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वास्तु दोष निवारण के कुछ सरल उपाय।।

वास्तु दोष निवारण के कुछ सरल उपाय।। Some Simple Remedies For Vastu Dosh.

लेख का परिचय।। Introduction.

मित्रों, हर घर में किसी ना किसी रूप में कोई ना कोई छोटा-मोटा वास्तु दोष अवश्य होता ही है। क्योंकि आज के समय में जगह की कमी, बाज़ार में उपलब्ध सीमित फ्लैट डिज़ाइन तथा बदलती जीवनशैली के कारण हर घर को पूर्ण रूप से वास्तु के अनुरूप बनाना लगभग असंभव सा हो गया है। ऐसी स्थिति में यह जानना अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों तथा वास्तु आचार्यों ने ऐसे कौन से सरल, सहज तथा घरेलू उपाय बताए हैं। जिन्हें अपनाकर बिना अधिक खर्च अथवा जटिल प्रक्रिया के भी घर की ऊर्जा को संतुलित किया जा सकता है। यह उपाय, जिन्हें आमतौर पर वास्तु टोटके भी कहा जाता है। सदियों से भारतीय घरों में अपनाए जाते रहे हैं। तथा इन्हें अत्यंत प्रभावशाली तथा भरोसेमंद माना गया है।।

यह समझना भी आवश्यक है कि यह सरल उपाय किसी जादू अथवा चमत्कार पर आधारित नहीं, बल्कि इनका आधार भी वही पंचतत्व तथा दिशा-सिद्धांत है। जिस पर संपूर्ण वास्तु शास्त्र टिका हुआ है। हर उपाय के पीछे एक निश्चित तर्क तथा कारण होता है। चाहे वह किसी विशेष वस्तु को किसी विशेष दिशा में रखना हो, अथवा किसी विशेष रंग अथवा सामग्री का प्रयोग करना हो। यही कारण है कि यह उपाय ना तो महंगे होते हैं। और ना ही इन्हें अपनाने में अधिक समय अथवा श्रम लगता है। बल्कि साधारण घरेलू वस्तुओं तथा थोड़ी सी सावधानी से ही इन्हें आसानी से अपनाया जा सकता है।।

मित्रों, इस लेख में हम घर के विभिन्न भागों, जैसे मुख्य द्वार, रसोईघर, शयनकक्ष, धन रखने का स्थान तथा पूजा-स्थल से जुड़े कुछ अत्यंत सरल तथा प्रभावी वास्तु उपायों को विस्तार से समझेंगे। तथा साथ ही दैनिक जीवन में अपनाए जाने वाले कुछ ऐसे छोटे टोटकों की भी चर्चा करेंगे। जो घर की ऊर्जा को संतुलित रखने में सहायक माने जाते हैं। यह सभी उपाय पीढ़ियों से चले आ रहे अनुभव पर आधारित हैं। तथा इन्हें अपनाकर कोई भी परिवार बिना किसी बड़े निवेश अथवा निर्माण-कार्य के भी अपने घर में सकारात्मकता तथा संतुलन ला सकता है।।

द्वार से जुड़े सरल वास्तु उपाय।। Simple Vastu Remedies Related To The Main Door.

मित्रों, मुख्य द्वार को घर की ऊर्जा का प्रवेश-बिंदु माना जाता है। इसीलिए इससे जुड़े छोटे-छोटे उपाय भी घर की समग्र ऊर्जा पर गहरा प्रभाव डालते हैं। यदि मुख्य द्वार टेढ़ा-मेढ़ा हो, ठीक से बंद ना होता हो, अथवा उसमें से आवाज़ आती हो, तो इसे वास्तु दोष माना जाता है। और सबसे पहला सरल उपाय यही है कि द्वार की कब्ज़ों को नियमित रूप से तेल से चिकना रखा जाए। ताकि वह सुचारू रूप से खुले तथा बंद हो सके। इसके साथ ही द्वार के सामने कोई बड़ा पेड़, खंभा अथवा नुकीली संरचना हो, तो द्वार के भीतर की ओर एक छोटा उत्तल दर्पण लगा देना चाहिए। यह इस दोष के प्रभाव को कम करने का एक सरल तथा प्रभावी उपाय माना जाता है।।

यदि घर के दो द्वार एक सीधी रेखा में आमने-सामने हों, जिसे वास्तु में ‘वेध दोष’ कहा जाता है। तो इस दोष के निवारण के लिए दोनों द्वारों के बीच एक पर्दा अथवा छोटा तोरण लगाना उपयुक्त उपाय माना जाता है। ताकि ऊर्जा का सीधा तथा तीव्र प्रवाह बाधित हो सके। इसके अतिरिक्त द्वार के दोनों ओर प्रतिदिन एक-एक दीपक जलाना, विशेष रूप से संध्या के समय, नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने का एक सरल तथा अत्यंत प्रचलित उपाय है। द्वार के ऊपर घोड़े की नाल अथवा नींबू-मिर्च लटकाने की परंपरा भी इसी उद्देश्य से अपनाई जाती है। ताकि बुरी नज़र तथा नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश ना कर सके।।

मित्रों, यदि मुख्य द्वार दक्षिण-पश्चिम दिशा में हो, जिसे सामान्यतः अशुभ माना जाता है। तो इस दोष के निवारण के लिए द्वार के दोनों ओर स्वास्तिक अथवा ॐ का चिन्ह बनाना, तथा द्वार पर नियमित रूप से ताज़ा तोरण सजाना एक सरल तथा प्रभावी उपाय माना जाता है। इसके साथ ही द्वार के सामने साफ-सुथरी रंगोली बनाना, तथा द्वार के आस-पास किसी भी प्रकार का कूड़ा-कचरा अथवा टूटा-फूटा सामान ना रखना। इस दोष के प्रभाव को संतुलित करने में सहायक होता है। यह सभी उपाय बेहद सरल तथा किफायती भी हैं। फिर भी इनका नियमित पालन द्वार की ऊर्जा को शुद्ध तथा संतुलित बनाए रखने में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है।।

रसोईघर से जुड़े सरल वास्तु उपाय।। Simple Vastu Remedies Related To The Kitchen.

मित्रों, रसोईघर से जुड़ा सबसे सामान्य वास्तु दोष यह देखा जाता है कि गैस-चूल्हा आग्नेय कोण के बजाय किसी अन्य दिशा में रखा हो। अथवा चूल्हा तथा सिंक आमने-सामने हों। यदि चूल्हे की दिशा बदलना संभव ना हो, तो एक सरल उपाय यह है कि चूल्हे के पास एक छोटा तांबे का पिरामिड अथवा लाल रंग का कपड़ा रखा जाए। जिसे अग्नि तत्व को संतुलित करने वाला उपाय माना जाता है। इसके अतिरिक्त चूल्हे तथा सिंक के बीच यदि थोड़ी भी दूरी संभव हो, तो उसे बनाए रखना चाहिए। अथवा दोनों के बीच एक छोटा हरा पौधा रखकर उनके तत्वों के टकराव को कम किया जा सकता है।।

यदि रसोईघर में खाना बनाते समय गृहिणी की पीठ द्वार की ओर होती हो, तो इस असुविधाजनक स्थिति को ठीक करने के लिए चूल्हे के पास एक छोटा दर्पण इस प्रकार लगाया जा सकता है कि उसमें द्वार का प्रतिबिंब दिखाई दे। जिससे खाना बनाने वाला व्यक्ति द्वार पर होने वाली गतिविधि को देख सके। और यह असुरक्षा का भाव भी दूर हो जाता है। इसके साथ ही रसोईघर में पानी की टोंटी से टपकता पानी अथवा खराब नल भी एक वास्तु दोष माना जाता है। जिसे तुरंत ठीक करवा लेना चाहिए। क्योंकि इसे धन की निरंतर हानि का प्रतीक माना जाता है।।

मित्रों, रसोईघर में उपयोग होने वाले बर्तनों तथा राशन के भंडारण में भी कुछ सरल नियमों का पालन करना चाहिए। जैसे टूटे-फूटे अथवा चटके हुए बर्तनों का उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। क्योंकि इन्हें अशुभ माना जाता है। इसी प्रकार खाली अथवा लगभग खाली अनाज के डिब्बों को देखकर मन में नकारात्मक भाव उत्पन्न होता है। इसलिए राशन के डिब्बों को यथासंभव भरा हुआ रखने का प्रयास करना चाहिए। रसोईघर में हल्दी, चावल तथा नमक जैसी शुभ सामग्री को हमेशा भरपूर मात्रा में रखना। तथा उन्हें कभी बिल्कुल खाली ना होने देना। समृद्धि बनाए रखने का एक सरल तथा पारंपरिक वास्तु उपाय माना जाता है।।

शयनकक्ष से जुड़े सरल वास्तु उपाय।। Simple Vastu Remedies Related To The Bedroom.

मित्रों, शयनकक्ष से जुड़ा सबसे सामान्य दोष यह देखा जाता है कि बिस्तर की स्थिति गलत हो, अथवा कमरे में अव्यवस्था तथा भारीपन अधिक हो। यदि बिस्तर की दिशा बदलना संभव ना हो, तो कम से कम यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सोते समय सिर उत्तर दिशा की ओर बिल्कुल भी ना हो। इसके साथ ही बिस्तर के ठीक ऊपर कोई भारी शेल्फ, झूमर अथवा बीम ना हो। और यदि ऐसा हो, तो बिस्तर की स्थिति को थोड़ा खिसकाकर उस भारी वस्तु के ठीक नीचे आने से बचाया जा सकता है। जो कि तोड़-फोड़ के बिना भी संभव है।।

यदि शयनकक्ष में शीशा इस प्रकार लगा हो कि बिस्तर पर लेटते समय व्यक्ति को उसमें अपना प्रतिबिंब दिखाई देता हो, तो इसे तुरंत ठीक करना चाहिए। अथवा रात को सोते समय दर्पण पर एक कपड़ा डाल देना चाहिए। क्योंकि इसे दांपत्य जीवन में अशांति का कारण माना जाता है। इसके साथ ही शयनकक्ष में अधिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जैसे टेलीविज़न, कंप्यूटर अथवा मोबाइल चार्जर, बिस्तर के अत्यधिक निकट ना रखें। तथा रात को सोते समय इन्हें बंद अथवा दूर रख दें। क्योंकि इससे नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है। जिसे वास्तु में भी महत्वपूर्ण माना जाता है।।

मित्रों, शयनकक्ष में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए वहाँ हल्के तथा शांत रंगों का प्रयोग करना चाहिए। कमरे को नियमित रूप से हवादार रखना, तथा वहाँ अनावश्यक सामान इकट्ठा ना करना अत्यंत सरल परंतु प्रभावी वास्तु के उपाय माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त शयनकक्ष में सूखे फूल, मुरझाए पौधे अथवा युद्ध एवं हिंसा दर्शाने वाली तस्वीरें नहीं लगानी चाहिए। इनके स्थान पर परिवार की खुशहाल तस्वीरें अथवा प्राकृतिक दृश्यों वाली तस्वीरें लगाना उचित माना जाता है। यह सभी छोटे परिवर्तन बिना किसी विशेष खर्च के भी शयनकक्ष की ऊर्जा को सकारात्मक तथा शांत बनाए रखने में सहायक सिद्ध होते हैं।।

धन तथा समृद्धि के सरल वास्तु उपाय।। Simple Vastu Remedies For Wealth And Prosperity.

मित्रों, धन-संबंधी समस्याओं के निवारण के लिए वास्तु शास्त्र में कुछ अत्यंत सरल तथा प्रचलित उपाय बताए गए हैं। जिनमें सबसे प्रमुख है घर के उत्तर दिशा को स्वच्छ तथा हल्का रखना। साथ ही वहाँ किसी भी प्रकार का भारी अथवा टूटा-फूटा सामान ना रखना। इसके साथ ही घर की तिजोरी अथवा धन रखने के स्थान को कभी भी पूर्ण रूप से खाली नहीं रखना चाहिए। तथा वहाँ कुछ नकदी, चाँदी का सिक्का अथवा कोई मूल्यवान वस्तु सदैव रखनी चाहिए। क्योंकि इसे आर्थिक स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।।

घर के मुख्य द्वार अथवा बैठक-कक्ष में हँसते हुए बुद्ध की मूर्ति अथवा तस्वीर लगाना चाहिए। जिसे ‘लाफिंग बुद्धा’ भी कहा जाता है। धन एवं समृद्धि आकर्षित करने का एक अत्यंत लोकप्रिय उपाय भी इसे माना जाता है। इसके अतिरिक्त घर में उत्तर दिशा में मनी प्लांट का पौधा रखना चाहिए। तथा उसकी लताओं को ऊपर की ओर बढ़ने देना आर्थिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। कुछ परिवार धन के स्थान के निकट कुबेर यंत्र अथवा श्री यंत्र भी स्थापित करते हैं। तथा नियमित रूप से उसकी पूजा करते हैं। जिसे धन-संबंधी बाधाओं को दूर करने वाला उपाय माना जाता है।।

मित्रों, इसके साथ ही यह भी एक सरल परंतु प्रभावी उपाय माना जाता है कि घर में टूटी हुई घड़ियों, बंद पड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों अथवा अनुपयोगी वस्तुओं को इकट्ठा ना किया जाए। बल्कि इन्हें समय-समय पर हटाते रहा जाए। क्योंकि इन्हें रुकावट तथा ठहराव का प्रतीक माना जाता है। घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर शुभ-लाभ लिखना, तथा प्रतिदिन द्वार की सफाई करना भी धन-आगमन को सुगम बनाने वाला उपाय माना जाता है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक शुक्रवार अथवा गुरुवार को घर में लक्ष्मी जी की आरती करना चाहिए। तथा घर के हर कोने में दीपक की रोशनी पहुँचाना भी समृद्धि को बढ़ाने का एक सरल तथा श्रद्धापूर्ण उपाय माना जाता है।।

पूजा-स्थान से जुड़े सरल वास्तु उपाय।। Simple Vastu Remedies Related To The Puja Room.

मित्रों, यदि किसी कारणवश पूजा-स्थान ईशान कोण में ना बनाया जा सका हो, तो इसका एक सरल उपाय यह है कि घर में जहाँ भी पूजा-स्थान बना हो, वहाँ नियमित रूप से स्वच्छता रखी जाए। तथा मूर्तियों अथवा तस्वीरों को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाए कि पूजा करते समय व्यक्ति का मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर हो। इसके साथ ही पूजा-स्थान में मूर्तियों का आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए। तथा एक ही देवता की एक से अधिक मूर्तियाँ अथवा तस्वीरें साथ में नहीं रखनी चाहिए। क्योंकि इसे भी वास्तु में अनुचित माना जाता है।।

पूजा-स्थान के ठीक नीचे अथवा ऊपर शौचालय अथवा सीढ़ियाँ नहीं होनी चाहिए। यदि भवन की संरचना के कारण ऐसा हो, तो पूजा-स्थान की छत पर एक तांबे की प्लेट पर वास्तु दोष निवारण यंत्र स्थापित करना चाहिए। तथा वहाँ नियमित रूप से घी का दीपक जलाना भी इस दोष के प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है। इसके साथ ही पूजा-स्थान में टूटी हुई मूर्तियों अथवा फटी हुई तस्वीरों को रखने से बचना चाहिए। तथा ऐसी वस्तुओं को श्रद्धापूर्वक किसी पवित्र नदी अथवा जलाशय में विसर्जित कर देना चाहिए।।

मित्रों, प्रतिदिन प्रातःकाल तथा संध्या के समय पूजा-स्थान में दीपक जलाना, शंख अथवा घंटी बजाना, तथा धूपबत्ती का प्रयोग करना। पूजा-स्थान की ऊर्जा को शुद्ध तथा जाग्रत बनाए रखने का सबसे सरल तथा प्रभावी उपाय माना जाता है। इसके साथ ही पूजा-स्थान के आस-पास जूते-चप्पल अथवा गंदे कपड़े ना रखें। तथा वहाँ प्रवेश करने से पूर्व हाथ-पैर स्वच्छ करने की आदत डालें। यह छोटी-छोटी आदतें देखने में सामान्य लगती हैं। परंतु इनका नियमित पालन पूजा-स्थान की पवित्रता तथा प्रभावशीलता को दीर्घकाल तक बनाए रखने में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है।।

दैनिक जीवन में अपनाने योग्य सरल उपाय।। Simple Remedies To Follow In Daily Life.

मित्रों, वास्तु दोष निवारण के लिए घर के विशेष स्थानों के अतिरिक्त कुछ ऐसे सामान्य उपाय भी हैं, जिन्हें पूरे घर में तथा दैनिक जीवन में सहजता से अपनाया जा सकता है। इनमें सबसे प्रमुख है प्रतिदिन घर की समुद्री नमक के पानी से पोंछा लगाना। विशेष रूप से सप्ताह में एक बार, क्योंकि समुद्री नमक को नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करने की विशेष क्षमता वाला माना जाता है। इसके साथ ही घर के हर कमरे में एक-एक बार कपूर जलाकर घुमाना। तथा उसकी सुगंध को पूरे घर में फैलने देना। वातावरण को शुद्ध करने का एक सरल तथा अत्यंत प्रभावी उपाय माना जाता है।।

घर में नियमित रूप से गंगाजल का छिड़काव करना। विशेष रूप से किसी अशुभ घटना अथवा विवाद के बाद। नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का एक पारंपरिक तथा प्रभावी उपाय माना जाता है। इसके अतिरिक्त घर की उत्तर-पूर्व दिशा में प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्य को जल अर्पित करना। तथा घर के मुख्य द्वार पर प्रतिदिन ताज़ा जल का छिड़काव करना भी सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला उपाय बताया जाता है। घर में समय-समय पर हवन अथवा यज्ञ आदि करवाना भी संपूर्ण घर की ऊर्जा को शुद्ध करने का एक प्राचीन तथा प्रभावशाली उपाय माना जाता है।।

मित्रों, इन सबके साथ-साथ घर में नियमित रूप से सकारात्मक तथा मधुर संगीत बजाना। विशेष रूप से भजन अथवा मंत्र-जप, वातावरण को शांत तथा सकारात्मक बनाए रखने में सहायक माना जाता है। इसके अतिरिक्त प्रतिदिन घर के मुख्य द्वार पर पैर पोंछकर ही भीतर प्रवेश करना। तथा बाहर से आने के बाद हाथ-मुँह धोना, ना केवल स्वच्छता की दृष्टि से बल्कि वास्तु की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि इससे बाहर की नकारात्मक ऊर्जा घर के भीतर प्रवेश नहीं कर पाती। यह सभी छोटी-छोटी आदतें, जब नियमितता के साथ अपनाई जाती हैं। तो घर की समग्र ऊर्जा में उल्लेखनीय सकारात्मक परिवर्तन लाती हैं।।

ध्यान रखने योग्य कुछ ज़रूरी बातें।। A Few Important Points To Keep In Mind.

मित्रों, इन सरल उपायों को अपनाते समय यह ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है कि इन्हें श्रद्धा तथा नियमितता के साथ अपनाया जाए। ना कि केवल एक बार करके भूल जाया जाए। वास्तु के यह छोटे उपाय धीरे-धीरे तथा दीर्घकाल में अपना प्रभाव दिखाते हैं। इसलिए इन्हें अपनाने के बाद तुरंत परिणाम की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। बल्कि धैर्य के साथ इन्हें अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। जो उपाय एक बार करके छोड़ दिए जाते हैं। उनका प्रभाव भी उतना ही सीमित तथा अस्थायी रहता है।।

यह भी समझना आवश्यक है कि यह सभी उपाय हल्के तथा मध्यम स्तर के वास्तु दोषों के लिए प्रभावी माने जाते हैं। परंतु यदि किसी घर में कोई गंभीर तथा जटिल वास्तु दोष हो, तो उसके लिए किसी अनुभवी वास्तु विशेषज्ञ से विस्तृत तथा व्यक्तिगत परामर्श अवश्य लेना चाहिए। इसके साथ ही इन उपायों को अपनाते समय किसी भी वस्तु का अंधाधुंध अथवा अत्यधिक प्रयोग करने से भी बचना चाहिए। बल्कि संयमित तथा संतुलित ढंग से ही इन्हें अपनाना चाहिए। क्योंकि किसी भी उपाय की अति भी लाभ के बजाय हानि पहुँचा सकती है।।

मित्रों, अंत में यह भी स्मरण रखें कि यह सभी वास्तु उपाय, परिश्रम, अच्छे कर्म तथा सकारात्मक सोच के पूरक हैं। ना कि उनका विकल्प। केवल टोटके अपनाकर अपने कर्तव्यों तथा जिम्मेदारियों की उपेक्षा करना उचित नहीं माना जाता। जो व्यक्ति परिश्रम, सकारात्मक सोच तथा इन सरल वास्तु उपायों को एक साथ अपनाता है। उसे जीवन में सर्वाधिक तथा दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होता है। तथा उसका घर सदैव सुख, शांति तथा समृद्धि से परिपूर्ण बना रहता है।।

निष्कर्ष, छोटे उपाय, प्रभावशाली परिणाम।। Conclusion, Small Remedies, Effective Results.

मित्रों, तो अब स्पष्ट है कि वास्तु दोष निवारण के लिए हमेशा बड़े तथा महंगे उपायों की आवश्यकता नहीं होती। बल्कि द्वार, रसोईघर, शयनकक्ष, धन-स्थान तथा पूजा-स्थान से जुड़े कुछ सरल, सहज तथा किफायती उपायों को अपनाकर भी घर की ऊर्जा को प्रभावी ढंग से संतुलित किया जा सकता है। इन उपायों की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इन्हें कोई भी व्यक्ति, बिना किसी विशेष प्रशिक्षण अथवा बड़े निवेश के, अपने दैनिक जीवन में सरलता से अपना सकता है।।

मित्रों, इस पूरे लेख का सार यही है कि वास्तु शास्त्र की वास्तविक शक्ति केवल बड़े तथा जटिल निर्माण-कार्यों में ही नहीं, बल्कि छोटी-छोटी, नियमित तथा श्रद्धापूर्वक अपनाई गई आदतों में भी छिपी हुई है। इसलिए अपने घर में किसी भी प्रकार के वास्तु दोष का अनुभव होने पर, सबसे पहले इन सरल उपायों को अपनाकर देखें, तथा नियमितता के साथ इन्हें अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। अधिकतर मामलों में यही सरल उपाय पर्याप्त सिद्ध होते हैं। तथा घर में सकारात्मक और संतुलित ऊर्जा का वातावरण स्थापित करने में सहायक बनते हैं।।

मित्रों, हमारे पूर्वजों ने इन सरल वास्तु उपायों को हज़ारों वर्षों के अनुभव तथा अवलोकन के आधार पर विकसित किया। तथा इन्हें पीढ़ी-दर-पीढ़ी सहेजकर रखा। आज के व्यस्त तथा तनावपूर्ण जीवन में भी यह उपाय उतने ही सरल तथा प्रभावी बने हुए हैं। जितने पहले थे। इसलिए श्रद्धा, नियमितता तथा समझदारी के साथ इन्हें अपनाकर, हम बिना किसी बड़े खर्च अथवा निर्माण-कार्य के भी अपने घर में स्थायी सुख, शांति तथा समृद्धि का वातावरण सृजित कर सकते हैं।।

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