बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।
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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 11 सितम्बर 2026 दिन शुक्रवार।।
मित्रों, तारीख 11 सितम्बर 2026 दिन शुक्रवार को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। आज स्नान-दान आदी की पुण्यतमा अमावस्या है। इस अमावस्या को जी शुक्रवार जैसे शुभ वर की पड़ रही है, प्रजा में सुख एवं ख़ुशी की लहर रहने के योग बन रहे है। आप सभी सनातनियों को “इस पुन्यतमा अमावस्या” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आप का आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375118850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 11 सितम्बर 2026 दिन शुक्रवार।।
Aaj ka Panchang 11 September 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – वर्षा.
मास – भाद्रपद.
पक्ष – कृष्ण.
गुजराती पंचांग के अनुसार – श्रावण कृष्ण पक्ष.
#Panchang_11_September_2026
तिथि – अमावस्या 08:57 AM बजे तक उपरान्त प्रतिपदा तिथि है।।
नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी 13:17 PM तक उपरान्त उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है।।
योग – साध्य 17:03 PM तक उपरान्त शुभ योग है।।
करण – नाग 08:57 AM तक उपरान्त किन्स्तुघ्न 20:19 PM तक उपरान्त बव करण है।।
चन्द्रमा – सिंह राशि पर 19:09 PM तक उपरान्त कन्या राशि पर।।
सूर्य – सिंह राशि एवं पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:25:43
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:43:21
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 05:51:41
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 18:09:31
राहुकाल (अशुभ) – सुबह 11:03 बजे से 12:35 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.23 बजे से 12.47 बजे तक।।
#Panchang_11_September_2026
अमावस्या तिथि विशेष – अमावस्या को मैथुन त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि मानी जाती है। अर्थात इस अमावस्या तिथि के स्वामी पितृगणों को बताया गया है। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।।
मित्रों, अमावस्या तिथि को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। कहा जाता है, कि आज अमावस्या को किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस अमावस्या तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।।
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।।
विशेष ज्ञान – मित्रों, रविवार कि सप्तमी, सोमवार कि सोमवती अमावस्या (अथवा किसी दिन की भी अमावस्या हो), मंगलवार कि चतुर्थी और बुधवार कि अष्टमी। इन चारों तिथियों में किया गया मन्त्र जप सिद्ध हो जाता है। इनमें किया गया श्राद्ध-तर्पण, तीर्थ स्नान एवं दान अक्षय हो जाता है, क्योंकि इन तिथियों को सूर्यग्रहण के बराबर पुण्यदायिनी माना गया है।। (शिवपुराण, विद्येश्वर संहिता, अध्याय – 10.)
मित्रों, अमावस्या तिथि को जन्म लेने वाला व्यक्ति चतुर एवं कुटिल होता है। इनके मन में दया के भावनाओं की बहुत ही कमी होती है। इनके स्वभाव में ईर्ष्या अर्थात दूसरों से जलने की प्रवृति होती है। इनके व्यवहार एवं आचरण में कठोरता दिखाई देती है। ये दीर्घसूत्री अर्थात किसी भी कार्य को पूरा करने में काफी समय लगाते हैं।।
#Panchang_11_September_2026
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में हुआ है तो आप ऐसे भाग्यशाली व्यक्ति हैं जो समाज में सम्माननीय होता हैं और जिनका अनुसरण हर कोई करना चाहता है। आपमें आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा होता है तथा नेतृत्व की क्षमता आपमें बचपन से ही होता है। इन्ही सब कारणों से आपके अधीनस्थ कर्मचारी भी आपसे भय खाते हैं। परिवार में भी आप एक मुखिया की भूमिका में रहते हैं।।
परिवार के सभी छोटे बड़े कार्यों के लिए आपका परामर्श आवश्यक समझा जाता है तथा सभी सदस्य आपके द्वारा कहे गये वचनों को आज्ञा समझ कर पालन करते हैं। आपको अनुशासन में रहना पसंद है तथा आप परिवार या कार्यस्थल पर दूसरों से भी अनुशासन की अपेक्षा करते हैं। आपकी अनुशासनात्मक प्रवृत्ति पूर्ण रूप से सफल कही जा सकती है। आप प्रशासनिक क्षेत्रों में बेहद सफल होते हैं।।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र शुक्र का नक्षत्र है इसका पर्याय भाग्य भी होता है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक स्वभाव से चंचल एवं त्यागी होगा। दृढनिश्चयी होने के साथ-साथ आप कामी भी होंगे। शुक्र एक कामुक ग्रह माना जाता है इस नक्षत्र में चन्द्रमा जैसे ही आता है जातक की काम एवं चपलता उसपर हावी हो जाती है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक मनमोहक छवि और मीठा बोलने वाला होता है।।
ऐसे लोग दूसरों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते हैं और दान देने में भी नहीं हिचकिचाते। शुक्र के कारण आपका व्यवहार सौम्य एवं मीठा होता है। आपकी सरकारी क्षेत्र में कार्य करने की संभावनाएं अधिक होती है तथा अपने गुणों के कारण आप राज्य से घनिष्ठ सम्बन्ध भी बना लेते हैं। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में जन्मी स्त्री सौम्य स्वभाव की होतीं हैं। दूसरों की मदद और दान करना इनका विशेष गुण होता है।।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में जन्म लेनेवाली स्त्री क्रोधी और दृढ इच्छा रखने वाली होती हैं। ऐसी स्त्रियों का दान पुण्य का सहज स्वभाव होता है। ऐसे जातकों का प्रेम में असफलता के कारण मानसिक कष्ट, कमर का दर्द, ह्रदय रोग, वायु एवं रक्त से सम्बंधित रोग होने की संभावनायें अधिक होती है।।
प्रथम चरण:- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य हैं। इस नक्षत्र में जन्मा जातक मीठा बोलने वाला एवं सुन्दर होता है। इस नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा व्यक्ति सर्वगुण संपन्न एवं समर्थ होता है। लग्नेश सूर्य की दशा विशेष फलदायी तथा मंगल की दशा में जातक का भाग्योदय होने की संभावनायें अधिक होती हैं।।
द्वितीय चरण:- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध हैं। बुध के प्रभाव के कारण जातक वेद शास्त्रों का ज्ञाता एवं धर्म शास्त्रों का मर्मज्ञ होता है। सूर्य की दशा जातक के लिए स्वास्थ्यवर्धक होति है तथा मंगल की दशा-अन्तर्दशा में जातक का भाग्योदय होता है। बुध की दशा में धन की प्राप्ति के योग बनते हैं।।
तृतीय चरण:- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। लग्नेश सूर्य के साथ शुक्र का सम्बन्ध क्रूरता भरा है। क्योंकि शुक्र दानवों का गुरु ग्रह है। फलस्वरूप इस नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति क्रूर होगा। सूर्य की दशा जातक के लिए स्वास्थ्यवर्धक होगी तथा मंगल की दशा-अन्तर्दशा में जातक का भाग्योदय होगा। बुध की दशा में धन की प्राप्ति के योग बनेगे।।
चतुर्थ चरण:- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी मंगल हैं। मंगल नक्षत्र स्वामी शुक्र का शत्रु एवं क्रूर ग्रह है। मंगल, सूर्य, शुक्र भी तेजस्वी ग्रह हैं। अतः जातक की आयु अधिक नहीं होगी। सूर्य की दशा माध्यम फल देगी एवं मंगल की दशा में जातक का भाग्योदय होगा।।
#Panchang_11_September_2026
शुक्रवार का विशेष – शुक्रवार के दिन तेल मर्दन अर्थात तेल शरीर में मालिश करने से बिघ्न बाधायें आती हैं – (मुहूर्तगणपति)।।
शुक्रवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से लाभ और यश की प्राप्ति होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खाकर यात्रा कर सकते है।।
शुक्र के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए यह उपाय करना चाहिए। शुक्र की अशुभता दूर करने के लिए अपने सामर्थ्य के अनुसार रुई और दही किसी मंदिर में दान करना चाहिए। किसी भी स्त्री एवं अपनी पत्नी का भी कभी भी अपमान या निरादर नहीं करना चाहिए। उन्हें सदैव आदर और सम्मान देने का प्रयास करना चाहिए।।
शुक्रवार को सफ़ेद वस्त्र धारण करना चाहिए। इत्र एवं परफ्यूम लगाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। किसी नेत्रहीन व्यक्ति को सफ़ेद वस्त्र या मिठाई दान करने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। दश वर्ष से कम आयु की कुवांरी कन्याओं को गाय के दूध से बने खीर खिलाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। मछलियों को आटे की गोलियां खिलाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। चाँदी का कड़ा पहनने एवं श्रीसूक्त का पाठ करने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है।।
शुक्रवार का विशेष टिप्स – मित्रों, आज शुक्रवार को दक्षिणावर्ती शंख से भगवान नारायण (शालिग्राम भगवान) का अभिषेक करें। यथोपचार से पूजन करें और पूजन के उपरान्त अथवा मध्य में ही श्वेत चन्दन में केशर मिलाकर भगवान को श्रद्धापूर्वक तिलक लगायें। शुक्रवार को इस प्रकार किया गया भगवान नारायण का पूजन माता महालक्ष्मी को बलात आपके घर की ओर खिंच लाता है। आज लक्ष्मी घर में आयें इसके लिये घर के ईशान कोण में देशी गाय के घी से रुई के जगह लाल धागे की बत्ती का एक दीपक जलायें।।
#Panchang_11_September_2026
शुक्रवार को भूलकर भी ये काम न करें:- हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी-देवता का होता है। जिसके अनुसार शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी का होता है। शुक्रवार के दिन जो भक्त मां लक्ष्मी की पूजा विधिपूर्वक करते हैं, उन्हें संसार के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में लक्ष्मी मां को धन की देवी माना गया है। मान्यता अनुसार शुक्रवार के दिन माँ की पूजा-आराधना करने से उनका आशीर्वाद सदैव बना रहता है।।
लेकिन इस दिन कुछ काम जिसे कभी भूलकर भी नहीं करना चाहिए। दैनिक जीवन में भी कुछ ऐसे काम होते हैं, जैसे भूलकर भी कभी किसी को भी शुक्रवार के दिन धन ना दें और ना ही उधार लें। मान्यता है, कि शुक्रवार के दिन दिया गया धन वापस लौटकर नहीं आता है। इसदिन किसी को कर्ज देने से मां लक्ष्मी नाराज होती हैं और संबंध भी खराब होते हैं।।
वैसे तो आपको कभी किसी का अपमान नहीं करना चाहिए, लेकिन शुक्रवार के दिन इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन भूलकर भी महिलाओं, कन्याओं और किन्नरों का अपमान नहीं करना चाहिए। उनके बारे में अपशब्द नहीं बोलने चाहिए। महिलाओं में मां लक्ष्मी का वास होता है और उनके अपमान करने से मां लक्ष्मी भी नाराज हो जाती हैं।।
शुक्रवार के दिन अगर आप व्रत-पूजन नहीं भी करते हैं तो तामसिक भोजन खासतौर पर मांसाहार और मदिरा के सेवन से परहेज रखना चाहिए। इस दिन पूर्ण सात्विक भोजन करना चाहिए। अगर संभव हो सके तो इसको आप अपनी आदत भी बना लें।।
शुक्रवार के दिन भूलकर भी किसी को भी शक्कर नहीं देनी चाहिए। क्योंकि ज्योतिष में शक्कर का संबंध शुक्र और चंद्र दोनो से हैं। इसलिए शुक्रवार के दिन शक्कर देने से आपका शुक्र कमजोर होता है और शुक्र भौतिक सुखों का स्वामी है। शुक्र के नाराज होने से भौतिक सुख-सुवधिओं में कमी आती है और आर्थिक स्थिति भी खराब होती है।।
शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी के साथ नारायण की भी पूजा करनी चाहिए। लक्ष्मी के साथ नारायण की पूजा करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और दोनों का आशीर्वाद भी बना रहता है। अगर संभव हो सके तो सुबह या शाम किसी भी एक समय मीठा घर में जरूर बनाना चाहिए और उसको सबसे पहले घर की सबसे बड़ी स्त्री को देना चाहिए।।
शुक्रवार के दिन किसी से अपशब्दन न बोलें। ऐसा करने से माता लक्ष्मी आप से अप्रसन्नम हो जाती हैं और फिर आपके साथ धन संबंधी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। घर में अपव्यमय बढ़ जाता है। लोग बीमार रहने लगते हैं। व्यापार धंधे में नुकसान होने लगता है।
साफ-सुथरे रसोईघर में मां लक्ष्मी का वास होता है। इससे घर में वैभव और सुख-शांति का प्रवाह निरंतर होता रहता है। भूलकर भी रात के समय किचन में गंदे बर्तन छोड़ना चाहिए, इससे लक्ष्मी माता रूठ जाती है और घर में अशांति फैल जाती है। साथ ही स्वास्थ्य के खराब रहने की आशंका बनी रहती है।।
#Panchang_11_September_2026
मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म शुक्रवार को होता है वह व्यक्ति चंचल स्वभाव का होता है। ये सांसारिक सुखों में लिप्त रहने वाले होते हैं तथा तर्क करने में निपुण और नैतिकता में बढ़ चढ कर होते हैं। ऐसे लोग धनवान और कामदेव के गुणों से प्रभावित रहते हैं और इनकी बुद्धि अत्यन्त तीक्ष्ण होती है। ये ईश्वर की सत्ता में अंधविश्वास नहीं रखते हैं तथा कला के प्रति रूचि रखने वाले, सुन्दर एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं।।
ऐसे लोग सौंदर्यप्रेमी, मधुरभाषी, यात्राओं के शौकिन, सुंदर स्थानों पर घुमने वाले एवं कलाकार स्वभाव के होते हैं। इनमें सेक्स की भावना अन्यों के मुकाबले अधिक होती है। सुन्दर कपडे़ पहनने के शौकिन तथा आभूषण अर्थात ज्वेलरी प्रिय होते हैं। इनको अपना कैरियर पर्यटन से जुडे क्षेत्र, फैशन डिजायनर, कलाकार, सेक्स विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक अथवा ज्वेलरी से सम्बन्धित व्यदवसायों में आजमाना चाहिये। इनका शुभ अंक 7 होता है तथा इनका शुभ दिन बुधवार और शुक्रवार होता है।।
आज का सुविचार – मित्रों, अगर कोई आपको नीचा दिखाना चाहता हैं तो इसका मतलब हैं आप उससे ऊपर हैं। जिनमें आत्मविश्वास की कमी होती हैं वही दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। मुझे कौन याद करेगा इस भरी दुनिया में, हे प्रभु! बिना मतल़ब के तो लोग तुझे भी याद नही करते।।
#Panchang_11_September_2026
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