
हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,
मित्रों, आज हम बात करेंगे किसी भी जन्म कुंडली के प्रथम भाव में बैठे हुए राहु के शुभ अशुभ फल के विषय में । वैसे तो राहु एक छाया ग्रह माना जाता है । परंतु जन्म कुंडली में यह जिस स्थान या जिस राशि पर बैठता है उसी भावेश या राशिश के अनुसार या उसके स्वभाव के अनुसार शुभाशुभ फल जातक को प्रदान करता है ।।
परंतु प्राकृतिक रूप से राहु अगर कुंडली के प्रथम भाव में बैठा हो तो किस प्रकार का फल देगा इस विषय में आज हम विस्तृत चर्चा करेंगे । प्रथम भाव में राहु सिंहासन पर बिराजमान राजा के समक्ष चिंघाड़ते हुए हाथी की तरह माना गया है । यह एक कुशल प्रशासक बनाता है । ४२ वर्ष बाद राहु का अनिष्ट प्रभाव दूर हो जाता है ।।
अगर लग्नस्थ राहु के प्रभाव के विषय में बात करें तो ऐसे जातक को अपने जीवनसाथी के साथ अच्छा संबध होता है । ऐसे जातकों से उसके दुश्मन भी उनसे डरते हैं । ऐसे राहु का दोष यह होता है, कि ऐसे जातक अपना कार्य अच्छी तरह पूरा नहीं कर सकते जिसके वजह से बारंबार नौकरी बदला करते हैं ।।
मित्रों, ऐसे राहु का शुभ फल भी लग्न में होता है और कुछ अशुभ फल भी होता है । परन्तु साथ ही यदि सातवें भाव में शुक्र बैठा हो तो ऐसे जातक के धनवान होने की प्रबल संभावना होती है । परंतु ऐसे लोगों को उसकी पत्नी को अत्यधिक सहन करना पड़ता है ।।
अगर इस प्रकार के दोष आपके जीवन में हो तो इसका कुछ सहज उपाय आप कर सकते हैं । जैसे गेहूँ, गुड़ और ताम्रपात्र का दान करना । तांबे के पात्र में गेहूँ तथा गुड़ भर कर रविवार को बहते पानी में प्रवाहित करने से ऐसे राहु का दूषित प्रभाव समाप्त हो जाता है ।।
अगर कुंडली के लग्न में राहु हो और आपको इस प्रकार की कोई परेशानी हो तो ब्लू रंग के कपड़े कदापि न पहनें । गले में एक चाँदी की सिकड़ी पहनकर रखें । बहते नदी के जल में एक नारियल प्रवाहित करें ।।

