दिशा के अनुसार सही रंग का चयन कैसे करें।। Best Vastu Colors for Every Direction.
लेख का परिचय।। Introduction.
मित्रों, कभी सोचा है कि एक ही डिज़ाइन के दो घरों में से एक में घुसते ही सुकून मिलता है, और दूसरे में अजीब सी बेचैनी। फर्नीचर एक जैसा, लेआउट एक जैसा, फर्क सिर्फ दीवारों के रंग का। वास्तु शास्त्र कहता है, रंग कोई ऐसे ही चुन लेने वाली चीज़ नहीं है। हर दिशा किसी न किसी पंचतत्व से बंधी हुई होती है। और हर तत्व का अपना एक स्वभाव, अपनी एक फ्रीक्वेंसी होती है। जब दीवार का रंग उस दिशा के तत्व से मेल खाता है, तो ऊर्जा सहजता से बहती है। जब टकराता है, तो घर में एक अनकहा तनाव बना रहता है। चलिए आज इसी विज्ञान को दिशा-दर-दिशा समझते हैं।।
रंग चुनने का बुनियादी सिद्धांत।। The Basic Principle Of Choosing Color.
मित्रों, वास्तु शास्त्र में हर दिशा पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश, इन पांच तत्वों में से किसी एक से मुख्य रूप से जुड़ी होती है। इसी के साथ हर दिशा का एक अधिष्ठाता ग्रह अथवा देवता भी माना गया है। रंग चुनते समय बस एक ही सिद्धांत याद रखना है। जो तत्व उस दिशा में प्रधान है, दीवार का रंग उसी तत्व को बढ़ावा देने वाला हो, ना कि उससे टकराने वाला। यानी अग्नि तत्व की दिशा में जल तत्व का रंग डालना। या जल तत्व की दिशा में अग्नि का रंग डालना। यही असंतुलन की जड़ है।।
पूर्व दिशा, सूर्य और नई ऊर्जा का रंग।। East Direction, The Color Of The Sun And Fresh Energy.
मित्रों, पूर्व दिशा सूर्यदेव की दिशा मानी जाती है। यहाँ से रोज़ सुबह ताज़ी ऊर्जा घर में प्रवेश करती है। इसलिए यहाँ हल्का सफेद, क्रीम अथवा हल्का पीला रंग सर्वाधिक उपयुक्त रहता है। यह रंग सूर्य की ताज़गी तथा नई शुरुआत की भावना को दीवारों पर भी जीवंत बनाए रखते हैं। गहरे तथा भारी रंगों से यहाँ बचना चाहिए। क्योंकि वे इस दिशा की स्वाभाविक चमक को दबा देते हैं।।
उत्तर दिशा, कुबेर और जल तत्व का रंग।। North Direction, The Color Of Kubera And Water Element.
मित्रों, उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर की दिशा मानी जाती है। और इसे जल तत्व से भी जोड़ा जाता है। यहाँ हल्का हरा अथवा हल्का नीला रंग सबसे शुभ माना जाता है। यह रंग समृद्धि तथा शीतलता दोनों का प्रतीक हैं। इस दिशा में गहरा लाल अथवा नारंगी रंग लगाने से बचना चाहिए। क्योंकि यह अग्नि तत्व का रंग है और कुबेर की शीतल ऊर्जा से मेल नहीं खाता।।
ईशान कोण, सबसे पवित्र तथा हल्के रंग की दिशा।। Ishan Kon, The Direction Of The Purest And Lightest Colors.
मित्रों, ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व को देवताओं की दिशा माना गया है। और इसे जल तथा आकाश दोनों तत्वों से जोड़ा जाता है। यहाँ सफेद, हल्का आसमानी नीला अथवा हल्का पीला रंग सर्वाधिक शुभ रहता है। यह दिशा इतनी पवित्र मानी जाती है कि यहाँ गहरे, भारी अथवा गहरे काले रंग का प्रयोग पूर्ण रूप से वर्जित बताया गया है। हल्कापन ही इस कोण की आत्मा बतायी गयी है।।
दक्षिण दिशा, अग्नि तथा साहस का रंग।। South Direction, The Color Of Fire And Courage.
मित्रों, दक्षिण दिशा को यम की दिशा तथा अग्नि तत्व की दिशा माना जाता है। यहाँ लाल, गहरा नारंगी अथवा मरून रंग उपयुक्त रहता है। विशेषकर मास्टर बेडरूम जैसे स्थानों में यह रंग स्थिरता तथा सुरक्षा की भावना देता है। परंतु यहाँ नीला रंग बिलकुल भी अनुशंसित नहीं किया जाता। क्योंकि जल तत्व का रंग अग्नि तत्व की दिशा से सीधा टकराव पैदा करता है।।
आग्नेय कोण, संतुलित अग्नि रंग की दिशा।। Agneya Kon, The Direction Of Balanced Fire Tones.
मित्रों, आग्नेय कोण अर्थात दक्षिण-पूर्व अग्नि तत्व की ही दिशा है। इसलिए यहाँ रसोईघर बनाने की परंपरा भी प्रचलित है। रंग की दृष्टि से यहाँ हल्का नारंगी, हल्का गुलाबी अथवा हल्का लाल रंग उपयुक्त रहता है। गहरे तथा उग्र लाल रंग की अपेक्षा हल्के शेड्स इसलिए बेहतर माने जाते हैं। क्योंकि रसोई जैसी जगह में अग्नि पहले से ही सक्रिय रहती है। अतः रंग को उसे शांत करने वाला होना चाहिए न कि और भड़काने वाला।।
पश्चिम दिशा, जल तत्व का संतुलित रंग।। West Direction, The Balanced Color Of Water Element.
मित्रों, पश्चिम दिशा जल तत्व की दिशा मानी जाती है। और इसे सामान्य फल देने वाली दिशा कहा गया है। यहाँ सफेद अथवा हल्का ग्रे (Color) सर्वाधिक उपयुक्त रहता है। यह रंग शांति तथा संतुलन का भी प्रतीक हैं। और जल तत्व की स्वाभाविक स्थिरता को दीवारों पर भी बनाए रखते हैं।।
वायव्य कोण, वायु तत्व की हल्की छटा।। Vayavya Kon, The Light Shade Of Air Element.
मित्रों, वायव्य कोण अर्थात उत्तर-पश्चिम वायु तत्व की दिशा है। यहाँ सफेद, हल्का ग्रे अथवा हल्का पीला रंग उपयुक्त रहता है। वायु तत्व स्वभाव से गतिशील तथा हल्का होता है। इसलिए यहाँ का रंग भी हल्का ही रखा जाना चाहिए। भारीपन इस दिशा के स्वभाव के विपरीत माना जाता है।।
नैऋत्य कोण, पृथ्वी तत्व का भारी तथा स्थिर रंग।। Nairitya Kon, The Heavy And Stable Color Of Earth Element.
मित्रों, नैऋत्य कोण अर्थात दक्षिण-पश्चिम को वास्तु शास्त्र में सबसे भारी दिशा माना गया है। और यह पृथ्वी तत्व से जुड़ी है। यहाँ पीला, मटमैला, क्रीम अथवा हल्का भूरा रंग सर्वाधिक उपयुक्त रहता है। यह रंग इस दिशा को स्थिरता तथा भारीपन देने में सहायक होते हैं। जो नैऋत्य कोण की मूल आवश्यकता ही है। यहाँ चटक अथवा भड़कीले रंगों से बचना चाहिए।।
रंग चुनते समय एक और ज़रूरी बात।। One More Important Thing While Choosing Colors.
मित्रों, यह भी ध्यान रखिए कि पूरे घर में एक ही रंग हर दिशा में जबरदस्ती थोपना उचित नहीं। हर कमरे का इस्तेमाल भी उतना ही मायने रखता है जितनी उसकी दिशा। पूजा कक्ष तथा शयन कक्ष में सामान्यतः हल्के तथा शांत रंग बेहतर रहते हैं। जबकि लिविंग रूम अथवा बैठक में उस दिशा के अनुरूप थोड़ा जीवंत रंग भी अपनाया जा सकता है। यानी दिशा एक दिशा-निर्देश है, संपूर्ण नियम-पुस्तिका नहीं।।
निष्कर्ष, रंग है दीवारों की भाषा।। Conclusion, Color Is The Language Of Walls.
मित्रों, तो अब समझ आ ही गया होगा, रंग सिर्फ सुंदरता का विषय नहीं, यह हर दिशा की तत्व-भाषा को समझने और उसी भाषा में जवाब देने की कला है। पूर्व में हल्का पीला, उत्तर में हल्का हरा या नीला, ईशान में सफेद, दक्षिण में लाल या मरून, आग्नेय में हल्का गुलाबी, पश्चिम में सफेद अथवा ग्रे, वायव्य में हल्का पीला अथवा ग्रे और नैऋत्य में पीला या भूरा, यही आठ सूत्र याद रख लीजिए। सही रंग, सही दिशा में, यही वास्तु का सबसे सरल परंतु सबसे असरदार उपाय है।।
मुख्य_द्वार_की_दिशा मुख्य_द्वार_वास्तु उत्तर_मुखी_द्वार पूर्व_मुखी_द्वार ईशान_कोण_वास्तु वास्तु_दोष_निवारण Main_Door_Direction Vastu_For_Main_Door North_Facing_Door East_Facing_Door Vastu_Shastra_Tips
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