HomeArticlesAstro Articlesकुण्डली के द्वादश भाव में बैठे शनि का शुभाशुभ फल।।

कुण्डली के द्वादश भाव में बैठे शनि का शुभाशुभ फल।।

कुण्डली के द्वादश भाव में बैठे शनि का शुभाशुभ फल।। Dwadash Bhav Me Shani Ka Fal.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, आज हम जन्म कुण्डली के बारहवें भाव में बैठे शनि महाराज के शुभाशुभ फलों के विषय में विस्तार से बात करेंगे। द्वादश भाव को व्यय, मोक्ष, विदेश, एकान्त और बन्धन का भाव माना गया है। जब इस भाव में शनि देव विराजमान होते हैं तो इसका फल अत्यन्त गहन और विचारणीय हो जाता है।।

मित्रों, शनि और द्वादश भाव दोनों की प्रकृति में एक अद्भुत साम्य है। शनि एकान्त, तपस्या, वैराग्य और कठोर परिश्रम का प्रतीक है तथा द्वादश भाव भी एकान्त, मोक्ष और विदेश का प्रतिनिधि है। इसीलिए शनि को द्वादश भाव में कुछ विशेष महत्त्व प्राप्त होता है।।

द्वादश भाव में स्थित शनि वाले जातक प्रायः अत्यन्त परिश्रमी और सहनशील होते हैं। ये जातक जीवन में बहुत कठिन परिस्थितियों से गुजरते हैं परन्तु अपने दृढ़ संकल्प से हर कठिनाई को पार करते हैं। इनके स्वभाव में एक गहरी गम्भीरता होती है जो इन्हें भीड़ से अलग करती है।।

मित्रों, द्वादशस्थ शनि वाले जातकों को विदेश से विशेष लाभ होता है। ऐसे जातक प्रायः विदेश में जाकर अपनी किस्मत बनाते हैं। विदेशी कम्पनियों में भी इन्हें अच्छे अवसर मिलते हैं। आयात-निर्यात, विदेशी व्यापार और अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में ये विशेष सफलता प्राप्त करते हैं।।

परन्तु मित्रों, धन के मामले में यह स्थिति कुछ कष्टकारी भी हो सकती है। द्वादश भाव व्यय का भाव है और शनि यहाँ बैठकर जातक के धन व्यय को बढ़ा सकता है। अनावश्यक खर्चे, अस्पताल के खर्चे अथवा किसी गुप्त कारण से धन की हानि हो सकती है। इन जातकों को अपने व्यय पर विशेष नियन्त्रण रखना चाहिए।।

मित्रों, नींद और स्वास्थ्य के विषय में भी यह स्थिति कुछ कहती है। द्वादश भाव शयन का भाव भी है और यहाँ शनि की उपस्थिति से जातक को नींद की समस्या हो सकती है। पैरों में दर्द, हड्डियों की समस्या और आँखों की कमजोरी भी इन जातकों में देखी जाती है।।

आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो द्वादशस्थ शनि वाले जातक गहरे आध्यात्मिक विचारों वाले होते हैं। इन्हें ध्यान, योग और एकान्त साधना में विशेष रुचि होती है। यदि यह जातक आध्यात्मिक मार्ग पर चले तो जीवन में असाधारण ऊँचाइयाँ प्राप्त कर सकता है।।

मित्रों, यदि शनि यहाँ बलवान हो और किसी शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो जातक किसी बड़े संस्थान का मुखिया, जेल अधीक्षक, अस्पताल प्रशासक अथवा किसी बड़े आश्रम का संचालक भी बन सकता है। यह भी हो सकता है कि यह जातक किसी गुप्त विभाग में कार्य करे।।

इस स्थिति के निवारण हेतु प्रतिदिन शनि मन्त्र का जाप करें — “ॐ शं शनैश्चराय नमः।” शनिवार को काले तिल, सरसों का तेल और काले वस्त्र का दान करें। पीपल के वृक्ष को शनिवार की शाम सरसों के तेल का दीपक जलाएं। गरीब और वृद्ध जनों की सेवा करें — शनि देव प्रसन्न होंगे।।

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