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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 12 सितम्बर 2026 दिन शनिवार।।
मित्रों, तारीख 12 सितम्बर 2026 दिन शनिवार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा उपरान्त द्वितीया तिथि है। आज सौम्यश्रृंग समर्घताकरम् है। आज ययीजययोग एवं यमघंटयोग भी है। आज त्रिपुष्करयोग है। अर्थात आज अगर आप एक पाप का काम करेंगे तो तीनगुना फल मिलेगा और यदि एक पुण्यकर्म करेंगें तो उसका भी तीनगुना फल मिलेगा। आप सभी सनातनियों को “त्रिपुष्करयोग” की हार्दिक मंगलकामनाएँ।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आप का आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 12 सितम्बर 2026 दिन शनिवार।।
Aaj ka Panchang 12 September 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – वर्षा.
मास – भाद्रपद.
पक्ष – शुक्ल.
गुजराती पंचांग के अनुसार – भाद्रपद शुक्ल पक्ष.
#Panchang_12_September_2026
तिथि – प्रतिपदा 07:47 AM बजे तक उपरान्त द्वितीया तिथि है।।
नक्षत्र – उत्तराफाल्गुनी 12:56 PM तक उपरान्त हस्त नक्षत्र है।।
योग – शुभ 15:10 PM तक उपरान्त शुक्ल योग है।।
करण – बव 07:47 AM तक उपरान्त बालव 19:24 PM तक उपरान्त कौलव करण है।।
चन्द्रमा – कन्या राशि पर।।
सूर्य – सिंह राशि एवं पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:25:56
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:42:26
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 12:52:35
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 18:08:52
राहुकाल (अशुभ) – सुबह 09:30 बजे से 11:03 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.22 बजे से 12.46 बजे तक।।
#Panchang_12_September_2026
प्रतिपदा तिथि विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली अर्थात किसी भी कार्य को अथवा कार्यक्षेत्र को बढ़ाने वाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद अर्थात कोई भी कार्य को निर्विघ्नता पूर्वक चरम तक पहुंचाने अर्थात सिद्धि तक पहुंचाने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता को बताया गया है। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये। आज प्रतिपदा तिथि को इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है।।
मित्रों, यदि प्रतिपदा तिथि रविवार या मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित होता है। इसके अलावा प्रतिपदा तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय शुभ कार्य करने की सलाह दी जाती है। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा में भगवान शिव का पूजन नहीं करना चाहिए क्योंकि शिव का वास श्मशान में होता है। परन्तु कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा में भगवान शिव का पूजन करना चाहिए। शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि में विवाह, यात्रा, उपनयन, चौल कर्म, वास्तु कर्म व गृह प्रवेश आदि मॉगलिक कार्य नहीं करने चाहिए।।
मित्रों, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म प्रतिपदा तिथि में होता है वह व्यक्ति अनैतिक कार्यों में संलग्न रहने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति कानून के विरूद्ध जाकर काम करने वाला भी होता है। ऐसे लोगों को मांस मदिरा काफी पसंद होता है अर्थात ये तामसी भोजन के बहुत शौकीन होते हैं। आम तौर पर इनकी दोस्ती ऐसे लोगों से होती है जिन्हें समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता अर्थात बदमाश और ग़लत काम करने वाले लोग। कृष्ण पक्ष प्रतिपदा को जन्मा जातक धनी एवं बुद्धिमान होगा। उन पर माता की विशेष कृपा दृष्टि बनी रहती है। जातक चंद्रमा के बलवान होने के कारण मानसिक रूप से भी बलवान होते हैं। वहीं दूसरी ओर शुक्ल पक्ष प्रतिपदा में जन्मा जातक बुरी लोगों की संगति में पड़कर बुरी आदतों के शिकार हो सकते हैं। उनके द्वारा किए गए कार्य कभी कभार उनके परिवार को ही हानि पहुंचाते हैं। इसके विपरीत कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा में आप शुभ कार्य कर सकते हैं।।
#Panchang_12_September_2026
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में जन्म लेने वाला व्यक्ति युद्ध विद्या में निपुण, लड़ाकू एवं साहसी होता है। ऐसे लोग देश और समाज में अपने रौबीले व्यक्तित्व के कारण पहचाने जाते हैं। उत्तराफाल्गुनी के जातक दूसरों का अनुसरण नहीं करते अपितु लोग उनका अनुसरण करते हैं। आपमें नेतृत्व के गुण जन्म से ही होते हैं अतः आप अपना कार्य करने में खुद ही सक्षम होते हैं।।
इस नक्षत्र में जन्मा जातक दूसरों के इशारों पर चलना पसंद नहीं करता। यह लोग सिंह की भाँती अकेले ही अपना शिकार खुद करते हैं। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र जातक राजा के समान भोगी एवं पराई स्त्री में रूचि रखने वाले होते हैं। चन्द्रमा के प्रभाव में यदि हो तो जातक विद्या बुद्धि से युक्त धनी एवं भाग्यवान होता है। उत्तराफाल्गुनी के जातक मित्र बनाने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।।
ऐसे लोग मित्रों की सहायता करने तथा उनसे सहायता प्राप्त करने में भी यह संकोच नहीं करते हैं। ऐसे जातक मित्रों को बहुत महत्व देते हैं। मित्रता के सम्बन्ध में भी इनके साथ यह बातें लागू होती हैं। ये जिनसे दोस्ती करते हैं उसके साथ लम्बे समय तक मित्रता निभाते हैं। उदारता तथा दूसरों की सहायता करना आपके स्वभाव में ही है। आप अतिथितियों के आदर सत्कार में कभी कोई कमी नहीं छोड़ते हैं।।
ऐसे लोग बुद्धिमान होने के साथ-साथ व्यवहार कुशल एवं हास्य प्रेमी भी होते हैं। अपनी इन्ही विशेषताओं के कारण आप सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। आपके लिए व्यापार एवं व्यवसाय या अन्य निजि कार्य करना लाभप्रद नहीं होता है। जो व्यक्ति उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में पैदा होते हैं वे स्थायित्व में यकीन रखते हैं। इन्हें बार-बार काम बदलना पसंद नहीं होता है। ये जिस काम में एक बार लग जाते हैं उस काम में लम्बे समय तक बने रहते हैं।।
ऐसे जातकों के स्वभाव की विशेषता होती है, कि ये स्वयं सामर्थ्यवान होते हुए भी दूसरों से सीखने में हिचकते नहीं हैं। अपने स्वभाव की इस विशेषता के कारण ये निरंतन प्रगति की राह पर आगे बढ़ते रहते हैं। उत्तराफाल्गुनी के जातक आर्थिक रूप से सामर्थवान होते हैं। क्योंकि दृढ़विश्वास एवं लगन के साथ अपने लक्ष्य को हासिल करने हेतु ये सदैव तत्पर रहते हैं। पारिवारिक जीवन के सम्बन्ध में देखा जाए तो ये अपनी जिम्मेवारियों का पालन अच्छी तरह से करते हैं।।
प्रथम चरण:- उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य हैं। इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक पंडित अर्थात अपने क्षेत्र का विद्वान् होता है। इसका कारक यह है, कि प्रथम चरण का नवांशेश गुरु होता है। नक्षत्र स्वामी एवं सूर्य दोनों ही विद्या के लिए शुभ ग्रह माने जाते है। दोनों का चन्द्र पर प्रभाव जातक को पंडित बनाता है। मंगल की दशा-अन्तर्दशा में जातक का भाग्योदय होता है। गुरु की दशा इनके जीवन में हर प्रकार का शुभ फल देती है।।
द्वितीय चरण:- उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शनि हैं। इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक राजा या राजा समान वैभवशाली एवं पराक्रमी होता है। लग्नेश बुध की दशा उत्तम फलदायी होती है। शुक्र की दशा में जातक का भाग्योदय अवश्य ही होता है।।
तृतीय चरण:- उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी भी शनि हैं। इस नक्षत्र चरण में यदि चन्द्रमा भी है तो व्यक्ति हर हाल में अपने शत्रुओं पर विजयी होगा तथा प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त करेगा। लग्नेश बुध की दशा अच्छा फल देती है। शनि अनिष्ट फल नहीं देगा अपितु शुक्र एवं शनि की दशा में जातक का भाग्योदय होता है।।
चतुर्थ चरण:- उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी गुरु हैं। इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक धार्मिक स्वभाव वाला, अपने संस्कारों के प्रति आस्थावान एवं सभ्य होता है। शुक्र की दशा में जातक का भाग्योदय होता है एवं बृहस्पति की दशा उत्तम फलदायिनी होती है।।
#Panchang_12_September_2026
शनिवार को जूते-चप्पल, लोहे की बनी वस्तुयें, नया अथवा पुराना भी वाहन नहीं खरीदना चाहिये एवं नए कपड़े न खरीदना और ना ही पहली बार पहनना चाहिये।।
शनिवार का विशेष – शनिवार के दिन तेल मर्दन “मालिश” करने से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती हैं – (मुहूर्तगणपति)।।
शनिवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से आयुष्य की हानि होती है। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है।।
दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।।
#Panchang_12_September_2026
जिस व्यक्ति का जन्म शनिवार को होता है उस व्यक्ति का स्वभाव कठोर होता है। ये पराक्रमी एवं परिश्रमी होते हैं तथा इनके ऊपर दु:ख भी आये तो ये उसे भी सह लेना जानते हैं। ये न्यायी एवं गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा सेवा करना इन्हें काफी पसंद होता है।।
शनिवार को जन्म लेनेवाले जातक कुछ सांवले रंग के, साहसी, मैकेनिक अथवा चिकित्सक होते हैं। इनमें से कुछ अपने कार्य में सुस्त भी होते हैं, जैसे देर से जागना, देर तक सोना भी इनकी आदतों में शुमार होता है। पारिवारिक जिम्मेदारियां भी शुद्ध रहती है इसलिये ये एक मेहनतकश इंसान होते हैं। सफलता के मार्ग में रूकावटों का भी सामना करना पड़ता है।।
शनिवार को जन्मलेनेवाले जातकों के स्वभाव में साहस लक्षित होता है। सफलता के मार्ग में लाख रुकावटें आए, लेकिन ये इसे पार करके ही रहते हैं। ऐसे लोग अधिकांशतः सांवले रंग के होते हैं। इन जातकों को अपने कैरियर के लिये डॉक्टपर, इंजीनियर तथा मैकेनिक के क्षेत्र का चयन करना चाहिये। इनका शुभ अंक 3, 6 और 9 तथा इनका शुभ दिन शनिवार और मंगलवार होता है।।
आज का सुविचार – मित्रों, रात लम्बी और काली हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं होता कि सुबह होगी ही नहीं। ठीक उसी तरह असफलता का दौर लम्बा हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब ये कतई नहीं होता कि आपको अब कभी सफलता मिलेगी ही नहीं।।
#Panchang_12_September_2026
शनि देव मेहरबान हों तो इंजीनियर और चार्टर्ड एकाउंटेंट बनाते है।।…. आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें: