Home Articles Astro Articles बृहस्पति ग्रह के प्रभाव लाभ और उपाय।। Jupiter in Vedic Astrology.

बृहस्पति ग्रह के प्रभाव लाभ और उपाय।। Jupiter in Vedic Astrology.

Jupiter in Vedic Astrology

गुरु ग्रह के लाभ, प्रभाव और कृपा – संपूर्ण शास्त्रीय विवेचन।। Jupiter (Guru Graha): Complete Scriptural Benefits, Effects and Divine Blessings.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष में गुरु ग्रह (बृहस्पति) को देवताओं का गुरु, ज्ञान, धर्म, सदाचार, संतान, भाग्य, विद्या, आध्यात्मिकता, धन, दान, न्याय तथा जीवन में शुभता का कारक माना गया है। नौ ग्रहों में गुरु ग्रह सबसे अधिक शुभ ग्रहों में गिना जाता है। जिस व्यक्ति की जन्मकुंडली में गुरु बलवान, शुभ और उच्च स्थिति में होता है, उसके जीवन में ज्ञान, मान-सम्मान, सुख-समृद्धि और ईश्वर की विशेष कृपा निरन्तर बनी रहती है।।

शास्त्रों की बात करें तो, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में महर्षि पराशर ने गुरु ग्रह को ज्ञान, धर्म, वेद, धन, पुत्र, यश और शुभ फल देने वाला ग्रह बताया है। बृहत् जातक में आचार्य वराहमिहिर ने लिखा है कि बलवान गुरु व्यक्ति को विद्वान, धर्मनिष्ठ, दानी, प्रतिष्ठित और सम्मानित बनाता है। फलदीपिका के अनुसार शुभ गुरु जातक को धन, सुख, उत्तम संतान, उच्च शिक्षा, धार्मिक प्रवृत्ति तथा समाज में प्रतिष्ठा प्रदान करता है।।

गुरु ग्रह से कुछ प्रमुख लाभ की अगर हम चर्चा करें तो ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति करवाता है, गुरु ग्रह व्यक्ति को गहन ज्ञान, विवेक, समझदारी, निर्णय लेने की क्षमता तथा शास्त्रों का अध्ययन करने की योग्यता प्रदान करता है। ऐसे व्यक्ति सदैव सही मार्ग का चुनाव करते हैं। यदि गुरु शुभ हो तो रुके हुए कार्य बनने लगते हैं। भाग्य का साथ मिलता है तथा जीवन में अप्रत्याशित शुभ अवसर प्राप्त होते हैं।।

गुरु ग्रह स्थायी (स्थिर) धन, आर्थिक सुरक्षा, निवेश में सफलता तथा आय के नए स्रोत प्रदान करता है। यह व्यक्ति को ईमानदारी से धन कमाने की प्रेरणा देता है। गुरु ग्रह शिक्षा, अनुसंधान, अध्यापन, दर्शन, वेद, ज्योतिष, आयुर्वेद, कानून तथा धार्मिक शिक्षा प्राप्ति में भी सफलता दिलाता है। महिलाओं की कुंडली में गुरु ग्रह पति का कारक माना जाता है। शुभ गुरु योग्य, संस्कारी एवं सहयोगी जीवनसाथी का योग बनाता है तथा वैवाहिक जीवन में सुख प्रदान करता है।।

Jupiter in Vedic Astrology

गुरु ग्रह संतान का भी मुख्य कारक माना गया है। इसकी शुभ स्थिति स्वस्थ, योग्य और संस्कारी संतान का सुख प्रदान करती है। गुरु ग्रह व्यक्ति को ईश्वर में आस्था, भक्ति, यज्ञ, दान, पूजा, सत्संग, गुरु सेवा तथा मोक्ष मार्ग की ओर भी प्रेरित करता है। बलवान गुरु समाज में प्रतिष्ठा, मान-सम्मान, नेतृत्व क्षमता तथा लोगों का विश्वास दिलाता है। शुभ गुरु शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता, मानसिक संतुलन तथा सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।।

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गुरु ग्रह व्यक्ति को सत्य, न्याय, ईमानदारी तथा नैतिक मूल्यों का पालन करने वाला बनाता है। कार्यक्षेत्र की भी बात कर लेते है, तो अच्छा गुरु शिक्षक, न्यायाधीश, प्रोफेसर, वकील, धार्मिक गुरु, ज्योतिषी, लेखक, सलाहकार, बैंकिंग, प्रशासन तथा शिक्षा क्षेत्र में विशेष सफलता दिलाता है। गुरु ग्रह परिवार में प्रेम, सम्मान, सहयोग तथा संस्कारों को भी मजबूत करता है।।

शुभ गुरु व्यक्ति को परोपकारी बनाता है, जिससे पुण्य और शुभ कर्मों का संचय होता है। गुरु ग्रह आत्मज्ञान, ध्यान, योग, वेदांत तथा आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। शुभ गुरु वाले व्यक्ति को योग्य गुरु, श्रेष्ठ मार्गदर्शक तथा जीवन में सही दिशा देने वाले लोग मिलते हैं। आपका गुरु मजबूत है या नही उसके कुछ सामान्य संकेत बताता हूँ। ऐसे लोगों में धर्म और ईश्वर में आस्था होती है। विद्वानों का सम्मान करते हैं।।

सत्य और न्याय का पालन करते हैं। इनके जीवन में आर्थिक स्थिरता होती है। उच्च शिक्षा प्राप्ति में सफलता। संतान सुख। परिवार में सम्मान। समाज में प्रतिष्ठा। दान और सेवा की भावना। सकारात्मक एवं शांत स्वभाव जातक में स्वयं तथा स्वतः ही होते हैं। और यदि गुरु ग्रह आपका मजबूत ना हो और उसे यदि मजबूत करना चाहते हों तो उसके कुछ शास्त्रीय उपाय बताते हैं। प्रत्येक गुरुवार भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा करें। “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें।।

पीले वस्त्र धारण करें। हल्दी, चने की दाल, पीले फल एवं पीले वस्त्र का दान करें। गुरु, आचार्य, ब्राह्मण तथा शिक्षकों का सम्मान करें। श्रीमद्भगवद्गीता तथा विष्णुसहस्रनाम का नियमित पाठ करें। सदाचार, सत्य और दान आदि शास्त्रों के नियमों का नित्य पालन करें।।  

अंतिम निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, गुरु ग्रह केवल धन और भाग्य का ही नहीं, बल्कि ज्ञान, धर्म, सदाचार, संतान, विवाह, शिक्षा, प्रतिष्ठा, आध्यात्मिक उन्नति तथा जीवन के समग्र कल्याण का प्रमुख कारक ग्रह माना गया है। जब गुरु ग्रह शुभ और बलवान होता है, तब व्यक्ति के जीवन में समृद्धि, मान-सम्मान, बुद्धि-विवेक, धार्मिकता और ईश्वर की कृपा का निरंतर विस्तार होता है। इसलिए शास्त्रों के अनुसार गुरु ग्रह की प्रसन्नता के लिए सदाचार, गुरु-सेवा, दान, धर्म तथा ईश्वर-भक्ति को जीवन का आधार बनाना चाहिए।।

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