अथ श्रीमृत्युञ्जय अष्टोत्तरशत नामावलिः।। Shri Mrityunjaya Ashtottarshat Namavali.
मृत्युञ्जयाष्टोत्तरशतनामावलिः-
ॐ भगवते नमः ।
ॐ सदाशिवाय नमः ।
ॐ सकलतत्त्वात्मकाय नमः ।
ॐ सर्वमन्त्ररूपाय नमः ।
ॐ सर्वयन्त्राधिष्ठिताय नमः ।
ॐ तन्त्रस्वरूपाय नमः ।
ॐ तत्त्वविदूराय नमः ।
ॐ ब्रह्मरुद्रावतारिणे नमः ।
ॐ नीलकण्ठाय नमः ।
ॐ पार्वतीप्रियाय नमः ।
ॐ सोमसूर्याग्निलोचनाय नमः ।
ॐ भस्मोद्धूलितविग्रहाय नमः ।
ॐ महामणिमकुटधारणाय नमः ।
ॐ माणिक्यभूषणाय नमः ।
ॐ सृष्टिस्थितिप्रलयकालरौद्रावताराय नमः ।
ॐ दक्षाध्वरध्वंसकाय नमः ।
ॐ महाकालभेदकाय नमः ।
ॐ मूलाधारैकनिलयाय नमः ।
ॐ तत्त्वातीताय नमः ।
ॐ गङ्गाधराय नमः । २०
ॐ सर्वदेवाधिदेवाय नमः ।
ॐ वेदान्तसाराय नमः ।
ॐ त्रिवर्गसाधनाय नमः ।
ॐ अनेककोटिब्रह्माण्डनायकाय नमः ।
ॐ अनन्तादिनागकुलभूषणाय नमः ।
ॐ प्रणवस्वरूपाय नमः ।
ॐ चिदाकाशाय नमः ।
ॐ आकाशादिस्वरूपाय नमः ।
ॐ ग्रहनक्षत्रमालिने नमः ।
ॐ सकलाय नमः ।
ॐ कलङ्करहिताय नमः ।
ॐ सकललोकैककर्त्रे नमः ।
ॐ सकललोकैकभर्त्रे नमः ।
ॐ सकललोकैकसंहर्त्रे नमः ।
ॐ सकलनिगमगुह्याय नमः ।
ॐ सकलवेदान्तपारगाय नमः ।
ॐ सकललोकैकवरप्रदाय नमः ।
ॐ सकललोकैकशङ्कराय नमः ।
ॐ शशाङ्कशेखराय नमः ।
ॐ शाश्वतनिजावासाय नमः । ४०
ॐ निराभासाय नमः ।
ॐ निरामयाय नमः ।
ॐ निर्लोभाय नमः ।
ॐ निर्मोहाय नमः ।
ॐ निर्मदाय नमः ।
ॐ निश्चिन्ताय नमः ।
ॐ निरहङ्काराय नमः ।
ॐ निराकुलाय नमः ।
ॐ निष्कलङ्काय नमः ।
ॐ निर्गुणाय नमः ।
ॐ निष्कामाय नमः ।
ॐ निरुपप्लवाय नमः ।
ॐ निरवद्याय नमः ।
ॐ निरन्तराय नमः ।
ॐ निष्कारणाय नमः ।
ॐ निरातङ्काय नमः ।
ॐ निष्प्रपञ्चाय नमः ।
ॐ निस्सङ्गाय नमः ।
ॐ निर्द्वन्द्वाय नमः ।
ॐ निराधाराय नमः । ६०
ॐ निरोगाय नमः ।
ॐ निष्क्रोधाय नमः ।
ॐ निर्गमाय नमः ।
ॐ निर्भयाय नमः ।
ॐ निर्विकल्पाय नमः ।
ॐ निर्भेदाय नमः ।
ॐ निष्क्रियाय नमः ।
ॐ निस्तुलाय नमः ।
ॐ निस्संशयाय नमः ।
ॐ निरञ्जनाय नमः ।
ॐ निरुपमविभवाय नमः ।
ॐ नित्यशुद्धबुद्धपरिपूर्णाय नमः ।
ॐ नित्याय नमः ।
ॐ शुद्धाय नमः ।
ॐ बुद्धाय नमः ।
ॐ परिपूर्णाय नमः ।
ॐ सच्चिदानन्दाय नमः ।
ॐ अदृश्याय नमः ।
ॐ परमशान्तस्वरूपाय नमः ।
ॐ तेजोरूपाय नमः । ८०
ॐ तेजोमयाय नमः ।
ॐ महारौद्राय नमः ।
ॐ भद्रावतारय नमः ।
ॐ महाभैरवाय नमः ।
ॐ कल्पान्तकाय नमः ।
ॐ कपालमालाधराय नमः ।
ॐ खट्वाङ्गाय नमः ।
ॐ खड्गपाशाङ्कुशधराय नमः ।
ॐ डमरुत्रिशूलचापधराय नमः ।
ॐ बाणगदाशक्तिबिण्डिपालधराय नमः ।
ॐ तोमरमुसलमुद्गरधराय नमः ।
ॐ पट्टिशपरशुपरिघाधराय नमः ।
ॐ भुशुण्डिचिताग्निचक्राद्ययुधधराय नमः ।
ॐ भीषणकारसहस्रमुखाय नमः ।
ॐ विकटाट्टहासविस्फारिताय नमः ।
ॐ ब्रह्माण्डमण्डलाय नमः ।
ॐ नागेन्द्रकुण्डलाय नमः ।
ॐ नागेन्द्रहाराय नमः ।
ॐ नागेन्द्रवलयाय नमः ।
ॐ नागेन्द्रचर्मधराय नमः । १००
ॐ नागेन्द्राभरणाय नमः ।
ॐ त्र्यम्बकाय नमः ।
ॐ त्रिपुरान्तकाय नमः ।
ॐ विरूपाक्षाय नमः ।
ॐ विश्वेश्वराय नमः ।
ॐ विश्वरूपाय नमः ।
ॐ विश्वतोमुखाय नमः ।
ॐ मृत्युञ्जयाय नमः । १०८
।। इति श्रीमृत्युञ्जयाष्टोत्तरशतनामावलिः समाप्ता।।
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बृहत्पाराशर होराशास्त्रम् के 19वें अध्याय में वर्णित अनेकयोगाध्यायः में ज्योतिष के सभी महत्वपूर्ण योगों का विस्तृत वर्णन किया गया है । जातक के जीवन में इन योगों का क्या असर होता है, इस बात का विस्तृत वर्णन हम कर रहे हैं । तो आइये जानें इस विडियो टुटोरियल में मृदंग योग एवं उसके फल के विषय में – मृदंग योग एवं उसके फल.
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