किसे और क्यों पुखराज रत्न धारण करना चाहिए।। Who Should Wear Yellow Sapphire and Why.
लेख का परिचय अथवा भूमिका।। Introduction.
मित्रों, ज्योतिष शास्त्र में रत्नों का विशेष महत्त्व बताया गया है, और इन्हीं रत्नों में एक अत्यंत लोकप्रिय रत्न है पुखराज, जिसे देवगुरु बृहस्पति यानी गुरु ग्रह का रत्न माना जाता है। परन्तु बाज़ार में आजकल पुखराज के नाम पर एक अन्य पीले रंग का पत्थर भी बड़े पैमाने पर बेचा जाता है, जिसे सिट्रीन (Citrine) कहा जाता है।।
दोनों देखने में लगभग एक जैसे पीले रंग के होते हैं, इसी कारण अधिकतर लोग इन दोनों में भ्रमित हो जाते हैं। परन्तु ज्योतिषीय, रासायनिक तथा मूल्य की दृष्टि से इन दोनों रत्नों में जमीन आसमान का अंतर है। आइए, इस लेख में हम विस्तार से समझते हैं कि पुखराज तथा पुखराज जैसे दिखनेवाले रत्नों में क्या भेद है, इन्हें धारण करने से क्या-क्या फायदे मिलते हैं और यह किस व्यक्ति को धारण करना चाहिए।।
पुखराज क्या है।। What is Pukhraj (Yellow Sapphire).
मित्रों, पुखराज, जिसे अंग्रेज़ी में येलो सफायर (Yellow Sapphire) कहा जाता है, एक कोरंडम (Corundum) परिवार का बहुमूल्य रत्न है। यह अत्यंत कठोर होता है और मोह्स स्केल (Mohs Scale) पर इसकी कठोरता 9 मानी जाती है, जो हीरे के बाद सबसे कठोर रत्नों में गिनी जाती है।।
वैदिक ज्योतिष में पुखराज को नवग्रहों में देवगुरु बृहस्पति अर्थात गुरु ग्रह का प्रतिनिधि रत्न माना गया है। गुरु ग्रह को ज्ञान, धन, विवाह, संतान तथा सौभाग्य का कारक ग्रह माना जाता है। इसलिए पुखराज धारण करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है।।
सिट्रीन क्या है।। What is Citrine.
मित्रों, वहीँ एकदम समान दिखनेवाला एक वस्तु होता है, जिसे सिट्रीन कहा जाता है जो एक क्वार्ट्ज़ (Quartz) परिवार का अर्ध-कीमती (Semi-Precious) रत्न है, जिसकी कठोरता मोह्स स्केल पर लगभग 7 मानी जाती है। इसका पीला रंग प्राकृतिक आयरन (Iron) की उपस्थिति के कारण होता है, हालांकि बाज़ार में उपलब्ध अधिकांश सिट्रीन वास्तव में हीट-ट्रीटेड अमेथिस्ट (Heat-Treated Amethyst) होता है।।
ऐसे वस्तु को (Citrine) जिसे कृत्रिम रूप से गर्म करके पीला रंग दिया जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से सिट्रीन को पुखराज का स्थान कभी नहीं दिया जा सकता। क्योंकि यह मूलतः गुरु ग्रह का प्रामाणिक रत्न नहीं है। बल्कि इसे एक सजावटी एवं सस्ता विकल्प मात्र वो भी केवल कुछ लोगों द्वारा माना जाता है।।
सिट्रीन और पुखराज रत्न में मुख्य अंतर।। Main Differences Between Citrine and Pukhraj.
मित्रों, इन दोनों रत्नों में अंतर को समझने के लिए इन बैटन पर ध्यान देना अत्यंत सहायक सिद्ध होगा। रत्न परिवार की दृष्टि से पुखराज कोरंडम परिवार का है, जबकि सिट्रीन क्वार्ट्ज़ परिवार का। कठोरता की दृष्टि से पुखराज मोह्स स्केल पर लगभग 9 अंक का है, जबकि सिट्रीन मात्र 7 अंक का। ग्रह-कारकत्व की दृष्टि से केवल पुखराज ही गुरु ग्रह का प्रामाणिक रत्न माना जाता है, सिट्रीन को यह मान्यता प्राप्त नहीं है।।
अब बात करते हैं, मूल्य की दृष्टि से भी पुखराज अत्यंत मूल्यवान तथा दुर्लभ रत्न होता है। जबकि सिट्रीन अपेक्षाकृत बहुत सस्ता एवं बहुत ही सुलभ वस्तु है। चमक तथा पारदर्शिता की दृष्टि से पुखराज में गहरी चमक तथा स्पष्टता होती है। जबकि सिट्रीन में यह गुण अपेक्षाकृत बहुत ही कम पाया जाता है। ज्योतिषीय प्रभाव की दृष्टि से पुखराज गुरु ग्रह को बलवान बनाकर शीघ्र एवं प्रामाणिक फल देता है। जबकि सिट्रीन पहनने से गुरु ग्रह से वैसा प्रभावी फल प्राप्त नहीं होता।।
पुखराज धारण करने के फायदे।। Benefits of Wearing Pukhraj.
मित्रों, पुखराज रत्न धारण करने से गुरु ग्रह बलवान होकर जातक को अनेकों शुभ फल प्रदान करता है। जैसे ज्ञान, बुद्धि तथा एकाग्रता में वृद्धि होती है। विवाह संबंधी बाधाएँ दूर होकर शीघ्र विवाह के योग बनते हैं। धन-वैभव में वृद्धि तथा आर्थिक स्थिरता प्राप्त होती है। संतान सुख तथा संतान से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है।।
साथ ही अगर बात करें तो शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं तथा करियर में उन्नति सहज ही प्राप्त होती है। सामाजिक प्रतिष्ठा एवं सम्मान में भी वृद्धि होती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से यकृत (लिवर), मोटापे तथा पाचन संबंधी समस्याओं में भी लाभ मिलता है। ऐसा हमारे सनातनी शास्त्रों में वर्णन मिलता है। मानसिक शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति की ओर भी झुकाव इससे बढ़ता है।।
सिट्रीन धारण करने के फायदे।। Benefits of Wearing Citrine.
मित्रों, सिट्रीन को यद्यपि गुरु ग्रह का प्रामाणिक रत्न नहीं माना जाता। फिर भी रत्न-शास्त्र की दृष्टि से इसे धारण करने के कुछ सीमित लाभ अवश्य बताए जाते हैं। यह एक सजावटी एवं ऊर्जा-संतुलक (Energy Balancing) रत्न माना जाता है। इसे धारण करने से मन में सकारात्मकता तथा आत्मविश्वास में हल्की वृद्धि भी होती है, ऐसा माना जाता है।।
यह सिट्रिन अपेक्षाकृत सस्ता होने के कारण उन लोगों के लिए एक विकल्प होता है, जो पुखराज खरीदने में आर्थिक रूप से असमर्थ होते हैं। परन्तु ध्यान रहे कि यह पुखराज जितना प्रभावी एवं प्रामाणिक फल कभी नहीं दे सकता। यह बहुत ही हल्का प्रभाव वाला एक वस्तु है, जो जीवन में अत्यल्प प्रभाव देता है।।
यह पुखराज किस व्यक्ति को धारण करना चाहिए।। Who Should Wear It.
मित्रों, ज्योतिषीय दृष्टि से पुखराज विशेष रूप से उन जातकों के लिए लाभकारी माना जाता है, जिनकी कुंडली में गुरु ग्रह निर्बल, नीच अथवा पीड़ित अवस्था में हो। धनु तथा मीन राशि वालों के लिए, चूंकि गुरु इन राशियों का स्वामी गुरु ही है, इसलिए पुखराज विशेष शुभ फलदायी माना जाता है। कर्क, वृश्चिक तथा मेष राशि वालों के लिए भी परिस्थिति अनुसार पुखराज लाभकारी हो सकता है।।
विवाह में विलंब, संतान संबंधी समस्या, आर्थिक अस्थिरता अथवा शिक्षा में बाधा का सामना कर रहे जातकों को पुखराज विशेष रूप से लाभ पहुँचाता है। इसके विपरीत मिथुन, कन्या तथा मकर राशि वालों को पुखराज धारण करने से पूर्व विशेष सावधानी तथा योग्य ज्योतिषीय परामर्श आवश्यक माना जाता है। क्योंकि इन राशियों के लिए गुरु सदैव अनुकूल फलदायी नहीं होता।।
सिट्रीन उन लोगों के लिए एक हल्का एवं सामान्य विकल्प हो सकता है, जो केवल सजावट अथवा ऊर्जा-संतुलन हेतु कोई पीला रत्न धारण करना चाहते हों। परन्तु जिन्हें ज्योतिषीय दृष्टि से गुरु ग्रह को बलवान बनाने की वास्तव में आवश्यकता हो। उन्हें प्रामाणिक एवं प्रमाणित पुखराज ही धारण करना चाहिए।।
पुखराज धारण करने की सही विधि।। Correct Method to Wear Pukhraj.
मित्रों, पुखराज को सदैव सोने की अंगूठी में जड़वाकर गुरुवार के दिन शुक्ल पक्ष में धारण करना शुभ माना जाता है। इसे दाहिने हाथ की तर्जनी अंगुली (Index Finger) में धारण करना शास्त्रोक्त विधि है।।
धारण करने से पूर्व रत्न को गंगाजल तथा कच्चे दूध से शुद्ध करके गुरु ग्रह का मंत्र “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” का जप करके धारण करना चाहिए। किसी भी रत्न को धारण करने से पहले किसी योग्य एवं विद्वान वैदिक ज्योतिषी से अपनी जन्मकुंडली दिखाकर परामर्श अवश्य लेना चाहिए।।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)
1. क्या सिट्रीन को पुखराज के स्थान पर पहना जा सकता है? Can Citrine Be Worn Instead of Pukhraj.
उत्तर:- नहीं, ज्योतिषीय दृष्टि से सिट्रीन गुरु ग्रह का प्रामाणिक रत्न नहीं है, इसलिए यह पुखराज जैसा प्रभावी फल कभी नहीं दे सकता।।
2. असली पुखराज और सिट्रीन में पहचान कैसे करें? How to Identify Real Pukhraj and Citrine.
उत्तर:- असली पुखराज में गहरी चमक, अधिक कठोरता तथा भीतर से एक विशेष चमकीली किरण (Silk Effect) दिखाई देती है। जबकि सिट्रीन अपेक्षाकृत हल्का, कम चमकीला तथा अधिक पारदर्शी होता है। प्रामाणिक जांच के लिए सदैव किसी प्रयोगशाला के प्रमाणपत्र (Lab Certificate) अवश्य देख लेना चाहिए।।
3. पुखराज किन राशियों के लिए सबसे शुभ माना जाता है? Which Zodiac Signs Benefit Most from Pukhraj.
उत्तर:- धनु एवं मीन राशि, जिनके स्वामी स्वयं गुरु हैं, उनके लिए पुखराज विशेष रूप से शुभ फलदायी माना जाता है।।
4. क्या पुखराज धारण करने से पहले ज्योतिषीय परामर्श आवश्यक है? Is Astrological Consultation Necessary Before Wearing Pukhraj.
उत्तर:- हाँ, अनिवार्य रूप से। कुंडली में गुरु की स्थिति, दशा तथा अन्य ग्रहों से संबंध देखे बिना कभी भी पुखराज रत्न धारण नहीं करना चाहिए।।
5. सिट्रीन की कीमत पुखराज से कितनी कम होती है? How Much Cheaper Is Citrine Compared to Pukhraj.
उत्तर:- सिट्रीन, प्रामाणिक पुखराज की तुलना में सामान्यतः कई गुना सस्ता होता है। क्योंकि यह अर्ध-कीमती एवं अधिक सुलभ रत्न होता है। जबकि पुखराज एक दुर्लभ एवं बहुमूल्य रत्न माना जाता है।।
लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.
मित्रों, सिट्रीन और पुखराज देखने में भले ही एक जैसे पीले रंग के प्रतीत हों, परन्तु रासायनिक संरचना, कठोरता, दुर्लभता तथा ज्योतिषीय कारकत्व की दृष्टि से इन दोनों में बहुत बड़ा अंतर होता है। जिन जातकों की कुंडली में गुरु ग्रह से जुड़ी वास्तविक समस्याएँ हों, उन्हें प्रामाणिक एवं प्रमाणपत्र-युक्त पुखराज ही धारण करना चाहिए।।
क्योंकि सिट्रीन उतना प्रभावी ज्योतिष के दृष्टिकोण से फल कभी भी प्रदान नहीं कर सकता। किसी भी रत्न को धारण करने से पहले किसी योग्य एवं विद्वान वैदिक ज्योतिषी से अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण अवश्य करवाना चाहिए।।
ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Click Here & Watch My YouTube Channel.
इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.
वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।
