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गजकेसरी योग।। Gajkesari Yoga.

Gajkesari Yoga
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गजकेसरी योग।। Gajkesari Yoga.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, आज हम एक अत्यन्त शुभ और प्रसिद्ध ज्योतिषीय योग के विषय में बात करेंगे जिसका नाम है — गजकेसरी योग।।

यह योग जन्म कुण्डली के सर्वाधिक शुभ योगों में से एक माना जाता है। जिस जातक की कुण्डली में यह योग होता है, उसे जीवन में अपार यश, सम्मान और समृद्धि की प्राप्ति होती है।।

मित्रों, गजकेसरी योग तब बनता है जब जन्म कुण्डली में बृहस्पति और चन्द्रमा परस्पर केन्द्र भावों में अर्थात् १, ४, ७ या १० वें भाव में एक दूसरे से स्थित होते हैं। इस योग का नाम भी बड़ा अर्थपूर्ण है — “गज” अर्थात् हाथी और “केसरी” अर्थात् सिंह। जिस प्रकार हाथी और सिंह अपने-अपने क्षेत्र के राजा होते हैं, ठीक उसी प्रकार इस योग वाला जातक भी अपने क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करता है।।

मित्रों, गजकेसरी योग वाले जातक का व्यक्तित्व अत्यन्त प्रभावशाली होता है। ऐसा जातक जहाँ भी जाता है, वहाँ उसकी उपस्थिति मात्र से ही वातावरण बदल जाता है। लोग स्वाभाविक रूप से इनकी ओर आकर्षित होते हैं और इनके नेतृत्व को स्वीकार करते हैं।।

इस योग वाले जातक की बुद्धि अत्यन्त तीव्र और विवेकशील होती है। ऐसे जातक न केवल विद्वान होते हैं बल्कि अपने ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग भी बड़ी कुशलता से करते हैं। वाणी में मिठास और तर्कशक्ति की प्रबलता ही इनकी सबसे बड़ी विशेषता होती है।।

मित्रों, धन और सम्पत्ति के मामले में भी गजकेसरी योग वाले जातक अत्यन्त भाग्यशाली होते हैं। इनके घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं रहती। राज्य और सरकार से भी इन्हें विशेष सहयोग और सम्मान मिलता है। कई बार तो ऐसे जातक राजनीति, प्रशासन या न्यायपालिका में उच्च पद तक पहुँचते हैं।।

परन्तु मित्रों, यह भी जान लें कि गजकेसरी योग का पूर्ण फल तभी मिलता है जब बृहस्पति और चन्द्रमा दोनों बलवान हों। यदि इनमें से कोई एक ग्रह नीच राशि में, पाप ग्रहों से पीड़ित अथवा अस्त हो तो इस योग का फल आधा या कम हो जाता है। इसीलिए कुण्डली में केवल योग देखना पर्याप्त नहीं होता है, अपितु ग्रहों की बल-स्थिति भी परखनी पड़ती है।।

मित्रों, गजकेसरी योग वाले जातक की आयु भी प्रायः दीर्घ होती है। माता के साथ इनके सम्बन्ध अत्यन्त प्रेमपूर्ण रहते हैं। समाज में इनकी प्रतिष्ठा इतनी होती है कि लोग इनकी बात को प्रमाण मानते हैं। शिक्षा, अध्यापन, चिकित्सा और आध्यात्म के क्षेत्र में ये विशेष सफलता प्राप्त करते हैं।।

इस योग को और बलवान बनाने के लिए गुरुवार के दिन बृहस्पति की पूजा करें, पीले वस्त्र धारण करें, केले के पेड़ की पूजा करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं। चन्द्रमा को बलवान बनाने हेतु सोमवार को शिव जी की पूजा करें तथा दूध और चावल का दान करें।।

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