HomeArticlesAstro Articlesकुण्डली के द्वादश भाव में बैठे मंगल का शुभाशुभ फल।।

कुण्डली के द्वादश भाव में बैठे मंगल का शुभाशुभ फल।।

कुण्डली के द्वादश भाव में बैठे मंगल का शुभाशुभ फल।। Dwadash Bhav Me Mangal Ka Fal.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, आज हम जन्म कुण्डली के बारहवें भाव में बैठे मंगल ग्रह के शुभाशुभ फलों के विषय में विस्तार से चर्चा करेंगे। मंगल एक उग्र, साहसी और ऊर्जावान ग्रह है। जब यह ग्रह द्वादश भाव में स्थित होता है तो इसके फल अत्यन्त मिश्रित और रोचक होते हैं।।

मित्रों, सर्वप्रथम यह जान लें कि द्वादश भाव में मंगल की उपस्थिति “शयन सुख” को प्रभावित करती है। द्वादश भाव शयन और गुप्त सुखों का भाव भी है। ऐसे जातकों का वैवाहिक जीवन कुछ उतार-चढ़ाव से भरा हो सकता है। जीवनसाथी के साथ सामंजस्य बिठाने में कभी-कभी कठिनाई आती है।।

द्वादश भाव में स्थित मंगल वाले जातक अत्यन्त साहसी और निडर होते हैं। ये किसी भी चुनौती से डरते नहीं। परन्तु इनका स्वभाव कुछ क्रोधी और आवेशपूर्ण भी हो सकता है। क्रोध के आवेश में ये ऐसे निर्णय ले लेते हैं जिनका बाद में पछतावा होता है।।

मित्रों, धन के विषय में यह स्थिति बताती है कि जातक का धन अनावश्यक खर्चों में व्यय होता है। विशेषकर चिकित्सा पर खर्च, दुर्घटनाओं में हानि अथवा शत्रुओं के कारण धन की क्षति हो सकती है। इन जातकों को अपने धन की सुरक्षा के प्रति सदैव सावधान रहना चाहिए।।

परन्तु मित्रों, यदि मंगल यहाँ बलवान हो — विशेषकर यदि मंगल वृश्चिक राशि में हो — तो यह जातक विदेश में जाकर असाधारण सफलता प्राप्त करता है। विदेशी भूमि पर इसकी कार्यक्षमता और साहस दोनों खूब काम आते हैं। सेना, पुलिस, सर्जरी और विदेश सेवा में ये जातक विशेष प्रगति करते हैं।।

स्वास्थ्य की दृष्टि से देखें तो द्वादशस्थ मंगल वाले जातकों को आँखों की समस्या, रक्त विकार और गुप्त रोगों से सतर्क रहना चाहिए। दुर्घटनाओं का भय भी रहता है। इसीलिए ऐसे जातकों को वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।।

मित्रों, आध्यात्मिक दृष्टि से यह मंगल जातक को तन्त्र-मन्त्र, गुप्त विद्याओं और रहस्यमय विषयों में रुचि देता है। यदि यह रुचि सकारात्मक दिशा में जाए तो जातक एक असाधारण साधक बन सकता है।।

इस स्थिति के निवारण हेतु प्रतिदिन हनुमान जी की उपासना करें। मंगलवार का व्रत रखें और हनुमान चालीसा का पाठ करें। लाल मसूर की दाल और गुड़ का दान करें। रक्तदान करना भी मंगल को शान्त करने का एक उत्तम उपाय है।।

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