Home Chandra Graha अथ श्रीचन्द्र अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्।।

अथ श्रीचन्द्र अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्।।

Chandra Ashtottarshat Name Stotram
Chandra Ashtottarshat Name Stotram

अथ श्रीचन्द्र अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्।। Chandra Ashtottarshat Name Stotram.

श्रीचन्द्राष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्:-

अथ श्रीचन्द्राष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ।
अथ वक्ष्ये शशिस्तोत्रं तच्छृणुष्व मुदान्वितः ॥ १॥
चन्द्रोऽमृतमयः श्वेतो विधुर्विमलरूपवान् ।
विशालमण्डलः श्रीमान् पीयूषकिरणः करी ॥ २॥
द्विजराजः शशधरः शशी शिवशिरोगृहः ।
क्षीराब्धितनयो दिव्यो महात्माऽमृतवर्षणः ॥ ३॥
रात्रिनाथो ध्वान्तहर्ता निर्मलो लोकलोचनः ।
चक्षुराह्लादजनकस्तारापतिरखण्डितः ॥ ४॥
षोडशात्मा कलानाथो मदनः कामवल्लभः ।
हंसःस्वामी क्षीणवृद्धो गौरः सततसुन्दरः ॥ ५॥
मनोहरो देवभोग्यो ब्रह्मकर्मविवर्धनः ।
वेदप्रियो वेदकर्मकर्ता हर्ता हरो हरिः ॥ ६॥
ऊर्द्ध्ववासी निशानाथः श‍ृङ्गारभावकर्षणः ।
मुक्तिद्वारं शिवात्मा च तिथिकर्ता कलानिधिः ॥ ७॥
ओषधीपतिरब्जश्च सोमो जैवातृकः शुचिः ।
मृगाङ्को ग्लौः पुण्यनामा चित्रकर्मा सुरार्चितः ॥ ८॥
रोहिणीशो बुधपिता आत्रेयः पुण्यकीर्तकः ।
निरामयो मन्त्ररूपः सत्यो राजा धनप्रदः ॥ ९॥
सौन्दर्यदायको दाता राहुग्रासपराङ्मुखः ।
शरण्यः पार्वतीभालभूषणं भगवानपि ॥ १०॥
पुण्यारण्यप्रियः पूर्णः पूर्णमण्डलमण्डितः ।
हास्यरूपो हास्यकर्ता शुद्धः शुद्धस्वरूपकः॥ ११॥
शरत्कालपरिप्रीतः शारदः कुमुदप्रियः ।
द्युमणिर्दक्षजामाता यक्ष्मारिः पापमोचनः ॥ १२॥

इन्दुः कलङ्कनाशी च सूर्यसङ्गमपण्डितः ।
सूर्योद्भूतः सूर्यगतः सूर्यप्रियपरःपरः ॥ १३॥
स्निग्धरूपः प्रसन्नश्च मुक्ताकर्पूरसुन्दरः ।
जगदाह्लादसन्दर्शो ज्योतिः शास्त्रप्रमाणकः ॥ १४ ॥

सूर्याभावदुःखहर्ता वनस्पतिगतः कृती ।
यज्ञरूपो यज्ञभागी वैद्यो विद्याविशारदः ॥ १५॥
रश्मिकोटिर्दीप्तिकारी गौरभानुरिति द्विज ।
नाम्नामष्टोत्तरशतं चन्द्रस्य पापनाशनम् ॥ १६॥
चन्द्रोदये पठेद्यस्तु स तु सौन्दर्यवान् भवेत् ।
पौर्णमास्यां पठेदेतं स्तवं दिव्यं विशेषतः ॥ १७॥
स्तवस्यास्य प्रसादेन त्रिसन्ध्यापठितस्य च ।
सदाप्रसादास्तिष्ठन्ति ब्राह्मणाश्च द्विजोत्तम ॥ १८॥
श्राद्धे चापि पठेदेतं स्तवं पीयूषरूपिणम् ।
तत्तु श्राद्धमनन्तञ्च कलानाथप्रसादतः ॥ १९॥
दुःस्वप्ननाशनं पुण्यं दाहज्वरविनाशनम् ।
ब्राह्मणाद्याः पठेयुस्तु स्त्रीशूद्राः श‍ृणुयुस्तथा ॥ २०॥

।। इति बृहद्धर्मपुराणान्तर्गतं श्रीचन्द्राष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं सम्पूर्णम्।।

==============================================

बृहत्पाराशर होराशास्त्रम् के 19वें अध्याय में वर्णित अनेकयोगाध्यायः में ज्योतिष के सभी महत्वपूर्ण योगों का विस्तृत वर्णन किया गया है । जातक के जीवन में इन योगों का क्या असर होता है, इस बात का विस्तृत वर्णन हम कर रहे हैं । तो आइये जानें इस विडियो टुटोरियल में मृदंग योग एवं उसके फल के विषय में – मृदंग योग एवं उसके फल.

बृहत्पाराशर होराशास्त्रम् के 19वें अध्याय में वर्णित अनेकयोगाध्यायः में ज्योतिष के सभी महत्वपूर्ण योगों का विस्तृत वर्णन किया गया है । जातक के जीवन में इन योगों का क्या असर होता है, इस बात का विस्तृत वर्णन हम कर रहे हैं । तो आइये जानें इस विडियो टुटोरियल में शारदा योग एवं उसके फल के विषय में – शारदा योग एवं उसके फल .

बृहत्पाराशर होराशास्त्रम् के 19वें अध्याय में वर्णित अनेकयोगाध्यायः में ज्योतिष के सभी महत्वपूर्ण योगों का विस्तृत वर्णन किया गया है । जातक के जीवन में इन योगों का क्या असर होता है, इस बात का विस्तृत वर्णन हम कर रहे हैं । तो आइये जानें इस विडियो टुटोरियल में श्रीनाथ योग एवं उसके फल के विषय में – श्रीनाथ योग एवं उसके फल .

ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Watch YouTube Video’s.

इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें।।

किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं।।

सिलवासा ऑफिस:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के सामने, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा।।

सिलवासा ऑफिस में प्रतिदिन मिलने का समय:-
10:30 AM to 01:30 PM And 05:30 PM to 08:30 PM.

WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
E-Mail :: balajijyotish11@gmail.com 

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

error: Content is protected !!
Exit mobile version