HomeVedic Articlesमाता महागौरी की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।।

माता महागौरी की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।।

माता महागौरी की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।। Ma Mahagauri Special Bhog And Mantras.

माता महागौरी के पूजन का परिचय।। Introduction.

मित्रों, नवरात्रि के अष्टम दिवस माँ दुर्गा के अष्टम स्वरूप, माता महागौरी की उपासना की जाती है। माता का यह स्वरूप अत्यंत श्वेत तथा गौर-वर्ण का होता है। जिसकी तुलना शंख, चंद्रमा तथा कुंद-पुष्प की उज्ज्वलता से की जाती है। मान्यता है कि भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने हेतु की गई घोर तपस्या के कारण माता का शरीर श्याम-वर्ण हो गया था। परंतु भगवान शिव ने गंगाजल से इनका अभिषेक करके पुनः इन्हें गौर-वर्ण प्रदान किया। इसीलिए इन्हें महागौरी कहा जाता है। माता वृषभ अर्थात नंदी पर आरूढ़ होकर, अपने चार हाथों में त्रिशूल, डमरू, अभय-मुद्रा तथा वर-मुद्रा धारण करती हैं।।

वैदिक शास्त्रों में माता महागौरी को राहु ग्रह का भी अधिष्ठाता माना गया है। अतः इनकी उपासना से साधक के भीतर पवित्रता, शांति तथा समस्त पाप-दोषों के शमन की शक्ति का संचार होता है। जो साधक अपने जीवन में असंभव प्रतीत होने वाले कार्यों की सिद्धि, पवित्रता तथा मानसिक शांति की कामना रखते हैं। उनके लिए अष्टम दिवस का यह पूजन सर्वाधिक फलदायी माना जाता है।।

परन्तु आप बिलकुल घबराएँ नहीं। आज हम इसी विषय पर विस्तार से समझेंगे कि माता महागौरी का पूजन किस प्रकार करना चाहिए। इन्हें कौन सा भोग सर्वाधिक प्रिय होता है। किस विशिष्ट श्रृंगार एवं विशिष्ट मंत्र के जप से माता की शीघ्र प्रसन्नता प्राप्त होती है। तथा इस पूजन से कौन सा विशिष्ट फल प्राप्त होता है। यह सबकुछ हम आज के इस विशिष्ट लेख में समझेंगे।।

माता महागौरी की पूजन-विधि।। Puja Vidhi Of Maa Mahagauri.

मित्रों, नवरात्रि के अष्टम दिवस प्रातःकाल ब्रह्म-मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसी दिन अधिकांश स्थानों पर महाष्टमी का पूजन तथा कन्या-पूजन भी संपन्न किया जाता है। अतः पूजा-स्थान को विशेष रूप से शुद्ध करके, माता महागौरी की प्रतिमा अथवा चित्र को एक स्वच्छ चौकी पर स्थापित करना चाहिए।।

सर्वप्रथम श्रीगणेश जी तथा कलश का स्मरण करके पूजन आरंभ करना चाहिए। तत्पश्चात माता महागौरी का आवाहन करना चाहिए। माता को रोली-अक्षत अर्पित करने के पश्चात श्वेत पुष्प, विशेषकर मोगरा अथवा चमेली का पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके पश्चात धूप-दीप प्रज्वलित करके माता की आरती करनी चाहिए। साथ ही अंत में नौ कन्याओं को देवी-स्वरूप मानकर उनका पूजन तथा भोजन करवाकर ही पूजन संपन्न करना चाहिए।।

माता को सर्वाधिक प्रिय भोग, नारियल तथा दक्षिणा का योग।। The Bhog Most Dear To The Mother, The Offering Of Coconut And Dakshina.

मित्रों, शास्त्रों के अनुसार माता महागौरी को नारियल का भोग सर्वाधिक प्रिय माना जाता है। जिसे माता को अर्पित करने के पश्चात ब्राह्मण अथवा कन्याओं को दान करने से साधक के समस्त दुःख-दारिद्र्य का नाश होता है। तथा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।।

इसके साथ ही माता को नारियल से निर्मित मिठाई तथा काले चने एवं पूड़ी का भोग लगाना भी अत्यंत प्रिय माना जाता है। जो कन्या-पूजन में विशेष रूप से अर्पित किया जाता है। कुछ विद्वानों के अनुसार माता को शुद्ध घी से बनी खीर अथवा हलवे का भोग अर्पित करना भी विशेष रुप से शुभ फलदायी सिद्ध होता है। जिससे साधक के जीवन में स्थायी सुख-शांति बनी रहती है।।

माता का विशिष्ट श्रृंगार, श्वेत वस्त्र तथा चांदी के आभूषण का योग।। Special Adornment Of The Mother, White Attire And Silver Ornaments.

मित्रों, माता महागौरी को अपनी गौर-वर्णी तथा शांत प्रकृति के अनुरूप श्वेत रंग के वस्त्र अर्पित करना उनका अत्यंत प्रिय अलंकार माना जाता है। जो पवित्रता तथा शांति के प्रतीक भी होता हैं। इनके श्रृंगार में चांदी अर्थात रजत के आभूषण धारण कराना विशेष शुभ माना जाता है। क्योंकि चांदी को भी चंद्रमा के समान शीतल तथा उज्ज्वल माना गया है।।

इसके साथ ही माता को श्वेत पुष्पों की माला पहनाना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। जो इनके गौर-वर्णी स्वरूप को और भी अधिक सुशोभित करता है। इस प्रकार के शुभ्र तथा शांत श्रृंगार से माता शीघ्र प्रसन्न होकर साधक को पवित्रता तथा मानसिक शांति का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।।

माता महागौरी के विशिष्ट मंत्र, जप से शीघ्र प्रसन्नता का योग।। Special Mantras Of Maa Mahagauri, The Yoga Of Swift Grace Through Chanting.

मित्रों, माता महागौरी की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए अग्रलिखित मूल-मंत्र का श्रद्धापूर्वक नियमित जप करना चाहिए। “ॐ देवी महागौर्यै नमः।।” इसके साथ ही ध्यान-मंत्र के रूप में निम्न श्लोक का भी पाठ करना चाहिए।।

“श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।”

मित्रों, इस मंत्र का अर्थ है कि श्वेत वृषभ पर आरूढ़, श्वेत वस्त्र धारण करने वाली, पवित्र तथा भगवान शिव को आनंद प्रदान करने वाली देवी महागौरी मुझे शुभ फल प्रदान करें। प्रातः तथा सायं दोनों समय इस मंत्र का कम से कम एक माला अर्थात एक सौ आठ बार जप करने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं। मंत्र-जप के समय भी कुछ सावधानियाँ रखनी चाहिए। मंत्र-जप सदैव स्वच्छ आसन पर बैठकर, पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए।।

जप के समय शुद्ध स्फटिक की माला अथवा चांदी की माला का प्रयोग विशेष रूप से शुभ फलदायी माना जाता है। चूँकि माता महागौरी पवित्रता तथा शुचिता की देवी मानी जाती हैं। अतः इस दिन साधक को विशेष रूप से शारीरिक तथा मानसिक पवित्रता का ध्यान रखते हुए। स्वच्छ भाव से ही जप करना चाहिए।।

इस पूजन से प्राप्त होने वाला विशिष्ट फल।। Special Fruit Obtained From This Worship.

मित्रों, जो साधक नवरात्रि के अष्टम दिवस विधिपूर्वक माता महागौरी का पूजन, निर्धारित भोग-अर्पण तथा मंत्र-जप करता है। उसे असंभव प्रतीत होने वाले कार्यों की भी सिद्धि प्राप्त होती है। तथा उसके संचित समस्त पाप-दोषों का नाश होकर अंतःकरण पूर्णतः पवित्र हो जाता है। इसके साथ ही माता अपने भक्तों के समस्त कष्टों को तत्काल दूर करती हैं। इसीलिए इन्हें “कष्ट-हारिणी” भी कहा जाता है। तथा कुंआरी कन्याओं को मनोवांछित वर की प्राप्ति का विशिष्ट फल भी प्राप्त होता है।।

और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि इन उपायों को केवल औपचारिकता के लिए नहीं। बल्कि पूर्ण श्रद्धा तथा निरंतरता के साथ करना चाहिए। माता का पूजन शुद्ध मन, पवित्र भाव तथा सच्ची भक्ति-भावना के साथ ही करना चाहिए। क्योंकि बाह्य आडंबर की अपेक्षा आंतरिक पवित्रता तथा श्रद्धा ही माता की वास्तविक प्रसन्नता का कारण बनती है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, देवी भागवत पुराण तथा दुर्गा-सप्तशती में माता महागौरी को नवदुर्गाओं में अष्टम स्वरूप बताया गया है। जो अपने भक्तों के समस्त कष्टों का तत्काल निवारण करती हैं। स्कंद पुराण में भी यह उल्लेख मिलता है कि अष्टम नवरात्रि में इनकी विधिपूर्वक उपासना तथा कन्या-पूजन करने से साधक को समस्त इच्छित फलों की प्राप्ति होती है।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. माता महागौरी को कौन सा भोग सर्वाधिक प्रिय है।। Which Bhog Is Most Dear To Maa Mahagauri.

उत्तर:- नारियल तथा नारियल से निर्मित मिठाई, तथा काले चने-पूड़ी का भोग माता को सर्वाधिक प्रिय मानी जाती है।।

प्रश्न 2. माता महागौरी का मूल-मंत्र क्या है।। What Is The Primary Mantra Of Maa Mahagauri.

उत्तर:- “ॐ देवी महागौर्यै नमः।।” यह माता का मूल-मंत्र माना जाता है। जिसका नियमित जप माता की शीघ्र प्रसन्नता प्रदान करता है।।

प्रश्न 3. माता महागौरी की उपासना से क्या विशिष्ट फल प्राप्त होता है।। What Special Fruit Is Obtained From The Worship Of Maa Mahagauri.

उत्तर:- माता की उपासना से असंभव कार्यों की सिद्धि, समस्त पाप-दोषों का नाश तथा मनोवांछित वर की प्राप्ति जैसा विशिष्ट फल प्राप्त होता है। जिस कारण इन्हें “कष्ट-हारिणी” भी कहा जाता है।।

प्रश्न 4. अष्टमी के दिन कन्या-पूजन का क्या महत्व है।। What Is The Significance Of Kanya Pujan On Ashtami.

उत्तर:- अष्टमी के दिन नौ कन्याओं को साक्षात देवी-स्वरूप मानकर उनका पूजन तथा भोजन करवाना माता महागौरी के पूजन का अभिन्न तथा अत्यंत शुभ फलदायी अंग माना जाता है।।

प्रश्न 5. मंत्र-जप कितनी बार तथा किस समय करना चाहिए।। How Many Times And At What Time Should The Mantra Be Chanted.

उत्तर:- प्रातः तथा सायं दोनों समय कम से कम एक माला अर्थात एक सौ आठ बार मंत्र-जप करना चाहिए। जिससे माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, नवरात्रि के अष्टम दिवस माता महागौरी की विधिपूर्वक उपासना, नारियल के भोग का अर्पण, शुभ्र श्रृंगार, कन्या-पूजन तथा “ॐ देवी महागौर्यै नमः” मंत्र के नियमित जप से साधक को माता की विशेष कृपा की प्राप्त होती है। यह पूजन न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। बल्कि साधक के जीवन से समस्त कष्ट, पाप-दोष तथा दारिद्र्य का नाश भी करता है। जो आगामी नवरात्रि-साधना के समापन के लिए अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि इस पूजन को विधिपूर्वक संपन्न करने हेतु किसी विद्वान तथा अनुभवी ब्राह्मण अथवा आचार्य से विस्तृत मार्गदर्शन अवश्य प्राप्त करना चाहिए। ताकि पूजन में किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए तथा माता की पूर्ण कृपा प्राप्त हो सके।।

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