अथ श्रीचन्द्र अष्टोत्तरशत नामावलिः।। Chandrama Ashtottarshat Namavalih.
श्रीचन्द्राष्टोत्तरशतनामावलिः-
चन्द्राय नमः। अमृतमयाय। श्वेताय। विधवे। विमलरूपवते।
विशालमण्डलाय। श्रीमते। पीयूषकिरणकारिणे। द्विजराजाय।
शशधराय। शशिने। शिवशिरोगृहाय। क्षीराब्धितनयाय।
दिव्याय। महात्मने। अमृतवर्षणाय। रात्रिनाथाय। ध्वान्तहर्त्रे।
निर्मलाय। लोकलोचनाय नमः॥२०॥
चक्षुषे नमः। आह्लादजनकाय। तारापतये। अखण्डिताय।
षोडशात्मने। कलानाथाय। मदनाय। कामवल्लभाय। हंसःस्वामिने।
क्षीणवृद्धाय। गौराय। सततसुन्दराय। मनोहराय। देवभोग्याय।
ब्रह्मकर्मविवर्धनाय। वेदप्रियाय। वेदकर्मकर्त्रे। हर्त्रे। हराय।
हरये नमः॥४०॥
ऊर्द्ध्ववासिने नमः । निशानाथाय । शृङ्गारभावकर्षणाय ।
मुक्तिद्वाराय । शिवात्मने । तिथिकर्त्रे । कलानिधये । ओषधीपतये ।
अब्जाय । सोमाय । जैवातृकाय । शुचये । मृगाङ्काय । ग्लावे ।
पुण्यनाम्ने । चित्रकर्मणे । सुरार्चिताय । रोहिणीशाय । बुधपित्रे ।
आत्रेयाय नमः ॥ ६०॥
पुण्यकीर्तकाय नमः । निरामयाय । मन्त्ररूपाय । सत्याय । राजसे ।
धनप्रदाय । सौन्दर्यदायकाय । दात्रे । राहुग्रासपराङ्मुखाय ।
शरण्याय । पार्वतीभालभूषणाय । भगवते । पुण्याय । आरण्यप्रियाय ।
पूर्णाय । पूर्णमण्डलमण्डिताय । हास्यरूपाय । हास्यकर्त्रे । शुद्धाय ।
शुद्धस्वरूपकाय नमः ॥ ८०॥
शरत्कालपरिप्रीताय नमः । शारदाय । कुमुदप्रियाय ।
द्युमणये । दक्षजामात्रे । यक्ष्मारये । पापमोचनाय । इन्दवे ।
कलङ्कनाशिने । सूर्यसङ्गाय । पण्डिताय । सूर्योद्भूताय । सूर्यगताय ।
सूर्यप्रियपरःपराय । स्निग्धरूपाय । प्रसन्नाय । मुक्ताकर्पूरसुन्दराय ।
जगदाह्लादसन्दर्शाय । ज्योतिषे । शास्त्रप्रमाणकाय नमः ॥ १००॥
सूर्याभावदुःखहर्त्रे नमः। वनस्पतिगताय। कृतिने। यज्ञरूपाय।
यज्ञभागिने। वैद्याय। विद्याविशारदाय। रश्मिकोटिदीप्तिकारिणे
नमः। गौरभानुरिति द्विजसे नमः॥१०९॥
।। इति श्रीचन्द्राष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं समाप्ता।।
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