HomeSurya Grahaकुंडली के सप्तम भाव में बैठे सूर्य का शुभाशुभ फल एवं उपाय।।

कुंडली के सप्तम भाव में बैठे सूर्य का शुभाशुभ फल एवं उपाय।।

कुंडली के सप्तम भाव में बैठे सूर्य का शुभाशुभ फल एवं उपाय।। Surya in the Seventh House Shubhashubh Fal.

सप्तम भाव और सूर्य का संबंध।। Introduction.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मा, तेज, आत्मविश्वास, नेतृत्व तथा राजसी गुणों का कारक ग्रह माना गया है। सप्तम भाव विवाह, जीवनसाथी तथा व्यावसायिक साझेदारी का प्रतिनिधित्व करता है। जब तेजस्वी तथा राजसी सूर्य इसी सप्तम भाव में बैठता है। तब जातक के वैवाहिक जीवन पर विशेष, कभी-कभी जटिल प्रभाव भी देखने को मिलता है।।

सप्तम भाव को कलत्र भाव तथा साझेदारी भाव भी कहा जाता है। और परंपरागत ज्योतिष में यह स्पष्ट किया गया है कि सप्तम भाव सूर्य के लिए विशेष रूप से अनुकूल स्थान नहीं माना जाता। इसका एक कारण यह भी बताया गया है कि सप्तम भाव कालपुरुष की कुंडली में सूर्यास्त की दिशा से जुड़ा होता है। जिससे सूर्य की तीव्रता कुछ हद तक क्षीण हो जाती है।।

इसका अर्थ यह कदापि नहीं कि सप्तम भाव का सूर्य अत्यंत अशुभ ही होगा। बल्कि यह अनेक स्थितियों में जातक को आकर्षक व्यक्तित्व, प्रतिष्ठित जीवनसाथी तथा प्रभावशाली लोगों से मेल-जोल भी प्रदान करता है। परन्तु सूर्य के स्वाभाविक अहंकार तथा तेजस्विता के कारण संबंधों में कभी-कभी टकराव की संभावना भी बनी रहती है।।

सूर्य की स्थिति यदि बलवान एवं शुभ हो तो प्रतिष्ठित तथा सहयोगी जीवनसाथी प्रदान करती है। परन्तु पीड़ित अथवा अशुभ सूर्य दांपत्य जीवन में अहंकार तथा दूरी भी उत्पन्न करता है। वास्तविक फल का निर्णय तो सदैव संपूर्ण जन्मकुंडली, दशा और गोचर के आधार पर ही किया जाता है।।

सप्तम भाव में सूर्य का सामान्य स्वभाव।। General Nature of Sun in the Seventh House.

मित्रों, सप्तम भाव में सूर्य जातक को आत्मविश्वासी तथा नेतृत्वप्रधान स्वभाव के साथ संबंधों में प्रवेश करने की प्रवृत्ति प्रदान करता है। ऐसे जातक अपने जीवनसाथी में सम्मान, प्रतिष्ठा तथा सामाजिक स्थिति को विशेष रूप से महत्व देते हैं। क्योंकि सूर्य स्वयं सम्मान तथा प्रतिष्ठा का कारक ग्रह है। इनका व्यक्तित्व स्वाभाविक रूप से आकर्षक तथा प्रभावशाली होता है।।

ऐसे जातकों का सौंदर्य के प्रति रुझान भी विशेष रूप से देखा जाता है। तथा ये प्रभावशाली एवं उच्च सामाजिक स्तर के लोगों के साथ मेल-जोल रखना पसंद करते हैं। विवाह के प्रति इनका दृष्टिकोण गंभीर होता है। परन्तु संबंधों में नेतृत्व की भावना के कारण इन्हें कभी-कभी समझौता करना कठिन प्रतीत होता है।।

इनकी वाणी में गंभीरता तथा दृढ़ता भी देखी जाती है। जिससे संबंधों में स्पष्टवादिता तो रहती ही है। परन्तु कभी-कभी यही गुण अत्यधिक कठोर भी प्रतीत होता है। जीवनसाथी अथवा साझेदार के साथ बराबरी का संबंध बनाए रखना इनके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है।।

शुभ सूर्य का सप्तम भाव में फल।। Effects of an Auspicious Sun in the Seventh House.

मित्रों, यदि सप्तम भाव का सूर्य उच्च राशि, स्वमित्र राशि अथवा शुभ ग्रहों की दृष्टि से युक्त होकर बलवान हो, तो जातक को सम्मानित तथा प्रतिष्ठित परिवार से जीवनसाथी प्राप्त होता है। ऐसे जातकों का वैवाहिक जीवन जीवनसाथी के आर्थिक सहयोग तथा सामाजिक प्रतिष्ठा से समृद्ध होता है।।

शुभ सूर्य से जातक को व्यावसायिक साझेदारी में भी विशेष सफलता प्राप्त होती है। विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ नेतृत्व तथा अधिकार की आवश्यकता होती है। ऐसे जातक अपने जीवनसाथी के माध्यम से भी सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि अनुभव करते हैं। तथा दोनों के बीच पारस्परिक सम्मान बना रहता है।।

जीवनसाथी सामान्यतः आत्मविश्वासी, आकर्षक तथा नेतृत्व क्षमता से संपन्न होता है। जो घर तथा समाज दोनों में सम्मान अर्जित करता है। सामाजिक जीवन में भी ऐसे जातक अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण विशेष पहचान प्राप्त करते हैं।।

अशुभ सूर्य का सप्तम भाव में फल।। Effects of an Inauspicious Sun in the Seventh House.

मित्रों, यदि सप्तम भाव का सूर्य नीच राशि (तुला) में, पापग्रहों से पीड़ित अथवा अस्त अवस्था में हो, तो जातक को वैवाहिक जीवन में अहंकार, दूरी अथवा जीवनसाथी से अपमानित होने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातकों में अत्यधिक स्वाभिमान की प्रवृत्ति भी देखी जाती है। जिससे संबंधों में टकराव भी कभी-कभी उत्पन्न होता है।।

अशुभ सूर्य से विवाह में विलंब अथवा दांपत्य जीवन में मानसिक चिंता की संभावना भी बढ़ जाती है। यदि सूर्य के साथ चंद्रमा की युति हो, तो जीवनसाथी से अनादर मिलने जैसी स्थितियां भी देखी जाती है। क्योंकि सूर्य का तीक्ष्ण स्वभाव तथा चंद्रमा का भावुक स्वभाव संबंधों में अहम का टकराव भी उत्पन्न करता है।।

ऐसे जातकों को संबंधों में अत्यधिक अधिकार-भावना अथवा अहंकार से बचना चाहिए। क्योंकि इससे जीवनसाथी के साथ दूरी बढ़ जाएगी। परन्तु अंतिम निष्कर्ष के लिए सप्तमेश तथा संपूर्ण जन्मकुंडली का अध्ययन अनिवार्य है। किसी अनुभवी, योग्य तथा विद्वान ज्योतिषी से अपनी जन्मकुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए।।

स्वास्थ्य पर प्रभाव।। Health Effects.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य का संबंध हृदय, अस्थियों तथा नेत्रों से बताया गया है। जबकि सप्तम भाव का संबंध वृक्क तथा जननांगों से बताया गया है। सप्तम भाव में सूर्य के अशुभ होने पर हृदय संबंधी असंतुलन, नेत्र दुर्बलता अथवा पित्त प्रकृति के विकार जैसे विकार भी उत्पन्न हो जाते हैं।।

यदि सूर्य शनि से पीड़ित हो, तो निम्न रक्तचाप जैसी समस्या भी उत्पन्न हो जाती है। जबकि गुरु से पीड़ित होने पर उच्च रक्तचाप की संभावना बढ़ जाती है। मुहांसे, तीव्र ज्वर अथवा पित्त संबंधी शिकायतें भी इसी पीड़ित स्थिति से जुड़ी मानी जाती हैं।।

इसके विपरीत यदि सूर्य शुभ हो, तो जातक में उत्तम जीवनशक्ति तथा रोग-प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है। ऐसी स्थिति में भी आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लेना चाहिए। साथ ही ज्योतिष से सम्बंधित उपाय भी करने से बहुत लाभ होता है।।

सूर्य को संतुलित करने के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies to Balance Sun in the Seventh House.

मित्रों, सप्तम भाव के सूर्य को शुभ अथवा संतुलित बनाए रखने के लिए सूर्य देवता के मंत्र “ॐ सूर्याय नमः” अथवा “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः” का श्रद्धापूर्वक जप करना चाहिए। प्रतिदिन प्रातःकाल ताम्र पात्र से सूर्य को अर्घ्य देना इस दिशा में विशेष लाभदायक सिद्ध होता है।।

रविवार के दिन व्रत रखना तथा गुड़, गेहूँ अथवा तांबे का दान करना भी शुभ फलदायी माना जाता है। जीवनसाथी के प्रति अहंकार की बजाय सम्मान तथा समानता का भाव रखने का प्रयास भी करना चाहिए। क्योंकि यही आचरण सूर्य के शुभ प्रभाव को बढ़ाने वाला माना जाता है।।

आदित्य हृदय स्तोत्र का नियमित पाठ करना तथा पिता एवं वरिष्ठजनों का सम्मान करना भी सूर्य की शुभता बनाए रखने के लिए ज्योतिषीय दृष्टिकोण से लाभकारी माना जाता है। साथ ही व्यावसायिक साझेदारी में भी बराबरी का व्यवहार बनाए रखना व्यावहारिक दृष्टि से सहायक सिद्ध होता है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में सूर्य को आत्मा, तेज तथा नेतृत्व का प्रमुख कारक ग्रह बताया गया है। फलदीपिका के अनुसार सप्तम भाव को सूर्य के लिए सामान्यतः अनुकूल स्थान नहीं माना गया है। क्योंकि यह भाव कालपुरुष की कुंडली में सूर्यास्त की दिशा से संबंधित है। जिससे सूर्य की तेजस्विता कुछ सीमित हो जाती है।।

फिर भी शुभ ग्रहों की दृष्टि तथा उच्च राशि की स्थिति में यह भाव जातक को प्रतिष्ठित जीवनसाथी तथा आर्थिक सहयोग प्रदान करता है। बृहज्जातक में भी स्पष्ट किया गया है कि इसका अंतिम फलादेश सप्तमेश की स्थिति तथा संपूर्ण जन्मकुंडली के समन्वित अध्ययन के पश्चात ही निश्चित किया जाना चाहिए।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

Q 1. सप्तम भाव में शुभ सूर्य क्या फल देता है? Effects of Auspicious Sun in 7th House.

उत्तर:- सप्तम भाव का शुभ सूर्य प्रतिष्ठित तथा सहयोगी जीवनसाथी, सामाजिक प्रतिष्ठा तथा साझेदारी में सफलता जैसे उत्तम फल प्रदान करता है।।

Q 2. सप्तम भाव में अशुभ सूर्य क्या नुकसान देता है? Problems Caused by Inauspicious Sun in 7th House.

उत्तर:- सप्तम भाव का अशुभ सूर्य दांपत्य जीवन में अहंकार, दूरी तथा विवाह में विलंब जैसी बाधाएँ उत्पन्न करता है।।

Q 3. सप्तम भाव के सूर्य से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ कौन-सी हैं? Health Issues Linked to Sun in 7th House.

उत्तर:- वैदिक ज्योतिष में सूर्य का संबंध हृदय तथा नेत्र से माना गया है। पीड़ित सूर्य इन क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं का संकेत देता है।।

Q 4. सप्तम भाव के सूर्य को संतुलित करने का सबसे प्रभावी वैदिक उपाय क्या है? Most Effective Remedy for Sun in 7th House.

उत्तर:- सूर्य देवता के मंत्र का जप, नियमित सूर्यार्घ्य देना तथा रविवार को गुड़ एवं तांबे का दान करना, ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।।

Q 5. क्या सप्तम भाव में सूर्य नीच राशि का होने पर सदैव अशुभ रहता है? Is Debilitated Sun in 7th House Always Inauspicious.

उत्तर:- नहीं, यदि नीचभंग राजयोग बनता हो अथवा शुभ ग्रहों की दृष्टि प्राप्त हो, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, कुंडली के सप्तम भाव में बैठे सूर्य देवता शुभ हो तो जातक को प्रतिष्ठित तथा सहयोगी जीवनसाथी, सामाजिक प्रतिष्ठा तथा साझेदारी में सफलता प्रदान करते हैं। वहीं अशुभ होने पर दांपत्य जीवन में अहंकार, दूरी तथा विवाह में विलंब जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न करते हैं। परंपरागत रूप से सप्तम भाव को सूर्य के लिए सर्वाधिक अनुकूल स्थान नहीं माना गया है। फिर भी शुभ ग्रहों के प्रभाव में यह अनेक बार लाभकारी परिणाम भी देता है।।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य देवता के मंत्र का जप, सूर्यार्घ्य, रविवार का व्रत तथा सूर्य से सम्बंधित दान इसे संतुलित एवं बलवान बनाने में सहायक माना गया है। इसके साथ ही जीवनसाथी के प्रति सम्मान तथा समानता का भाव बनाए रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण आचरण माना जाता है। क्योंकि सूर्य के स्वाभाविक अहंकार को संयमित करना ही संबंधों की सफलता की कुंजी है।।

परन्तु किसी भी निर्णायक निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले किसी अनुभवी, योग्य तथा विद्वान ज्योतिषी से संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण अवश्य करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।

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