प्रथम भाव में मेष राशि के बृहस्पति का फल (मेष लग्नस्थ बृहस्पति का फल)।। Effects of Jupiter in Aries in the First House.
मित्रों, वैदिक ज्योतिष में प्रथम भाव (लग्न भाव) सम्पूर्ण जन्मकुण्डली का सबसे महत्वपूर्ण भाव माना गया है। यह भाव व्यक्ति के शरीर, व्यक्तित्व, स्वास्थ्य, स्वभाव, आत्मविश्वास, आयु, प्रतिष्ठा तथा जीवन की दिशा का प्रतिनिधित्व करता है। जब इस महत्वपूर्ण प्रथम भाव में देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) स्थित हों और “मेष लग्नस्थ बृहस्पति का फल” राशि मेष (Aries) हो, तब एक अत्यंत प्रभावशाली योग निर्मित होता है।।
मेष राशि का स्वामी मंगल है और मंगल तथा बृहस्पति परस्पर मित्र ग्रह हैं। इसलिए सामान्यतः यह स्थिति शुभ मानी जाती है। ऐसे में प्रथम भाव से इन विषयों का विचार किया जाता है। व्यक्तित्व, शरीर, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, जीवन की दिशा, प्रसिद्धि, नेतृत्व क्षमता, निर्णय शक्ति आदि-आदि। यदि प्रथम भाव बलवान हो तो सम्पूर्ण कुण्डली का प्रभाव भी मजबूत हो जाता है।।
मेष राशि में बृहस्पति का स्वभाव।। Nature of Jupiter in Aries.

मेष राशि अग्नितत्त्व प्रधान, चर तथा साहस का प्रतीक है। बृहस्पति ज्ञान, धर्म, नीति, गुरु, भाग्य एवं सदाचार के कारक हैं। ऐसे में जब ज्ञान (बृहस्पति) और साहस (मंगल) का मेल होता है तब व्यक्ति दूरदर्शी होता है। निर्णय लेने में सक्षम होता है। नेतृत्व करनेवाला होता है। दूसरों को प्रेरित करनेवाला होता है। समाज में सम्मान प्राप्त करनेवाला होता है।।
व्यक्तित्व पर प्रभाव।। Effect on Personality.
मित्रों, ऐसे जातक आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं। आत्मविश्वासी भी होते हैं। धर्मप्रिय और न्यायप्रिय होते हैं। दूसरों की सहायता करना पसंद करते हैं। अच्छे सलाहकार भी बनते हैं। इनकी उपस्थिति मात्र से लोग प्रभावित हो जाते हैं। ऐसे लोगों का शिक्षा एवं ज्ञान (Education & Intelligence) पर भी अच्छी पकड़ होती है। क्योंकि बृहस्पति देवता ज्ञान के कारक ग्रह हैं। ऐसे जातकों को उच्च शिक्षा, दर्शन, वेद, ज्योतिष, अध्यापन, कानून और प्रशासन के क्षेत्र में विशेष सफलता मिल सकती है।।
यदि बृहस्पति शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो ऐसा जातक व्यक्ति विद्वान बनता है। करियर (Career & Profession) प्रथम भाव का बृहस्पति इन क्षेत्रों में विशेष सफलता देता है अध्यापक, प्रोफेसर, न्यायाधीश, वकील, आध्यात्मिक गुरु, ज्योतिषाचार्य, प्रशासनिक अधिकारी, सरकारी सेवा, प्रेरक वक्ता तथा लेखकबनते हैं और यदि दशा सहयोग करे तो व्यक्ति समाज में उच्च एवं प्रतिष्ठित पद भी प्राप्त करता है।।
धन एवं भाग्य।। Wealth & Fortune.
बृहस्पति भाग्य के कारक बताये गए हैं। इसलिए ऐसे जातक परिश्रम से धन कमाते हैं। सम्मानपूर्वक आय अर्जित करते हैं। अनेक लोगों का मार्गदर्शन कर धन प्राप्त करते हैं। भाग्य का साथ सामान्य से अधिक मिलता है। ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन (Marriage & Married Life) बहुत safal माना जाता है। यदि सप्तम भाव तथा शुक्र भी शुभ हों तो योग्य जीवनसाथी मिलता है। वैवाहिक जीवन सम्मानजनक रहता है। परिवार में धार्मिक वातावरण सदैव बना रहता है।।
स्वास्थ्य।। Health.

सामान्यतः ऐसे लोगों का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। किन्तु अशुभ स्थिति में मोटापा अधिक बढ़ जाता है। लीवर विकार, रक्तचाप की बीमारी एवं पित्त संबंधी समस्या देखी जा सकती है। अशुभ होने पर परिणाम (Negative Effects) इस प्रकार के स्वाभाविक तौर पर देखे जाते हैं। यदि बृहस्पति पाप ग्रहों से पीड़ित हो, राहु-केतु से ग्रस्त हो, नीच नवांश में हो अथवा अत्यधिक निर्बल हो तो अहंकार बढ़ जाता है। जिसके परिणाम स्वरुप गलत निर्णय, गुरुजनों का अपमान, आर्थिक रुकावट, प्रतिष्ठा में कमी, विवाह में विलम्ब, संतान कष्ट या संतान से कष्ट जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।।
“मेष लग्नस्थ बृहस्पति का फल” का शास्त्रीय उपाय।। Vedic Remedies.
यदि बृहस्पति कमजोर हो तो गुरुवार का व्रत रखें। पीले वस्त्र धारण करें। “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः” इस मंत्र का अधिक-से-अधिक जप करें। पीली दाल एवं हल्दी का दान करें। गुरुजनों का सम्मान करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। योग्य ज्योतिषी की सलाह से पुखराज धारण कर सकते हैं।।
“मेष लग्नस्थ बृहस्पति का फल” का अंतिम निष्कर्ष।। Conclusion.
मित्रों, प्रथम भाव में मेष राशि का बृहस्पति (मेष लग्नस्थ बृहस्पति का फल) सामान्यतः अत्यंत शुभ माना जाता है। यह व्यक्ति को तेजस्वी व्यक्तित्व, उच्च ज्ञान, नेतृत्व क्षमता, धार्मिक प्रवृत्ति, समाज में मान-सम्मान तथा भाग्योदय प्रदान करता है। यदि बृहस्पति शुभ एवं बलवान हो तो जातक अपने ज्ञान, पराक्रम और सदाचार से जीवन में विशिष्ट स्थान (पद) प्राप्त करता है। वहीं यदि गुरु ग्रह कुंडली में पीड़ित हो तो इन सभी शुभ फलों में कमी आ जाती है। इसलिए समयानुसार शास्त्रीय उपाय करना हितकारी माना गया है।।
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