Home Vastu Articles घर का मुख्य द्वार किस दिशा में शुभ होता है।।

घर का मुख्य द्वार किस दिशा में शुभ होता है।।

घर का मुख्य द्वार किस दिशा में शुभ होता है।। Ghar Ke Mukhya Dwar Ki Shubh Disha
घर का मुख्य द्वार किस दिशा में शुभ होता है।। Ghar Ke Mukhya Dwar Ki Shubh Disha

घर का मुख्य द्वार किस दिशा में शुभ होता है।। Ghar Ke Mukhya Dwar Ki Shubh Disha.

लेख का परिचय।। Introduction.

मित्रों, वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मुख्य द्वार वह प्रथम बिंदु माना गया है। जहाँ से समस्त प्राकृतिक ऊर्जाएँ भवन में प्रवेश करती हैं। यह द्वार केवल आवागमन का साधन मात्र नहीं है। बल्कि इसे संपूर्ण भवन की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य तथा पारिवारिक सौहार्द का प्रवेश-मार्ग माना जाता है। यही कारण है कि प्राचीन काल से ही भवन-निर्माण के समय मुख्य द्वार की दिशा का निर्धारण अत्यंत सावधानीपूर्वक किया जाता रहा है।।

मुख्य द्वार की दिशा का महत्व क्यों है।। Why Direction of Main Door Matters.

वास्तु शास्त्र पंचमहाभूतों अर्थात पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु तथा आकाश के संतुलन पर आधारित विज्ञान है। प्रत्येक दिशा में इन पंचतत्वों की सक्रियता भिन्न-भिन्न मात्रा में होती है। सूर्य के उदय होने के कारण पूर्व दिशा को ऊर्जा तथा नवीनता की दिशा माना गया है। वहीं उत्तर दिशा को धन के अधिपति कुबेर देवता का दिशा बताया गया है। मुख्य द्वार जिस दिशा में स्थित होता है, उसी दिशा की ऊर्जा सर्वप्रथम भवन में प्रवेश करती है। अतः इसका चयन अत्यंत विचारपूर्वक किया जाना चाहिए।।

पूर्वमुखी मुख्य द्वार।। East Facing Main Door.

मित्रों, पूर्व दिशा को वास्तु शास्त्र में अत्यंत शुभ दिशाओं में गिना जाता है। यह सूर्यदेव की दिशा मानी जाती है। जहाँ से प्रतिदिन नवीन ऊर्जा, सकारात्मकता तथा नई संभावनाएँ भवन में प्रवेश करती हैं। इस दिशा में स्थित मुख्य द्वार वाले भवनों में निवास करने वाले जातक स्वाभाविक रूप से आत्मविश्वासी, उत्साही तथा उन्नतिशील माने जाते हैं। परंतु इस दिशा में द्वार का स्थान वास्तु पुरुष मंडल के अनुसार सही पद पर होना अत्यंत आवश्यक है।।

उत्तरमुखी मुख्य द्वार।। North Facing Main Door.

उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना जाता है। इस दिशा में स्थित मुख्य द्वार आर्थिक स्थिरता, व्यापार में उन्नति तथा धन-प्राप्ति के योग बनाने वाला माना गया है। विशेष रूप से व्यापारी वर्ग तथा व्यवसाय संचालित करने वाले जातकों के लिए यह दिशा अत्यंत शुभ फलदायी सिद्ध होती है।।

ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा।। North-East Direction (Ishan Kon).

उत्तर तथा पूर्व दिशा के मध्य स्थित ईशान कोण को वास्तु शास्त्र में समस्त दिशाओं में सर्वाधिक पवित्र तथा शुभ माना गया है। इसे देवताओं की दिशा भी कहा जाता है। इस दिशा में स्थित मुख्य द्वार वाले भवन में शांति, आध्यात्मिक उन्नति तथा मानसिक स्थिरता प्राप्त होता है। तथा साथ ही आर्थिक समृद्धि के मार्ग को भी प्रशस्त करता है।।

दक्षिण तथा दक्षिण-पश्चिम दिशा से बचाव।। Directions to Avoid: South and South-West.

दक्षिण दिशा को यम देवता की दिशा माना गया है। और सामान्यतः इस दिशा में स्थित मुख्य द्वार को अशुभ माना जाता है। क्योंकि यह भवन में ऊर्जा के संतुलन को बिगाड़ देता है। इससे भी अधिक भारी तथा अशुभ दिशा दक्षिण-पश्चिम अर्थात नैऋत्य कोण को माना गया है। यह वास्तु पुरुष के पैरों की दिशा मानी जाती है। तथा इस दिशा में मुख्य द्वार होने से भवन में अस्थिरता, ऋण-भार तथा पारिवारिक तनाव जैसी स्थितियाँ उत्पन्न होती है।।

द्वार से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण वास्तु नियम।। Other Important Vastu Rules Related to Main Door.

मुख्य द्वार भवन के अन्य समस्त द्वारों की तुलना में आकार में बड़ा तथा भव्य होना चाहिए। क्योंकि इसे भवन का मुख्य प्रवेश-द्वार माना जाता है। द्वार खोलते समय किसी प्रकार की चरचराहट अथवा ध्वनि नहीं आनी चाहिए, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा का सूचक मानी जाती है। मुख्य द्वार के ठीक सम्मुख सीढ़ी, शौचालय अथवा लिफ्ट का होना अशुभ माना गया है। क्योंकि यह भवन में प्रवेश करने वाली ऊर्जा को पुनः बाहर की ओर परावर्तित कर देता है। इसके साथ ही द्वार के दोनों ओर पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था भी अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।।

वास्तु दोष होने पर सामान्य उपाय।। General Remedies If Vastu Dosh Exists.

मित्रों, यदि किसी कारणवश भवन का मुख्य द्वार शुभ दिशा में स्थित न हो, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। मुख्य द्वार को सदैव स्वच्छ, सुसज्जित तथा अवरोधरहित रखना चाहिए। द्वार के समीप तुलसी का पौधा, शुभ रंगों का प्रयोग, तोरण तथा दहलीज़ की उचित ऊँचाई जैसे सरल उपायों के माध्यम से वास्तु दोष के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया जा सकता है।।

निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, मुख्य द्वार वास्तु शास्त्र का वह अत्यंत संवेदनशील अंग है, जो भवन में प्रवेश करने वाली ऊर्जा की दिशा एवं गुणवत्ता निर्धारित करता है। पूर्व, उत्तर तथा ईशान कोण को इस दृष्टि से सर्वाधिक शुभ माना गया है। वहीं दक्षिण एवं नैऋत्य कोण से यथासंभव बचाव करने की सलाह दी जाती है। परंतु अंततः यह स्मरण रखना भी आवश्यक है कि दिशा केवल मार्ग प्रशस्त करती है। भवन में वास्तविक सुख-समृद्धि परिवार के प्रेम, संस्कार तथा पारस्परिक सामंजस्य से ही सम्भव होती है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि किसी भी भवन-निर्माण से पूर्व किसी अनुभवी एवं विद्वान वास्तु विशेषज्ञ से अपने भवन का विश्लेषण अवश्य करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।

मुख्य_द्वार_की_दिशा मुख्य_द्वार_वास्तु उत्तर_मुखी_द्वार पूर्व_मुखी_द्वार ईशान_कोण_वास्तु वास्तु_दोष_निवारण Main_Door_Direction Vastu_For_Main_Door North_Facing_Door East_Facing_Door Vastu_Shastra_Tips

ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे  YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Click Here & Watch My YouTube Channel.

इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।

किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं ।।
 
संपर्क करें:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजु में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा ।।
 
WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
E-Mail :: balajijyotish11@gmail.com

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

error: Content is protected !!
Exit mobile version