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नवरात्रि में क्या करें और क्या न करें व्रत के सम्पूर्ण नियम।।

नवरात्रि में क्या करें और क्या न करें व्रत के सम्पूर्ण नियम।। Navratri Vrat Rules Dos and Donts.

नवरात्रि व्रत का परिचय।। Introduction.

मित्रों, हमने पिछले लेख में नवरात्रि में अनेकों लेखों के माध्यम से अनेकों नियमों को विस्तार से समझा था। परंतु नवरात्रि की साधना केवल दीपक जलाने तक सीमित नहीं है। क्योंकि इन नौ दिनों में सबसे अधिक पालन किया जाने वाला संकल्प व्रत ही होता है। करोड़ों श्रद्धालु कोई पूरे नौ दिन, कोई केवल पहले तथा अंतिम दिन, तो कोई अष्टमी-नवमी को व्रत रखते हैं। और हर वर्ष घर-घर में यही प्रश्न उठता है कि क्या खाएँ, क्या न खाएँ, और किन बातों से बचें।।

इस विषय में एक बात पहले ही स्पष्ट कर देना आवश्यक है। व्रत के नियम सभी क्षेत्रों, संप्रदायों तथा कुल-परंपराओं में एक जैसे नहीं होते। कहीं सेंधा नमक चलता है तो कहीं पूर्णतः निराहार रहा जाता है। कहीं एक समय फलाहार होता है तो कहीं दिन में दो बार। इसलिए जो बातें आज हम बताएँगे, वे सर्वमान्य तथा सामान्य परंपरा पर आधारित होता हैं। तथा अपनी कुल-परंपरा को सर्वोपरि रखना ही उचित है।।

साथ ही मित्रों, व्रत का मूल उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं, अपितु मन, वाणी तथा आहार को संयमित करके माता दुर्गा के चरणों में स्थिर होना है। यदि व्रत इतना कठिन हो जाए कि स्वास्थ्य बिगड़ने लगे, तो वह साधना का उद्देश्य ही खो देता है। इसीलिए आज हम केवल नियम ही नहीं, अपितु उनके व्यावहारिक पक्ष को भी समझेंगे।।

तो आज हम विस्तार से समझेंगे कि व्रत का संकल्प किस प्रकार लिया जाए। व्रत में क्या खाना शुभ तथा उचित माना गया है। किन वस्तुओं से बचना चाहिए। आचरण में क्या करें तथा क्या न करें। किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए। तथा व्रत का पारण किस प्रकार किया जाए।इन सभी बातों को इस लेख के माध्यम से समझने का प्रयास करेंगे।।

व्रत का संकल्प एवं तैयारी।। Vow and Preparation for the Fast.

मित्रों, नवरात्रि व्रत का आरंभ प्रतिपदा के दिन कलश-स्थापना के साथ होता है। प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें तथा हाथ में जल, अक्षत एवं पुष्प लेकर माता दुर्गा का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लना चाहिए। संकल्प में यह स्पष्ट रखें कि आप कितने दिन व्रत रखेंगे। क्योंकि जो संकल्प लिया जाए, उसी का पालन करना सच्ची निष्ठा माना जाता है।।

व्रत आरंभ होने से एक-दो दिन पहले ही घर की सफाई कर लें तथा पूजा-स्थान को शुद्ध कर लें। रसोई में व्रत के भोजन के लिए अलग बर्तन रखना अनेक परिवारों की परंपरा है। साथ ही सेंधा नमक, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, मखाना, फल तथा दूध-दही जैसी सामग्री पहले से ले आएँ। ताकि बीच में कोई कठिनाई न हो।।

यहाँ एक व्यावहारिक सलाह यह भी है कि व्रत के पहले दिन से अचानक बहुत कठोर नियम न अपनाएँ। यदि आप पहली बार पूरे नौ दिन का व्रत रख रहे हैं। तो अपनी क्षमता का आकलन करके ही संकल्प लें। साथ ही यह भी स्मरण रखें कि कम दिन का व्रत श्रद्धा से निभाना चाहिए। लंबे व्रत को बीच में अधूरा छोड़ देने से कहीं श्रेष्ठ होता है।।

व्रत में क्या खाना उचित माना गया है।। What to Eat During the Fast.

मित्रों, नवरात्रि के व्रत में सात्त्विक तथा हल्का आहार लिया जाना परंपरागत रुप से श्रेष्ठ माना जाता है। परंपरा में फल, दूध, दही, पनीर, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा, समा के चावल अर्थात सामक, राजगिरा, आलू, शकरकंद, लौकी तथा मेवे सामान्यतः व्रत में चलने वाले पदार्थ माने जाते हैं। इन्हें अनाज की श्रेणी में नहीं गिना जाता, इसीलिए ये फलाहार के अंतर्गत लिए जाते हैं।।

नमक के स्थान पर केवल सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है। जिसे व्रत के लिए शुद्ध माना गया है। भोजन बनाने के लिए शुद्ध घी अथवा मूँगफली के तेल का प्रयोग प्रचलित है। मसालों में काली मिर्च, जीरा, हरी मिर्च तथा सेंधा नमक सामान्यतः चलते हैं। परंतु इसमें भी कुल-परंपरा के अनुसार भेद हो सकता है। अतः अपने घर एवं कुल की रीति का ही पालन करें।।

इसके साथ ही मित्रों, बार-बार तले हुए अथवा अत्यधिक भारी पदार्थ खाने से व्रत का मूल उद्देश्य ही नष्ट हो जाता है। पूरे दिन केवल पकौड़े, पूरी तथा मिठाइयों पर निर्भर रहने के बजाय फल, दूध तथा हल्का भोजन लेना शरीर के लिए भी अनुकूल रहता है। पर्याप्त जल, नारियल पानी तथा छाछ का सेवन भी करते रहें। ताकि शरीर में जल की कमी न हो।।

व्रत में किन वस्तुओं से बचना चाहिए।। What to Avoid During the Fast.

मित्रों, नवरात्रि में गेहूँ का आटा, चावल, दालें तथा अन्य अनाज और उनसे बने पदार्थ सामान्यतः वर्जित माने जाते हैं। साधारण पिसा हुआ नमक, प्याज, लहसुन, मांस, मछली, अंडा तथा मदिरा का सेवन तो इन नौ दिनों में पूर्णतः त्याज्य बताया गया है। जिन घरों में पूरे नवरात्रि व्रत नहीं भी रखे जाते, वहाँ भी इन नौ दिनों में तामसिक भोजन से दूर रहने की परंपरा है।।

साथ ही बासी, जूठा अथवा बाजार का अशुद्ध भोजन भी व्रत में अनुचित माना गया है। जो पदार्थ व्रत के लिए बेचे जाते हैं, उनमें कई बार मिलावट अथवा अशुद्धता की संभावना रहती है। इसलिए कुट्टू जैसे आटे को खरीदते समय उसकी ताजगी तथा गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें। यह इसलिए भी आवश्यक है कि बासी अथवा खराब आटे से स्वास्थ्य-संबंधी समस्या उत्पन्न होने के उदाहरण भी देखे गए हैं।।

इसके अतिरिक्त पूरे दिन अत्यधिक चाय-कॉफी, तंबाकू, गुटखा तथा नशे की किसी भी वस्तु से भी बचना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को इनकी लत हो, तो अचानक छोड़ने से असुविधा हो सकती है। ऐसी स्थिति में धीरे-धीरे कम करना ही व्यावहारिक उपाय होता है। तथा व्रत का भाव यही रहे कि इन्हें स्थायी रूप से छोड़ने की दिशा में आगे बढ़ा जाए।।

आचरण में क्या करें।। What to Do in Conduct.

मित्रों, नवरात्रि में आचरण की शुद्धता भोजन की शुद्धता से भी अधिक महत्वपूर्ण मानी गई है। प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त अथवा प्रातःकाल उठकर स्नान करें। माता की आरती करें तथा दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा अथवा नवार्ण मंत्र का जप करें। जितना संभव हो, मौन तथा सत्य-भाषण का पालन करें तथा घर में शांत एवं सकारात्मक वातावरण बनाए रखें।।

इन नौ दिनों में दान, सेवा तथा जरूरतमंदों की सहायता करना विशेष रूप से पुण्यदायी माना गया है। गाय को चारा खिलाना, गरीबों को भोजन कराना तथा कन्याओं का सम्मान करना माता की उपासना के ही अंग होते हैं। माता-पिता, बड़ों तथा घर की स्त्रियों का आदर करना भी इन दिनों की साधना का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है।।

संभव हो तो भूमि पर अथवा सादे बिस्तर पर सोना तथा ब्रह्मचर्य का पालन करना भी परंपरा में बताया गया है। प्रतिदिन माता के नौ स्वरूपों, अर्थात शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी तथा सिद्धिदात्री का क्रमशः स्मरण तथा पूजन करने से साधना को पूर्णता मिलती है।।

आचरण में क्या न करें।। What Not to Do in Conduct.

मित्रों, इन नौ दिनों में क्रोध, कटु वचन, झगड़ा, निंदा तथा किसी का अपमान करने से भी बचना चाहिए। परंपरा में यह कहा गया है कि जिस घर में नवरात्रि में क्लेश होता है, वहाँ साधना का फल क्षीण हो जाता है। इसलिए व्रत रखने वाले को ही नहीं, पूरे परिवार को इन दिनों में शांति बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।।

अनेक परिवारों में नवरात्रि के दौरान बाल कटवाना, दाढ़ी बनवाना तथा नाखून काटना वर्जित माना जाता है। तथा दिन में सोना भी अनुचित कहा गया है। साथ ही चमड़े की वस्तुओं, जैसे बेल्ट, पर्स अथवा जूते का पूजा-स्थान के समीप प्रयोग नहीं करना चाहिए। ये नियम सभी कुलों में समान रूप से लागू नहीं होते। अतः अपनी परंपरा के अनुसार ही इनका पालन करें।।

इसके अतिरिक्त किसी पर अनावश्यक क्रोध करना, झूठ बोलना, किसी का धन अथवा वस्तु हड़पना। तथा दिखावे के लिए व्रत करना भी अनुचित माना गया है। शास्त्रों का मूल भाव यही है कि व्रत का फल बाह्य आडंबर से नहीं, अपितु अंतःकरण की शुद्धता से प्राप्त होता है। इसलिए व्रत की चर्चा बार-बार करके उसे प्रदर्शन का विषय न बनाएँ।।

किन्हें सावधानी रखनी चाहिए।। Who Should Take Precautions.

मित्रों, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्रत को स्वास्थ्य की कीमत पर कभी न रखें। गर्भवती तथा स्तनपान कराने वाली स्त्रियाँ, छोटे बच्चे, वृद्धजन तथा गंभीर रोगों से पीड़ित व्यक्ति कठोर निराहार व्रत से बचें। मधुमेह, रक्तचाप, हृदय रोग अथवा किसी भी नियमित औषधि पर निर्भर व्यक्ति व्रत रखने से पूर्व अपने चिकित्सक से अवश्य परामर्श लें।।

शास्त्र-परंपरा स्वयं यह स्वीकार करती है कि असमर्थ व्यक्ति के लिए व्रत में छूट है। ऐसे व्यक्ति फलाहार, दूध अथवा हल्का सात्त्विक भोजन लेकर भी व्रत का भाव रख सकते हैं। अथवा परिवार के किसी सदस्य द्वारा व्रत करवाने की भी परंपरा बताई गई है। औषधि को व्रत के नाम पर छोड़ देना किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा सकता।।

इसी प्रकार विद्यार्थी, परीक्षा देने वाले अथवा कठिन शारीरिक परिश्रम करने वाले लोग अपनी क्षमता के अनुसार हल्का व्रत रख सकते हैं। मित्रों, माता को आपकी भूख नहीं, आपकी श्रद्धा चाहिए। यदि आप पूरे दिन सात्त्विक आचरण, जप तथा सेवा में लगे रहें। तो वही आपके व्रत की पूर्णता मानी जाएगी।।

अष्टमी-नवमी तथा कन्या-पूजन।। Ashtami-Navami and Kanya Pujan.

मित्रों, नवरात्रि के व्रत का समापन प्रायः अष्टमी अथवा नवमी को कन्या-पूजन के साथ किया जाता है। इस दिन नौ कन्याओं तथा एक बालक को, जिन्हें भैरव का स्वरूप माना जाता है। घर बुलाकर उनके चरण धोए, तिलक लगाये और हलवा, पूरी तथा चने का प्रसाद खिलाया जाता है। इसके पश्चात उन्हें दक्षिणा तथा उपहार देकर आशीर्वाद लिया जाता है।।

कन्या-पूजन को माता की प्रत्यक्ष उपासना माना गया है। इसलिए इसे अत्यंत श्रद्धा, प्रेम तथा सम्मान के साथ करना चाहिए। कन्याओं को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं, अपितु माता के स्वरूप में देखकर उनका आदर करें। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि प्रसाद शुद्ध तथा स्वच्छ हो। तथा बच्चों की रुचि एवं स्वास्थ्य का भी ध्यान रखकर भोजन करवाया जाए।।

अष्टमी अथवा नवमी की तिथि प्रत्येक वर्ष पंचांग के अनुसार भिन्न-भिन्न होती है। तथा कभी-कभी तिथि-संयोग के कारण दोनों में से किसी एक दिन ही पूजन करना उचित बताया जाता है। अतः कन्या-पूजन तथा हवन का सटीक समय जानने हेतु स्थानीय पंचांग अथवा विद्वान ब्राह्मण से इस विषय में परामर्श अवश्य लें।।

व्रत का पारण एवं समापन।। Breaking the Fast and Conclusion.

मित्रों, नवरात्रि व्रत का पारण सामान्यतः नवमी के हवन तथा कन्या-पूजन के पश्चात, अथवा दशमी के दिन किया जाता है। यह भी कुल-परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकता है। पारण के समय सर्वप्रथम माता को भोग अर्पित करें। तत्पश्चात प्रसाद ग्रहण करें, तथा सात्त्विक भोजन से ही व्रत खोलें। मेरा मानना यह है, कि हवन में पूरी डालने के उपरान्त पारण का रास्ता प्रशस्त हो जाता है।।

व्रत खोलते समय एकाएक अत्यधिक भारी भोजन करने से बचना चाहिए। क्योंकि नौ दिन के संयम के बाद शरीर को धीरे-धीरे सामान्य आहार पर लौटाना उचित होता है। पारण के दिन भी दान-पुण्य करना तथा माता का आभार प्रकट करना शुभ माना जाता है। इस प्रकार व्रत का संपूर्ण चक्र श्रद्धा से आरंभ होकर कृतज्ञता में पूर्ण होता है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, दुर्गा सप्तशती में शरत्काल की महापूजा का उल्लेख मिलता है। जहाँ देवी स्वयं अपने माहात्म्य के श्रवण का फल बताती हैं। देवीभागवत पुराण में भी शारदीय तथा वासंतिक नवरात्रि की उपासना। व्रत तथा कन्या-पूजन की महिमा विस्तार से वर्णित है। इन ग्रंथों का मूल संदेश श्रद्धा, संयम तथा सेवा पर ही केंद्रित होती है।।

धर्मसिंधु तथा निर्णयसिंधु जैसे निबंध-ग्रंथों में नवरात्रि की तिथि-निर्णय, व्रत-विधि तथा पारण-समय का विवेचन मिलता है। साथ ही इन ग्रंथों तथा लोक-परंपराओं में क्षेत्र-भेद से अनेक भिन्नताएँ भी दिखाई देती हैं। इसीलिए किसी भी विशेष नियम के विषय में अपनी कुल-परंपरा तथा स्थानीय विद्वान ब्राह्मण का मार्गदर्शन लेना श्रेयस्कर माना जाता है।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. नवरात्रि व्रत में क्या खाना चाहिए।। What Should Be Eaten During Navratri Fast.

उत्तर:- फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े तथा कुट्टू का आटा, सामक चावल, आलू, शकरकंद तथा सेंधा नमक का प्रयोग सामान्यतः व्रत में चलता है। परंतु कुल-परंपरा के अनुसार इसमें भेद हो सकता है।।

प्रश्न 2. नवरात्रि व्रत में किन वस्तुओं से बचना चाहिए।। What Should Be Avoided During Navratri Fast.

उत्तर:- गेहूँ, चावल, दालें, साधारण नमक, प्याज, लहसुन, मांस, मछली, अंडा तथा मदिरा से बचना चाहिए। तथा बासी अथवा अशुद्ध भोजन भी वर्जित माना गया है।।

प्रश्न 3. क्या मधुमेह अथवा किसी रोग से पीड़ित व्यक्ति व्रत रख सकता है।। Can a Person With Diabetes or Any Illness Observe the Fast.

उत्तर:- ऐसे व्यक्ति को व्रत रखने से पूर्व अपने चिकित्सक से अवश्य परामर्श लेना चाहिए। औषधि छोड़कर निराहार व्रत करना उचित नहीं होता है। तथा फलाहार अथवा हल्के सात्त्विक भोजन के साथ व्रत का भाव रखा जा सकता है।।

प्रश्न 4. क्या नवरात्रि में बाल अथवा नाखून काटना वर्जित है।। Is Cutting Hair or Nails Prohibited in Navratri.

उत्तर:- अनेक परिवारों में यह परंपरा से वर्जित माना जाता है। परंतु यह सभी कुलों में समान नहीं है। अतः अपनी कुल-परंपरा के अनुसार ही इसका पालन करना चाहिए।।

प्रश्न 5. नवरात्रि व्रत का पारण कब करना चाहिए।। When Should Navratri Fast Be Broken.

उत्तर:- सामान्यतः नवमी के हवन तथा कन्या-पूजन के पश्चात अथवा दशमी के दिन पारण किया जाता है। परंतु यह कुल-परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकता है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, नवरात्रि का व्रत केवल भोजन के नियमों का नाम नहीं है। यह आहार, वाणी तथा विचार, तीनों के संयम की साधना है। सात्त्विक भोजन, शुद्ध आचरण, नियमित पूजा, दान-सेवा तथा कन्या-पूजन, ये सभी मिलकर इस व्रत को पूर्णता प्रदान करते हैं। तथा इनके मूल में केवल एक भाव है, माता के प्रति सच्ची श्रद्धा।।

इस विषय में मैं यही कहूँगा कि नियम तभी सार्थक हैं। जब वे मन को शांत तथा शरीर को स्वस्थ रखें। यदि कोई व्यक्ति अपनी क्षमता से अधिक कठोर नियम अपनाकर स्वयं को कष्ट में डाल ले, तो यह व्रत का उद्देश्य नहीं है। अपनी क्षमता तथा परिस्थिति के अनुसार संकल्प लें। और जो संकल्प लें उसे सच्चाई से निभाएँ।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि अपनी कुल-परंपरा, स्वास्थ्य-स्थिति तथा विशेष परिस्थिति के अनुसार किसी विद्वान, योग्य एवं अनुभवी ब्राह्मण तथा आवश्यकता होने पर अपने चिकित्सक से भी परामर्श लेना चाहिए। ताकि व्रत पूर्ण श्रद्धा, सुरक्षा तथा निश्चिंत मन से संपन्न हो सके। आप सभी सनातनियों को नवरात्रि के इस पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनायें।।

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