Home Articles Astro Articles अशुभ बृहस्पति का दुष्प्रभाव एवं सरल उपाय।। Unfavorable Jupiter And Simple Remedies

अशुभ बृहस्पति का दुष्प्रभाव एवं सरल उपाय।। Unfavorable Jupiter And Simple Remedies

Unfavorable Jupiter And Simple Remedies

गुरु ग्रह के अशुभ होने के दुष्प्रभाव, कारण, लक्षण एवं शास्त्रीय उपाय।। अशुभ बृहस्पति का दुष्प्रभाव एवं सरल उपाय। Effects of an Afflicted Jupiter (Guru Graha), Causes, Symptoms and Scriptural Remedies.

भूमिका।। Introduction.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष में गुरु ग्रह (बृहस्पति) को देवताओं का गुरु, धर्म, ज्ञान, संतान, विवाह, भाग्य, धन, सदाचार, वेद, आध्यात्मिकता तथा शुभ फल का कारक माना गया है। जब यह ग्रह शुभ और बलवान होता है तो जीवन में उन्नति, मान-सम्मान और समृद्धि प्रदान करता है। किंतु जब यही ग्रह अशुभ, निर्बल, नीच, अस्त अथवा पाप ग्रहों से पीड़ित हो जाता है, तब जीवन के अनेक क्षेत्रों में बाधाएँ आने लगती हैं।।

यह बात बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में महर्षि पराशर ने स्पष्ट किया है कि शुभ गुरु ज्ञान, पुत्र, धन, धर्म और भाग्य देता है, जबकि पीड़ित गुरु इन क्षेत्रों में बाधा उत्पन्न करता है। साथ ही फलदीपिका में कहा गया है, कि “अशुभ बृहस्पति का दुष्प्रभाव एवं सरल उपाय” निर्बल गुरु से विद्या की कमी, आर्थिक कठिनाइयाँ, (धन की परेशानियाँ) संतान संबंधी कष्ट तथा धार्मिक आस्था में कमी देखी जा सकती है। बृहत् जातक के अनुसार बलहीन बृहस्पति व्यक्ति के निर्णय, प्रतिष्ठा और सामाजिक सम्मान को भी प्रभावित करता है।।

गुरु ग्रह अशुभ क्यों होता है? Why Does Jupiter Become Afflicted?

मित्रों, पहली बात कि जन्मकुंडली में मकर राशि में नीच होना। राहु, केतु, शनि या मंगल जैसे पाप ग्रहों से तीव्र रूप से पीड़ित होना। साथ ही सूर्य के अत्यधिक निकट होने से अस्त होना। षष्ठ, अष्टम या द्वादश भाव में दुर्बल स्थिति में होने से भी यह अशुभ कारक हो जाता है। यह बात अलग है, कि “अंतिम निर्णय या फलादेश पूरी कुंडली पर निर्भर करता है। इसका प्रभाव महादशा या अंतरदशा में ग्रह पीड़ा के रूप सक्रिय हो जाता है।।

गुरु ग्रह के अशुभ होने के प्रमुख लक्षण।। Major Symptoms of an Afflicted Jupiter.

पहली बात की जब जन्मकुंडली में गुरु अशुभ होता है, तो जातक के शिक्षा में बाधा। पढ़ाई में मन न लगना, परीक्षा में बार-बार असफलता या उचित मार्गदर्शन का अभाव। आर्थिक समस्याएँ आने लगती है। धन का न रुकना अर्थात बचत का न होना, गलत निवेश या आर्थिक अस्थिरता। विवाह में विलंब होना, विशेषकर महिलाओं की कुंडली में पीड़ित गुरु विवाह में देरी करवाता है या वैवाहिक जीवन में तनाव का कारण बन जाता है।।

अशुभ अगर गुरु जैसा ग्रह जब हो जाता है तब यह संतान संबंधी कष्ट देने लगता है। जैसे संतान प्राप्ति में विलंब, संतान की शिक्षा या स्वास्थ्य को लेकर चिंता। धार्मिक आस्था में कमी। (Decline in Spiritual Inclination) जैसे धर्म में तथा गुरु और शास्त्रों के प्रति श्रद्धा कम होना तथा जीवन में नैतिक भ्रम बढ़ना। गलत निर्णय ले लेना (Poor Decision-Making) जैसे बिना सोचे-समझे निर्णय लेना और बाद में हानि उठाना।।

मित्रों, गुरु के कुंडली में अशुभ होने से सामाजिक सम्मान में कमी (Loss of Reputation) हो जाती है अथवा आपकी प्रतिष्ठा में गिरावट, योग्य होने पर भी सम्मान न मिलना। करियर में रुकावट (Career Obstacles) जैसे पदोन्नति में विलंब, अवसर हाथ से निकलना या वरिष्ठों का सहयोग न मिलना। मानसिक अस्थिरता (Mental Restlessness) आत्मविश्वास में कमी, निराशा और भविष्य को लेकर असमंजस।।

  गुरु ग्रह के अशुभ प्रभाव।। Negative Effects of an Afflicted Jupiter.

गुरु यदि आपकी कुंडली में कमजोर अथवा पीड़ित हो “अशुभ बृहस्पति का दुष्प्रभाव एवं सरल उपाय।” तो आपके भाग्य का कमजोर होना। ज्ञान और विवेक में कमी। धन संचय में कठिनाई। वैवाहिक जीवन में नियमित तनाव का बढ़ना। संतान सुख में बाधा। धार्मिक जीवन से दूरी। गुरुजनों और शिक्षकों से मतभेद। सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी। करियर में धीमी प्रगति। अवसर मिलने के बाद भी उनका लाभ न उठा पाना जैसे कार्य आपके जीवन में होने लगते हैं।।

गुरु ग्रह को मजबूत करने के शास्त्रीय उपाय।। Scriptural Remedies to Strengthen Jupiter.

मित्रों, अगर आपके साथ भी ऐसा ही कुछ हो रहा हो तो घबराएँ नहीं बल्कि ज्यादा से ज्यादा भगवान विष्णु की उपासना। (Worship Lord Vishnu) करें और गुरुवार को तो अवश्य ही भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करें। गुरु ग्रह के मंत्र का जप (Chant Jupiter Mantra) ज्यादा से ज्यादा कौर नियमित करें। जैसे “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” या “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः” इन मन्त्रों में से किसी एक का का नियमित जप करें।।

गुरुवार का व्रत।। Thursday Fast.

जी हाँ मित्रों, गुरुवार का व्रत रखकर सात्त्विक जीवन अपनाएँ। पीली वस्तुओं का दान करें (Donate Yellow Items)। जैसे हल्दी, चने की दाल, पीले वस्त्र, केसर, पीले फल आदि का दान करें। गुरुजनों का सम्मान (Respect Teachers and Elders) जैसे शास्त्रों के अनुसार गुरु, माता-पिता, आचार्य और विद्वानों का सम्मान करने से गुरु ग्रह प्रसन्न होता है।।

धार्मिक ग्रंथों का पाठ।। Recitation of Sacred Texts.

मित्रों यह सबसे श्रेष्ठ उपाय हैंऔर इसमें कोई खर्च भी नहीं है। आजकल तो ग्रंथों के PDF सहजता से उपलब्ध हो जाते हैं और यदि न मिले आप हमसे मांग लीजिये। परन्तु नियमित श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीविष्णुसहस्रनाम तथा श्रीमद्भागवत महापुराण जैसे ग्रंथों का नियमित पाठ करें हिंदी में भी कर सकते हैं। इनका नियमित अध्ययन बहुत ही शुभ माना गया है।।

धन या श्रम दान और सेवा।। Charity and Service.

जरूरतमंद विद्यार्थियों, विद्वानों या ब्राह्मणों की यथाशक्ति सहायता करें। सदाचार का पालन (Follow Righteous Conduct) सत्य, विनम्रता, संयम और धर्म का पालन गुरु ग्रह को बल प्रदान करने वाला माना गया है। साथ ही किसी विद्वान ज्योतिषी से सलाह लेकर पुखराज रत्न भी धारण कर सकते हैं।।

क्या केवल रत्न पहनने से गुरु ग्रह ठीक हो जाता है? Does Wearing a Gemstone Alone Fix Jupiter.

मित्रों, परन्तु यहाँ एक बात का विशेष ध्यान रखें, कि शास्त्रीय दृष्टि से केवल पुखराज (Yellow Sapphire) रत्न धारण करना प्रत्येक व्यक्ति के लिए उचित नहीं माना जाता। रत्न धारण करने से पहले अवश्य ही किसी योग्य और अनुभवी वैदिक ज्योतिषी से जन्मकुंडली का परीक्षण आवश्य करवा लेवें। कभी-कभी अनुचित रत्न लाभ के स्थान पर हानि भी पहुँचा सकता है।।

महत्वपूर्ण सावधानी (Important Note) यह रखना है, कि किसी भी ग्रह को केवल एक ग्रह योग या उससे निर्मित किसी एक दोष देखकर शुभ या अशुभ घोषित नहीं किया जा सकता। ग्रह का वास्तविक फल उसकी राशि, भाव, दृष्टि, युति, नवांश, दशा-अंतरदशा और संपूर्ण जन्मकुंडली के संयुक्त अध्ययन के बाद ही यह निश्चित किया जा सकता है की वो ग्रह शुभ है अथवा अशुभ है।।

इस लेख का भावार्थ।। Conclusion.

गुरु ग्रह का अशुभ होना जीवन में शिक्षा, धन, विवाह, संतान, करियर, मान-सम्मान और आध्यात्मिक उन्नति जैसे अनेक क्षेत्रों में बाधाएँ उत्पन्न करता है। किंतु वैदिक ज्योतिष एवं अन्य शास्त्र यह भी बताते हैं “अशुभ बृहस्पति का दुष्प्रभाव एवं सरल उपाय।” कि श्रद्धा, सदाचार, गुरु-सेवा, भगवान विष्णु की उपासना, मंत्र-जप, दान तथा धर्मपालन के द्वारा गुरु ग्रह की कृपा प्राप्त की जा सकती है। इसलिए किसी भी उपाय को केवल अंधविश्वास के रूप में नहीं, बल्कि शास्त्रसम्मत आचरण, आत्मसंयम और सत्कर्म के साथ अपनाना चाहिए यही ग्रह दोष से मुक्ति का मार्ग है।।

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