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पञ्चांग 25 अगस्त 2026 दिन मंगलवार।।

पञ्चांग 25 अगस्त 2026 दिन मंगलवार।। Panchang 25 August 2026

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 25 अगस्त 2026 दिन मंगलवार।।

मित्रों, तारीख 25 अगस्त 2026 दिन मंगलवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। आज भौम प्रदोष का पावन व्रत है। आज के इस प्रदोष के बारे में लिखा है:- ऋणापकर्णाय श्रेयस्करम्। अर्थात कैसा भी कर्ज हो आज के प्रदोष को अगर शिवलिंग पर शहद का लेपन इसी संकल्प के साथ किया जाय तो सभी प्रकार के कर्ज की निवृत्ति हो जाती है। आज दुर्गायात्रा-गौरीपूजा-हनुमान जी के दर्शन का बहुत पूण्य होता है। आज त्रिपुष्करयोग भी है। आज रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “भौमप्रदोष व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आप का आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375258850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।

वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

पञ्चांग 25 अगस्त 2026 दिन मंगलवार।। Panchang 25 August 2026

आज का पञ्चांग 25 अगस्त 2026 दिन मंगलवार।।
Aaj ka Panchang 25 August 2026.

विक्रम संवत् – 2083.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.

शक – 1948.

अयन – सौम्यायनम्.

गोल – याम्य.

ऋतु – ग्रीष्म.

मास – श्रावण.

पक्ष – शुक्ल.

गुजराती पंचांग के अनुसार – श्रावण शुक्ल पक्ष.

#Panchang_25_August_2026

तिथि – द्वादशी 05:35 AM बजे तक उपरान्त त्रयोदशी तिथि है।।

नक्षत्र – उत्तराषाढ़ा 22:52 PM तक उपरान्त श्रवण नक्षत्र है।।

योग – आयुष्मान 07:42 AM तक उपरान्त सौभाग्य योग है।।

करण – बालव 06:22 AM तक उपरान्त कौलव 19:14 PM तक उपरान्त तैतिल करण है।।

चन्द्रमा – धनु राशि पर 03:07 AM तक उपरान्त मकर राशि पर।।

सूर्य – सिंह राशि एवं मघा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।

मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:21:48

मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:58:12

वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 05:39:49

वाराणसी सूर्यास्त – सायं 25:21:38

राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:50 बजे से 17:24 बजे तक।।

शुभ मुहूर्त – दोपहर 12.28 बजे से 12.52 बजे तक।।

#Panchang_25_August_2026

त्रयोदशी तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।।

इस त्रयोदशी तिथि के देवता मदन अर्थात कामदेव जी को बताया गया है। भगवान कामदेव जी शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण और देवी माता रुक्मिणी के पुत्र हैं। कामदेव जी प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। आज की त्रयोदशी तिथि में भगवान के अंशावतार भगवान कामदेव की पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का (मन्त्र वेबसाइट के निचे के लिंक पर है) जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।।

आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।

त्रयोदशी तिथि ज्योतिषशास्त्र में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति महापुरूष होता है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है और अनेक विषयों की अच्छी जानकारी रखने वाला होता है। यह व्यक्ति काफी विद्वान होता है तथा अन्यों के प्रति दया भाव रखने वाला एवं किसी की भी भलाई करने हेतु सदैव तत्पर रहने वाला होता है । इस तिथि के जातक समाज में काफी प्रसिद्धि हासिल करते ही हैं।।

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उत्तराषाढा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म उत्तराषाढा नक्षत्र में हुआ है तो आप एक सफल एवं स्वतंत्र व्यक्ति हैं। आप ईश्वर में आस्था रखते हुए जीवन में प्रसन्नता और मैत्री के साथ आगे बढ़ने में विश्वास रखते हैं। विवाह के उपरान्त आपके जीवन में और अधिक सफलता एवं प्रसन्नता आती है। उत्तराषाढा में जन्मा जातक ऊँचे कद और गठीले शरीर के मालिक होते हैं।।

चमकदार आँखे और चौड़ा माथा आपके व्यक्तित्व में चार चाँद लगाते हैं। गौर वर्ण के साथ आपकी आंखे थोड़ी लालिमा लिए हुए होती हैं। आप मृदुभाषी होंगे और सभी से प्रेम पूर्वक व्यवहार आपमें स्वाभाविक ही रहेगी। आप सादी जीवन शैली में विश्वास रखते हैं और अधिक ताम-झाम से दूरी बनाये रखना पसंद करेंगे। धन की अधिकता भी आपके इन विचारों को प्रभावित नहीं करेगी।।

कोमल हृदयी होने के कारण आप कभी भी किसी को हानि पहुंचाने के बारे में नहीं सोच सकते। क्योंकि दूसरों की भलाई करना आपके स्वभाव में ही होगा। नम्र स्वभाव होते हुए भी आप किसी के सामने घुटने नहीं टेकते हैं। और न ही किसी भी प्रकार की कठिनाई आपको हिला सकती है। आपको जीवन में किसी पर भी निर्भरता पसंद नहीं होगा। सकारात्मक और स्थिर सोच के कारण आप अपने जीवन से सम्बंधित अधिकतर निर्णय स्वयं लेंगे।।

आपके लिए हुए निर्णय सही भी होंगे। जलदबाज़ी में निर्णय लेना आपके स्वभाव में नहीं होगा। आप सभी को आदर और सम्मान देना पसंद करेंगे विशेषतः स्त्रियों को। आप अपने विचारों को व्यक्त करने से कभी नहीं हिचकिचायेंगे। किसी के विरोध में भी यदि आपको बोलना हो तो आप अवश्य बोलेंगे परन्तु बेहद विनम्रता के साथ। अपने इसी स्वभाव के कारण आप माफ़ी मांगने से भी नहीं झिझकते।।

बहुत ही कम आयु से अपने ऊपर सभी जिम्मेदारियों के आ जाने के कारण आप कभी-कभी मानसिक अशांति भी महसूस करेंगे। जीवन को हर पहलु से और अधिक सफल बनाने के लिए आप सदैव प्रयासरत रहेंगे। इन्ही प्रयासों में विफल होने पर आप अपने आपको असहाय समझने लगेंगे। परन्तु वास्तविकता में ऐसा नहीं होगा। आप एक सक्षम और जुझारू व्यक्ति होंगे और कठिन से कठिन परिस्तिथियों में से भी निकलने में सक्षम होंगे।।

अपने बौधिक विचारों और सकारात्मक सोच के कारण आप सृजनात्मक और कलात्मक या यूँ कहें विज्ञान और कला दोनों ही क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करेंगे। आपकी इमानदारी, अथक परिश्रम और मजबूत इरादे जीवन में आपको सदैव सफलता दिलायेंगे। रुकावटों के कारण थक कर बैठ जाना आपके स्वभाव में नहीं होगा। अपने कार्यक्षेत्र में आप अपने करीबी सहयोगियों के सन्दर्भ में अति कुशलता एवं सजगता के साथ रहेंगे।।

जीवन के 38वें वर्ष के उपरान्त आप स्थिरता और समृद्धि प्राप्त करेंगे। वैवाहिक जीवन सुखमय और प्रसन्नता से भरा रहेगा। यद्यपि जीवन साथी के स्वास्थ्य के कारण आप परेशान हो सकते हैं। संतान पक्ष से सुख संतोषजनक रहेगा। उत्तराषाढा नक्षत्र में जन्मी स्त्री पतिव्रता एवं मधुर वाणी वाली होती हैं। अतिथियों की आवभगत और सेवा करना इनके स्वभाव में ही होता है।।

उत्तराषाढा नक्षत्र में जन्मा जातक जहाँ रहता है वहां का प्रख्यात व्यक्ति होता है। ऐसे जातकों को घुटने या कूल्हों के जोड़ों से सम्बंधित रोग, सूजन, छाती या फेफड़े का दर्द, अक्समात चोट या जलने की संभावना भी प्रबल होती है।।

प्रथम चरण:- उत्तराषाढ़ा नक्षत्र इक्कीसवाँ नक्षत्र है और इसका स्वामी ग्रह सूर्य है। इस नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी गुरु हैं। दोनों ग्रह परस्पर मित्र हैं। लग्नेश भी गुरु होने के कारण गुरु ग्रह का प्रभाव अधिक है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक राजा तुल्य ऐश्वर्यशाली एवं पराक्रमी होगा। गुरु की दशा में जातक का सर्वांगीण विकास होगा और सूर्य की दशा अन्तर्दशा में जातक का प्रबल भाग्योदय होगा।।

द्वितीय चरण:- उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह सूर्य है। इस द्वितीय चरण का स्वामी शनि हैं। उत्तराषाढा के दुसरे चरण में जन्मा जातक आजीवन अपने मित्रों का विरोध सहता है। लग्नेश शनि सूर्य का शत्रु है अतः शनि की दशा धनदायक होगी। परन्तु सूर्य की दशा अशुभ फलदायक होगी। लग्नेश शनि की दशा भी अपेक्षित लाभ नहीं देगी।।

तृतीय चरण:- उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह सूर्य है। इस तृतीय चरण का स्वामी भी शनि हैं। उत्तराषाढा के तीसरे चरण में जन्मा जातक अपने जीवन में सदैव मान सम्मान चाहने वाला होता है। शनि लग्नेश भी है अतः लग्नेश शनि की दशा उत्तम फल देगी। शनि की दशा आपके लिए उन्नतिदायक एवं धनदायक होगी। परन्तु सूर्य की दशा अशुभ फलदायक होगी।।

चतुर्थ चरण:- उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह सूर्य है। इसके चतुर्थ चरण का स्वामी बृहस्पति हैं। उत्तराषाढा के चौथे चरण में जन्मा जातक स्वभाव से धार्मिक एवं आध्यात्मिकता में रूचि रखने वाला होता है। उत्तराषाढा के चौथे चरण का स्वामी बृहस्पति है जो लग्नेश शनि का शत्रु है। परन्तु लग्न नक्षत्र स्वामी सूर्य का मित्र है। अतः सूर्य और बृहस्पति की दशा समान्य रहेगी और शनि की दशा लाभप्रद रहेगी।।

#Panchang_25_August_2026

मंगलवार को नए कपड़े न ही खरीदना चाहिये और न ही पहली बार पहनना चाहिए। मंगलवार वाहन एवं भूमि-भवन आदि भी नहीं खरीदना चाहिये।।

मंगलवार का विशेष – मंगलवार के दिन तेल मर्दन (शरीर में तेल मालिश) करने से आयु घटती है – (मुहूर्तगणपति)।।

मंगलवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से भी आयु की हानि होती है।। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।।

मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात दाढ़ी या बाल काटने या कटवाने से उम्र कम होती है। अत: मंगलवार को बाल या दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए। मंगलवार को बजरंगबली की पूजा का विशेष महत्व है।।

मंगलवार को यथासंभव कोशिश करके मंदिर में जाकर हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी/लाल पेड़े या गुड़ और चने का प्रसाद चढ़ाएं। हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत एवं नज़र की बाधा से बचाव होता है साथ ही आपके समस्त शत्रु परास्त होते है।।

मंगलवार के व्रत से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है। मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है, मांगलिक दोष दूर होता है।।

#Panchang_25_August_2026

मंगलवार को जिनका जन्म होता है, वो जातक स्वभाव से उग्र, साहसी, प्रयत्नशील एवं महत्वाकांक्षी होते हैं। इनमें नेतृत्व की क्षमता अन्यों के मुकाबले बहुत शुद्ध होती है। ऐसे लोग जिम्मेदारियों के कार्य में सफल भी होते हैं। खिलाड़ी, पहलवान, सेना तथा पुलिस विभाग में सफल रहते हैं। यह जातक अधिकांशतः रक्तवर्ण या गेहूंआ रंग होता है।।

मंगलवार को जन्म लेनेवाला जातक जटिल बुद्धि वाला होता है। ये किसी भी बात को आसानी से नहीं मानते हैं। ऐसे लोग शक्की किस्म के होते हैं इसलिये सभी बातों में इन्हें कुछ न कुछ खोट दिखाई देता है। ये युद्ध प्रेमी और पराक्रमी होते हैं तथा अपनी बातों पर कायम रहने वाले होते हैं। जरूरत पड़ने पर ऐसे जातक हिंसा पर भी उतर आते हैं। इनके स्वभाव की एक बड़ी विशेषता है कि ये अपने कुटुम्ब का पूरा ख्याल रखते हैं।।

मंगलवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति स्वभावानुसार क्रोधी, उग्र, पराक्रमी, जुझारू, अदम्य साहसी, आलोचना सहन न करने वाले और सांगठनिक क्षमता वाले होते हैं। नेतागिरी, पुलिस, सेना, नौकरशाह तथा खिलाड़ी के रूप में इनका कैरियर सफल रहता है। इनका शुभ अंक 3, 6, 9 तथा शुभ रंग लाल एवं मैरुन और इनका शुभ दिन मंगलवार एवं शुक्रवार होता है।।

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मंगलवार का विशेष टिप्स – यदि आपके जीवन में कभी अचानक ज्यादा खर्च की स्थिति बन जाय, तो किसी भी मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में गुड़-चने का भोग श्रद्धापूर्वक लगाएं। भोग लगाने के बाद वहीँ बैठकर 25 बार हनुमान चालीसा का पाठ भी अवश्य करें।।

मंगलवार के दिन ये विशेष उपाय करें – मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्त्व होता है। आज हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाना, चमेली के तेल का ही दीपक जलाना तथा माखन का भोग लगाना चाहिये, इससे हर प्रकार की मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।।

आज का सुविचार – मित्रों, दुनिया में भगवान का संतुलन कितना अद्भुत हैं, 50 कि.ग्रा. अनाज का बोरा जो उठा सकता हैं वो खरीद नही सकता और जो खरीद सकता हैं वो उठा नही सकता। जब आप गुस्सें में हो तब कोई फैसला न लेना और जब आप खुश हो तब कोई वादा न करना, अगर ये याद रखेंगे तो कभी नीचा नही देखना पड़ेगा।।

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अरिष्ट अर्थात एक्सिडेन्ट एवं चोट आदि लगने के योग ।।….. आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें:  & ब्लॉग पर पढ़ें:

“क्या बाबा के सर सज रही है, UP का ताज? क्या बाबा फिर CM बन सकते हैं।।” – My Latest video.
“क्या कहती है अखिलेश यादव की कुंडली? क्या मिलेगी सत्ता?।।” – My Latest video.
“शुक्र की महादशा में सूर्य अन्तर्दशा फलम्” – My Latest video.
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Panchang 25 August 2026

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें।।
किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं।।

सिलवासा ऑफिस:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजू में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा।।

सिलवासा ऑफिस में प्रतिदिन मिलने का समय:-
10:00 AM to 02:00 PM And 04:30 PM to 08:30 PM.
WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
E-Mail :: balajijyotish11@gmail.com

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