बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।
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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 08 अक्टूबर 2026 दिन गुरुवार।।
मित्रों, तारीख 08 अक्टूबर 2026 दिन गुरुवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष कि त्रयोदशी तिथि है। आज प्रदोष का परम पावन व्रत है। आज तेरहवें दिन का श्राद्ध किया जायेगा। यदि आपके पिता का देहावसान किसी भी मास के त्रयोदशी तिथि को हुआ हो तो आपको आज ही उनका श्राद्ध करना चाहिए। आज अपने गोत्र वालों एवं कुछ ब्राह्मणों को शुद्ध पक्वान्नो का भोजन आदरपूर्वक और दक्षिणा सहित करवाना चाहिए। आज मासशिवरात्रि व्रत भी है। जिस दिन त्रयोदशी तिथि में महानिशा अर्थात् मध्यरात्रि के समय चतुर्दशी तिथि व्याप्त हो, उस दिन शिवरात्रि का व्रत करना चाहिए। आप सभी सनातनियों को “प्रदोष व्रत एवं मासशिवरात्रि व्रत तथा तेरहवें दिन के श्राद्ध” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आप का आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 08 अक्टूबर 2026 दिन गुरुवार।।
Aaj ka Panchang 08 October 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – वर्षा.
मास – अश्विन.
पक्ष – कृष्ण.
गुजराती पंचांग के अनुसार – भाद्रपद कृष्ण पक्ष.
#Panchang_08_October_2026
तिथि – त्रयोदशी 22:17 PM बजे तक उपरान्त चतुर्दशी तिथि है।।
नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी 21:21 PM तक उपरान्त उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है।।
योग – शुभ 02:53 AM तक उपरान्त शुक्ल योग है।।
करण – गर 10:45 AM तक उपरान्त वणिज 22:17 PM तक उपरान्त विष्टि करण है।।
चन्द्रमा – सिंह राशि पर।।
सूर्य – कन्या राशि एवं हस्त नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:32:05
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:18:47
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 06:11:39
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 17:49:45
राहुकाल (अशुभ) – सुबह 13:54 बजे से 15:23 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.14 बजे से 12.38 बजे तक।।
#Panchang_08_October_2026
त्रयोदशी तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।।
इस त्रयोदशी तिथि के देवता मदन अर्थात कामदेव जी को बताया गया है। भगवान कामदेव जी शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण और देवी माता रुक्मिणी के पुत्र हैं। कामदेव जी प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। आज की त्रयोदशी तिथि में भगवान के अंशावतार भगवान कामदेव की पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का (मन्त्र वेबसाइट के निचे के लिंक पर है) जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।
त्रयोदशी तिथि ज्योतिषशास्त्र में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति महापुरूष होता है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है और अनेक विषयों की अच्छी जानकारी रखने वाला होता है। यह व्यक्ति काफी विद्वान होता है तथा अन्यों के प्रति दया भाव रखने वाला एवं किसी की भी भलाई करने हेतु सदैव तत्पर रहने वाला होता है । इस तिथि के जातक समाज में काफी प्रसिद्धि हासिल करते ही हैं।।
#Panchang_08_October_2026
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में हुआ है तो आप ऐसे भाग्यशाली व्यक्ति हैं जो समाज में सम्माननीय होता हैं और जिनका अनुसरण हर कोई करना चाहता है। आपमें आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा होता है तथा नेतृत्व की क्षमता आपमें बचपन से ही होता है। इन्ही सब कारणों से आपके अधीनस्थ कर्मचारी भी आपसे भय खाते हैं। परिवार में भी आप एक मुखिया की भूमिका में रहते हैं।।
परिवार के सभी छोटे बड़े कार्यों के लिए आपका परामर्श आवश्यक समझा जाता है तथा सभी सदस्य आपके द्वारा कहे गये वचनों को आज्ञा समझ कर पालन करते हैं। आपको अनुशासन में रहना पसंद है तथा आप परिवार या कार्यस्थल पर दूसरों से भी अनुशासन की अपेक्षा करते हैं। आपकी अनुशासनात्मक प्रवृत्ति पूर्ण रूप से सफल कही जा सकती है। आप प्रशासनिक क्षेत्रों में बेहद सफल होते हैं।।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र शुक्र का नक्षत्र है इसका पर्याय भाग्य भी होता है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक स्वभाव से चंचल एवं त्यागी होगा। दृढनिश्चयी होने के साथ-साथ आप कामी भी होंगे। शुक्र एक कामुक ग्रह माना जाता है इस नक्षत्र में चन्द्रमा जैसे ही आता है जातक की काम एवं चपलता उसपर हावी हो जाती है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक मनमोहक छवि और मीठा बोलने वाला होता है।।
ऐसे लोग दूसरों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते हैं और दान देने में भी नहीं हिचकिचाते। शुक्र के कारण आपका व्यवहार सौम्य एवं मीठा होता है। आपकी सरकारी क्षेत्र में कार्य करने की संभावनाएं अधिक होती है तथा अपने गुणों के कारण आप राज्य से घनिष्ठ सम्बन्ध भी बना लेते हैं। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में जन्मी स्त्री सौम्य स्वभाव की होतीं हैं। दूसरों की मदद और दान करना इनका विशेष गुण होता है।।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में जन्म लेनेवाली स्त्री क्रोधी और दृढ इच्छा रखने वाली होती हैं। ऐसी स्त्रियों का दान पुण्य का सहज स्वभाव होता है। ऐसे जातकों का प्रेम में असफलता के कारण मानसिक कष्ट, कमर का दर्द, ह्रदय रोग, वायु एवं रक्त से सम्बंधित रोग होने की संभावनायें अधिक होती है।।
प्रथम चरण:- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य हैं। इस नक्षत्र में जन्मा जातक मीठा बोलने वाला एवं सुन्दर होता है। इस नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा व्यक्ति सर्वगुण संपन्न एवं समर्थ होता है। लग्नेश सूर्य की दशा विशेष फलदायी तथा मंगल की दशा में जातक का भाग्योदय होने की संभावनायें अधिक होती हैं।।
द्वितीय चरण:- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध हैं। बुध के प्रभाव के कारण जातक वेद शास्त्रों का ज्ञाता एवं धर्म शास्त्रों का मर्मज्ञ होता है। सूर्य की दशा जातक के लिए स्वास्थ्यवर्धक होति है तथा मंगल की दशा-अन्तर्दशा में जातक का भाग्योदय होता है। बुध की दशा में धन की प्राप्ति के योग बनते हैं।।
तृतीय चरण:- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। लग्नेश सूर्य के साथ शुक्र का सम्बन्ध क्रूरता भरा है। क्योंकि शुक्र दानवों का गुरु ग्रह है। फलस्वरूप इस नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति क्रूर होगा। सूर्य की दशा जातक के लिए स्वास्थ्यवर्धक होगी तथा मंगल की दशा-अन्तर्दशा में जातक का भाग्योदय होगा। बुध की दशा में धन की प्राप्ति के योग बनेगे।।
चतुर्थ चरण:- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी मंगल हैं। मंगल नक्षत्र स्वामी शुक्र का शत्रु एवं क्रूर ग्रह है। मंगल, सूर्य, शुक्र भी तेजस्वी ग्रह हैं। अतः जातक की आयु अधिक नहीं होगी। सूर्य की दशा माध्यम फल देगी एवं मंगल की दशा में जातक का भाग्योदय होगा।।
#Panchang_08_October_2026
गुरुवार शॉपिंग के लिये अच्छा दिन माना जाता है।।
गुरुवार का विशेष – गुरुवार के दिन तेल मर्दन करने से धन एवं यश की हानि होती है – (मुहूर्तगणपति)।।
गुरुवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से तथा सर के बाल धोना, कपड़े धुलना अथवा धोबी के घर डालना, घर-आँगन की गोबर आदि से लिपाई करना इस प्रकार के कार्य नहीं करने चाहियें इससे धन एवं पूण्य की हानी होती है और लक्ष्मी घर छोड़कर चली जाती है।। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति का कारक ग्रह होता है। साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक ग्रह भी होता है। इसलिये बृहस्पति ग्रह अकेले ही स्त्री के संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है। अतः बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है जिससे कि बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी आती है। इसी कारण से इस दिन बाल धोना या कटवाना भी नहीं चाहिए। इसका असर संतान और पति के जीवन पर पड़ता है और उनकी उन्नति बाधित होती है।।
वास्तु अनुसार घर के ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है। ईशान कोण का संबंध परिवार के नन्हे सदस्यों यानी कि बच्चों से होता है। साथ ही घर के पुत्र संतान का संबंध भी इसी कोण से ही होता है। ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है इसलिये घर में शुद्ध वजन वाले कपड़ों को धोना, कबाड़ घर से बाहर निकालना, घर को धोना या पोछा लगाना इत्यादि घर के ईशान कोण को कमजोर करता है। उससे घर के बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर गुरु का शुभ प्रभाव कम होता है।।
#Panchang_08_October_2026
गुरुवार भगवान लक्ष्मी नारायण का दिन होता है। इसलिये इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से जीवन में अपार खुशियाँ आती है। इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से पति-पत्नी के बीच कभी दूरियाँ नहीं आती है साथ ही धन की वृद्धि भी होती है। जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से उन्नति के रास्ते आसानी से खुलते हैं। परन्तु यदि गुरु ग्रह को कमजोर करने वाले कार्य किए जाए तो प्रमोशन होने में भी रुकावटें आती है।।
गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है। जैसे – सिर के बाल धोना, भारी कपड़े धोना, बाल कटवाना, शेविंग करवाना, शरीर के बालों को साफ करना, फेशियल करवाना, नाखून काटना, घर से मकड़ी के जाले साफ करना, घर के उन कोनों की सफाई करना जिन कोनों की रोज सफाई नहीं की जाती हो। ये सभी काम गुरुवार को करने से धन हानि होता है तथा तरक्की रुक जाती है।।
दिशाशूल – गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है।।
गुरुवार के दिन ये विशेष उपाय करें – गुरु धन एवं प्रतिष्ठा का कारक ग्रह होता है। जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है। गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें बिगड़े काम भी बन जायेंगे।।
#Panchang_08_October_2026
बृहस्पतिवार को जिनका जन्म होता है, वह व्यक्ति विद्या एवं धन से युक्त होता है अर्थात ये ज्ञानी और धनवान होते हैं। ये विवेकशील होते हैं और शिक्षण को अपना पेशा बनाते हैं। ये लोगों के सम्मुख आदर और सम्मान के साथ प्रस्तुत होते हैं तथा उच्च स्तर के सलाहकार भी होते हैं। गुरुवार में जन्मे जातक सभ्य, खिलते रंग के, सुशील एवं मधुर स्वभाव के होते हैं तथा धर्म के प्रति सचेत होते हैं।।
ये सभी सद्गुणों से संपन्न होने के वजह से किसी के साथ विश्वासघात नहीं करते हैं। ऐसे लोग किसी का हक नहीं मारते तथा न्याय के प्रति सजग होते हैं। यह सफल राजनीतिज्ञ, न्यायधीश, क्लर्क, प्रकाशक एवं धर्मगुरु आदि के रूप में सफल होते हैं। गुरुवार को जन्मं लेने वाले व्यसक्ति बेहद मिलनसार और मधुर स्वभाव के होते हैं। ये जीवन को उत्सफव की तरह जीते हैं इसलिए हमेशा खिले-खिले रहते हैं।।
ऐसे व्यक्ति धर्म में विशेष रुचि रखने वाले होते हैं। धार्मिक प्रवृत्ति के कारण ये कभी किसी के साथ विश्वाससघात नहीं कर सकते हैं। यह किसी का हक भी नहीं मारते, न्याय के प्रति सजग होते हैं। इनको अपने जीवन में सफलता हेतु धर्मगुरु, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, प्रकाशक एवं न्यायधीश आदि के क्षेत्र में भाग्य आजमाना चाहिये। इनका शुभ दिन मंगलवार और बृहस्पितिवार तथा शुभ अंक 4 होता है।।
आज का विचार – मित्रों, हम अपनी पिछली गलतियों से सबक लेकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। परन्तु याद रहे कि होशियार लोग अपनी गलती से लेते हैं, जबकि ज्यादा होशियार लोग दूसरों की गलतियों से गलतियों को दुहराना सीखते हैं। इसलिये अपनी गलतियों को सुधारना ही व्यक्ति में इंसानियत लाता है।।
#Panchang_08_October_2026
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