बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।
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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 14 अक्टूबर 2026 दिन बुधवार।।
मित्रों, तारीख 14 अक्टूबर 2026 दिन बुधवार को अश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि चतुर्थी तिथि है। आज अश्विन मास के शारदीय नवरात्र का चतुर्थ दिवस है। आज माता कुष्मांडा देवी के दर्शन एवं पूजन का बहुत पुण्य होता है। आज माता कुष्मांडा देवी को मधुपर्क एवं दोनों नेत्रों के बीच तिलक लगाने से माता की विशिष्ट कृपा एवं प्रशन्नता प्राप्त होती है। आज वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत है। मित्रों जगतजननी जगदम्बिका माता श्री दुर्गा जी का चतुर्थ रूप माता श्री कूष्मांडा देवी हैं। अपने उदर से अंड अर्थात् ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से जाना जाता है। नवरात्रि के नव दिनों में चतुर्थ दिन इनकी पूजा-आराधना की जाती है। श्री कूष्मांडा माता की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं। आज सर्वार्थसिद्धियोग एवं रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “शारदीय नवरात्र के चतुर्थ दिवस माता कुष्मांडा देवी के उपासना” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 14 अक्टूबर 2026 दिन बुधवार।।
Aaj ka Panchang 14 October 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – वर्षा.
मास – अश्विन.
पक्ष – शुक्ल.
गुजराती पंचांग के अनुसार – अश्विन शुक्ल पक्ष.
#Panchang_14_October_2026
तिथि – चतुर्थी 25:14 PM बजे तक उपरान्त पञ्चमी तिथि है।।
नक्षत्र – विशाखा 01:43 AM तक उपरान्त अनुराधा नक्षत्र है।।
योग – आयुष्मान 20:39 PM तक उपरान्त सौभाग्य योग है।।
करण – वणिज 12:17 PM तक उपरान्त विष्टि करण है।।
चन्द्रमा – वृश्चिक राशि पर।।
सूर्य – कन्या राशि एवं चित्रा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:33:55
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:13:51
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 06:15:47
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 17:45:35
राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 12:24 बजे से 13:52 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12:12 बजे से 12:36 बजे तक।।
#Panchang_14_October_2026
चतुर्थी तिथि विशेष:- चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी श्रीगणेश जी महाराज को बताया गया है। यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।।
इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज चतुर्थी तिथि में गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।।
मित्रों, ज्योतिष शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।।
#Panchang_14_October_2026
मित्रों, जगतजननी जगदम्बिका माता श्री दुर्गा जी का चतुर्थ रूप माता श्री कूष्मांडा देवी हैं। अपने उदर से अंड अर्थात् ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से जाना जाता है। नवरात्रि के नव दिनों में चतुर्थ दिन इनकी पूजा-आराधना की जाती है। श्री कूष्मांडा माता की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं।।
इनकी आराधना से मनुष्य त्रिविध तापों से मुक्त हो जाता है। माता कुष्माण्डा सदैव अपने भक्तों पर अपनी कृपादृष्टि बनाकर रखती हैं। इनकी पूजा आराधना से मनुष्य को हृदय की शांति एवं लक्ष्मी की प्राप्ति होती हैं। इन बातों का आधार दुर्गा सप्तशती को माना जाय अथवा देवी भागवत को माता कुष्मांडा वह देवी हैं, जिनके उदर में त्रिविध तापयुक्त सम्पूर्ण संसार स्थित है। माता कूष्माण्डा ही वह देवी हैं, जो इस सम्पूर्ण चराचर जगत की अधिष्ठात्री हैं।।
मित्रों, जब सृष्टि की रचना नहीं हुई थी उस समय अंधकार-ही-अंधकार था। माता कुष्मांडा जिनका मुखमंड सैकड़ों सूर्य की प्रभा से प्रदिप्त है, उस समय प्रकट हुई। उनके मुख पर बिखरी मुस्कुराहट से सृष्टि की पलकें झपकनी शुरू हो गयी। तब इन्हीं माता की हंसी से सृष्टि में ब्रह्मण्ड का जन्म हुआ। शास्त्रानुसार इस देवी का निवास सूर्यमण्डल के मध्य में है। और यह सूर्यमंडल को अपने संकेत से नियंत्रित रखती हैं।।
माता कूष्मांडा अष्टभुजा से युक्त हैं अत: इन्हें अष्टभुजी देवी के नाम से भी जाना जाता है। देवी अपने इन आठो हाथों में क्रमश: कमण्डलु, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत से भरा कलश, चक्र तथा गदा धारण करती हैं। देवी के हाथों में कमलगट्टे की माला सदैव विद्यमान रहती है। जिससे माता अपने भक्तों के कल्याण की कामना सदैव करती रहती है। यह माला ही भक्तों को सभी प्रकार की ऋद्धि-सिद्धि देने वाला कहा जाता है।।
मित्रों, माता कुष्मांडा अपने प्रिय वाहन सिंह पर सवार रहती हैं। जो भक्त श्रद्धा पूर्वक माता कुष्मांडा की उपासना नवरात्री के चौथे दिन करता है उसके सभी प्रकार के कष्ट रोग, शोक आदि का अंत हो जाता है। और उसे आयु एवं यश की प्राप्ति होती है। आदिशक्ति, सिद्धिदात्री माता दुर्गा का चतुर्थ दुर्गा माता श्री कूष्मांडा को कहा जाता है। अपने उदर से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से जाना जाता है।।
अतुलनीय सम्पत्ति की प्राप्ति हेतु नवरात्र के चौथे दिन माता कुष्मांडा के पूजा की विधि।। इस लेख को पूरा यहाँ क्लिक करके पढ़ें:
#Panchang_14_October_2026
अनुराधा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म अनुराधा नक्षत्र में हुआ है तो आपका अधिकाँश जीवन विदेशों में ही बीतेगा। परन्तु अच्छी बात यह है, कि विदेशों में रहकर आप अधिक धन कमाएंगे और समाज में मान सम्मान प्राप्त करेंगे। आप बहुत साहसी एवं कर्मठ व्यक्तित्व के स्वामी होंगे। परिस्थितियों की मार के सामने आप झुकने वालों में से नहीं होंगे। आप चुपचाप बिना रुके और बिना थके निरंतर आगे बढ़ते ही रहेंगे।।
आप बहुत दृढ इच्छाशक्ति एवं तीक्ष्ण बुद्धि के मालिक हैं। अनुराधा नक्षत्र में जन्मा जातक भ्रमणशील प्रवृत्ति का होता है। आप खाने पीने के बहुत अधिक शौक़ीन होंगे। इसलिए अधिकतर समय आप स्वादिष्ट व्यंजनों की ही खोज में रहेंगे। सब कुछ होते हुए भी जीवन में कभी-कभी ऐसा समय भी आएगा की आप धन की कमी महसूस करेंगे। जन्म स्थान से पृथक होने का दुःख भी यदा-कदा सताता रहेगा।।
परन्तु आप बहुत मेहनती होंगे और शारीरिक श्रम से कभी नहीं घबरायेंगे। इसलिए बहुत जल्द ही घटनाओं से उबरने की कोशिश करते है। अनुराधा नक्षत्र में जन्मी महिलाएं भी खाने की बेहद शौक़ीन होती हैं। साथ ही सामान्य से अधिक भोजन करने और पचाने में सक्षम होती है। स्वभाव से भ्रमणशील परन्तु झगडालू प्रवृत्ति होने के कारण कभी कभी क्रूरतापूर्वक व्यवहार भी करती हैं।।
अनुराधा नक्षत्र में जन्मी महिलाओं के सुंदर बाल उनकी पहचान के संकेत हैं। अनुराधा नक्षत्र में जन्मा जातक पेट और गले से सम्बंधित रोग से ग्रसित होता है। अनुराधा नक्षत्र में जन्मी स्त्रियों में मासिक धर्म से जुडी समस्याएं ज्यादातर देखी गयी है।।
प्रथम चरण:- अनुराधा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक उतावले स्वभाव का होता है। सूर्य लग्न स्वामी मंगल का मित्र है। परन्तु लग्न नक्षत्र स्वामी का शत्रु है। अतः सूर्य की दशा मिश्रित फल देगी। शनि की दशा में भौतिक रूप से उन्नति होगी। लग्नेश मंगल की दशा अत्यंत शुभ फल देगी।।
द्वितीय चरण:- अनुराधा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध होता है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक धार्मिक स्वभाव का होता है। बुध लग्न स्वामी मंगल का शत्रु ग्रह है। बुध में शनि का अंतर एवं शनि में बुध का अंतर शुभ फलदायी होगा। परन्तु शनि में मंगल या मंगल में शनि का अंतर अशुभ फल देनेवाला होता है। मंगल की दशा में ऐसा जातक उन्नति ही करता है।।
तृतीय चरण:- अनुराधा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक दीर्घायु प्राप्त करता है। अनुराधा नक्षत्र के तीसरे चरण का स्वामी शुक्र है जो शनि का शत्रु है परन्तु मंगल का मित्र है। फलतः शुक्र की दशा माध्यम फलदायी होगी। शनि की दशा में पराक्रम बढेगा तथा भौतिक उपलब्धियों की प्राप्ति होगी। मंगल की दशा अत्यंत उत्तम फल देनेवाली होती है।।
चतुर्थ चरण:- अनुराधा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी मंगल होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक प्रायः नपुंसक होता है। अनुराधा नक्षत्र के चौथे चरण का स्वामी मंगल है तथा लग्न स्वामी भी मंगल है। अतः मंगल की दशा-अन्तर्दशा जातक को उत्तम फल देती है। शनि की दशा माध्यम फल देगी क्योंकि शनि और मंगल में शत्रुता है।।
#Panchang_14_October_2026
आज बुधवार के दिन यह सावधानी अवश्य रखें:- बुधवार को बालों से संबंधित कोई भी वस्तु न खरीदें, टूथ ब्रश आदि भी नहीं खरीदना चाहिए। बुधवार के दिन दूध की खीर या अन्य कोई व्यंजन जिसमें दूध जलने की संभावना हो नहीं बनाना चाहिए। अगर हो सके तो आज के दिन दूध न उबालें। बुधवार के दिन किसी को उधार पैसे न दें। इससे आपको धन संबंधित परेशानी हो सकती है।।
आज बुधवार के दिन ये विशेष उपाय करें – बुधवार गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी का दिन है। इसलिये आज के दिन इनकी पूजा का विशेष महत्त्व होता है। आज के दिन गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।।
अगर आपकी कुण्डली में बुध अच्छा हो तो इन कार्य क्षेत्र में आपको सफलता सहजता से मिल सकती है। बुधवार को भी इन कामों को करना चाहिए। जिससे आपके जीवन में सफलता प्राप्त हो जाएगी।।
ज्योतिष, शेयर, दलाली जैसे कार्यों के लिए भी यह दिन शुभ माना गया है। सिंदूर का तिलक या टीका लगाएं। इस दिन पूर्व, दक्षिण और नैऋत्य दिशा में यात्रा कर सकते हैं। इस दिन धन जमा करने से धन में बरकत होती है। माता दुर्गा के मंदिर जाना चाहिए। इस दिन किसी कन्या को साबुत बादाम भी दान में देना चाहिए।।
बुधवार का विशेष – बुधवार के दिन तेल मर्दन अथवा मालिश करने से माता लक्ष्मी प्रशन्न होती हैं और धनलाभ होता है – (मुहूर्तगणपति)।।
बुधवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से धन एवं पूण्य का लाभ होता है।। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो, यात्रा करनी ही हो तो धनिया, तिल की वस्तु, ईलायची अथवा पिस्ता खाकर यात्रा कर सकते है।।
#Panchang_14_October_2026
मित्रों, बुधवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति मधुर वाणी बोलने वाले होते हैं। इस तिथि के जातक पठन पाठन में रूचि रखते हैं और ज्ञानी होते हैं। ऐसे लोगों का लेखन में अत्यधिक रूचि होती है और अधिकांशत: इसे अपनी जीवका का साधन भी बना लेते हैं। ये जिस विषय का चयन करते हैं उसके अच्छे जानकार होते हैं। इनके पास धन तो होता है परंतु ऐसे लोग धोखेबाज भी होते हैं।।
ऐसे जातक सामन्य रंग-रूप, बुद्धिमान, लेखक, पत्रकार, प्रकाशक एवं द्विस्वभाव के होते हैं। किसी एक कार्य को न कर अनेक कार्य में जुटे होते हैं। वैसे शान्तिप्रिय रहना इनका स्वभाव होता है। अधिकांशतः मार्केटिंग के क्षेत्र में ऐसे लोगों को उत्तम सफलता मिलती है। बुधवार को जन्म लेने वाले हमेशा असमंजस के शिकार रहते हैं। वह एक समय कई कार्यों पर हाथ आजमाने की कोशिश करते हैं, कई बार सफलता मिल भी जाती है और कई बार गिरते भी हैं।।
इनमें छल-कपट नहीं होता और कई बार तो ये दूसरों की गलतियां खुद पर तक ले लेते हैं। इनको लेखन, पत्रकारिता, प्रकाशन, बैंकिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में अपना किस्मत आजमाना चाहिये। इन क्षेत्रों में इन्हें अच्छी सफलता की संभावना होती है। इनके लिये बुधवार एवं शुक्रवार का दिन भाग्यवर्धक होता है तथा 3 और 6 इनका लकी नम्बर होता है।।
आज का सुविचार – मित्रों, यदि जीवन में लोकप्रिय होना हो तो सबसे ज्यादा “आप” शब्द का, उसके बाद “हम” शब्द का और सबसे कम “मैं” शब्द का प्रयोग करना चाहिए। इस संसार में कोई किसी का हमदर्द नहीं होता, लाश को शमशान में रखकर अपने लोग ही पुछ्ते हैं.. और कितना वक़्त लगेगा।।
#Panchang_14_October_2026
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