बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।
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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 03 अगस्त 2026 दिन सोमवार।।
मित्रों, तारीख 03 अगस्त 2026 दिन सोमवार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है। आज श्रावण मास (उत्तर भारतियों) का पहला श्रावण सोमवार का व्रत है। श्रावण सोमवार का व्रत (सावन सोमवारी व्रत) करने एवं भगवान शिव का दर्शन-पूजन करने से प्रदोष व्रत के सामान फल की प्राप्ति होती है। आज भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र-जप, “ॐ नमः शिवाय” का जप तथा बिल्वपत्र अर्पण का विशेष फल बताया गया है। मान्यता है, कि आज श्रद्धापूर्वक व्रत एवं शिवपूजन करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। परिवार में सुख-शान्ति आती है। रोग एवं मानसिक कष्टों में कमी आती है। आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। विवाह एवं संतान सम्बन्धी बाधाओं के निवारण हेतु भी यह दिन शुभ होता है। आज सूर्य देवता पुनर्वसु नक्षत्र से चलकर श्लेषा नक्षत्र में (रात्रि 11:49 बजे) चले जायेंगे। इसका विवरण इस प्रकार है:- स्त्री. पु. चं.चं. योग, अश्व वाहन, वह्नि नाड़ी,इसके स्वामी मंगल हैं। इसमें सामान्य वर्षा का योग है। आज यायीजययोग एवं रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “श्रावण सोमवार व्रत एवं सूर्य देवता के आश्लेषा नक्षत्र के संक्रांति” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आपका आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 03 अगस्त 2026 दिन सोमवार।।
Aaj ka Panchang 03 August 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – ग्रीष्म.
मास – श्रावण.
पक्ष – कृष्ण.
गुजराती पंचांग के अनुसार – आषाढ़ कृष्ण पक्ष.
Panchang 03 August 2026
तिथि – पञ्चमी 22:55 PM बजे तक उपरान्त षष्ठी तिथि है।।
नक्षत्र – उत्तराभाद्रपद 22:01 PM तक उपरान्त रेवती नक्षत्र है।।
योग – सुकर्मा 21:14 PM तक उपरान्त धृति योग है।।
करण – कौलव 11:09 AM तक उपरान्त तैतिल 22:55 PM तक उपरान्त गर करण है।।
चन्द्रमा – मीन राशि पर।।
सूर्य – कर्क राशि एवं पुष्य नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:15:11
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 19:13:02
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 05:25:41
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 06:35:37
राहुकाल (अशुभ) – सुबह 07:53 बजे से 09:30 बजे तक।।
विजय (शुभ) मुहूर्त – दोपहर 12.32 बजे से 12.56 बजे तक।।
Panchang 03 August 2026
पञ्चमी तिथि विशेष:- पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। पञ्चमी तिथि को पूर्णा संज्ञक तिथियों में स्थान प्राप्त है। नन्दा, भद्रा, जया, रिक्ता और पूर्णा—इन पाँच संज्ञाओं में पूर्णा संज्ञा की तिथि सभी प्रकार की सिद्धि, पूर्णता तथा समृद्धि प्रदान करने वाली मानी गई है। इस कारण इस पञ्चमी तिथि में प्रारम्भ किए गए कार्य प्रायः सफलता को प्राप्त होते हैं। शास्त्रों में पञ्चमी तिथि को विद्या, ज्ञान, औषधि, नागोपासना तथा ऋषि-पूजन के लिए विशेष प्रशस्त बताया गया है। विशेषतः यदि यह पञ्चमी तिथि शुभ नक्षत्र के साथ संयोग करे तो अध्ययन, दीक्षा, मन्त्र ग्रहण, शास्त्र अध्ययन तथा विद्यारम्भ के लिए अत्यन्त उत्तम मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।।
पञ्चमी तिथि के अधिपति नागराज वासुकी जी माने गए हैं। अतः इस दिन नागदेवता का पूजन करने से सर्पभय दूर होता है। विषभय की शान्ति होती है। कुल में नागदोष का शमन होता है। भूमिदोष एवं भूमि सम्बन्धी बाधाएँ कम होती हैं। सन्तान की रक्षा एवं परिवार की उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। विशेषतः श्रावण मास की नागपञ्चमी का महत्व तो सर्वविदित है। किन्तु प्रत्येक मास की पञ्चमी भी नागपूजन के लिए शुभ मानी गई है।।
शिवपुराण में तथा आगमों में भी नागों को भगवान शिव का आभूषण बताया गया है। इसलिए पञ्चमी तिथि में भगवान शिव का पूजन, अभिषेक, रुद्राष्टाध्याय का पाठ तथा “ॐ नमः शिवाय” मन्त्र का जप करने से भी नागदेवताओं की भी कृपा प्राप्त होती है। शिवलिङ्ग पर कच्चा दूध, जल, बिल्वपत्र तथा अक्षत चढ़ाने से अनेक प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है।।
इस पञ्चमी तिथि में शुभ कार्य:- पञ्चमी तिथि में विद्यारम्भ, पुस्तक क्रय, मन्त्रदीक्षा, स्वाध्याय, देवप्रतिष्ठा, गृह में धार्मिक कार्य, औषधि सेवन का प्रारम्भ, भूमि सम्बन्धी शुभ कार्य, व्यापार विस्तार, धन संचय, आभूषण धारण, वाहन क्रय आदि कार्य शुभ माने गए हैं, यदि अन्य पंचांग दोष उपस्थित न हों।।
पञ्चमी तिथि में किस कार्य को नहीं करना चाहिए:- यद्यपि पञ्चमी शुभ तिथि मानी जाती है, तथापि अनावश्यक हिंसा, वृक्षों का विनाश, सर्प अथवा अन्य जीवों को कष्ट देना, कटु वचन बोलना, ऋषि, गुरु तथा माता-पिता का अपमान, इनसे विशेष रूप से बचना चाहिए। नागों के अधिपत्य वाली इस पञ्चमी तिथि में जीवों के प्रति दया का विशेष महत्व बताया गया है। आयुर्वेद और लोकपरम्परा में पञ्चमी को शरीर की शुद्धि तथा औषधि सेवन प्रारम्भ करने के लिए भी शुभ माना गया है। अनेक वैद्य आज भी औषधि सिद्धि एवं नई चिकित्सा के प्रारम्भ के लिए शुभ तिथि का विचार करते हैं।।
पञ्चमी तिथि में जन्म लेने वाले जातको का फलाफल:- पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं।।
पञ्चमी तिथि में जन्म लेने वाला जातक सामान्यतः बुद्धिमान, मधुरभाषी, दयालु, धर्मप्रिय, माता-पिता का सेवक, गुरुजन का सम्मान करने वाला, आर्थिक दृष्टि से उन्नति करने वाला, उत्तम सलाहकार, समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखते हैं तथा जीवन में धीरे-धीरे उत्तम सफलता प्राप्त करते हैं। इनमें धार्मिक प्रवृत्ति, तीर्थाटन तथा देवपूजन के प्रति विशेष श्रद्धा देखने को मिलती है।।
पञ्चमी तिथि का आध्यात्मिक संदेश:- पञ्चमी तिथि हमें यह शिक्षा देती है, कि मनुष्य को अपने भीतर छिपे हुए भय, क्रोध तथा विषरूप दोषों का परित्याग करके ज्ञान, विनम्रता और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। नागदेवता कुण्डलिनी शक्ति तथा गूढ़ ज्ञान के प्रतीक माने गए हैं। अतः इस पञ्चमी तिथि में आत्मचिन्तन, जप, ध्यान तथा ईश्वर-स्मरण करने से मानसिक शान्ति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। आज पञ्चमी तिथि में नागदेवता की प्रतिमा का यथाविधि पूजन करके यदि नदी के बहते जल में प्रवाहित अथवा विसर्जन (प्रत्येक पञ्चमी का अनिवार्य विधान नहीं है।) यह कुछ विशेष व्रतों या त्यौहारों के अवसर पर किया जा सकता है।।
“आज पञ्चमी तिथि में नागदेवता का श्रद्धापूर्वक पूजन, दुग्धाभिषेक (जहाँ परम्परा मान्य हो), हल्दी, कुश, दूर्वा तथा पुष्प अर्पित कर उनकी कृपा का प्रार्थना करने से भय, बाधा तथा सर्पदोषजनित कष्टों में शान्ति प्राप्त होती है।” कुछ आचार्यों की मान्यताओं के अनुसार “कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है”। वैसे शास्त्रों के अनुसार सामान्य नागपूजन को सीधे “कालसर्प दोष की पूर्ण शान्ति” का सार्वभौमिक उपाय नहीं कहा जा सकता। ऐसे भयंकर दोषों की शान्ति तो संतुलित और शास्त्रसम्मत रूप से ही होना चाहिए। “नागदेवता की उपासना से सर्पभय, नागसम्बन्धी दोषों की शान्ति तथा भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। यदि किसी ज्योतिषीय दोष के लिए विशेष शान्ति आवश्यक हो तो योग्य आचार्य के निर्देशन में विधिवत् अनुष्ठान करना चाहिए।।
Panchang 03 August 2026
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में हुआ है तो आप स्वभाव से एक दयालु व्यक्ति होंगे। आप धार्मिक होने के साथ-साथ वैरागी भी होंगे। आप समाज में एक धार्मिक नेता, प्रसिद्द शास्त्र विद एवं मानव प्रेमी के रूप में प्रख्यात होंगे। आप कोमल हृदयी एवं दूसरों के साथ सदैव सद्भावना रखते हैं। यदि आपके साथ कोई दुर्व्यवहार भी करता है तो आप उसे क्षमा कर देते हैं।।
आप अपने दिल में भी किसी के प्रति कोई द्वेष नहीं रखते। आप महत्वाकांक्षी व्यक्ति नहीं हैं परन्तु इच्छाएं बढ़ी-चढ़ी होती हैं। मन ही मन आप उन्नत्ति के सर्वोच्च शिखर पर पहुँच भी जाते हैं। देश भक्ति एवं इमानदारी आपके प्रमुख गुण होंगे। आप मनमौजी परन्तु मजबूत विचारों वाले व्यक्ति होंगे। आप उन गिने चुने व्यक्तियों में से होंगे जिन्हें आम लोग आदर की दृष्टि से देखते हैं।।
उत्तराभाद्रपद में जन्मे जातक निष्पक्ष व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं। आप किसी को भी उसकी आर्थिक एवं सामाजिक सम्पन्नता के आधार पर नहीं अपितु मानवता के आधार पर तौलते है। आप बहुत बुद्धिमान एवं विवेकशील व्यक्ति होंगे। एक प्रखर वक्ता होने के कारण अनायास ही लोग आपकी ओर खिचाव महसूस करते हैं। आपकी सबसे बड़ी कमी आपका क्रोध होगा जो किसी भी छोटी से छोटी बात पर आ जाता है।।
आप विपरीत लिंगियों के प्रति विशेष आकर्षण महसूस करते हैं और उनका साथ आपको बेहद प्रिय है। उत्तराभाद्रपद के जातक किसी भी कार्यक्षेत्र में उच्च पद को प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। आप अपनी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नहीं अपितु अपने गुणों के कारण सफल होते हैं। आप अक्सर अपने से अधिक शिक्षित लोगों से भी अधिक सफलता पाते हैं। आप कठोर परिश्रमी एवं कार्य के प्रति बहुत अधिक समर्पित व्यक्ति होंगे।।
ऐसे लोग कभी भी किसी कार्य को बीच में छोड़ना पसंद नहीं करते। आप अपने करियर में बहुत मान-सम्मान और प्रशंसा पाते हैं। आप अधिक समय तक निचले पदों पर कार्यरत नहीं रहते हैं। अपनी लगन और मेहनत के कारण आपकी उच्च पदों के लिए तरक्की शीघ्र ही हो जाती है। आप अपने जीवन के 18वें या 19वें वर्ष से ही जीवन यापन में लग जाते हैं। जीवन के 19, 21, 28., 30, 35 और 42वां वर्ष आपके करियर में महतवपूर्ण बदलाव लायेगा।।
उत्तराभाद्रपद के जातक का बचपन कठिनाईयों में बीतता है। आपको अपने माता-पिता से अपेक्षित स्नेह नहीं प्राप्त होता है। हालाँकि पिता के कारण आप समाज में गौरवान्वित होते हैं। परन्तु पिता से आपको अपने जीवन में किसी भी प्रकार का कोई लाभ प्राप्त नहीं होता है। आपको सदा ही अपने जन्म स्थान से दूर रहना पड़ता है। आपका विवाह एक सुंदर और आज्ञाकारी स्त्री से होता है।।
इस कारण आपका दाम्पत्य जीवन बहुत सुखी एवं समृद्ध होता है। आपकी आज्ञाकारी संतान आपकी प्रसन्नता का कारण बनती है। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जन्मी जातिकायें बुद्धिमान और धर्म के प्रति रूचि रखने वाली होती हैं। आप धैर्यवान एवं गुणवान होती हैं। आप जीवन में सदा मान सम्मान एवं प्रतिष्ठा प्राप्त करती हैं। उत्तराभाद्रपद के जातकों का प्रमुख लक्षण है बातूनी होना। आपको पैरों से सम्बंधित रोग या चोट, हर्निया एवं बवासीर जैसी बीमारियाँ हो सकती है।।
प्रथम चरण:- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। इस उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य हैं। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा जातक राजा के समान पराक्रमी होता है। लग्न स्वामी शनि एवं चरण स्वामी स्वामी सूर्य में परस्पर शत्रुता है। अतः सूर्य की दशा अशुभ फल देगी। शनि की दशा भी प्रतिकूल फल देगी। शनि में सूर्य या सूर्य में शनि की अन्तर्दशा मारक दशा का फल देगी। गुरु की दशा उत्तम स्वास्थ्य एवं राजयोग देने वाली होगी।।
द्वितीय चरण:- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। इस उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध हैं। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मा जातक तस्करी में रूचि रखता है। लग्न नक्षत्र स्वामी शनि बुध का मित्र है। अतः शनि की दशा मध्यम, परन्तु बुध की दशा अति शुभ फल देगी। बुध की दशा में गृहस्थ सुख एवं भौतिक उपलब्धियां प्राप्त होंगी। गुरु की दशा भी जातक को उत्तम फल देगी।।
तृतीय चरण:- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। इस उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा जातक पुत्रवान होता है। तीसरे चरण का स्वामी शुक्र है जो नक्षत्र स्वामी शनि का मित्र है। अतः शनि की दशा मध्यम परन्तु शुक्र की दशा शुभ फल देगी। शुक्र की दशा में पराक्रम बढेगा। लग्नेश गुरु की दशा भी अति उत्तम फल देगी।।
चतुर्थ चरण:- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। इस उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी मंगल हैं। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मा जातक संपूर्ण रूप से सुखी होता है। लग्नेश गुरु की शनि से शत्रुता है तथा लग्न नक्षत्र स्वामी शनि की नक्षत्र चरण स्वामी मंगल से भी शत्रुता है। अतः शनि की दशा अशुभ फल देगी एवं मंगल की दशा मध्यम फल देगी। जो लाभ मंगल की दशा में जातक को मिलना चाहिए था वह नहीं मिल पायेगा। गुरु की दशा राजयोग प्रदाता होती है।।
Panchang 03 August 2026
सामान्यतया सोमवार शॉपिंग के लिए अच्छा दिन माना जाता है।।
सोमवार का विशेष – सोमवार के दिन तेल मर्दन अर्थात् तेल मालिश करने से चहरे और शरीर की कान्ति बढ़ती है – (मुहूर्तगणपति)।।
सोमवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से शिव भक्ति की हानि होती है। पुत्रवान पिता को तो कदापि नहीं करना चाहिये। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है।।
सोमवार के दिन ये विशेष उपाय करें – सोमवार को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।
Panchang 03 August 2026
मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म सोमवार को होता है, वो जातक शांत प्रवृत्ति के गौर वर्ण लिए हुये होते हैं। सोमवार चन्द्र प्रधान दिन होता है, इसलिये इस जातक में कल्पनाशीलता, दया भाव, नम्रता के गुण परिलक्षित होते हैं। माता के प्रिय एवं सद्गुणों से युक्त ये जातक कवि ह्रदय, सफेद वस्तुओं से लाभ पाने वाला, यात्रा का शौकीन, जलाशयों एवं प्रकृति का प्रेमी होता है।।
सोमवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है। इनकी प्रकृति यानी इनका स्वभाव शान्त होता है। इनकी वाणी मधुर और मोहित करने वाली होती है। ये स्थिर स्वभाव वाले होते हैं सुख हो या दु:ख सभी स्थिति में ये समान रहते हैं। धन के मामले में भी ये भाग्यशाली होते हैं तथा इन्हें सरकार एवं समाज से मान-सम्मान मिलता है।।
इस दिन जन्म लेने वाले जातक को पर्यावरण के क्षेत्र में, समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में, पानी से जुड़े रोजगार जैसे मत्य् क पालन या मछली का व्यवसाय, पत्थरों का व्यवसाय, कपड़े का व्यंवसाय शुद्ध फलता है। इनके लिए सफेद रंग सदा शुभकारी होता है इसलिए कैरियर के लिहाज से आप जहां भी जायें सफेद रुमाल अपनी जेब में रखें और उस क्षेत्र को ही चुने जिसमें सफेद रंग की प्रधानता हो, जैसे पानी, कपड़ा, फूल, पत्थयर आदि से जुड़ा व्यवसाय।।
आज का सुविचार – मित्रों, जीना हैं, तो उस दीपक की तरह जियो जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता हैं जितनी किसी गरीब की झोपड़ी में। जो भाग्य में हैं वह भाग कर आयेगा और जो भाग्य में नही हैं वह आकर भी भाग जायेगा। हँसते रहो तो दुनिया साथ हैं, वरना आँसुओं को तो आँखो में भी जगह नही मिलती।।
Panchang 03 August 2026
चन्द्रमा द्वारा निर्मित कुछ अतुलनीय धनदायक योग।।…… आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
ॐ अथ शिवप्रातः स्मरणस्तोत्रम् – यहाँ क्लिक करें और पढ़ें:
