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अशुभ सूर्य को शांत करने के विविध उपाय।।

अशुभ सूर्य को शांत करने के विविध उपाय।। Various remedies to pacify an inauspicious Sun.

भूमिका।। Introduction.

मित्रों, यदि कुंडली में सूर्य यदि नीचस्थ, पापग्रहों से पीड़ित अथवा अशुभ भावों का स्वामी होकर नकारात्मक फल दे रहा हो, तो जातक को आत्मविश्वास की कमी, पिता से मतभेद, नेत्र-हृदय संबंधी स्वास्थ्य समस्याएँ सामान्य तौर पर होती ही है। कुंडली में सूर्य देवता के अशुभ होने से नौकरी, मान-सम्मान में बाधा जैसी परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ता है।।

ऐसे में सूर्य देवता को कैसे ठीक करें? सूर्य देवता को अपने अनुकूल बनाने में सबसे बड़ी बाधा कई बार बजट होता है। परन्तु आपके बजट के अनुसार अलग-अलग स्तर के वैदिक उपाय आज मैं आपलोगों को बताता हूँ, जिसे आप सहजता से कर सकते हैं। और सूर्य देवता के अशुभ होनेपर भी आप उनसे शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं। आइए इन्हें संक्षेप में समझते हैं।।

सस्ते एवं सरल उपाय।। Simple & Low-Cost Remedies.

मित्रों, सर्वप्रथम आपको प्रतिदिन सूर्योदय के समय ताँबे के लोटे में जल उसमें लाल फूल तथा थोड़ा गुड़ मिलाकर अर्घ्य देना (Daily Surya Arghya) चाहिए। मन्त्र “ॐ सूर्याय नमः” अथवा “ॐ घृणिं सूर्याय नमः” से अर्घ्य देना है। साथ ही इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जप करना। रविवार को नमक रहित भोजन का व्रत रखना चाहिए।।

सूर्य देवता से अनुकूल फल प्राप्त करने हेतु आपको अपने स्वयं के पिता एवं पितातुल्य वृद्धजनों का सम्मान करना चाहिए और उनका आशीर्वाद प्रतिदिन लेना चाहिए। रविवार को गेहूँ, गुड़, तांबे का सिक्का अथवा लाल वस्त्र का यथाशक्ति दान करना। नियमित रूप से सूर्य नमस्कार करना। यह सभी उपाय लगभग नि:शुल्क अथवा बहुत ही कम खर्चे में सम्पन्न हो जाते हैं।।

मध्यम स्तर के उपाय।। Moderate-Cost Remedies.

मित्रों, अब दूसरा उपाय है, जो मध्यम स्तर का है, जिसमें थोडा-बहुत धन भी खर्च होता है। आदित्य हृदय स्तोत्रम् अथवा सूर्य चालीसा का प्रतिदिन पाठ करना चाहिए। अब इसके लिए पुस्तक अथवा गुटका खरीदना पड़ सकता है। प्रत्येक रविवार को मंदिर में जाकर सूर्य देव का विधिवत पूजन करवाना चाहिए। जिसमें पंडित जी की सामान्य दक्षिणा लग सकती है।।

साथ ही ताँबे पर बने सूर्य देवता का यंत्र स्थापित करवाकर नियमित घर पर ही पूजन करना चाहिए। एकमुखी रुद्राक्ष अथवा तांबे का कड़ा धारण करना भी एक प्रभावी उपाय है, जो अपेक्षाकृत किफायती दर पर बाजार में उपलब्ध होता है। यह उपाय सामान्यतः कुछ सौ से लेकर कुछ हज़ार रुपये तक के खर्चे में संपन्न हो जाते हैं।।

महंगे एवं विशेष उपाय।। Expensive & Special Remedies.

यह उपाय भी बहुत ही प्रभावी है, परन्तु इसके लिए आपको विद्वान ज्योतिषी से सलाह अवश्य लेना पड़ेगा। उसके उपरान्त प्रामाणिक एवं प्रयोगशाला द्वारा प्रमाणित माणिक्य (Ruby) रत्न सोने में जड़वाकर धारण करना चाहिए। जो अत्यंत मूल्यवान माना जाता है। और जो सहजता से उपलब्ध भी नहीं होता। मार्किट में जो सहजता से मिलता है वो नहीं।।

दूसरा किसी विद्वान ब्राह्मण की निगरानी में ब्राह्मणों द्वारा विधिवत सूर्य शांति पूजा अथवा नवग्रह शांति हवन करवाना चाहिए। जिसमें सामग्री, ब्राह्मणों की दक्षिणा तथा हवन सामग्री आदि की व्यवस्था का विशेष खर्च भी होता है। किसी पवित्र सूर्य-तीर्थ, जैसे कोणार्क सूर्य मंदिर अथवा अन्य किसी पवित्र स्थान पर भी विशेष पूजा-अर्चना एवं दान कर-करवा सकते हैं। बड़े स्तर पर अन्न, वस्त्र अथवा गौ-दान करना चाहिए। जो आर्थिक रूप से सक्षम जातकों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।।

कौन-सा उपाय किसके लिए उपयुक्त है।। Which Remedy Suits Whom.

मित्रों, सामान्य अथवा हल्की सूर्य-पीड़ा की स्थिति में सस्ते एवं सरल उपाय ही पर्याप्त फलदायी सिद्ध होते हैं। जबकि अत्यंत निर्बल अथवा गंभीर रूप से पीड़ित सूर्य के लिए मध्यम अथवा महंगे स्तर के उपाय अधिक शीघ्र एवं प्रभावी परिणाम देते हैं।।

परन्तु मैं तो ये कहूँगा की किसी भी उपाय को करवाने अथवा किसी भी रत्न को अपनाने से पहले यह आवश्यक है, कि किसी योग्य एवं विद्वान ज्योतिषी से जन्मकुंडली दिखाकर सूर्य की वास्तविक स्थिति की पुष्टि करवा ली जाए।।

निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, नकारात्मक फल देने वाले सूर्य को शांत करने के लिए बजट की कोई बाध्यता नहीं है। जैसे सूर्य देवता को प्रतिदिन सूर्यार्घ्य देना अथवा सूर्यदेवता के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करना तथा दान देने जैसे नि:शुल्क उपायों से लेकर माणिक्य धारण तथा विशेष सूर्य शांति पूजा जैसे महंगे उपायों तक आप कर-करवा सकते हैं।।

प्रत्येक स्तर पर प्रभावी समाधान उपलब्ध हैं। श्रद्धा एवं नियम के साथ किया गया छोटा-सा उपाय भी उतना ही फलदायी होता है। वैसे तो जितना बड़ा अनुष्ठान करवाएंगे। उतना बड़ा फल भी प्राप्त होता है। परन्तु किसी भी उपाय को अपनाने से पूर्व किसी विद्वान ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।।

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