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कुंडली के सप्तम भाव में स्थित चंद्रमा का फल एवं उपाय।।

कुंडली के सप्तम भाव में स्थित चंद्रमा का फल एवं उपाय।। Chandra in Seventh House Effects and Remedies
कुंडली के सप्तम भाव में स्थित चंद्रमा का फल एवं उपाय।। Chandra in Seventh House Effects and Remedies

कुंडली के सप्तम भाव में स्थित चंद्रमा का फल एवं उपाय।। Chandra in Seventh House Effects and Remedies.

सप्तम भाव और चंद्रमा का संबंध।। Introduction.

मित्रों, सप्तम भाव को कलत्र भाव, विवाह भाव तथा साझेदारी भाव भी कहा जाता है। और यह केंद्र भाव होने के कारण जन्मकुंडली के चार अत्यंत बलशाली स्तंभों में से एक माना गया है। इसी से जातक के विवाह, जीवनसाथी, दांपत्य जीवन, व्यापारिक साझेदारी तथा सार्वजनिक संबंधों का आँकलन किया जाता है। यह भाव जातक के जीवन का वह दर्पण है, जिसमें उसकी अपनी छवि किसी दूसरे व्यक्ति के माध्यम से प्रतिबिंबित होकर लौटती है।।

अब चंद्रमा की प्रकृति पर विचार करें तो यह मन, भावनाओं, संवेदनशीलता, कल्पनाशीलता तथा मातृत्व-भाव का सबसे कोमल एवं परिवर्तनशील ग्रह माना गया है। चंद्रमा जिस भी भाव में स्थित होता है, वहाँ अपनी चंचलता, भावुकता तथा ममत्व का विशेष रंग भर देता है। रोचक बात यह है कि चंद्रमा स्वयं मन का कारक ग्रह है। इसलिए जब यह साझेदारी के भाव में आकर बैठ जाता है, तो जातक का दांपत्य जीवन स्वाभाविक रूप से भावनाओं, संवेदनशीलता तथा घनिष्ठता के धरातल पर संचालित होने लगता है।।

चंद्रमा सामान्यतः स्त्री-तत्व, पोषण तथा आत्मीयता का भी कारक ग्रह माना जाता है। अर्थात जिस संबंध में स्नेह, सुरक्षा तथा भावनात्मक जुड़ाव की भावना सुनिश्चित होती है। वहाँ चंद्रमा का प्रभाव विशेष रूप से देखा जाता है। यही कारण है कि सप्तम भाव में चंद्रमा की यह स्थिति जातक को एक ऐसे जीवनसाथी की ओर आकर्षित करती है, जो स्वभाव से भावुक, देखभाल करने वाला तथा मातृतुल्य वात्सल्य से परिपूर्ण हो। तथा जातक के दांपत्य जीवन, संबंधों की गहराई तथा सामाजिक साझेदारी पर विशेष तथा गहरा प्रभाव देखने को मिलता है।।

चंद्रमा की स्थिति यदि बलवान एवं शुभ हो तो सुंदर तथा स्नेहमयी जीवनसाथी, प्रेमपूर्ण दांपत्य जीवन तथा साझेदारी में सफलता प्रदान करती है। वहीं पीड़ित अथवा अशुभ चंद्रमा मानसिक अस्थिरता, दांपत्य जीवन में उतार-चढ़ाव तथा जीवनसाथी के स्वास्थ्य संबंधी चिंता भी उत्पन्न करता है। वैसे वास्तविक फल का निर्णय तो सदैव संपूर्ण जन्मकुंडली, ग्रहों की दशा और उनके गोचर आदि के आधार पर ही किया जाता है।।

सप्तम भाव में चंद्रमा का सामान्य स्वभाव।। General Nature of Moon in the Seventh House.

मित्रों, सप्तम भाव में चंद्रमा जातक को अत्यंत भावुक, संवेदनशील तथा रोमांटिक स्वभाव प्रदान करता है। ऐसे जातक अपने संबंधों में गहराई तथा घनिष्ठता की तलाश करते हैं। तथा सतही अथवा औपचारिक संबंधों की अपेक्षा भावनात्मक जुड़ाव वाले संबंध निभाना अधिक उपयुक्त समझते हैं। इनकी संबंध-शैली में कोमलता तथा आत्मीयता विशेष रूप से देखी जाती है।।

ऐसे जातकों में स्वाभाविक रूप से देखभाल करने की प्रवृत्ति, सहानुभूति तथा सामाजिक व्यवहार-कुशलता पाई जाती है। जिस कारण इन्हें अपने जीवनसाथी तथा साझेदारों से सरलता से स्नेह प्राप्त होता है। सार्वजनिक जीवन में भी इनकी छवि अत्यंत मृदुभाषी तथा मिलनसार व्यक्ति की बनती है। इस सप्तम भाव में स्थित चंद्रमा की स्थिति की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि जातक अपने संबंधों में स्वाभाविक रूप से एक भावनात्मक संतुलन तथा सामंजस्य स्थापित कर पाता है। जिससे दांपत्य जीवन में गहरी आत्मीयता उत्पन्न होने की योग्यता प्राप्त हो जाती है।।

परन्तु इसी के साथ एक चुनौती भी जुड़ी होती है। अर्थात मन की चंचलता, अत्यधिक भावुकता तथा मनोदशाओं के उतार-चढ़ाव को संतुलित रूप से संभालना। ऐसे जातकों को अपनी भावनाओं का प्रयोग स्थिरता के साथ करना पड़ता है। जीवन में यह स्थिरता बहुत कुछ देती है। अन्यथा यही गुण संबंधों में अस्थिरता तथा अनावश्यक अपेक्षाओं का कारण भी कई बार बन जाता है। जो आगे चलकर दांपत्य जीवन के लिए अच्छा नहीं होता है।।

शुभ चंद्रमा का सप्तम भाव में फल।। Effects of an Auspicious Moon in the Seventh House.

मित्रों, यदि सप्तम भाव का चंद्रमा उच्च राशि (वृषभ) अथवा स्वराशि (कर्क) में स्थित होकर बलवान हो, तो जातक को अत्यंत सुंदर, भावुक तथा गुणवान जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। ऐसे जातकों का दांपत्य जीवन स्नेह, विश्वास तथा भावनात्मक सामंजस्य से परिपूर्ण रहता है। तथा जीवनसाथी के माध्यम से इन्हें मानसिक शांति एवं सुख की भी विशेष प्राप्ति होती है। ऐसा चंद्रमा की कुंडली के सप्तम भाव की अच्छी स्थिति के कारण संभव होता है।।

शुभ चंद्रमा से जातक को व्यापारिक साझेदारी, जनसंपर्क से जुड़े क्षेत्रों तथा जल, दूध, वस्त्र अथवा खाद्य-सामग्री से संबंधित व्यवसाय में भी एक विशिष्ट सफलता दिलाती है। विशेषकर यदि यह व्यवसाय जनता से सीधे जुड़ा हो तब। ऐसे जातक अपने कोमल तथा सौम्य स्वभाव के कारण समाज में विशेष सम्मान अर्जित करते हैं। तथा इनकी उपस्थिति मात्र से ही वातावरण में एक शांत तथा सुखद ऊर्जा का संचार होता है। जिससे लोग स्वाभाविक रूप से इनकी ओर आकर्षित होते हैं।।

यदि चंद्रमा के साथ शुभ ग्रहों की युति अथवा दृष्टि हो, तो जातक को विदेश यात्रा से जुड़े संबंधों में भी लाभ प्राप्त होता है। तथा जीवनसाथी विदेश से अथवा जल-तत्व से संबंधित किसी क्षेत्र से भी होता है। ऐसे जातकों का वैवाहिक जीवन समय के साथ और अधिक प्रगाढ़ तथा स्थिर होता चला जाता है। जिससे इनके संपूर्ण जीवन में एक भावनात्मक स्थिरता की अनुभूति बनी रहती है।।

अशुभ चंद्रमा का सप्तम भाव में फल।। Effects of an Inauspicious Moon in the Seventh House.

मित्रों, यदि सप्तम भाव का चंद्रमा नीच राशि (वृश्चिक) में, पापग्रहों से पीड़ित अथवा क्षीण अवस्था में हो, तो जातक को दांपत्य जीवन में मानसिक अस्थिरता, अत्यधिक भावुकता के कारण गलतफहमियाँ अथवा जीवनसाथी के स्वभाव में चंचलता का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातकों में अत्यधिक संवेदनशीलता की प्रवृत्ति भी देखी जाती है। जिससे संबंधों में उतार-चढ़ाव भी अधिक अनुभव होते हैं।।

कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि यदि सप्तम भाव का चंद्रमा पाप ग्रहों से युक्त अथवा दृष्ट हो, तो जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बताई गई है। इसी प्रकार यदि चंद्रमा राहु अथवा केतु से पीड़ित हो, तो दांपत्य जीवन में अकारण संदेह, दूरी अथवा मानसिक उलझन जैसी परिस्थितियाँ भी उत्पन्न हो जाती हैं। हालाँकि ऐसे किसी भी निष्कर्ष के लिए अत्यंत सावधानीपूर्वक तथा संपूर्ण कुंडली का अध्ययन आवश्यक होता है।।

ऐसे जातकों को अपनी मनोदशाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए तथा संबंधों में धैर्य एवं संवाद बनाए रखना चाहिए। क्योंकि यही दृष्टिकोण दीर्घकालिक दांपत्य सुख को सुनिश्चित करता है। परन्तु अंतिम निष्कर्ष के लिए सप्तमेश तथा संपूर्ण जन्मकुंडली का अध्ययन अनिवार्य होता है।।

विवाह, दांपत्य जीवन तथा साझेदारी पर विस्तृत प्रभाव।। Detailed Effects on Marriage, Married Life and Partnerships.

मित्रों, सप्तम भाव में स्थित चंद्रमा जातक को ऐसे दांपत्य संबंध की ओर प्रेरित करता है, जिसमें भावनात्मक जुड़ाव, स्नेह तथा आत्मीयता का महत्वपूर्ण स्थान होता है। ऐसे जातकों का जीवनसाथी प्रायः कोमल स्वभाव, गृहकार्य में निपुण तथा भावनाओं को समझने वाला होता है। क्योंकि इनकी उपस्थिति मात्र से ही एक स्नेहपूर्ण तथा सुरक्षित वातावरण का निर्माण होता है।।

जीवनसाथी के साथ इनका संबंध भावनात्मक स्तर पर अत्यंत गहरा होता है। अर्थात अनेक बार जीवनसाथी ही जातक के मानसिक संतुलन तथा भावनात्मक स्थिरता में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से सहायक सिद्ध होता है। यदि चंद्रमा शुभ हो, तो जीवनसाथी का सहयोग तथा स्नेह जातक के संपूर्ण जीवन को नई मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। जबकि चंद्रमा के पीड़ित होने पर इस दिशा में भी कुछ अस्थिरता अथवा असमंजस उत्पन्न होता है।।

व्यापारिक साझेदारी के क्षेत्र में भी सप्तम भाव का चंद्रमा विशेष भूमिका निभाता है। ऐसे जातक अपने साझेदारों के साथ भी भावनात्मक तथा विश्वासपूर्ण संबंध बनाए रखना पसंद करते हैं। जिससे इनकी साझेदारियाँ प्रायः दीर्घकालिक तथा स्थायी सिद्ध होती हैं। परन्तु अत्यधिक भावुकता के कारण कभी-कभी व्यावसायिक निर्णयों में भी भावनात्मक दृष्टिकोण हावी हो जाता है। जिसके प्रति आपको सजग रहना आवश्यक होता है।।

सप्तमस्थ चंद्रमा का स्वास्थ्य पर प्रभाव।। Health Effects.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा का संबंध मन, रक्त तथा जल-तत्व से माना गया है। जबकि सप्तम भाव का संबंध गुर्दे, मूत्राशय तथा कमर के निचले हिस्से से होता है। सप्तम भाव में चंद्रमा के शुभ होने पर मानसिक स्थिरता, भावनात्मक संतुलन तथा जल-तत्व संबंधी अंगों का स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है।।

इसके विपरीत यदि चंद्रमा पीड़ित हो, तो मानसिक तनाव, अनिद्रा, मूड में अत्यधिक उतार-चढ़ाव अथवा गुर्दे तथा मूत्राशय संबंधी विकार का अनुभव होता है। अत्यधिक भावुकता की प्रवृत्ति के कारण भी मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। विशेषकर जब चंद्रमा राहु अथवा शनि से पीड़ित हो। ऐसी स्थिति में संतुलित जीवनशैली तथा मानसिक शांति बनाए रखने के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श भी अवश्य लेना चाहिए। तथा चंद्रमा के बताए गए ज्योतिषीय उपायों को भी करना चाहिए।।

चंद्रमा को बलवान बनाने के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies to Strengthen Moon in the Seventh House.

मित्रों, सप्तम भाव के चंद्रमा को शुभ अथवा बलवान बनाए रखने के लिए चंद्र देवता के मंत्र “ॐ सों सोमाय नमः” अथवा “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः” का श्रद्धापूर्वक जप करना चाहिए। सोमवार के दिन शिवजी का जलाभिषेक करना तथा चंद्रमा को प्रतिदिन रात्रि में जल से अर्घ्य देना भी शुभ फलदायी माना जाता है। क्योंकि चंद्रमा को स्वयं भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान माना गया है।।

सोमवार के दिन व्रत रखना तथा सफेद वस्तुओं जैसे चावल, दूध, चीनी अथवा सफेद वस्त्र आदि का दान करना भी शुभ फलदायी माना जाता है। माता तथा जीवनसाथी का सम्मान करना चाहिए। मानसिक शांति के लिए ध्यान तथा योग का अभ्यास करना भी सप्तम भाव के चंद्रमा को संतुलित एवं बलवान बनाने में विशेष रूप से सहायक सिद्ध होता है।।

और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि अपनी भावनाओं का सम्मान अवश्य करें। परन्तु संबंधों में स्थिरता तथा धैर्य के प्रति भी उतनी ही सजगता बनाए रखें। क्योंकि यही संतुलन इस सप्तम भाव में स्थित चंद्रमा की स्थिति का सबसे बड़ा उपाय भी है और सबसे बड़ा गुण भी है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावना तथा स्त्री-तत्व का प्रमुख कारक ग्रह बताया गया है। फलदीपिका के अनुसार केंद्र भाव में स्थित बलवान चंद्रमा जातक को स्नेहमयी जीवनसाथी, प्रेमपूर्ण दांपत्य जीवन तथा साझेदारी में सफलता प्रदान करता है। जबकि पीड़ित चंद्रमा दांपत्य जीवन में अस्थिरता तथा मानसिक उलझन उत्पन्न कर देता है।।

सारावली में भी सप्तम भाव के चंद्रमा को भावनात्मक जुड़ाव तथा संबंधों में गहराई का प्रमुख कारक स्वीकार किया गया है। तथा यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसका अंतिम फलादेश सप्तमेश की स्थिति तथा संपूर्ण जन्मकुंडली के समन्वित अध्ययन के पश्चात ही निश्चित किया जाना चाहिए।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. सप्तम भाव में शुभ चंद्रमा क्या फल देता है।। What results does a benefic Moon yield in the seventh house.

उत्तर:- सप्तम भाव का शुभ चंद्रमा सुंदर तथा स्नेहमयी जीवनसाथी, प्रेमपूर्ण दांपत्य जीवन तथा साझेदारी में सफलता जैसे उत्तम फल प्रदान करता है।।

प्रश्न 2. सप्तम भाव में अशुभ चंद्रमा क्या नुकसान देता है।। What harm does a malefic Moon in the seventh house cause.

उत्तर:- सप्तम भाव का अशुभ चंद्रमा दांपत्य जीवन में मानसिक अस्थिरता, गलतफहमियाँ तथा जीवनसाथी के स्वास्थ्य संबंधी चिंता जैसी बाधाएँ उत्पन्न कर देता है।।

प्रश्न 3. सप्तम भाव के चंद्रमा से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ कौन-सी हैं।। What are the health issues associated with the Moon in the seventh house.

उत्तर:- वैदिक ज्योतिष में सप्तम भाव का संबंध गुर्दे तथा मूत्राशय से माना गया है। जबकि चंद्रमा का संबंध मन तथा रक्त से है। पीड़ित चंद्रमा इन क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं का संकेत देता है।।

प्रश्न 4. सप्तम भाव के चंद्रमा को बलवान बनाने का सबसे प्रभावी वैदिक उपाय क्या है।। What is the most effective Vedic remedy to strengthen the Moon in the seventh house.

उत्तर:- चंद्र देवता के मंत्र का जप, सोमवार को शिवजी का जलाभिषेक, सफेद वस्तुओं का दान तथा ध्यान-योग का अभ्यास ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।।

प्रश्न 5. क्या सप्तम भाव का चंद्रमा प्रेम विवाह के योग बनाता है।। Does the Moon in the seventh house create the potential for a love marriage.

उत्तर:- हाँ, यदि यह पंचम भाव अथवा सप्तमेश से भी संबंध बनाए, तो सप्तम भाव का चंद्रमा भावनात्मक जुड़ाव के आधार पर प्रेम विवाह की भी संभावना दर्शाता है। परंतु अंतिम निर्णय संपूर्ण कुंडली देखकर ही किया जाता है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, कुंडली के सप्तम भाव में स्थित चंद्रमा शुभ हो तो जातक को सुंदर, भावुक तथा स्नेहमयी जीवनसाथी, प्रेमपूर्ण दांपत्य जीवन तथा साझेदारी में सफलता प्रदान करता है। वहीं अशुभ होने पर मानसिक अस्थिरता, दांपत्य जीवन में उतार-चढ़ाव तथा जीवनसाथी के स्वास्थ्य संबंधी चिंता जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न कर देता है। यह सप्तम भाव एवं चंद्रमा ग्रह का संयोग हमें यह सिखाता है कि भावनाओं तथा स्थिरता का मेल दांपत्य जीवन को अत्यंत समृद्ध बनाता है। बशर्ते जातक अपनी संवेदनशीलता को धैर्य तथा संतुलन के साथ संभाले।।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार चंद्र देवता के मंत्र का जप, सोमवार का व्रत, शिवजी का जलाभिषेक तथा ध्यान का अभ्यास इसे संतुलित एवं बलवान बनाने में सहायक माना गया है। और यहाँ मैं यही कहूँगा कि जो जातक अपनी भावनाओं तथा स्थिरता के बीच सही संतुलन साध लेता है। उसी का दांपत्य जीवन सप्तम भाव के इस चंद्रमा से सर्वाधिक लाभान्वित होता है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि किसी भी विशेष उपाय अथवा निर्णायक निष्कर्ष से पहले किसी अनुभवी, योग्य एवं विद्वान ज्योतिषी से संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण विधिपूर्वक अवश्य करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके। कुंडली के सप्तम भाव में स्थित चंद्रमा शुभ हो तो जातक को सुंदर, भावुक तथा स्नेहमयी जीवनसाथी, प्रेमपूर्ण दांपत्य जीवन तथा साझेदारी में सफलता प्रदान करता है। वहीं अशुभ होने पर मानसिक अस्थिरता, दांपत्य जीवन में उतार-चढ़ाव तथा जीवनसाथी के स्वास्थ्य संबंधी चिंता भी उत्पन्न करता है।।

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