बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।
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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 10 अगस्त 2026 दिन सोमवार।।
मित्रों, तारीख 10 अगस्त 2026 दिन सोमवार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष कि द्वादशी तिथि है। तो आइये आज हम सबसे पहले कामिका एकादशी व्रत के पारण का निर्णय देखते हैं। तो जैसा की आप जानते हैं, कि तारीख 08 अगस्त 2026 को दिन में दोपहर 14:00 PM बजे से शुरू होकर 09 अगस्त 2026 को रात्री 11:06 AM बजे तक एकादशी थी। इसलिए आज 10 अगस्त 2026 को पारण का समय [हृषीकेश पञ्चांग के अनुसार] प्रातः 05:55 AM बजे तक ही है। परन्तु मुंबई और सॉफ्टवेयर अथवा गूगल के अनुसार पारण का समय प्रातः 06:20 से 08:54 AM बजे तक है। इस समय के भीतर ही सभी कामिका एकादशी व्रतियों को एकादशी व्रत का पारण कर लेना चाहिए। आज गुरु देवता [बृहस्पति ग्रह] का उदय पूर्व दिशा में हो जायेंगे। आज सोमवार का पावन व्रत भी है। बल्कि आज तो सोमवार का सोमप्रदोष व्रत भी है। आज शिवमन्दिर जाकर अपने मन की इच्छाओं को पूर्ण करने के लिए भगवान शिव की पूजा के बाद प्रार्थना करना चाहिए। आज के दिन मांगी हुई इच्छायें शिव अवश्य पूर्ण करते ही हैं। खासकर पुत्र हीनों की कामनायें अवश्य पूर्ण हो जाती है। आज यायीजययोग भी है। आप सभी सनातनियों को “सोमप्रदोष व्रत एवं श्रावण सोमवार व्रत की” बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आपका आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 10 अगस्त 2026 दिन सोमवार।।
Aaj ka Panchang 10 August 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – ग्रीष्म.
मास – श्रावण.
पक्ष – कृष्ण.
गुजराती पंचांग के अनुसार – आषाढ़ कृष्ण पक्ष.
Panchang 10 August 2026
तिथि – द्वादशी 08:02 AM बजे तक उपरान्त त्रयोदशी तिथि है।।
नक्षत्र – आर्द्रा 12:28 PM तक उपरान्त पुनर्वसु नक्षत्र है।।
योग – वज्र 22:28 PM तक उपरान्त सिद्धि योग है।।
करण – तैतिल 08:02 AM तक उपरान्त गर 18:29 PM तक उपरान्त वणिज करण है।।
चन्द्रमा – मिथुन राशि पर।।
सूर्य – कर्क राशि एवं आश्लेषा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:17:31
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 19:09:02
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 05:29:41
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 06:31:37
राहुकाल (अशुभ) – सुबह 07:54 बजे से 09:31 बजे तक।।
विजय (शुभ) मुहूर्त – दोपहर 12.32 बजे से 12.56 बजे तक।।
Panchang 10 August 2026
द्वादशी तिथि विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह मसूर से बना सभी व्यंजन इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण भगवान को बताया गया है। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ अवश्य करने चाहिए। नाम के पाठ एवं जप आदि करने से व्यक्ति के जीवन में धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति सहज ही होने लगती है।।
आज द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।।
द्वादशी तिथि में जन्म लेनेवाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं।।
Panchang 10 August 2026
आर्द्रा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म आर्द्रा नक्षत्र में हुआ है तो आपकी रूचि अध्ययन में बहुत अधिक होगी। आप सदैव ही अपने आस-पास की घटनाओं के बारे में जागरूक रहते हैं। किताबों से विशेष लगाव आपकी पहचान है। एक और विशेषता जो की आर्दा नक्षत्र में पैदा हुए जातकों में अक्सर देखी गयी है वह है उनकी व्यापार करने की समझ। अपनी तीक्ष्ण व्यापारिक बुद्धि के कारण आप व्यापार क्षेत्र में शीघ्र ही सफलता की उचाईयों को छू लेने में सक्षम होते है।।
आपमें भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं का पूर्वाभास करने की अजब क्षमता होती है। दूसरों की मन की बात भी आप आसानी से भांप लेते हैं। इसलिए जीवन में धोखा खाने की संभावनाएं कम ही रहती है। मीठी और रसीली बातें आपके व्यवहार में होती हैं। इसलिए व्यापारिक संस्थाओं में अधिकतर जनसंपर्क के पद के लिए आपको चुना जाता है। परन्तु कड़े अनुशासन में रहना आप के बस की बात नहीं होती है।।
जहाँ आपसे किसी के दिल की बात छुपी नहीं रहती वहीँ आप अपने दिल की बात की किसी की भनक भी नहीं लगने देते। आप एक अन्तर्मुखी व्यक्ति होंगे जो शीघ्र ही किसी के सामने आपने दिल की बात नहीं रखते। कभी-कभी आप रहस्यवादी बन जाते हैं जिसके मन की थाह पाना बहुत कठिन होता है। आप दिमाग से अधिक दिल की सुनने वाले व्यक्ति हैं।।
आप अक्सर सुनते सभी की हैं परन्तु करते केवल अपने मन की हैं। इस कारण आपको कभी-कभी नुकसान भी उठाना पड़ जाता है। आप धन खर्च करने से पहले सोच विचार नहीं करते इस कारण जीवन में अधिकतर आप धन की कमी महसूस करते हैं। आर्द्रा नक्षत्र में जन्मे जातक स्वभाव से क्रोधी एवं अभिमानी होते हैं। आर्द्रा नक्षत्र में जन्मे जातकों को अस्थमा, दमा एवं डिप्थेरिया जैसी बीमारियों के शिकार होते हैं।।
प्रथम चरण:- आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहू को माना जाता है। राहू की दशा 18 वर्ष की होती हैं। इसके प्रथम चरण का स्वामी ग्रह बृहस्पति हैं। राहु और बृहस्पति की युति के कारण गुरु चंडाल योग बनता है। अतः इस योग में जन्मा जातक बहुत धन खर्च करने वाला व्ययी होता है। लग्नेश बुध की दशा अति उत्तम फल देगी तथा आपका भाग्योदय बृहस्पति की दशा में होगा।।
द्वितीय चरण:- आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहू को माना जाता है। राहू की दशा 18 वर्ष की होती हैं। इसके द्वितीय चरण का स्वामी ग्रह शनि हैं। जो स्वल्प धनि है, राहु भी स्वलप धनि है अतः दोनों के योग के कारण जातक अपने जीवन काल में दरिद्रता का शिकार हो जाता है। लग्नेश बुध की दशा अति उत्तम फल देगी तथा आपका भाग्योदय बृहस्पति और शनि की दशा में होगा।।
तृतीय चरण:- आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहू को माना जाता है। राहू की दशा 18 वर्ष की होती हैं। इसके तृतीय चरण का स्वामी ग्रह भी शनि हैं। शास्त्रों के अनुसार आर्दा नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मे जातकों की आयु सामान्यतः कम होती है। लग्नेश बुध की दशा अति उत्तम फल देगी। राहु भी शुभ फल देगा। तथा शनि की दशा में जातक का भाग्योदय होगा।।
चतुर्थ चरण:- आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहू को माना जाता है। राहू की दशा 18 वर्ष की होती हैं। इसके चतुर्थ चरण का स्वामी ग्रह बृहस्पति हैं। राहु और बृहस्पति की युति के कारण गुरु चंडाल योग बनता है। अतः इस योग में जन्मे जातक में चोरी करने की आदत पड़ जाती है। लग्नेश बुध की दशा अति उत्तम फल देगी। राहु भी शुभ फल देगा।।
Panchang 10 August 2026
सामान्यतया सोमवार शॉपिंग के लिए अच्छा दिन माना जाता है।।
सोमवार का विशेष – सोमवार के दिन तेल मर्दन अर्थात् तेल मालिश करने से चहरे और शरीर की कान्ति बढ़ती है – (मुहूर्तगणपति)।।
सोमवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से शिव भक्ति की हानि होती है। पुत्रवान पिता को तो कदापि नहीं करना चाहिये। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है।।
सोमवार के दिन ये विशेष उपाय करें – सोमवार को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।
Panchang 10 August 2026
मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म सोमवार को होता है, वो जातक शांत प्रवृत्ति के गौर वर्ण लिए हुये होते हैं। सोमवार चन्द्र प्रधान दिन होता है, इसलिये इस जातक में कल्पनाशीलता, दया भाव, नम्रता के गुण परिलक्षित होते हैं। माता के प्रिय एवं सद्गुणों से युक्त ये जातक कवि ह्रदय, सफेद वस्तुओं से लाभ पाने वाला, यात्रा का शौकीन, जलाशयों एवं प्रकृति का प्रेमी होता है।।
सोमवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है। इनकी प्रकृति यानी इनका स्वभाव शान्त होता है। इनकी वाणी मधुर और मोहित करने वाली होती है। ये स्थिर स्वभाव वाले होते हैं सुख हो या दु:ख सभी स्थिति में ये समान रहते हैं। धन के मामले में भी ये भाग्यशाली होते हैं तथा इन्हें सरकार एवं समाज से मान-सम्मान मिलता है।।
इस दिन जन्म लेने वाले जातक को पर्यावरण के क्षेत्र में, समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में, पानी से जुड़े रोजगार जैसे मत्य् क पालन या मछली का व्यवसाय, पत्थरों का व्यवसाय, कपड़े का व्यंवसाय शुद्ध फलता है। इनके लिए सफेद रंग सदा शुभकारी होता है इसलिए कैरियर के लिहाज से आप जहां भी जायें सफेद रुमाल अपनी जेब में रखें और उस क्षेत्र को ही चुने जिसमें सफेद रंग की प्रधानता हो, जैसे पानी, कपड़ा, फूल, पत्थयर आदि से जुड़ा व्यवसाय।।
आज का सुविचार – मित्रों, जीना हैं, तो उस दीपक की तरह जियो जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता हैं जितनी किसी गरीब की झोपड़ी में। जो भाग्य में हैं वह भाग कर आयेगा और जो भाग्य में नही हैं वह आकर भी भाग जायेगा। हँसते रहो तो दुनिया साथ हैं, वरना आँसुओं को तो आँखो में भी जगह नही मिलती।।
Panchang 10 August 2026
चन्द्रमा द्वारा निर्मित कुछ अतुलनीय धनदायक योग।।…… आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
ॐ अथ शिवप्रातः स्मरणस्तोत्रम् – यहाँ क्लिक करें और पढ़ें:
