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मंगल दशम भाव में प्रभाव और उपाय।।

मंगल दशम भाव में प्रभाव और उपाय।। Mangal in Tenth House Effects And Remedies.

दशम भाव और मंगल का संबंध।। Introduction.

मित्रों, दशम भाव को कर्म भाव, राजसत्ता भाव तथा प्रतिष्ठा भाव भी कहा जाता है। और यह केंद्र भाव होने के कारण अत्यंत बलशाली भाव भी माना गया है। इसी से जातक के करियर, सामाजिक प्रतिष्ठा, नेतृत्व क्षमता तथा सार्वजनिक जीवन का आँकलन किया जाता है। यह दशम भाव जातक के कर्मक्षेत्र का वह दर्पण है, जिसमें उसका पुरुषार्थ प्रत्यक्ष रूप से प्रतिबिंबित होता है।।

अब मंगल की प्रकृति पर विचार करें तो यह साहस, पराक्रम, ऊर्जा तथा नेतृत्व का तीव्र तथा क्रूर ग्रह माना गया है। मंगल जिस भी भाव में बैठता है, वहाँ अपनी ऊर्जा तथा गति का विशेष संचार करता है। तथा उस भाव के विषयों को तीव्रता प्रदान करता है। दशम भाव उपचय भाव होने के कारण मंगल जैसे क्रूर ग्रह के लिए विशेष रूप से अनुकूल माना जाता है। क्योंकि शास्त्रों में स्पष्ट किया गया है कि उपचय भावों में स्थित क्रूर ग्रह अपने प्रभाव में निरंतर वृद्धि करते हैं।।

जब साहस तथा नेतृत्व के कारक मंगल इसी कर्म भाव में आकर बैठ जाते हैं, तो एक अत्यंत सशक्त संयोग उत्पन्न होता है। क्योंकि करियर स्वयं भी साहस, प्रतिस्पर्धा तथा नेतृत्व की मांग करता है। यही कारण है कि यह दशम भाव और मंगल ग्रह के संयोग जातक को कर्मक्षेत्र में असाधारण ऊर्जा तथा महत्वाकांक्षा प्रदान करता है। जिससे जातक के करियर, नेतृत्व क्षमता तथा समाज में स्थान पर विशेष तथा गहरा प्रभाव देखने को मिलता है।।

दशम भाव उपचय भाव होने के कारण मंगल के लिए अत्यंत अनुकूल भाव माना जाता है। विशेषकर जब मंगल स्वराशि अथवा उच्च राशि में हो तो यह राजयोग के समान शुभ फल प्रदान करता है। परन्तु वास्तविक फल का निर्णय तो कभी भी संपूर्ण जन्मकुंडली, ग्रहों की दशा और ग्रहों के गोचर को अच्छे से देख-समझकर उसके आधार पर ही किया जाता है।।

दशम भाव में मंगल का सामान्य स्वभाव।। General Nature of Mars in the Tenth House.

मित्रों, दशम भाव में मंगल जातक को नेतृत्वकर्ता, महत्वाकांक्षी तथा कर्मठ स्वभाव प्रदान करता है। ऐसे जातक कार्यक्षेत्र में तीव्र गति से आगे बढ़ने की चेष्टा करते हैं। तथा चुनौतियों का सामना निडरता से करते हैं। इनमें स्वाभाविक रूप से नेतृत्व करने की क्षमता विद्यमान रहती है। जिस कारण ये प्रायः अपने कार्यक्षेत्र में शीघ्र ही एक विशिष्ट स्थान बना लेते हैं।।

स्वभाव में महत्वाकांक्षा तथा शीघ्रता के कारण ये अपने लक्ष्यों को शीघ्र प्राप्त करने का प्रयास भी करते हैं। इनकी कार्यशैली में एक विशेष प्रकार की तीव्रता तथा दृढ़ता होती है। जिसके कारण ये किसी भी कार्य को अधूरा छोड़ना पसंद नहीं करते। और अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए पूरी शक्ति लगा देते हैं।।

कई बार यही महत्वाकांक्षा अहंकार का रूप भी ले लेती है। जिसके कारण अधिकारियों अथवा सहकर्मियों के साथ टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे जातकों को अपनी ऊर्जा को रचनात्मक दिशा में प्रवाहित करने की कला सीखनी पड़ती है। अन्यथा यही ऊर्जा संबंधों में कटुता का कारण भी बन जाती है।।

शुभ मंगल का दशम भाव में फल।। Effects of an Auspicious Mars in the Tenth House.

मित्रों, यदि दशम भाव का मंगल स्वराशि, उच्च राशि (जैसे मकर राशि में) अथवा शुभ ग्रहों की दृष्टि से युक्त होकर बलवान हो तो यह राजयोग के समान शुभ फल प्रदान करता है। ऐसे जातक सेना, पुलिस, इंजीनियरिंग, खेल तथा प्रशासनिक सेवाओं में विशेष रूप से सफलता प्राप्त करते हैं। क्योंकि इन क्षेत्रों में साहस, अनुशासन तथा तीव्र निर्णय-क्षमता की सर्वाधिक आवश्यकता होती है।।

समाज में उच्च पद, सम्मान तथा नेतृत्व की भूमिका जातक को स्वतः प्राप्त होती है। तथा कार्यक्षेत्र में जातक की गिनती अग्रणी व्यक्तियों में होती है। साहसपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता के कारण जातक करियर में शीघ्र उन्नति प्राप्त करता है। तथा इनके नेतृत्व में कार्य करने वाले लोग भी इनसे प्रेरणा प्राप्त करते हैं।।

ऐसे जातक जोखिम उठाने से नहीं घबराते, और यही गुण इन्हें प्रतिस्पर्धियों से आगे रखता है। इनकी उपस्थिति मात्र से ही कार्यस्थल पर एक अनुशासित तथा ऊर्जावान वातावरण का निर्माण होता है। जिससे संगठन अथवा टीम की समग्र उत्पादकता में भी वृद्धि होती है।।

अशुभ मंगल का दशम भाव में फल।। Effects of an Inauspicious Mars in the Tenth House.

मित्रों, यदि दशम भाव का मंगल नीचस्थ, पापग्रहों से पीड़ित अथवा निर्बल हो तो जातक को अधिकारियों अथवा वरिष्ठों से टकराव का सामना करना पड़ता है। कार्यक्षेत्र में अस्थिरता तथा बार-बार नौकरी परिवर्तन की स्थिति भी बनती है। क्योंकि ऐसे जातकों के लिए किसी एक स्थान पर लंबे समय तक टिके रहना कठिन हो जाता है।।

अहंकार के कारण संबंधों में तनाव भी उत्पन्न होता है। जिससे करियर में आगे की प्रगति बाधित हो जाती है। शीघ्रता में लिए गए निर्णयों के कारण कभी-कभी व्यवसाय अथवा नौकरी में हानि भी उठानी पड़ती है। तथा अत्यधिक आक्रामक व्यवहार के कारण सहकर्मियों का सहयोग भी कम ही मिलता है।।

ऐसे जातकों को अपनी महत्वाकांक्षा तथा साहस को धैर्य तथा विनम्रता के साथ संतुलित करना सीखना चाहिए। क्योंकि कर्मक्षेत्र में दीर्घकालिक सफलता केवल गति से नहीं, बल्कि संयम से भी प्राप्त होती है। वरिष्ठों तथा सहकर्मियों के साथ सम्मानपूर्ण व्यवहार बनाए रखना भी इस दशम भाव में बैठे मंगल ग्रह की स्थिति के अशुभ प्रभाव को नियंत्रित करने में विशेष रूप से सहायक सिद्ध होता है।।

स्वास्थ्य पर मंगल का प्रभाव।। Health Effects.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष के अनुसार दशम भाव का संबंध घुटनों तथा हड्डियों से माना गया है। और मंगल का संबंध रक्त तथा शरीर की ऊर्जा से होता है। दशम भाव में मंगल यदि शुभ हो तो शारीरिक शक्ति तथा कार्यक्षमता बनी रहती है। तथा जातक लंबे समय तक कार्य करने के बाद भी शीघ्र थकान अनुभव नहीं करता।।

इसके विपरीत यदि मंगल अशुभ हो तो घुटनों अथवा हड्डियों में चोट के संकेत देते हैं। तथा अत्यधिक कार्यभार के कारण तनाव उत्पन्न होता है। रक्तचाप संबंधी असंतुलन अथवा अत्यधिक क्रोध के कारण उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य समस्याएँ भी इसी पीड़ित मंगल की स्थिति से जुड़ी मानी जाती हैं।।

ऐसी स्थिति में सावधानी बरतने के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श भी अवश्य लेना चाहिए। कार्यक्षेत्र में अत्यधिक शारीरिक श्रम अथवा जोखिम भरे कार्यों के दौरान भी विशेष सावधानी रखनी चाहिए। ताकि दुर्घटना की संभावनाओं को कम किया जा सके। साथ ही मंगल से सम्बंधित जो उपाय बताये गए हैं उन्हें भी अवश्य अपनाना चाहिए।।

मंगल को बलवान बनाने के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies to Strengthen Mars in the Tenth House.

मित्रों, दशम भाव के मंगल को शुभ अथवा बलवान बनाए रखने के लिए आप मंगल देवता के मंत्र “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” का श्रद्धापूर्वक जप करें। हनुमान जी की उपासना तथा मंगलवार का व्रत अत्यन्त शुभ फलदायी माना गया है। क्योंकि हनुमान जी को साहस, शक्ति तथा अनुशासन के आदर्श स्वरूप में ही पूजा जाता है।।

एक विकल्प कार्यक्षेत्र में विनम्रता एवं अनुशासन अपनाना तथा वरिष्ठ लोगों का सम्मान करना भी शुभ माना जाता है। लाल वस्तुओं का दान करना दशम भाव के मंगल की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा प्रदान करने में सहायक होता है। तथा मंगलवार के दिन इस मंगल से सम्बंधित वस्तुओं का दान विशेष रूप से शुभ फलदायी सिद्ध होता है।।

और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि अपनी महत्वाकांक्षा को अनुशासन की सीमा में रखें। क्योंकि नियंत्रित मंगल ही सर्वाधिक शुभ फलदायी सिद्ध होता है। कार्यस्थल पर क्रोध की बजाय संयम तथा सहयोग की भावना अपनाना भी इस दशम भाव और मंगल ग्रह की स्थिति को अत्यंत सुदृढ़ बनाता है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में मंगल को साहस, पराक्रम तथा ऊर्जा का प्रमुख कारक ग्रह बताया गया है। फलदीपिका के अनुसार दशम भाव में स्थित बलवान मंगल राजयोग के समान फल प्रदान करता है। जबकि पीड़ित मंगल करियर में बाधाएँ उत्पन्न करता है।।

बृहज्जातक में दशमस्थ मंगल को नेतृत्व तथा उच्च पद प्राप्ति का प्रमुख कारक ग्रह माना गया है। इसी प्रकार जातक पारिजात में भी दशम भाव के मंगल को करियर तथा सामाजिक प्रतिष्ठा दोनों पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालने वाला ग्रह बताया गया है। तथा इसका अंतिम फलादेश कुंडली में दशमेश की स्थिति तथा संपूर्ण जन्मकुंडली के समन्वित अध्ययन के पश्चात ही निश्चित किया जाना चाहिए।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

Q 1. दशम भाव में शुभ मंगल क्या फल देता है? Effects of Auspicious Mars in 10th House.

उत्तर:- दशम भाव का शुभ मंगल नेतृत्व क्षमता, राजयोग जैसा करियर, समाज में उच्च प्रतिष्ठा तथा शीघ्र उन्नति जैसे उत्तम फल प्रदान करता है।।

Q 2. दशम भाव में अशुभ मंगल क्या नुकसान देता है? Problems Caused by Malefic Mars in 10th House.

उत्तर:- दशम भाव का अशुभ मंगल अधिकारियों से टकराव, करियर में अस्थिरता तथा अहंकार के कारण संबंधों में तनाव जैसी बाधाएँ उत्पन्न करता है।।

Q 3. दशम भाव के मंगल से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ कौन-सी हैं? Health Issues Linked to Mars in 10th House.

उत्तर:- वैदिक ज्योतिष में दशम भाव का संबंध घुटनों तथा हड्डियों से माना गया है। पीड़ित मंगल इन क्षेत्रों से जुड़ी चोट आदि लगने का संकेत देता है। ऐसे में ज्योतिषीय परामर्श के साथ-साथ डॉक्टर से इलाज भी करवाना आवश्यक होता है।।

Q 4. दशम भाव के मंगल को बलवान बनाने का सबसे प्रभावी वैदिक उपाय क्या है? Most Effective Remedy for Mars in 10th House.

उत्तर:- “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः मंत्र का जप, हनुमान जी की उपासना, मंगलवार का व्रत तथा कार्यक्षेत्र में अनुशासन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।।

Q 5. कौन-सी राशि में मंगल दशम भाव में सर्वाधिक शुभ फल देता है? Which Sign Makes Mars Most Auspicious in 10th House.

उत्तर:- मंगल मकर राशि में उच्च का होता है। अतः यदि दशम भाव में मकर राशि का मंगल हो तो यह राजयोग के समान उत्तम फल प्रदान करता है। परंतु अंतिम निर्णय संपूर्ण कुंडली देखकर ही किया जाता है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, कुंडली के दशम भाव में स्थित मंगल शुभ हो तो जातक को नेतृत्व क्षमता, राजयोग जैसा करियर तथा समाज में उच्च प्रतिष्ठा प्रदान करता है। वहीं अशुभ होने पर अधिकारियों से टकराव तथा करियर में अस्थिरता जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न करता है। यह इस दशम भाव और मंगल ग्रह के संयोग से हमें यह ज्ञात होता है कि साहस तथा नेतृत्व भी तभी सार्थक सिद्ध होते हैं, जब उनके साथ अनुशासन तथा विनम्रता का भी समन्वय हो।।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगल देवता के मंत्र का जप, हनुमान जी की उपासना, मंगलवार का व्रत तथा कार्यक्षेत्र में अनुशासन इसे संतुलित एवं बलवान बनाने में सहायक माना गया है। और यहाँ मैं यही कहूँगा कि उपचय भाव में स्थित यह मंगल जातक को असाधारण ऊर्जा तो अवश्य देता है, परन्तु यही ऊर्जा जब विवेक के साथ जुड़ती है, तभी वह वास्तविक राजयोग का रूप ले पाती है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि किसी भी विशेष उपाय अथवा निर्णायक निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले किसी भी अनुभवी, योग्य और विद्वान ज्योतिषी से अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण विधिपूर्वक करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।

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