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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 05 नवम्बर 2026 दिन गुरुवार।।
मित्रों, तारीख 05 नवम्बर 2026 दिन गुरुवार को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। अर्थात आज रम्भा नाम का एकादशी व्रत सभी के लिए है। आप सभी एकादशी व्रतियों को रम्भा एकादशी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें। शास्त्रानुसार एकादशी व्रत सर्वोत्तम व्रत होता है, जिसे लगभग सभी सनातनियों को अवश्य करना चाहिए। आज गोवत्स द्वादशी का व्रत भी प्रदोष काल में मनाया जायेगा। आज यायिजययोग है। आप सभी सनातनियों को “रम्भा एकादशी व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें एवं मंगलकामनाएँ।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 05 नवम्बर 2026 दिन गुरुवार।।
Aaj ka Panchang 05 November 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – शरद.
मास – कार्तिक.
पक्ष – कृष्ण.
गुजराती पंचांग के अनुसार – अश्विन कृष्ण पक्ष.
#Panchang_05_November_2026
तिथि – एकादशी 10:36 AM बजे तक उपरान्त द्वादशी तिथि है।।
नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी 03:31 AM तक उपरान्त उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है।।
योग – ऐन्द्र 06:27 AM तक उपरान्त वैधृति योग है।।
करण – बालव 10:36 AM तक उपरान्त कौलव 22:31 PM तक उपरान्त तैतिल करण है।।
चन्द्रमा – सिंह राशि पर 09:35 AM तक उपरान्त कन्या राशि पर।।
सूर्य – तुला राशि एवं स्वाति नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:43:07
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 17:59:48
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 06:30:39
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 17:30:45
राहुकाल (अशुभ) – सुबह 13:47 बजे से 15:11 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.10 बजे से 12.34 बजे तक।।
#Panchang_05_November_2026
मित्रों, तारीख 05 नवम्बर 2026 दिन गुरुवार को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। अर्थात आज रम्भा नाम का एकादशी व्रत सभी के लिए है। आप सभी एकादशी व्रतियों को रम्भा एकादशी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें। शास्त्रानुसार एकादशी व्रत सर्वोत्तम व्रत होता है, जिसे लगभग सभी सनातनियों को अवश्य करना चाहिए। आज गोवत्स द्वादशी का व्रत भी प्रदोष काल में मनाया जायेगा। आज यायिजययोग है। आप सभी सनातनियों को “रम्भा एकादशी व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें एवं मंगलकामनाएँ।।
एकादशी तिथि विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये। चावल खाना इस एकादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। ऐसा करने से पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।।
एकादशी तिथि के देवता विश्वदेवताओं को बताया गया है। यह एकादशी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी गयी है। यह एकादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।।
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है। मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं। इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है। इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है। समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है।।
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#Panchang_05_November_2026
वैदिक सनातन धर्म में एकादशी तिथि बहुत ही पुण्य फलदायी तिथि मानी जाती है। प्रत्येक मास में एकादशी तिथि दो बार आती है। इसके अनुसार प्रत्येक वर्ष में 24 एकादशी तिथियां आती हैं। लेकिन अधिक मास की एकादशियों के साथ इनकी संख्या 26 हो जाती है। वैदिक पञ्चांग की ग्यारहवीं तिथि एकादशी कहलाती है। इस तिथि का नाम ग्यारस या ग्यास भी है। यह तिथि चंद्रमा की ग्यारहवीं कला है, इस कला में अमृत का पान उमा देवी करती हैं।।
एकादशी तिथि का निर्माण शुक्ल पक्ष में तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर 121 डिग्री से 132 डिग्री तक होता है। वहीं कृष्ण पक्ष में एकादशी तिथि का निर्माण सूर्य और चंद्रमा का अंतर 301 से 312 डिग्री तक होता है। एकादशी तिथि के स्वामी विश्वेदेवा को माना गया है। संतान, धन-धान्य और घर की प्राप्ति के लिए इस तिथि में जन्मे जातकों को विश्वेदेवा की पूजा अवश्य करनी चाहिए।।
यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।।
#Panchang_05_November_2026
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में जन्म लेने वाला व्यक्ति युद्ध विद्या में निपुण, लड़ाकू एवं साहसी होता है। ऐसे लोग देश और समाज में अपने रौबीले व्यक्तित्व के कारण पहचाने जाते हैं। उत्तराफाल्गुनी के जातक दूसरों का अनुसरण नहीं करते अपितु लोग उनका अनुसरण करते हैं। आपमें नेतृत्व के गुण जन्म से ही होते हैं अतः आप अपना कार्य करने में खुद ही सक्षम होते हैं।।
इस नक्षत्र में जन्मा जातक दूसरों के इशारों पर चलना पसंद नहीं करता। यह लोग सिंह की भाँती अकेले ही अपना शिकार खुद करते हैं। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र जातक राजा के समान भोगी एवं पराई स्त्री में रूचि रखने वाले होते हैं। चन्द्रमा के प्रभाव में यदि हो तो जातक विद्या बुद्धि से युक्त धनी एवं भाग्यवान होता है। उत्तराफाल्गुनी के जातक मित्र बनाने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।।
ऐसे लोग मित्रों की सहायता करने तथा उनसे सहायता प्राप्त करने में भी यह संकोच नहीं करते हैं। ऐसे जातक मित्रों को बहुत महत्व देते हैं। मित्रता के सम्बन्ध में भी इनके साथ यह बातें लागू होती हैं। ये जिनसे दोस्ती करते हैं उसके साथ लम्बे समय तक मित्रता निभाते हैं। उदारता तथा दूसरों की सहायता करना आपके स्वभाव में ही है। आप अतिथितियों के आदर सत्कार में कभी कोई कमी नहीं छोड़ते हैं।।
ऐसे लोग बुद्धिमान होने के साथ-साथ व्यवहार कुशल एवं हास्य प्रेमी भी होते हैं। अपनी इन्ही विशेषताओं के कारण आप सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। आपके लिए व्यापार एवं व्यवसाय या अन्य निजि कार्य करना लाभप्रद नहीं होता है। जो व्यक्ति उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में पैदा होते हैं वे स्थायित्व में यकीन रखते हैं। इन्हें बार-बार काम बदलना पसंद नहीं होता है। ये जिस काम में एक बार लग जाते हैं उस काम में लम्बे समय तक बने रहते हैं।।
ऐसे जातकों के स्वभाव की विशेषता होती है, कि ये स्वयं सामर्थ्यवान होते हुए भी दूसरों से सीखने में हिचकते नहीं हैं। अपने स्वभाव की इस विशेषता के कारण ये निरंतन प्रगति की राह पर आगे बढ़ते रहते हैं। उत्तराफाल्गुनी के जातक आर्थिक रूप से सामर्थवान होते हैं। क्योंकि दृढ़विश्वास एवं लगन के साथ अपने लक्ष्य को हासिल करने हेतु ये सदैव तत्पर रहते हैं। पारिवारिक जीवन के सम्बन्ध में देखा जाए तो ये अपनी जिम्मेवारियों का पालन अच्छी तरह से करते हैं।।
प्रथम चरण:- उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य हैं। इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक पंडित अर्थात अपने क्षेत्र का विद्वान् होता है। इसका कारक यह है, कि प्रथम चरण का नवांशेश गुरु होता है। नक्षत्र स्वामी एवं सूर्य दोनों ही विद्या के लिए शुभ ग्रह माने जाते है। दोनों का चन्द्र पर प्रभाव जातक को पंडित बनाता है। मंगल की दशा-अन्तर्दशा में जातक का भाग्योदय होता है। गुरु की दशा इनके जीवन में हर प्रकार का शुभ फल देती है।।
द्वितीय चरण:- उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शनि हैं। इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक राजा या राजा समान वैभवशाली एवं पराक्रमी होता है। लग्नेश बुध की दशा उत्तम फलदायी होती है। शुक्र की दशा में जातक का भाग्योदय अवश्य ही होता है।।
तृतीय चरण:- उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी भी शनि हैं। इस नक्षत्र चरण में यदि चन्द्रमा भी है तो व्यक्ति हर हाल में अपने शत्रुओं पर विजयी होगा तथा प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त करेगा। लग्नेश बुध की दशा अच्छा फल देती है। शनि अनिष्ट फल नहीं देगा अपितु शुक्र एवं शनि की दशा में जातक का भाग्योदय होता है।।
चतुर्थ चरण:- उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी गुरु हैं। इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक धार्मिक स्वभाव वाला, अपने संस्कारों के प्रति आस्थावान एवं सभ्य होता है। शुक्र की दशा में जातक का भाग्योदय होता है एवं बृहस्पति की दशा उत्तम फलदायिनी होती है।।
#Panchang_05_November_2026
गुरुवार शॉपिंग के लिये अच्छा दिन माना जाता है।।
गुरुवार का विशेष – गुरुवार के दिन तेल मर्दन करने से धन एवं यश की हानि होती है – (मुहूर्तगणपति)।।
गुरुवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से तथा सर के बाल धोना, कपड़े धुलना अथवा धोबी के घर डालना, घर-आँगन की गोबर आदि से लिपाई करना इस प्रकार के कार्य नहीं करने चाहियें इससे धन एवं पूण्य की हानी होती है और लक्ष्मी घर छोड़कर चली जाती है।। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति का कारक ग्रह होता है। साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक ग्रह भी होता है। इसलिये बृहस्पति ग्रह अकेले ही स्त्री के संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है। अतः बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है जिससे कि बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी आती है। इसी कारण से इस दिन बाल धोना या कटवाना भी नहीं चाहिए। इसका असर संतान और पति के जीवन पर पड़ता है और उनकी उन्नति बाधित होती है।।
वास्तु अनुसार घर के ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है। ईशान कोण का संबंध परिवार के नन्हे सदस्यों यानी कि बच्चों से होता है। साथ ही घर के पुत्र संतान का संबंध भी इसी कोण से ही होता है। ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है इसलिये घर में शुद्ध वजन वाले कपड़ों को धोना, कबाड़ घर से बाहर निकालना, घर को धोना या पोछा लगाना इत्यादि घर के ईशान कोण को कमजोर करता है। उससे घर के बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर गुरु का शुभ प्रभाव कम होता है।।
#Panchang_05_November_2026
गुरुवार भगवान लक्ष्मी नारायण का दिन होता है। इसलिये इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से जीवन में अपार खुशियाँ आती है। इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से पति-पत्नी के बीच कभी दूरियाँ नहीं आती है साथ ही धन की वृद्धि भी होती है। जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से उन्नति के रास्ते आसानी से खुलते हैं। परन्तु यदि गुरु ग्रह को कमजोर करने वाले कार्य किए जाए तो प्रमोशन होने में भी रुकावटें आती है।।
गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है। जैसे – सिर के बाल धोना, भारी कपड़े धोना, बाल कटवाना, शेविंग करवाना, शरीर के बालों को साफ करना, फेशियल करवाना, नाखून काटना, घर से मकड़ी के जाले साफ करना, घर के उन कोनों की सफाई करना जिन कोनों की रोज सफाई नहीं की जाती हो। ये सभी काम गुरुवार को करने से धन हानि होता है तथा तरक्की रुक जाती है।।
दिशाशूल – गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है।।
गुरुवार के दिन ये विशेष उपाय करें – गुरु धन एवं प्रतिष्ठा का कारक ग्रह होता है। जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है। गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें बिगड़े काम भी बन जायेंगे।।
#Panchang_05_November_2026
बृहस्पतिवार को जिनका जन्म होता है, वह व्यक्ति विद्या एवं धन से युक्त होता है अर्थात ये ज्ञानी और धनवान होते हैं। ये विवेकशील होते हैं और शिक्षण को अपना पेशा बनाते हैं। ये लोगों के सम्मुख आदर और सम्मान के साथ प्रस्तुत होते हैं तथा उच्च स्तर के सलाहकार भी होते हैं। गुरुवार में जन्मे जातक सभ्य, खिलते रंग के, सुशील एवं मधुर स्वभाव के होते हैं तथा धर्म के प्रति सचेत होते हैं।।
ये सभी सद्गुणों से संपन्न होने के वजह से किसी के साथ विश्वासघात नहीं करते हैं। ऐसे लोग किसी का हक नहीं मारते तथा न्याय के प्रति सजग होते हैं। यह सफल राजनीतिज्ञ, न्यायधीश, क्लर्क, प्रकाशक एवं धर्मगुरु आदि के रूप में सफल होते हैं। गुरुवार को जन्मं लेने वाले व्यसक्ति बेहद मिलनसार और मधुर स्वभाव के होते हैं। ये जीवन को उत्सफव की तरह जीते हैं इसलिए हमेशा खिले-खिले रहते हैं।।
ऐसे व्यक्ति धर्म में विशेष रुचि रखने वाले होते हैं। धार्मिक प्रवृत्ति के कारण ये कभी किसी के साथ विश्वाससघात नहीं कर सकते हैं। यह किसी का हक भी नहीं मारते, न्याय के प्रति सजग होते हैं। इनको अपने जीवन में सफलता हेतु धर्मगुरु, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, प्रकाशक एवं न्यायधीश आदि के क्षेत्र में भाग्य आजमाना चाहिये। इनका शुभ दिन मंगलवार और बृहस्पितिवार तथा शुभ अंक 4 होता है।।
आज का विचार – मित्रों, हम अपनी पिछली गलतियों से सबक लेकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। परन्तु याद रहे कि होशियार लोग अपनी गलती से लेते हैं, जबकि ज्यादा होशियार लोग दूसरों की गलतियों से गलतियों को दुहराना सीखते हैं। इसलिये अपनी गलतियों को सुधारना ही व्यक्ति में इंसानियत लाता है।।
#Panchang_05_November_2026
जन्मकुण्डली के अनुसार आपके जीवन में धन कैसे और कब आयेगा?।।…. आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें….. वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
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