HomeSurya Grahaकुंडली के अष्टम भाव में बैठे सूर्य का शुभाशुभ फल एवं उपाय।।

कुंडली के अष्टम भाव में बैठे सूर्य का शुभाशुभ फल एवं उपाय।।

कुंडली के अष्टम भाव में बैठे सूर्य का शुभाशुभ फल एवं उपाय।। Surya in the Eighth House Effects.

अष्टम भाव और सूर्य का संबंध।। Introduction.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मा, तेज, आत्मबल तथा जीवनशक्ति का कारक ग्रह माना गया है। अष्टम भाव को आयुष्य भाव भी कहा जाता है। और इसी से जातक की आयु, मृत्यु, गूढ़ विद्या, रहस्य तथा जीवन में आने वाले गहन परिवर्तनों का आकलन भी किया जाता है। जब जीवनशक्ति के कारक सूर्य इसी अष्टम भाव में बैठे होते हैं। तब जातक की आयु तथा जीवनशैली दोनों पर ही विशेष प्रभाव देखने को मिलता है।।

अष्टम भाव को रहस्य भाव तथा परिवर्तन भाव भी कहा जाता है। और यह दु:स्थान होने के कारण सामान्यतः चुनौतीपूर्ण माना जाता है। रोचक बात यह है, कि सूर्य को अष्टम भाव का दोष विशेष रूप से नहीं लगता। अर्थात अन्य पापी ग्रहों की भाँति सूर्य यहाँ उतना अशुभ नहीं माना जाता। फिर भी अग्नि तत्व राशियों में स्थित होने पर इसका प्रभाव अधिक तीव्र हो जाता है।।

सूर्य की प्रकृति पर विचार करें तो यह जीवनशक्ति तथा आत्मबल का ग्रह है। इसलिए जब यह आयु के भाव में आता है, तो इसकी बल-स्थिति ही जातक की दीर्घायु अथवा मध्यम आयु का संकेत देती है। यही कारण है कि इस अष्टम भाव और सूर्य ग्रह संयोग का सूक्ष्म अध्ययन विशेष महत्वपूर्ण हो जाता है।।

सूर्य की स्थिति यदि बलवान एवं शुभ हो तो दीर्घायु तथा सत्यनिष्ठ व्यक्तित्व प्रदान करती है। परन्तु पीड़ित अथवा अशुभ सूर्य आयु संबंधी चिंता तथा गुप्त भेद खुलने जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न करता है। परन्तु वास्तविक फल का निर्णय तो सदैव संपूर्ण जन्मकुंडली, ग्रहों की दशा और गोचर के आधार पर ही किया जाता है।।

अष्टम भाव में सूर्य का सामान्य स्वभाव।। General Nature of Sun in the Eighth House.

मित्रों, अष्टम भाव में सूर्य जातक को सत्यनिष्ठ, तपस्वी तथा गूढ़ विषयों में रुचि रखने वाला स्वभाव प्रदान करता है। ऐसे जातक सामान्यतः सच्चाई के बल पर आगे बढ़ने में विश्वास रखते हैं। तथा इनका स्वभाव क्रोधी होने के बावजूद ईमानदार होता है। ये अत्यंत विश्वासी स्वभाव के होते हैं। जिस कारण इन्हें कई बार धोखे का सामना भी करना पड़ता है।।

ऐसे जातकों में जीवन-मृत्यु, गूढ़ विद्या तथा तंत्र-मंत्र जैसे विषयों के प्रति भी स्वाभाविक रुचि देखी जाती है। इनके घर की गोपनीय बातें बाहर चली जाने की प्रवृत्ति भी देखी जा सकती है। तथा घरेलू सेवकों अथवा विश्वस्त लोगों से धोखा मिलने की संभावना भी बनी रहती है।।

आर्थिक दृष्टि से भी इनका जीवन उतार-चढ़ाव भरा होता है। क्योंकि इनके परिश्रम का लाभ कई बार अन्य लोग उठा लेते हैं। फिर भी इनका प्रयत्नशील स्वभाव इन्हें बार-बार संघर्ष करते रहने की प्रेरणा देता है। तथा जीवन के प्रति इनका दृष्टिकोण गंभीर तथा तपस्वी प्रवृत्ति का होता है।।

शुभ सूर्य का अष्टम भाव में फल।। Effects of an Auspicious Sun in the Eighth House.

मित्रों, यदि अष्टम भाव का सूर्य बलवान अथवा सुस्थित हो, तो जातक को दीर्घायु, सत्यनिष्ठा तथा राजा के समान प्रभावशाली व्यक्तित्व मिलता है। ऐसे जातकों को जीवन के 22वें वर्ष के आसपास से सरकारी सहयोग अथवा प्रशासनिक क्षेत्र से विशेष लाभ मिलने की संभावना भी बताई गई है।।

शुभ सूर्य से जातक को कोई भी हानि सरलता से नहीं पहुँचा पाता। क्योंकि इनका आत्मबल तथा सत्यनिष्ठा इन्हें सुरक्षा प्रदान करती है। ऐसे जातक शोध-कार्य, ज्योतिष अथवा गूढ़ विद्याओं में भी विशेष सफलता प्राप्त करते हैं। तथा जीवन के गहन प्रश्नों को समझने की असाधारण क्षमता रखते हैं।।

गाय तथा बड़े भाई की सेवा करने से ऐसे जातकों की आयु में और भी वृद्धि होती है। ऐसा ज्योतिषीय मान्यताओं में कहा गया है। जीवन में आने वाले संकटों का सामना भी ये अपने आत्मबल के सहारे सफलतापूर्वक कर लेते हैं।।

अशुभ सूर्य का अष्टम भाव में फल।। Effects of an Inauspicious Sun in the Eighth House.

मित्रों, यदि अष्टम भाव का सूर्य पीड़ित, निर्बल अथवा अग्नि राशियों में अत्यधिक तीव्र प्रभाव में हो, तो जातक को आयु संबंधी चिंता, आर्थिक अस्थिरता अथवा गुप्त भेद खुलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातकों का धन कई बार अन्य लोग ही भोगते हैं। तथा इन्हें धन-हानि भी उठानी पड़ती है।।

अशुभ सूर्य से नेत्र-ज्योति में कमी अथवा गंभीर नेत्र संबंधी समस्याएँ भी कई बार उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसा होता है, विशेषकर जब सूर्य अत्यधिक पीड़ित हो। यदि सप्तमेश भी पीड़ित हो, तो जीवनसाथी से संबंध मधुर नहीं रहते। तथा जीवनसाथी की वाणी में अहंकार की प्रवृत्ति भी देखी जा सकती है।।

ऐसे जातकों को अत्यधिक विश्वासी स्वभाव के कारण सावधान रहना चाहिए। विशेषकर सेवकों अथवा निकटवर्ती लोगों के मामले में थोड़ी विशेष सावधानी की आवश्यकता होती ही है। परन्तु फिर भी मैं तो यही कहूँगा की, किसी भी तरह के अंतिम निष्कर्ष के लिए अष्टमेश तथा संपूर्ण जन्मकुंडली का अध्ययन अनिवार्य होता ही है।।

स्वास्थ्य पर प्रभाव।। Health Effects.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य नेत्र-ज्योति, हृदय तथा अस्थियों का कारक ग्रह बताया गया है। जबकि अष्टम भाव मृत्यु तथा दीर्घकालिक रोगों से संबंधित माना जाता है। अष्टम भाव में सूर्य के अत्यधिक पीड़ित होने पर आँखों की रोशनी में गंभीर समस्या तथा शारीरिक ऊर्जा में भी कई बार कमियाँ देखि गयी है।।

कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार अष्टम भाव के पीड़ित सूर्य से जहरीले जीव-जंतुओं अथवा दुर्घटना का भय भी होता है। हालाँकि इसका निर्णय अन्य ग्रहों की स्थिति के साथ ही किया जाना चाहिए। ऐसी किसी भी आशंका के लिए अनावश्यक भय की बजाय सतर्कता रखें तथा उपाय सूर्य से सम्बंधित उपायों को अपनाना अधिक उचित होता है।।

इसके विपरीत यदि सूर्य बलवान तथा सुस्थित हो, तो जातक को दीर्घायु तथा उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होता है। परन्तु ऐसी स्थिति में भी आवश्यकता पड़ने पर नियमित चिकित्सकीय जाँच अवश्य करवानी चाहिए। और यहाँ तो मैं कहूँगा की सूर्य से सम्बंधित जो भी उपाय बताये जा रहे हैं, उन्हें पूर्ण समर्पण के साथ तथा पूरी निष्ठां से करना चाहिए।।

सूर्य को बलवान बनाने के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies to Strengthen Sun in the Eighth House.

मित्रों, अष्टम भाव के सूर्य को शुभ अथवा बलवान बनाए रखने के लिए सूर्य देवता के मंत्र “ॐ सूर्याय नमः” अथवा “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः” का श्रद्धापूर्वक अधिकाधिक जप करना चाहिए। प्रतिदिन प्रातःकाल ताम्र पात्र से भगवान सूर्य देवता को सूर्यार्घ्य देना चाहिए। ऐसा करने से सूर्य अच्छा हो तो और भी अच्छा फल देता है। और बुरा हो तो भी अशुभ फल नहीं के बराबर देता है।।

और भी उपाय हैं, जैसे रविवार के दिन व्रत रखना अथवा नमक का त्याग करना। गुड़, गेहूँ अथवा तांबे का दान करना भी अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है। गाय की सेवा से सूर्य की प्रीति को सहज ही प्राप्त किया जा सकता है। अपने बड़े भाई का सम्मान करना भी ज्योतिषीय दृष्टिकोण से आयु-वृद्धि के लिए विशेष लाभदायक माना जाता है।।

कुछ वैदिक और विशेष उपाय भी हैं, जिन्हें अपनाकर आप सूर्य देवता से निर्भय हो सकते हैं। जैसे आदित्य हृदय स्तोत्र का नियमित पाठ करना तथा गुप्त एवं गोपनीय विषयों में अनावश्यक विश्वास न रखना भी व्यावहारिक दृष्टि से सहायक सिद्ध होता है। साथ ही मंत्र-सिद्धि की दृष्टि से भी सूर्य साधना को इस भाव में विशेष फलदायी माना गया है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में सूर्य को आयु तथा जीवनशक्ति का प्रमुख कारक ग्रह बताया गया है। फलदीपिका के अनुसार अष्टम भाव में स्थित बलवान सूर्य जातक को दीर्घायु तथा राजोचित गुण प्रदान करता है। जबकि पीड़ित सूर्य आयु संबंधी चिंता तथा आर्थिक अस्थिरता उत्पन्न करता है।।

कुछ अन्य ज्योतिषीय ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि सूर्य को अष्टम भाव का सामान्य दोष नहीं लगता। जिससे यह भाव अन्य पापी ग्रहों की तुलना में सूर्य के लिए अपेक्षाकृत कम अशुभ माना जाता है। फिर भी इसका अंतिम फलादेश तो अष्टमेश की स्थिति तथा संपूर्ण जन्मकुंडली के समन्वित अध्ययन के पश्चात ही निश्चित किया जाना चाहिए।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

Q 1. अष्टम भाव में शुभ सूर्य क्या फल देता है? Effects of Auspicious Sun in 8th House.

उत्तर:- अष्टम भाव का शुभ सूर्य दीर्घायु, सत्यनिष्ठ व्यक्तित्व तथा सरकारी सहयोग जैसे उत्तम फल प्रदान करता है।।

Q 2. अष्टम भाव में अशुभ सूर्य क्या नुकसान देता है? Problems Caused by Inauspicious Sun in 8th House.

उत्तर:- अष्टम भाव का अशुभ सूर्य आयु संबंधी चिंता, आर्थिक अस्थिरता तथा गुप्त भेद खुलने जैसी समस्याएँ उत्पन्न करता है।।

Q 3. अष्टम भाव के सूर्य से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ कौन-सी हैं? Health Issues Linked to Sun in 8th House.

उत्तर:- वैदिक ज्योतिष में सूर्य का संबंध नेत्र-ज्योति तथा हृदय से माना गया है। अत्यधिक पीड़ित सूर्य आँखों की रोशनी तथा शारीरिक ऊर्जा में कमी का संकेत देता है।।

Q 4. अष्टम भाव के सूर्य को बलवान बनाने का सबसे प्रभावी वैदिक उपाय क्या है? Most Effective Remedy for Sun in 8th House.

उत्तर:- सूर्य देवता के मंत्र का जप, प्रतिदिन नियमित सूर्यार्घ्य देना, रविवार को गुड़ एवं तांबे का दान करना तथा गाय माता की सेवा ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।।

Q 5. क्या अष्टम भाव का सूर्य सदैव आयु के लिए अशुभ होता है? Is Sun in 8th House Always Bad for Longevity.

उत्तर:- नहीं, सूर्य को अष्टम भाव का सामान्य दोष नहीं लगता, और यदि यह बलवान तथा सुस्थित हो तो यह दीर्घायु का ही संकेत देता है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, कुंडली के अष्टम भाव में स्थित सूर्य शुभ हो तो जातक को दीर्घायु, सत्यनिष्ठ व्यक्तित्व तथा सरकारी सहयोग प्रदान करता है। वहीं अशुभ होने पर आयु संबंधी चिंता, आर्थिक अस्थिरता तथा गुप्त भेद खुलने जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न करता है। रोचक बात यह है कि सूर्य को अन्य पापी ग्रहों की भाँति अष्टम भाव का सामान्य दोष नहीं लगता। जिससे यह अष्टम भाव तथा सूर्य ग्रह का संयोग अपेक्षाकृत कम अशुभ माना जाता है।।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य देवता के मंत्र का अधिकाधिक जप, नियमित सूर्यार्घ्य, रविवार का व्रत, उपरोक्त बताये गए दान तथा गाय माता की सेवा एवं सगे बड़े भाई की सेवा इसे संतुलित एवं बलवान बनाने में सहायक माना गया है। इसके साथ ही गोपनीय विषयों में सावधानी तथा सत्यनिष्ठा बनाए रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण आचरण माना जाता है। क्योंकि यही आचरण जीवन में आने वाली चुनौतियों को कम करने में सहायक होता है।।

परन्तु मेरा आपको यह सलाह हैं, कि किसी भी निर्णायक निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले किसी अनुभवी, योग्य तथा विद्वान ज्योतिषी से अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण विधिपूर्वक अवश्य करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।

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