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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 19 सितम्बर 2026 दिन शनिवार।।
मित्रों, तारीख 19 सितम्बर 2026 दिन शनिवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है। आज राधाष्टमी का पावन व्रत है। आज मुल नक्षत्र में ज्येष्ठा देवी का विसर्जन किया जाता है। आज सर्वार्थामृतसिद्धियोग और रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “राधाष्टमी के पावन व्रत” की हार्दिक मंगलकामनाएँ।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आप का आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 19 सितम्बर 2026 दिन शनिवार।।
Aaj ka Panchang 19 September 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – वर्षा.
मास – भाद्रपद.
पक्ष – शुक्ल.
गुजराती पंचांग के अनुसार – भाद्रपद शुक्ल पक्ष.
#Panchang_19_September_2026
तिथि – अष्टमी 15:27 PM बजे तक उपरान्त नवमी तिथि है।।
नक्षत्र – मूल 25:43 PM तक उपरान्त पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र है।।
योग – आयुष्मान 14:29 PM तक उपरान्त सौभाग्य योग है।।
करण – विष्टि 02:14 AM तक उपरान्त बव 15:27 PM तक उपरान्त बालव करण है।।
चन्द्रमा – धनु राशि पर।।
सूर्य – सिंह राशि एवं उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:27:26
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:35:56
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 19:57:35
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 18:03:52
राहुकाल (अशुभ) – सुबह 09:30 बजे से 11:01 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.20 बजे से 12.44 बजे तक।।
#Panchang_19_September_2026
अष्टमी तिथि विशेष:- अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि शुक्ल पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।।
इस अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।।
मित्रों, अष्टमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति धर्मात्मा होता है। मनुष्यों पर दया करने वाला तथा हरेक प्रकार के गुणों से युक्त गुणवान होता है। ये कठिन से कठिन कार्य को भी अपनी निपुणता से पूरा कर लेते हैं। इस तिथि के जातक सत्य का पालन करने वाले होते हैं यानी सदा सच बोलने की चेष्टा करते हैं। इनके मुख से असत्य तभी निकलता है जबकि किसी मज़बूर को लाभ मिले।।
#Panchang_19_September_2026
मूल नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म मूल नक्षत्र में हुआ है तो आपका जीवन सुख समृद्धि के साथ बीतेगा। धन की कमी आपको कभी नहीं आएगी और आप अपने कार्यों द्वारा अपने परिवार का नाम और सम्मान और बढ़ाएंगे। आप कोमल हृदयी परन्तु अस्थिर दिमाग के व्यक्ति होंगे। कभी आप बहुत दयालु और कभी अत्यधिक नुक्सान पहुंचाने वाले होते है।।
ऐश्वर्य पूर्ण जीवन के कारण आपका उठना बैठना समाज के धनि एवं उच्च वर्ग के व्यक्तियों के साथ ही होता है। इस कारण आपके व्यक्तित्व में घमंड आना स्वाभाविक ही है। आपका व्यवहार बहुत ही अनिश्चित होता है। समय और स्थान के साथ ये परिवर्तित भी हो जाता है। अपनी आकर्षक आँखों और सम्मोहक व्यक्तित्व के कारण आप अनायास ही लोगों के आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं।।
आप शांतिप्रिय और एक सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति होंगे। जो भविष्य की चिंता छोड़ केवल आज में जीना पसंद करते हैं। मूल नक्षत्र में जन्मे जातक सिद्धांतों और नैतिकता में बहुत अधिक विश्वास करते हैं। परन्तु अपनी अस्थिर सोच के कारण कभी-कभी आपके व्यवहार को समझना बेहद कठिन हो जाता है। आपमें गंभीरता की कमी होगी परन्तु ईश्वर पर आपका विश्वास अटूट होगा।।
मूल नक्षत्र के जातक अपने कार्य के प्रति मेहनती और निष्ठावान होतें हैं। ऐसे लोग अधिकतर कला, लेखन, प्रशासनिक, मेडिकल या हर्बल क्षेत्र में सफल माने जाते हैं। आप एक प्रभावशाली, बुद्धिमान और नेतृत्व के गुणों से भरपूर व्यक्ति होंगे। इसलिए यदि आप सामाजिक या राजनीतिक क्षेत्रों में भाग्य अजमाए तो आप शीघ्र ही उच्चस्थ पद प्राप्त कर सकते हैं।।
अपनी अस्थिर सोच के कारण जीवन में कई बार आप अपने कार्यक्षेत्र बदलते हैं। आप एक अच्छे वित्तीय सलाहकार होते हैं परन्तु केवल दूसरों के लिए। आप बिना सोचे समझे धन खर्च करने वालों में से हैं। इसलिए जीवन में कई बार आपको आर्थिक संकट से सामना करना पड़ सकता है। आपको विदेश में कार्य का प्रस्ताव कभी ठुकराना नहीं चाहिए। क्योंकि विदेश में आपका भाग्योदय निश्चित है।।
मूल नक्षत्र में जन्मे जातकों के जीवन के शरुआती वर्षों में पिता या भाई-बहन का सहयोग ना के बराबर मिलने के कारण स्वयं संघर्ष कर जीवन में सफल होते हैं। मूल नक्षत्र के जातकों का दांपत्य जीवन बेहद सुखमय एवं संतोषजनक होता है। आपकी पत्नी के कारण आप जीवन में शांति और आनंद का अनुभव करते हैं। मूल नक्षत्र की जातिका सामान्य से अधिक लम्बी कद वाली होती हैं। यह अच्छे और बुरे कार्यों में भेद नहीं करती इसलिए पाप कर्मों में रूचि लेने लगती हैं।।
मूल नक्षत्र में जन्मे जातकों की पहचान किसी को मूर्ख बना कर घमंड करना होता है। परन्तु इन्हें कमर और कुल्हे का दर्द, टी बी और लकवा जैसी बिमारियों से परेशानी का योग बनते रहता है।।
प्रथम चरण:- मूल नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी मंगल होता है। इस नक्षत्र चरण का स्वामी मंगल की गुरु एवं केतु से शत्रुता के कारण इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक जीवन भर भौतिक सुखों की प्राप्ति हेतु संघर्षरत रहता है। लग्नबली न होने के कारण जातक का विकास रुका हुआ रहेगा परन्तु सूर्य की दशा अच्छी जाएगी।।
द्वितीय चरण:- मूल नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शुक्र होता है। लग्नेश गुरु की नक्षत्र स्वामी केतु से शत्रुता है। परन्तु नक्षत्र चरण का स्वामी शुक्र की केतु से मित्रता के कारण जातक में त्याग अथवा दान की प्रवृत्ति अधिक होगी। सूर्य की दशा में जातक का भाग्योदय होता है। शुक्र की दशा भी ख़राब नहीं जाएगी और केतु की दशा शुभ फल देगी।।
तृतीय चरण:- मूल नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी बुध होता है। मूल नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्म लेने वाले जातक के अधिक मित्र होंगे एवं सभी सुयोग्य होंगे। लग्नेश गुरु की दशा अति उत्तम फल देगी। सूर्य की दशा में जातक का भाग्योदय होगा। केतु एवं बुध की दशाएं भी शुभ फल ही देंगी।।
चतुर्थ चरण:- मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी चन्द्र होता है। लग्नेश गुरु और चन्द्रमा की मित्रता के कारण मूल नक्षत्र के चौथे चरण में जन्म लेने वाला जातक राजा के समान सम्मान एवं ऐश्वर्य प्राप्त करता है। लग्नेश गुरु की दशा अति उत्तम फल देगी। सूर्य की दशा में जातक का भाग्योदय होगा। शुक्र की दशा भी ख़राब नहीं जाएगी।।
#Panchang_19_September_2026
शनिवार को जूते-चप्पल, लोहे की बनी वस्तुयें, नया अथवा पुराना भी वाहन नहीं खरीदना चाहिये एवं नए कपड़े न खरीदना और ना ही पहली बार पहनना चाहिये।।
शनिवार का विशेष – शनिवार के दिन तेल मर्दन “मालिश” करने से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती हैं – (मुहूर्तगणपति)।।
शनिवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से आयुष्य की हानि होती है। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है।।
दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।।
#Panchang_19_September_2026
जिस व्यक्ति का जन्म शनिवार को होता है उस व्यक्ति का स्वभाव कठोर होता है। ये पराक्रमी एवं परिश्रमी होते हैं तथा इनके ऊपर दु:ख भी आये तो ये उसे भी सह लेना जानते हैं। ये न्यायी एवं गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा सेवा करना इन्हें काफी पसंद होता है।।
शनिवार को जन्म लेनेवाले जातक कुछ सांवले रंग के, साहसी, मैकेनिक अथवा चिकित्सक होते हैं। इनमें से कुछ अपने कार्य में सुस्त भी होते हैं, जैसे देर से जागना, देर तक सोना भी इनकी आदतों में शुमार होता है। पारिवारिक जिम्मेदारियां भी शुद्ध रहती है इसलिये ये एक मेहनतकश इंसान होते हैं। सफलता के मार्ग में रूकावटों का भी सामना करना पड़ता है।।
शनिवार को जन्मलेनेवाले जातकों के स्वभाव में साहस लक्षित होता है। सफलता के मार्ग में लाख रुकावटें आए, लेकिन ये इसे पार करके ही रहते हैं। ऐसे लोग अधिकांशतः सांवले रंग के होते हैं। इन जातकों को अपने कैरियर के लिये डॉक्टपर, इंजीनियर तथा मैकेनिक के क्षेत्र का चयन करना चाहिये। इनका शुभ अंक 3, 6 और 9 तथा इनका शुभ दिन शनिवार और मंगलवार होता है।।
आज का सुविचार – मित्रों, रात लम्बी और काली हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं होता कि सुबह होगी ही नहीं। ठीक उसी तरह असफलता का दौर लम्बा हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब ये कतई नहीं होता कि आपको अब कभी सफलता मिलेगी ही नहीं।।
#Panchang_19_September_2026
शनि देव मेहरबान हों तो इंजीनियर और चार्टर्ड एकाउंटेंट बनाते है।।…. आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
