HomeMangal Grahaकुंडली के अष्टम भाव में बैठे मंगल का फल और उपाय।।

कुंडली के अष्टम भाव में बैठे मंगल का फल और उपाय।।

कुंडली के अष्टम भाव में बैठे मंगल का फल और उपाय।। Mars in Eighth House Effects.

लेख का एक परिचय।। Introduction.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष में मंगल को साहस, पराक्रम, ऊर्जा तथा रक्त का कारक ग्रह माना गया है। अष्टम भाव आयु, अकस्मात घटनाएँ, गुप्त विद्या तथा उत्तराधिकार का प्रतिनिधित्व करता है। जब साहस के कारक मंगल इसी अष्टम भाव में स्थित हों, तब जातक की आयु, संकट सहने की क्षमता तथा गुप्त विषयों में रुचि पर विशेष प्रभाव देखने को मिलता है।।

मंगल की स्थिति यदि बलवान एवं शुभ हो तो संकट के समय अद्भुत साहस तथा गुप्त धन में लाभ प्रदान मिलता है। वहीं पीड़ित या अशुभ मंगल दुर्घटना, शल्य चिकित्सा तथा रक्त संबंधी समस्याएँ भी उत्पन्न करता है। वैसे वास्तविक (Accurate) फल का निर्णय तो सदैव संपूर्ण जन्मकुंडली, दशा और गोचर के आधार पर ही किया जाता है।।

अष्टम भाव में मंगल का सामान्य स्वभाव।। General Nature.

मित्रों, अष्टम भाव में मंगल जातक को साहसी, गूढ़ रुचि वाला तथा संकटों से जूझने में सक्षम स्वभाव प्रदान करता है। ऐसे जातक गुप्त विद्या, अनुसंधान, तंत्र-मंत्र अथवा रहस्यमय विषयों की ओर स्वाभाविक रूप से आकर्षित होते हैं। तथा कठिन परिस्थितियों में भी अपना साहस नहीं खोते।।

स्वभाव में जोखिम उठाने तथा अकस्मात निर्णय लेने की प्रवृत्ति के कारण ये कई बार दुस्साहसिक कार्यों में भी संलग्न हो जाते हैं। इनकी वाणी में तीव्रता तथा गुप्त विषयों के प्रति गंभीरता स्पष्ट रूप से झलकती है।।

अष्टम भाव में मंगल का शुभ फल।। Auspicious Effects.

मित्रों, यदि अष्टम भाव का मंगल स्वराशि, उच्च राशि अथवा शुभ ग्रहों की दृष्टि से युक्त होकर बलवान हो तो जातक को दीर्घायु, संकट के समय अद्भुत साहस तथा गुप्त धन अथवा उत्तराधिकार में लाभ प्राप्त होता है। ऐसे जातक अनुसंधान, चिकित्सा अथवा गुप्त विज्ञान से जुड़े क्षेत्रों में विशेष सफलता प्राप्त करते हैं।।

संकटों से निकलने की अद्भुत क्षमता जीवन भर बनी रहती है। तथा जातक को अप्रत्याशित स्रोतों से भी धन-लाभ प्राप्त होता है। साहसपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता के कारण जातक जोखिम भरी परिस्थितियों में भी सफलता प्राप्त कर लेता है।।

अष्टम भाव में मंगल का अशुभ फल।। Malefic Effects.

मित्रों, यदि अष्टम भाव का मंगल नीचस्थ, पापग्रहों से पीड़ित अथवा निर्बल हो तो जातक को अकस्मात दुर्घटना, चोट अथवा शल्य चिकित्सा की स्थिति का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातकों में उतावलापन तथा जोखिम भरे निर्णयों की प्रवृत्ति भी देखी जाती है।।

विवादित संपत्ति अथवा उत्तराधिकार को लेकर पारिवारिक विवाद की स्थिति भी बनती है। शीघ्रता में लिए गए निर्णयों के कारण धन तथा स्वास्थ्य दोनों की ही हानि भी कभी-कभी हो जाती है। तथा ऐसे में मानसिक तनाव की प्रवृत्ति भी बनी रहती है।।

अष्टमस्थ मंगल का स्वास्थ्य पर प्रभाव।। Health Effects.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष के अनुसार अष्टम भाव का संबंध आयु तथा गुह्य अंगों से माना गया है। और मंगल का संबंध रक्त तथा शरीर की ऊर्जा से होता है। अष्टम भाव में मंगल यदि शुभ हो तो संकट में भी शारीरिक शक्ति तथा रोगप्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है।।

इसके विपरीत यदि मंगल अशुभ हो तो दुर्घटना, चोट, रक्त संबंधी विकार अथवा शल्य चिकित्सा जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। ऐसी स्थिति में वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतने के साथ-साथ ज्योतिषीय वैदिक उपायों को अवश्य अपनाना चाहिए। इससे भी ज्यादा जरुरत पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श भी अवश्य लेना चाहिए।।

अष्टमस्थ मंगल का वैदिक उपाय।। Vedic Remedies.

मित्रों, अष्टम भाव के मंगल को शुभ अथवा बलवान बनाए रखने के लिए आप मंगल देवता के मंत्र का जप (Chant Mars Mantra) “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” का श्रद्धापूर्वक जप करें। हनुमान जी की उपासना (Worship Lord Hanuman) तथा सुंदरकांड का नियमित पाठ अत्यन्त शुभ फलदायी माना गया है।।

एक विकल्प मंगलवार का व्रत (Observe Tuesday Fast) रखना तथा रक्तदान अथवा लाल वस्तुओं का दान (Donate Red Items or Blood Donation) करना भी शुभ माना जाता है। वाहन चलाते समय तथा शल्य चिकित्सा जैसे निर्णयों में विशेष सावधानी बरतना (Exercise Caution in Risky Decisions) अष्टम भाव के मंगल के दुष्प्रभाव को शांत करने में सहायक माना जाता है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में मंगल को साहस, पराक्रम तथा ऊर्जा का प्रमुख कारक ग्रह बताया गया है। फलदीपिका के अनुसार अष्टम भाव में स्थित बलवान मंगल जातक को संकट में साहस तथा दीर्घायु प्रदान करता है। जबकि पीड़ित मंगल दुर्घटना तथा स्वास्थ्य संबंधी बाधाएँ उत्पन्न करता है।।

बृहज्जातक में अष्टमस्थ मंगल को गुप्त विषयों में सफलता तथा संकट सहने की क्षमता का प्रमुख कारक माना गया है। इसी प्रकार जातक पारिजात में भी अष्टम भाव के मंगल को आयु तथा अकस्मात घटनाओं दोनों पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालने वाला ग्रह बताया गया है।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

Q 1. अष्टम भाव में शुभ मंगल क्या फल देता है? Effects of Auspicious Mars in 8th House.

उत्तर:- अष्टम भाव का शुभ मंगल दीर्घायु, संकट में साहस, गुप्त धन में लाभ तथा अनुसंधान के क्षेत्रों में सफलता जैसे उत्तम फल प्रदान करता है।।

Q 2. अष्टम भाव में अशुभ मंगल क्या नुकसान देता है? Problems Caused by Malefic Mars in 8th House.

उत्तर:- अष्टम भाव का अशुभ मंगल अकस्मात दुर्घटना, शल्य चिकित्सा, रक्त संबंधी विकार तथा उत्तराधिकार से जुड़े विवाद जैसी बाधाएँ उत्पन्न करता है।।

Q 3. अष्टम भाव के मंगल से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ कौन-सी हैं? Health Issues Linked to Mars in 8th House.

उत्तर:- वैदिक ज्योतिष में अष्टम भाव का संबंध आयु तथा गुह्य अंगों से माना गया है। पीड़ित मंगल दुर्घटना तथा रक्त विकार जैसी समस्याओं की ओर संकेत देता है। ऐसे में ज्योतिषीय परामर्श के साथ-साथ डॉक्टर से इलाज भी करवाना चाहिए।।

Q 4. अष्टम भाव के मंगल को बलवान बनाने का सबसे प्रभावी वैदिक उपाय क्या है? Most Effective Remedy for Mars in 8th House.

उत्तर:- “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” इस मंत्र का जप, हनुमान जी की उपासना, मंगलवार का व्रत और रक्तदान अथवा लाल वस्तुओं का दान ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।।

Q 5. क्या अष्टम भाव का मंगल सदैव आयु कम करता है? Does Mars in 8th House Always Reduce Longevity.

उत्तर:- नहीं। यह पूर्णतः मंगल की राशि, दृष्टि, बलाबल तथा संपूर्ण जन्मकुंडली पर निर्भर करता है। बलवान एवं शुभ मंगल दीर्घायु भी प्रदान करता है। अतः केवल भाव के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, कुंडली के अष्टम भाव में स्थित मंगल शुभ हो तो जातक को संकट में साहस, दीर्घायु तथा गुप्त विषयों में सफलता प्रदान करता है। वहीं अशुभ होने पर दुर्घटना, शल्य चिकित्सा तथा रक्त संबंधी समस्याएँ भी उत्पन्न करता है।।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगल ग्रह के मंत्र का जप, हनुमान जी की उपासना, मंगलवार का व्रत, मंगल से सम्बंधित दान तथा सतर्कता से निर्णय लेने की क्षमता इसे संतुलित एवं बलवान बनाती है। परन्तु किसी भी विशेष उपाय को अपनाने से पहले किसी अनुभवी, विद्वान एवं योग्य ज्योतिषी से संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण कराना उचित रहेगा।।

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