धन बल से युक्त, कवी ह्रदय, संगीत प्रेमी, कम प्रयत्न से अधिक लाभ कमाने वाला परन्तु स्वभाव से कामुक होता है। इस नक्षत्र पर मंगल का होना जातक को स्वार्थी बना देता है और गुरु की उपस्तिथि में जातक समाज के सम्मानजनक पदों पर आसीन होता है।।

#Panchang_04_October_2026

मित्रों, आज रविवार को सुबह भगवान सूर्य को ताम्बे के एक लोटे में लाल चन्दन, गुड़ और लाल फुल मिलाकर अर्घ्य इस मन्त्र से प्रदान करें। अथ मन्त्रः- एही सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते। अनुकम्प्य मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर।। अथवा गायत्री मन्त्र से भी सूर्यार्घ्य दे सकते हैं।।

इसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। भोजन में मीठा भोजन करना चाहिये नमक का परित्याग करना अत्यन्त श्रेयस्कर होता है। इस प्रकार से किया गया रविवार का पूजन आपको समाज में सर्वोच्च प्रतिष्ठा एवं अतुलनीय धन प्रदान करता है। क्योंकि सूर्य धन और प्रतिष्ठा का कारक ग्रह है।।

दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।।

रविवार का विशेष – रविवार के दिन तेल मर्दन करने से ज्वर (बुखार लगता) होता हैं – (मुहूर्तगणपति)।।

रविवार को क्षौरकर्म (बाल, दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से बुद्धि और धर्म की हानि होती है। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

विशेष जानकारी – मित्रों, रविवार के दिन, चतुर्दशी एवं अमावस्या तिथियों में तथा श्राद्ध एवं व्रत के दिन स्त्री सहवास नहीं करना चाहिये। साथ ही तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना भी शास्त्रानुसार मना है अर्थात ये सब नहीं करना चाहिये।।

#Panchang_04_October_2026

रविवार ध्रुव प्रकृति का दिन माना जाता है। रविवार भगवान सूर्य का दिन होता है। यह भगवान विष्णु का दिन भी माना जाता है। वैदिक सनातन धर्म में इसे सर्वश्रेष्ठ वार माना गया है। अच्छा स्वास्थ्य व तेजस्विता पाने के लिए रविवार के दिन उपवास रखना चाहिए। प्रचलन से सप्ताह का पहला वार सोमवार को माना जाता है क्योंकि रविवार को छुट्टी का नाम घोषित है। परंतु सही मायने में तो रविवार सप्ताह का प्रथम वार ही है। परंतु रविवार को कुछ ऐसे कार्य जिसे यदि आप करते हैं तो इससे आपन नुकसान उठाना पड़ सकता है।।

रविवार के दिन पश्चिम और वायव्य दिशा में यात्रा न करें। इन दिशाओं में यात्रा करना जरूरी हो तो रविवार को दलिया, घी या पान खाकर या इससे पहले पांच कदम पीछे चलकर ही इस दिशा में जाएं क्योंकि इस दिन खासकर पश्चिरम में दिशा का शूल माना जाता है। रविवार को तांबे से निर्मित चीजों को बेचने से बचना चाहिए। तांबे के अलावा सूर्य से संबंधित अन्य धातु या वस्तुएं भी ना बेचें।।

रविवार के दिन नीले, काले, कत्थई और ग्रे कलर के कपड़े नहीं पहनना चाहिए। काले या नीले से मिलते जुलते कपड़े तो कदापि ना पहनें। रविवार को नमक नहीं खाना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और हर कार्य में बाधा आती है। खास कर सूर्यास्त के बाद तो नमक बिलकुल भी नहीं खाना चाहिए।।

रविवार को दिन में सहवास करना और मांस एवं मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन शनि से संबंधित पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिए। आमतौर पर लोग रविवार को ही बाल कटाते हैं परंतु इस दिन बाल कटाने से सूर्य कमजोर होता है। इस दिन शरीर में तेल मालिश भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह सूर्य का दिन होता है और तेल शनि का होता है।।

#Panchang_04_October_2026

मित्रों, रविवार सप्ताह का प्रथम दिन होता है, इसके अधिष्ठात्री देव सूर्य को माना जाता है। इस दिन जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति तेजस्वी, गर्वीले और पित्त प्रकृति के होते है। इनके स्वभाव में क्रोध और ओज भरा होता है तथा ये चतुर और गुणवान होते हैं। इस दिन जन्म लेनेवाले जातक उत्साही और दानी होते हैं तथा संघर्ष की स्थिति में भी पूरी ताकत से काम करते हैं।।

रविवार को जन्म लेनेवाले जातक सुन्दर एवं गेंहूए रंग के होते हैं। इनमें तेजस्विता का गुण स्वाभाविक ही होता है। महत्वाकांक्षी होने के साथ ही प्रत्येक कार्य में जल्दबाजी करते है और सफल भी होते हैं। उत्साह इनमें कूट-कूट कर भरा होता है तथा ये परिश्रम से कभी भी घबराते नहीं हैं। ये हर कार्य में रूचि लेने वाले होते हैं परन्तु ये लोग समय के पाबंद नहीं होते। ये जातक अपना करियर किसी भी क्षेत्र में अपने कठिन परिश्रम से बनाने की क्षमता रखते हैं। इनका शुभ दिन रविवार तथा शुभ अंक 7 होता है।।

आज का सुविचार – मित्रों, गलती कबूल़ करने और गुनाह छोङने में कभी देर ना करना। क्योंकि सफर जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुशिकल हो जाती हैं। दुनिया में सिर्फ माँ-बाप ही ऐसे हैं जो बिना किसी स्वार्थ के प्यार करते हैं। कोई देख ना सका उसकी बेबसी जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों में डालकर।।

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सूर्य की महादशा में मंगल विजय और बुध कुष्ठ रोग देता है।।…. आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें:  & ब्लॉग पर पढ़ें:

मातृनवमी के व्रत का शुभ फल।। Matru Navami Vrat Ka Shubh Fal. Read More.

“क्या बाबा के सर सज रही है, UP का ताज? क्या बाबा फिर CM बन सकते हैं।।” – My Latest video.
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