हरतालिका तीज व्रत कथा एवं विधि।। Hartalika teej Vrat Katha And Vidhi.
जय श्रीमन्नारायण।।
मित्रों, हरतालिका तीज का यह पावन व्रत भारतीय नारी की उस अटूट श्रद्धा, संकल्प-शक्ति तथा पातिव्रत्य धर्म का सजीव प्रतीक है। जिसके बल पर स्वयं माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया था। यह व्रत प्रतिवर्ष भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि को हस्त नक्षत्र के योग में मनाया जाता है। तथा इसे स्त्रियों के व्रतों में सर्वाधिक कठिन एवं शुभ फलदायी व्रत माना गया है।।
वैसे तो यह व्रत केवल सुहागिन स्त्रियों के लिए ही होता है। परन्तु कुंवारी कन्याएँ भी अपने लिए योग्य तथा मनचाहे वर की प्राप्ति हेतु इस व्रत को अत्यंत श्रद्धापूर्वक रखती हैं। यही कारण है कि यह व्रत संपूर्ण उत्तर भारत में, विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान तथा मध्य प्रदेश में अत्यंत हर्षोल्लास तथा धार्मिक निष्ठा के साथ मनाया जाता है। जिसमें स्त्रियाँ निर्जला उपवास रखकर रात्रि-जागरण भी करती हैं।।
परन्तु आज तो देखा जाता है, कि सम्पूर्ण भारतवर्ष की सनातनी स्त्रियाँ इस तीज व्रत को करतीं हैं। हाँ अवश्य ही देखा गया है, कि उनके व्रत करने में थोडा-बहुत अन्तर होता है। जैसे उत्तर भारत की स्त्रियाँ से इस व्रत को सम्पूर्ण श्रद्धा भाव से तथा निराहार रहकर करतीं है। वहीँ गुजरात-महाराष्ट्रा की माताएं-बहनें इस व्रत में फलाहार आदि कर लेती हैं। कहीं-कहीं तो भोजन का भी प्रचलन है। परन्तु इससे उनके श्रद्धा भाव पर कोई असर नहीं होता।।
हरतालिका तीज का नामकरण एवं महत्व।। Meaning and Significance of Hartalika Teej.
मित्रों, हरतालिका शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। हरत तथा आलिका, जिसका अर्थ है हरण करना तथा सखी। पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती की सखियों ने ही उन्हें उनके पिता हिमालयराज के घर से हर लिया था। तथा उन्हें सघन वन में ले जाकर भगवान शिव की तपस्या करने में सहायता की थी। जिससे इस व्रत का नाम हरतालिका पड़ा।।
इस व्रत का महत्व केवल एक व्रत मात्र तक सीमित नहीं है। अपितु यह स्त्री की उस दृढ़ संकल्प-शक्ति का भी प्रतीक है। जिसके बल पर वह असंभव प्रतीत होने वाले कार्य को भी संभव बना देती है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए जिस प्रकार अन्न-जल त्यागकर घोर तपस्या की थी। वही तपस्या आज भी स्त्रियों के लिए प्रेरणा तथा आदर्श का स्रोत बनी हुई है।।
माता पार्वती की तपस्या की पावन कथा।। The Sacred Story of Goddess Parvati’s Penance.
मित्रों, पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने अपने पूर्वजन्म में ही यह संकल्प ले लिया था कि वे भगवान शिव को ही अपना पति स्वीकार करेंगी। परन्तु उनके पिता हिमालयराज ने नारद मुनि के परामर्श पर उनका विवाह भगवान विष्णु के साथ निश्चित कर दिया। यह जानकर माता पार्वती अत्यंत दुखी हो गईं, क्योंकि उनका हृदय तो सदा से ही भगवान शिव के प्रति समर्पित था।।
अपने पिता की इस इच्छा से व्याकुल होकर माता पार्वती अपनी प्रिय सखी के साथ गुप्त रूप से सघन वन में चली गईं। जहाँ उन्होंने रेत से शिवलिंग का निर्माण कर घोर तपस्या आरंभ की। उन्होंने अन्न-जल का पूर्णतः त्याग कर दिया। तथा कठोर उपवास एवं ध्यान में लीन होकर वर्षों तक भगवान शिव की आराधना की। जिससे उनका शरीर अत्यंत क्षीण हो गया। परन्तु उनका संकल्प तनिक भी नहीं डिगा।।
माता पार्वती की इस अटूट भक्ति तथा तपस्या से प्रसन्न होकर अंततः भगवान शिव प्रकट हुए। और उन्होंने माता पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार करने का वचन दिया। भाद्रपद शुक्ल तृतीया के इसी पावन दिन भगवान शिव ने माता पार्वती की तपस्या को स्वीकार किया था। इसी कारण इस तिथि को हरतालिका तीज के रूप में मनाया जाने लगा। जो स्त्री-शक्ति तथा अटूट श्रद्धा के विजय का प्रतीक बन गया।।

हरतालिका तीज व्रत एवं पूजन की विधि।। Method of Hartalika Teej Vrat and Puja.
मित्रों, हरतालिका तीज व्रत की तैयारी एक दिन पूर्व से ही आरंभ हो जाती है। जिसमें स्त्रियाँ सूर्यास्त से पूर्व सात्त्विक भोजन ग्रहण करती हैं। क्योंकि व्रत वाले दिन यह व्रत पूर्णतः निर्जला रखा जाता है। अर्थात इसमें अन्न तथा जल दोनों का ही त्याग किया जाता है। व्रत के दिन प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर संकल्प लिया जाता है। तथा नवीन वस्त्र एवं सोलह श्रृंगार धारण किए जाते हैं।।
पूजन के लिए बालू अथवा काली मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती तथा भगवान गणेश की प्रतिमाएँ बनाई जाती हैं। तथा इन्हें एक स्वच्छ स्थान पर विराजमान किया जाता है। पूजन में बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र, जल, दूध, शहद, घी तथा फल-फूल अर्पित किए जाते हैं। तथा माता पार्वती को सुहाग की समस्त सामग्री, जैसे चूड़ी, सिंदूर, बिंदी तथा मेहंदी अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।।
पूजन के पश्चात हरतालिका तीज व्रत कथा का श्रवण अथवा वाचन किया जाता है। जिसमें माता पार्वती की तपस्या का वर्णन सुना जाता है। रात्रि-जागरण करते हुए भजन-कीर्तन में समय व्यतीत किया जाता है। तथा अगले दिन प्रातःकाल पुनः पूजन कर व्रत का पारण किया जाता है। तत्पश्चात ही स्त्रियाँ अन्न-जल ग्रहण करती हैं।।
हरतालिका तीज व्रत के नियम।। Rules of the Hartalika Teej Vrat.
मित्रों, यह व्रत अत्यंत कठिन तथा नियमबद्ध माना गया है। इसीलिए इसे रखने से पूर्व इसके नियमों को भली-भाँति समझ लेना आवश्यक होता है। इस व्रत में सोना वर्जित माना गया है। अर्थात व्रती स्त्रियों को रात्रि-जागरण करते हुए भजन-कीर्तन में ही समय व्यतीत करना चाहिए। क्योंकि मान्यता है कि सो जाने पर व्रत का संकल्प भंग हो जाता है।।
इस व्रत में जल को ग्रहण करना भी पूर्णतः वर्जित माना गया है। अतः जिन स्त्रियों का स्वास्थ्य अत्यंत नाजुक हो अथवा जो गर्भवती हों, उन्हें अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही इस व्रत को अपनाना चाहिए। तथा आवश्यकता पड़ने पर फलाहार अथवा जल ग्रहण करने में कोई दोष नहीं माना जाता। क्योंकि भगवान भाव के भूखे होते हैं, कठोरता के नहीं।।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)
प्रश्न 1. हरतालिका तीज कब मनाई जाती है।। When is Hartalika Teej celebrated.
उत्तर:- हरतालिका तीज प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हस्त नक्षत्र के योग में मनाई जाती है।।
प्रश्न 2. हरतालिका तीज व्रत कौन रख सकता है।। Who can observe the Hartalika Teej fast.
उत्तर:- यह व्रत सुहागिन स्त्रियाँ अपने पति की दीर्घायु तथा अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं। तथा कुंवारी कन्याएँ भी मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए रखती हैं।।
प्रश्न 3. इस व्रत में क्या खाया जा सकता है।। What can be eaten during this fast.
उत्तर:- यह व्रत सामान्यतः निर्जला रखा जाता है। परन्तु जो स्त्रियाँ स्वास्थ्य कारणों से निर्जला व्रत न रख सकें। वे फलाहार अथवा जल ग्रहण कर सकती हैं।।
प्रश्न 4. हरतालिका तीज की पूजा में क्या अर्पित करना चाहिए।। What should be offered during Hartalika Teej puja.
उत्तर:- बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र तथा सुहाग की समस्त सामग्री जैसे चूड़ी, सिंदूर एवं मेहंदी भगवान शिव तथा माता पार्वती को अर्पित करनी चाहिए।।
प्रश्न 5. क्या इस व्रत में सोना वर्जित है।। Is sleeping prohibited during this fast.
उत्तर:- हाँ, इस व्रत में रात्रि-जागरण करने की परंपरा है। तथा सोने से बचकर भजन-कीर्तन में समय व्यतीत करना शुभ माना जाता है।।
लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.
मित्रों, हरतालिका तीज का यह पावन पर्व हमें माता पार्वती की उस अटूट श्रद्धा, धैर्य तथा संकल्प-शक्ति का स्मरण कराता है। जिसके बल पर उन्होंने असंभव को भी संभव बना दिया था। यह व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं है। अपितु यह स्त्रीयों की शक्ति, समर्पण तथा दृढ़ निश्चय की एक जीवंत गाथा भी है। जो युगों-युगों से नारी-हृदय को प्रेरणा देती आई है।।
इस व्रत को श्रद्धापूर्वक तथा विधि-विधान से रखने वाली स्त्रियों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही पति की दीर्घायु तथा सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है, ऐसी मान्यता है। भगवान शिव तथा माता पार्वती का यह पावन मिलन हमें यह भी सिखाता है कि सच्ची भक्ति तथा अटूट संकल्प के समक्ष कोई भी बाधा टिक नहीं सकती।।
इसी प्रकार के अन्य पावन व्रत-कथाओं, पर्वों तथा धार्मिक अनुष्ठानों की जानकारी के लिए हमारे ब्लॉग तथा वेबसाइट पर पधारें। तथा हमारे फेसबुक एवं यूट्यूब चैनल को भी अवश्य सब्सक्राइब करें।।
#हरतालिका_तीज_व्रत_कथा #हरतालिका_तीज_व्रत_विधि #हरतालिका_तीज_पूजा_विधि #हरतालिका_तीज_का_महत्व #हरतालिका_तीज_व्रत_के_नियम #Hartalika_Teej_Vrat_Katha #Hartalika_Teej_Vrat_Vidhi #Hartalika_Teej_Puja_Vidhi #Hartalika_Teej_Importance #Hartalika_Teej_Vrat_Rules #हरतालिका_तीज, #हरतालिका_तीज_व्रत, #माता_PARVATI_कथा, #सुहागिन_व्रत, #तीज_पूजा_विधि
ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Click Here & Watch My YouTube Channel.
इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.
वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।
