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कुंडली के दशम भाव में बैठे गुरु का शुभाशुभ फल और उपाय।।

कुंडली के दशम भाव में बैठे गुरु का शुभाशुभ फल और उपाय।। Guru In Tenth House Effects And Remedies.

दशम भाव और गुरु का संबंध।। Introduction.

मित्रों, दशम भाव को कर्म भाव, राजसत्ता भाव तथा प्रतिष्ठा भाव भी कहा जाता है। और यह केंद्र भाव होने के कारण जन्मकुंडली के चार अत्यंत बलशाली स्तंभों में से एक माना गया है। इसी दशम भाव से जातक के करियर, सामाजिक प्रतिष्ठा, नेतृत्व क्षमता तथा सार्वजनिक जीवन का आँकलन किया जाता है। यह भाव जातक के कर्मक्षेत्र का वह दर्पण है, जिसमें उसका पुरुषार्थ प्रत्यक्ष रूप से प्रतिबिंबित होकर समाज के सामने आता है।।

अब गुरु ग्रह की प्रकृति पर विचार करें तो यह ज्ञान, धर्म, विवेक तथा शुभता का सबसे विशाल एवं उदार ग्रह माना गया है। गुरु जिस भी भाव में विराजमान होता है, वहाँ अपनी गरिमा तथा शुभता का संचार अवश्य करता है। तथा उस भाव के विषयों को एक नैतिक एवं धर्मसम्मत दिशा प्रदान करता है। दशम भाव केंद्र स्थान होने के कारण गुरु जैसे शुभ ग्रह के लिए भी अत्यंत अनुकूल माना जाता है। क्योंकि केंद्र भाव में स्थित शुभ ग्रह जातक के जीवन में स्थायी उन्नति का कारण बनते हैं।।

मित्रों, जब ज्ञान तथा धर्म के कारक गुरु इसी कर्म भाव में आकर बैठ जाते हैं, तो एक अत्यंत सम्मानजनक संयोग बनता है। क्योंकि करियर स्वयं भी नैतिकता, विश्वसनीयता तथा दूरदर्शिता की मांग करता है। यही कारण है कि यह दशम भाव और गुरु ग्रह के संयोग जातक को कर्मक्षेत्र में गुरुतुल्य सम्मान तथा उच्च नैतिक छवि प्रदान करता है। जिससे जातक के करियर, समाज में स्थान तथा सार्वजनिक प्रतिष्ठा पर भी एक विशिष्ट एवं गहरा प्रभाव देखने को मिलता है।।

गुरु सामान्यतः केंद्र भाव में स्थित होने पर शुभ फल ही प्रदान करता है। कहा गया है:- किं कुर्वंती ग्रहा सर्वे यस्य केंद्रे बृहस्पति। विशेषकर जब यह स्वराशि अथवा उच्च राशि में हो तो यह राजयोग के समान परिणाम भी देता है। परन्तु वास्तविक फल का निर्णय तो कभी भी संपूर्ण जन्मकुंडली, ग्रहों की दशा और ग्रहों के गोचर को अच्छे से देख-समझकर उसके आधार पर ही किया जाता है।।

दशम भाव में गुरु का सामान्य स्वभाव।। General Nature of Jupiter in the Tenth House.

मित्रों, दशम भाव में गुरु जातक को स्वाभाविक रूप से नैतिक, दूरदर्शी तथा गंभीर स्वभाव प्रदान करता है। ऐसे जातक अपने कार्यक्षेत्र में सत्य तथा न्यायपूर्ण मार्ग पर चलना अधिक पसंद करते हैं। इनकी कार्यशैली में एक विशेष प्रकार की गरिमा तथा जिम्मेदारी का भाव सदैव विद्यमान रहता है। जिस कारण ये प्रायः अपने कार्यक्षेत्र में शीघ्र ही विश्वसनीयता तथा सम्मान अर्जित कर लेते हैं।।

ऐसे जातकों में स्वभाव से ही उदारता, धैर्य तथा दूसरों का मार्गदर्शन करने की स्वाभाविक क्षमता पाई जाती है। जिसके कारण इन्हें अपने सहकर्मियों तथा अधीनस्थों से भी सहज ही आदर प्राप्त होता है। ये अपने कार्यक्षेत्र में केवल पद ही नहीं, बल्कि एक गुरु के समान भूमिका भी निभाते देखे जाते हैं। इस दशम भाव में स्थित गुरु की स्थिति की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि जातक को अपने कर्म के प्रति एक स्वाभाविक दायित्व-बोध सदैव बना रहता है।।

परन्तु इसके साथ ही एक बात का ध्यान रखना भी आवश्यक होता है, अर्थात अत्यधिक आदर्शवाद अथवा सैद्धांतिक हठ से बचना। कई बार ऐसे जातक व्यावहारिकता की अपेक्षा सिद्धांतों को अधिक महत्व देने लगते हैं। जिससे प्रतिस्पर्धात्मक कार्यक्षेत्र में कभी-कभी अवसर हाथ से निकल भी जाते हैं। ऐसे में जातक को अपने आदर्शों के साथ-साथ समय तथा परिस्थिति की मांग को भी समझने का प्रयास करना चाहिए। तभी यह गुरु ग्रह की स्थिति संपूर्ण रूप से फलदायी सिद्ध हो पाती है।।

शुभ गुरु का दशम भाव में फल।। Effects of an Auspicious Jupiter in the Tenth House.

मित्रों, यदि दशम भाव का गुरु स्वराशि (धनु अथवा मीन) या उच्च राशि (कर्क) में स्थित होकर बलवान हो, तो यह जातक को उच्च पद, समाज में गुरुतुल्य सम्मान तथा दीर्घकालिक करियर में स्थिरता प्रदान करता है। ऐसे जातक शिक्षा, न्यायपालिका, प्रशासनिक सेवा, परामर्श तथा धर्म-प्रचार जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से सफलता प्राप्त करते हैं। क्योंकि इन क्षेत्रों में ज्ञान, नैतिकता तथा दूरदर्शिता की सर्वाधिक आवश्यकता होती है।।

समाज में उच्च पद, सम्मान तथा नेतृत्व की भूमिका जातक को स्वतः प्राप्त होती है। तथा कार्यक्षेत्र में जातक की गिनती विश्वसनीय एवं आदरणीय व्यक्तियों में होती है। इनके निर्णयों को अन्य लोग भी विशेष महत्व देते हैं। तथा इनके मार्गदर्शन में कार्य करने वाले लोग भी इनसे प्रेरणा एवं सीख प्राप्त करते हैं।।

ऐसे जातक धैर्यपूर्वक तथा सुनियोजित ढंग से अपने करियर का निर्माण करते हैं। और यही गुण इन्हें दीर्घकाल में सर्वाधिक सफल बनाता है। इनकी उपस्थिति मात्र से ही कार्यस्थल पर एक भरोसेमंद तथा शांत वातावरण का निर्माण होता है। जिससे संगठन अथवा संस्था की समग्र प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होती है।।

अशुभ गुरु का दशम भाव में फल।। Effects of an Inauspicious Jupiter in the Tenth House.

मित्रों, यदि दशम भाव का गुरु नीच राशि (मकर) में, पापग्रहों से पीड़ित अथवा निर्बल अवस्था में हो, तो जातक को करियर में विलंब, अवसरों की कमी अथवा परिश्रम के अनुरूप सम्मान न मिलने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातकों में अत्यधिक आदर्शवाद के कारण व्यावहारिक निर्णय लेने में भी कठिनाई अनुभव होती है।।

कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि यदि दशम भाव का गुरु पापग्रहों से युक्त अथवा दृष्ट हो, तो वरिष्ठ जनों अथवा गुरुजनों के साथ मतभेद तथा कार्यक्षेत्र में अनावश्यक विलंब जैसी बाधाएँ भी देखी जाती हैं। इसी प्रकार यदि गुरु शनि से पीड़ित हो, तो करियर में परिश्रम अधिक तथा फल विलंब से मिलने जैसी स्थिति भी बन जाती है। हालाँकि ऐसे किसी भी निष्कर्ष के लिए अत्यंत सावधानीपूर्वक तथा संपूर्ण जन्मकुंडली का अध्ययन आवश्यक होता है।।

ऐसे जातकों को धैर्य तथा व्यावहारिकता का समन्वय बनाए रखते हुए निरंतर परिश्रम करते रहना चाहिए। तथा वरिष्ठ जनों एवं गुरुजनों के साथ संबंधों को सुधारने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए। क्योंकि यही दृष्टिकोण दीर्घकाल में करियर को पुनः अनुकूल बनाने में सहायक सिद्ध होता है। परन्तु अंतिम निष्कर्ष के लिए दशमेश तथा संपूर्ण जन्मकुंडली का अध्ययन अनिवार्य होता है।।

करियर, सामाजिक प्रतिष्ठा तथा नेतृत्व पर विस्तृत प्रभाव।। Detailed Effects on Career, Social Status and Leadership.

मित्रों, दशम भाव में स्थित गुरु जातक को ऐसे कर्मक्षेत्र की ओर प्रेरित करता है, जिसमें ज्ञान, नैतिकता तथा मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण स्थान हो। ऐसे जातक प्रायः शिक्षा, कानून, प्रशासन, बैंकिंग, परामर्श दाता अथवा धार्मिक संस्थानों से जुड़े क्षेत्रों में विशेष रूप से सफलता प्राप्त करते हैं। क्योंकि इनकी उपस्थिति मात्र से ही एक भरोसेमंद तथा गरिमापूर्ण वातावरण का निर्माण होता है।।

वरिष्ठ जनों तथा अधिकारियों के साथ भी इनका संबंध विशेष भूमिका निभाता है। अर्थात अनेक बार वरिष्ठजन ही जातक के करियर निर्माण में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से सहायक सिद्ध होते हैं। यदि गुरु शुभ हो, तो यह सहयोग जातक के संपूर्ण करियर को नई ऊँचाई प्रदान करता है। जबकि गुरु के पीड़ित होने पर इस दिशा में भी कुछ मतभेद अथवा असमंजस उत्पन्न होता है।।

नेतृत्व के दृष्टिकोण से भी दशम भाव का गुरु विशेष महत्व रखता है। शुभ स्थिति में यह जातक को स्वाभाविक नेतृत्व क्षमता तथा सामाजिक सम्मान प्रदान करता है। जबकि अशुभ स्थिति में नेतृत्व की भूमिका पाने में कुछ अतिरिक्त परिश्रम अथवा विलंब की संभावना बनी रहती है। परन्तु अंतिम निर्णय के लिए संपूर्ण जन्मकुंडली का समन्वित अध्ययन आवश्यक होता है।।

दशमस्थ गुरु का स्वास्थ्य पर प्रभाव।। Health Effects.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष के अनुसार गुरु का संबंध यकृत, वसा तथा शरीर की समग्र वृद्धि से माना गया है। जबकि दशम भाव का संबंध घुटनों तथा हड्डियों से होता है। दशम भाव में गुरु के शुभ होने पर शारीरिक संतुलन तथा दीर्घकालिक कार्यक्षमता स्वाभाविक रूप से बनी रहती है।।

इसके विपरीत यदि गुरु पीड़ित हो, तो यकृत संबंधी विकार, मोटापा अथवा घुटनों-हड्डियों से जुड़ी समस्याओं का आना स्वाभाविक हो जाता है। अत्यधिक कार्यभार तथा मानसिक दबाव के कारण भी कभी-कभी स्वास्थ्य प्रभावित होता है। विशेषकर जब गुरु शनि अथवा राहु से पीड़ित हो। ऐसी स्थिति में संतुलित जीवनशैली तथा नियमित दिनचर्या बनाए रखने के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श भी लेना चाहिए। तथा गुरु से संबंधित जो उपाय बताए गए हैं उन्हें भी अवश्य अपनाना चाहिए।।

गुरु को बलवान बनाने के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies to Strengthen Jupiter in the Tenth House.

मित्रों, दशम भाव के गुरु को शुभ अथवा बलवान बनाए रखने के लिए गुरु देवता के मंत्र “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः” का श्रद्धापूर्वक जप करना चाहिए। गुरुवार के दिन व्रत रखना तथा भगवान श्रीविष्णु की उपासना करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। क्योंकि गुरु ग्रह को स्वयं भगवान विष्णु का ही स्वरूप माना गया है।।

गुरुवार के दिन पीले वस्त्र, चने की दाल, हल्दी अथवा पीली वस्तुओं का दान करना भी शुभ फलदायी माना जाता है। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ जनों तथा गुरुजनों का सम्मान करना चाहिए। तथा उनका मार्गदर्शन नियमित रूप से लेते रहना चाहिए। धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन तथा नियमित रूप से ज्ञानार्जन करते रहना भी दशम भाव के गुरु को संतुलित एवं बलवान बनाने में विशेष रूप से सहायक सिद्ध होता है।।

और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि अपने आदर्शों पर अडिग अवश्य रहें। परन्तु उसके साथ-साथ कार्यक्षेत्र की व्यावहारिक मांगों को समझना भी कभी न भूलें। क्योंकि यही संतुलन इस दशम भाव में स्थित गुरु ग्रह की स्थिति का सबसे बड़ा उपाय भी है और सबसे बड़ा गुण भी है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में गुरु को ज्ञान, धर्म तथा शुभता का प्रमुख कारक ग्रह बताया गया है। फलदीपिका के अनुसार केंद्र भाव में स्थित बलवान गुरु जातक को उच्च पद तथा समाज में सम्मान प्रदान करता है। जबकि पीड़ित गुरु करियर में विलंब तथा बाधाएँ उत्पन्न करता है।।

बृहज्जातक में दशमस्थ गुरु को नेतृत्व तथा गुरुतुल्य सम्मान प्राप्ति का प्रमुख कारक ग्रह माना गया है। इसी प्रकार जातक पारिजात में भी दशम भाव के गुरु को करियर तथा सामाजिक प्रतिष्ठा दोनों पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालने वाला ग्रह बताया गया है। तथा यह भी व्यवहारिक बात ही है, कि इसका अंतिम फलादेश कुंडली में दशमेश की स्थिति तथा संपूर्ण जन्मकुंडली के समन्वित अध्ययन के पश्चात ही निश्चित किया जाना चाहिए।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

Q 1. दशम भाव में शुभ गुरु क्या फल देता है? Effects of Auspicious Jupiter in 10th House.

उत्तर:- दशम भाव का शुभ गुरु उच्च पद, समाज में गुरुतुल्य सम्मान, दीर्घकालिक करियर की स्थिरता तथा नैतिक नेतृत्व क्षमता जैसे उत्तम फल प्रदान करता है।।

Q 2. दशम भाव में अशुभ गुरु क्या नुकसान देता है? Problems Caused by Malefic Jupiter in 10th House.

उत्तर:- दशम भाव का अशुभ गुरु करियर में विलंब, अत्यधिक आदर्शवाद के कारण व्यावहारिक हानि तथा वरिष्ठ जनों से मतभेद जैसी बाधाएँ उत्पन्न करता है।।

Q 3. दशम भाव के गुरु से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ कौन-सी हैं? Health Issues Linked to Jupiter in 10th House.

उत्तर:- वैदिक ज्योतिष में दशम भाव का संबंध घुटनों तथा हड्डियों से माना गया है। जबकि गुरु का संबंध यकृत तथा वसा से होता है। पीड़ित गुरु इन क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं का संकेत देता है।।

Q 4. दशम भाव के गुरु को बलवान बनाने का सबसे प्रभावी वैदिक उपाय क्या है? Most Effective Remedy for Jupiter in 10th House.

उत्तर:- गुरु देवता के मंत्र का जप, गुरुवार का व्रत, भगवान विष्णु की उपासना तथा पीली वस्तुओं का दान ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।।

Q 5. कौन-सा करियर दशम भाव के गुरु के लिए सर्वाधिक अनुकूल माना जाता है? Which Career Suits Jupiter in 10th House Best.

उत्तर:- शिक्षा, न्यायपालिका, प्रशासनिक सेवा, परामर्श तथा धार्मिक-आध्यात्मिक क्षेत्र दशम भाव के गुरु के लिए सर्वाधिक अनुकूल माने जाते हैं। परंतु अंतिम निर्णय संपूर्ण कुंडली देखकर ही किया जाता है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, कुंडली के दशम भाव में स्थित गुरु शुभ हो तो जातक को उच्च पद, समाज में गुरुतुल्य सम्मान, अध्यापन-परामर्श जैसे क्षेत्रों में सफलता तथा धर्मसम्मत करियर प्रदान करता है। वहीं अशुभ होने पर करियर में विलंब तथा अत्यधिक आदर्शवाद के कारण व्यावहारिक हानि जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न करता है। यह दशम भाव और गुरु ग्रह का संयोग हमें यह सिखाता है कि करियर में सच्ची सफलता तभी प्राप्त होती है। जब क्षमता के साथ-साथ नैतिकता तथा विवेक का भी समन्वय हो।।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार गुरु देवता के मंत्र का जप, गुरुवार का व्रत, भगवान श्रीविष्णु की उपासना तथा वरिष्ठजनों-गुरुजनों का सम्मान इसे संतुलित एवं बलवान बनाने में सहायक माना गया है। और यहाँ मैं यही कहूँगा कि केंद्र भाव में विराजमान यह गुरु ग्रह जातक को असाधारण सम्मान तो अवश्य ही देता है। परन्तु यही सम्मान जब व्यावहारिकता के साथ जुड़ता है, तभी वह वास्तविक एवं स्थायी सफलता का रूप ले पाता है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि किसी भी विशेष उपाय अथवा निर्णायक निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले किसी भी अनुभवी, योग्य और विद्वान ज्योतिषी से अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण विधिपूर्वक करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।

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