रसोईघर का वास्तु।। Rasoighar Ka Vastu.
रसोईघर तथा वास्तु शास्त्र का संबंध।। Introduction.
मित्रों, वास्तु शास्त्र में रसोईघर को घर के सबसे महत्वपूर्ण भागों में से एक माना गया है। क्योंकि यहीं से परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य, पोषण तथा समृद्धि का सीधा संबंध जुड़ा होता है। रसोईघर का स्वामी ग्रह अग्नि तत्व को माना गया है। तथा अग्नि का संबंध सूर्य तथा मंगल दोनों ग्रहों से होता है। जिस कारण इस स्थान की दिशा तथा संरचना का निर्धारण अत्यंत सूक्ष्मता से किया जाना चाहिए।।
अग्नि तत्व की प्रकृति ऊर्जावान, तीव्र तथा परिवर्तनकारी मानी गई है। इसलिए यदि इसे सही दिशा में स्थापित न किया जाए, तो यह घर के भीतर असंतुलन उत्पन्न कर देती है। इसके विपरीत यदि रसोईघर वास्तु के अनुरूप सही दिशा तथा सही संरचना में बना हो, तो यह परिवार के लिए स्वास्थ्य, समृद्धि तथा सुख-शांति का स्रोत बन जाता है। क्योंकि भोजन ही वह माध्यम है, जिसके द्वारा पंचतत्वों की ऊर्जा परिवार के प्रत्येक सदस्य के शरीर में प्रवेश करती है।
यही कारण है कि प्राचीन वास्तु के ग्रंथों में रसोईघर के निर्माण को अत्यंत गंभीरता से लिया गया है। तथा इसकी दिशा, स्टोव की स्थिति, जल-स्रोत का स्थान तथा रसोईघर में खड़े होकर भोजन बनाने की दिशा तक का सूक्ष्म वर्णन किया गया है। इन नियमों का पालन करने से न केवल भोजन बनाने वाले व्यक्ति की मानसिक शांति बनी रहती है। बल्कि संपूर्ण परिवार के स्वास्थ्य पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।।
रसोईघर की सही दिशा।। Correct Direction for the Kitchen.
मित्रों, वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोईघर के लिए सर्वाधिक शुभ दिशा आग्नेय कोण अर्थात दक्षिण-पूर्व दिशा मानी गई है। क्योंकि यह दिशा स्वयं अग्नि देव की दिशा है। तथा यहाँ रसोईघर बनाने से अग्नि तत्व अपने स्वाभाविक स्थान में रहकर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। इस दिशा में रसोईघर होने पर भोजन बनाने वाले व्यक्ति का स्वास्थ्य भी उत्तम बना रहता है। तथा परिवार में सुख-समृद्धि सतत बनी रहती है।।
यदि किसी कारणवश आग्नेय कोण में रसोईघर बनाना संभव न हो, तो वायव्य कोण अर्थात उत्तर-पश्चिम दिशा को भी द्वितीय विकल्प के रूप में स्वीकार्य माना गया है। यद्यपि यह दिशा आग्नेय कोण जितनी शुभ नहीं मानी जाती। रसोईघर को ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा में बनाने से पूर्णतः बचना चाहिए। क्योंकि यह दिशा जल-तत्व की दिशा मानी जाती है। और अग्नि तथा जल तत्वों के इस प्रकार टकराने से घर में स्वास्थ्य संबंधी तथा आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।।
इसी प्रकार रसोईघर को घर के ठीक मध्य भाग अर्थात ब्रह्मस्थान में भी कभी नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि यह स्थान अत्यंत पवित्र तथा संतुलन का केंद्र माना जाता है। और यहाँ अग्नि तत्व की उपस्थिति संपूर्ण भवन के ऊर्जा-संतुलन को बिगाड़ सकती है। जिससे काफी नकारात्मकता घर के सदस्यों में बढ़ जाती है। जिसका परिणाम आगे चलकर अच्छा नहीं निकलता।।
स्टोव अर्थात चूल्हे की सही स्थिति एवं दिशा।। Correct Placement and Direction of the Stove.
मित्रों, रसोईघर में स्टोव अर्थात गैस-चूल्हे को इस प्रकार रखा जाना चाहिए कि भोजन बनाते समय गृहिणी अथवा भोजन बनाने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर हो, क्योंकि पूर्व दिशा सूर्य देव की दिशा मानी जाती है। तथा इस दिशा की ओर मुख करके भोजन बनाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। यह स्थिति भोजन बनाने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य तथा मानसिक स्थिरता दोनों के लिए ही लाभकारी मानी गई है।।
स्टोव को कभी भी रसोईघर के ठीक मध्य में नहीं रखना चाहिए। बल्कि इसे दीवार के सहारे, विशेषकर आग्नेय कोण की दीवार के निकट स्थापित करना उचित माना जाता है। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि स्टोव तथा सिंक अर्थात जल-स्रोत के मध्य पर्याप्त दूरी हो, क्योंकि अग्नि तथा जल तत्व एक-दूसरे के अत्यंत निकट होने पर परस्पर विरोधी ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। जो घरेलू कलह तथा तनाव का कारण बन सकती है।।
रसोईघर में जल-स्रोत तथा भंडारण की स्थिति।। Placement of Water Source and Storage in the Kitchen.
मित्रों, रसोईघर में जल-स्रोत, अर्थात सिंक अथवा नल, को ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा में अथवा उत्तर दिशा में स्थापित करना सर्वाधिक शुभ माना जाता है। क्योंकि यह दिशा स्वयं जल-तत्व की दिशा है। इससे जल तथा अग्नि दोनों तत्व अपनी-अपनी उचित दिशाओं में रहते हुए सामंजस्यपूर्ण ढंग से कार्य करते हैं। तथा घर में सकारात्मक संतुलन बना रहता है।।
अनाज, मसाले तथा अन्य खाद्य-सामग्री के भंडारण के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा अर्थात नैऋत्य कोण को सर्वाधिक उपयुक्त माना गया है। क्योंकि यह दिशा स्थायित्व तथा संचय की दिशा है। इस दिशा में भंडारण करने से घर में अन्न-धन की कभी कमी नहीं रहती। ऐसी पारंपरिक मान्यता है। रेफ्रिजरेटर को भी सामान्यतः दक्षिण अथवा पश्चिम दिशा की दीवार के निकट रखना उचित माना जाता है।।
रसोईघर से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण वास्तु नियम।। Other Important Vastu Rules Related to the Kitchen.
मित्रों, रसोईघर कभी भी शौचालय अथवा बेडरूम के ठीक ऊपर अथवा नीचे नहीं होना चाहिए। क्योंकि यह स्थिति स्वच्छता तथा ऊर्जा दोनों ही दृष्टि से अशुभ मानी जाती है। इसके साथ ही रसोईघर का द्वार भी मुख्य द्वार के ठीक सामने नहीं होना चाहिए। क्योंकि इससे भोजन की पवित्रता तथा घर की सकारात्मक ऊर्जा दोनों प्रभावित हो सकती हैं।।
रसोईघर में पर्याप्त प्रकाश तथा वायु-संचार की भी विशेष व्यवस्था होनी चाहिए। अतः खिड़कियाँ यथासंभव पूर्व अथवा उत्तर दिशा में रखना उचित रहता है। रसोईघर की दीवारों के लिए पीले, नारंगी अथवा लाल रंग के हल्के शेड्स को शुभ माना गया है। क्योंकि ये रंग अग्नि तत्व से मेल खाते हैं। जबकि गहरे काले अथवा नीले रंगों से बचना चाहिए।।
और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि रसोईघर को सदैव स्वच्छ, व्यवस्थित तथा सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रखें। क्योंकि यहाँ बनने वाला भोजन ही परिवार के संपूर्ण स्वास्थ्य तथा मनोबल का आधार बनता है। इसलिए इस स्थान की पवित्रता तथा वास्तु-संतुलन दोनों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। ताकि परिवार का स्वास्थ्य सतत अच्छा और बढियाँ बना रहे।।
रसोईघर वास्तु दोष के निवारण के उपाय।। Remedies for Kitchen Vastu Dosha.
मित्रों, यदि किसी कारणवश रसोईघर गलत दिशा में बना हो, तो उसे पूर्णतः तोड़कर पुनर्निर्माण करने की बजाय कुछ सरल उपायों से भी इसके दोष को काफी हद तक संतुलित किया जा सकता है। जैसे रसोईघर में नियमित रूप से कपूर जलाना। तुलसी का पौधा रखना तथा स्वच्छता बनाए रखना दोष-निवारण में विशेष रूप से सहायक हो जाता है।।
यदि स्टोव सही दिशा में न हो, तो कम से कम भोजन बनाते समय अपना मुख पूर्व दिशा की ओर रखने का प्रयास अवश्य करना चाहिए। भले ही स्टोव को स्थानांतरित करना तत्काल संभव न हो। रसोईघर में नियमित रूप से हवन अथवा धूप-दीप करने से भी अग्नि तत्व संतुलित होता है। तथा नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव भी कम होते चला जाता है।
शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.
मित्रों, मयमतम् तथा विश्वकर्मा वास्तुशास्त्र जैसे प्राचीन ग्रंथों में रसोईघर के निर्माण के लिए आग्नेय कोण को ही सर्वोत्तम दिशा बताया गया है। तथा यह भी स्पष्ट किया गया है कि अग्नि तथा जल तत्वों को परस्पर अत्यधिक निकट नहीं रखना चाहिए। इन ग्रंथों में भोजन-निर्माण को केवल एक भौतिक क्रिया नहीं, बल्कि एक पवित्र यज्ञ-कर्म के समान माना गया है।।
बृहत्संहिता में भी गृह-निर्माण के प्रसंग में अग्नि-स्थान अर्थात रसोईघर के महत्व का उल्लेख करते हुए यह बताया गया है कि इसकी सही दिशा तथा संरचना संपूर्ण परिवार के स्वास्थ्य तथा समृद्धि को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है।।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)
प्रश्न 1. रसोईघर के लिए सबसे शुभ दिशा कौन-सी मानी जाती है।। Which direction is considered most auspicious for the kitchen.
उत्तर:- आग्नेय कोण अर्थात दक्षिण-पूर्व दिशा रसोईघर के लिए सर्वाधिक शुभ मानी जाती है। क्योंकि यह दिशा स्वयं अग्नि देव की दिशा है।।
प्रश्न 2. भोजन बनाते समय मुख किस दिशा की ओर होना चाहिए।। Which direction should one face while cooking.
उत्तर:- भोजन बनाते समय गृहिणी अथवा भोजन बनाने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर होना सर्वाधिक शुभ माना जाता है।।
प्रश्न 3. रसोईघर में जल-स्रोत किस दिशा में रखना चाहिए।। Where should the water source be placed in the kitchen.
उत्तर:- सिंक अथवा नल को ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा में अथवा उत्तर दिशा में रखना शुभ माना जाता है।।
प्रश्न 4. क्या रसोईघर ब्रह्मस्थान में बनाया जा सकता है।। Can the kitchen be built in the Brahmasthan.
उत्तर:- नहीं, रसोईघर को घर के मध्य भाग अर्थात ब्रह्मस्थान में कभी नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि इससे संपूर्ण भवन का ऊर्जा-संतुलन प्रभावित होता है।।
प्रश्न 5. यदि रसोईघर गलत दिशा में बना हो तो क्या उपाय करना चाहिए।। What remedies should be done if the kitchen is in the wrong direction.
उत्तर:- नियमित रूप से कपूर जलाना, तुलसी का पौधा रखना, स्वच्छता बनाए रखना तथा भोजन बनाते समय मुख पूर्व दिशा में रखना इस दोष को कम करने में सहायक माना जाता है।।
लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.
मित्रों, रसोईघर का वास्तु घर के स्वास्थ्य, समृद्धि तथा पारिवारिक सुख से गहरा संबंध रखता है, क्योंकि यहीं से बनने वाला भोजन संपूर्ण परिवार के शरीर तथा मन दोनों को पोषण प्रदान करता है। आग्नेय कोण में रसोईघर, पूर्वाभिमुख होकर भोजन बनाना, तथा जल एवं अग्नि तत्वों के मध्य उचित दूरी बनाए रखना, ये सभी नियम मिलकर घर में एक संतुलित तथा सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण करते हैं।
वैदिक वास्तु परंपरा के अनुसार रसोईघर को केवल भोजन बनाने का स्थान नहीं, बल्कि एक पवित्र स्थान मानकर उसकी स्वच्छता तथा वास्तु-संतुलन का सदैव ध्यान रखना चाहिए। इसके साथ ही यदि कोई वास्तु दोष उपस्थित हो, तो सरल उपायों के माध्यम से भी उसे काफी हद तक संतुलित किया जा सकता है।
अतः किसी भी नवीन भवन-निर्माण अथवा रसोईघर के पुनर्निर्माण से पूर्व किसी योग्य तथा शास्त्र-सम्मत वास्तुविद् अथवा ज्योतिषी से अवश्य परामर्श करना चाहिए, ताकि सही तथा व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।
#रसोईघर_का_वास्तु #किचन_वास्तु_टिप्स #रसोईघर_की_सही_दिशा #स्टोव_वास्तु_दिशा #रसोईघर_वास्तु_दोष_उपाय #Kitchen_Vastu_Shastra #Correct_Kitchen_Direction_Vastu #Stove_Direction_Vastu_Tips #Kitchen_Vastu_Dosha_Remedies #Vastu_Tips_For_Kitchen
ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Click Here & Watch My YouTube Channel.
इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.
वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।
