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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 28 अगस्त 2026 दिन शुक्रवार।।
मित्रों, तारीख 28 अगस्त 2026 दिन शुक्रवार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पुर्णिमा तिथि है। आज ही स्नान-दान आदि की पुर्णिमा भी है। “अद्य संस्कृत दिवसः अस्ति” अर्थात आज ही संस्कृत दिवस भी है। आज रक्षाबन्धन का पवित्र पर्व भी है। कुछ मतों के अनुसार प्रातः सूर्योदय से 09:48 AM बजे तक रक्षाबन्धन का शुभ मुहूर्त बताया जा रहा है। परन्तु महावीर पञ्चांग के अनुसार पुरे दिन रक्षाबन्धन का शुभ मुहूर्त है। बाकि आप अपने यहाँ के लोकल पञ्चांग के अनुसार मुहूर्त तय करें। आज तैतिरीय शाखा को मानने वाले वेदपाठी ब्राह्मणों का उपाकर्म (श्रावणी) पर्व भी है। आज झूलनयात्रा समाप्त हो जायेगा। आज से अमरनाथयात्रा का आरम्भ होता है। आप सभी सनातनियों को “रक्षाबन्धन के पवित्र पर्व” की हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्तानंत बधाइयाँ।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आप का आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 28 अगस्त 2026 दिन शुक्रवार।।
Aaj ka Panchang 28 August 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – वर्षा.
मास – श्रावण.
पक्ष – शुक्ल.
गुजराती पंचांग के अनुसार – श्रावण शुक्ल पक्ष.
#Panchang_28_August_2026
तिथि – पूर्णिमा 09:49 AM बजे तक उपरान्त प्रतिपदा तिथि है।।
नक्षत्र – धनिष्ठा 02:16 AM तक उपरान्त शतभिषा नक्षत्र है।।
योग – अतिगण्ड 07:28 AM तक उपरान्त सुकर्मा योग है।।
करण – बव 09:49 AM तक उपरान्त बालव 21:57 PM तक उपरान्त कौलव करण है।।
चन्द्रमा – कुम्भ राशि पर।।
सूर्य – सिंह राशि एवं मघा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:22:33
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:55:44
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 05:41:41
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 18:19:31
राहुकाल (अशुभ) – सुबह 11:05 बजे से 12:40 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.28 बजे से 12.52 बजे तक।।
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पूर्णिमा तिथि विशेष – पूर्णिमा को घी एवं प्रतिपदा को कुष्मांड खाना एवं दान करना दोनों वर्जित बताया गया है। पूर्णिमा तिथि एक सौम्य और पुष्टिदा तिथि मानी जाती है। इसके देवता चन्द्रमा हैं तथा यह पूर्णा नाम से विख्यात है। यह शुक्ल पक्ष में ही होती है और पूर्ण शुभ फलदायी मानी गयी है।।
हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को कोई-न-कोई व्रत-त्यौहार होता ही है। आज रक्षाबन्धन का परम पवित्र त्यौहार है। जिनकी कुण्डली में चन्द्रमा की दशा चल रही हो उसे पूर्णिमा के दिन उपवास रखना अर्थात व्रत करना चाहिये। जिनके बच्चे कफ रोगी हों अर्थात सर्दी, जुकाम, खाँसी और निमोनियाँ समय-समय पर होती रहती हो उनकी माँ को वर्षपर्यन्त पूर्णिमा का व्रत करना और चन्द्रोदय के बाद चंद्रार्घ्य देकर व्रत तोड़ना चाहिये।।
पूर्णिमा माता लक्ष्मी को विशेष प्रिय होती है। इसलिये आज के दिन महालक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से मनोवान्छित कामनाओं की सिद्धि होती है। पूर्णिमा को शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बिल्वपत्र, शमीपत्र, फुल तथा फलादि चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। पूर्णिमा को शिव पूजन में सफ़ेद चन्दन में केशर घिसकर शिवलिंग पर चढ़ाने से घर के पारिवारिक एवं आन्तरिक कलह और अशान्ति दूर होती है।।
मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म पूर्णिमा तिथि को होता है, वह व्यक्ति पूर्ण चन्द्र की तरह आकर्षक और मोहक व्यक्तित्व का स्वामी होता है। इनकी बुद्धि उच्च स्तर की होती है। ऐसे जातक अच्छे खान पान के शौकीन होते हैं तथा ये सदा ही अपने कर्म में जुटे रहते हैं। ऐसे लोग अत्यधिक परिश्रमी होते हैं और इसी वजह से धनवान भी होते हैं। परन्तु इनमें एक बहुत बड़ी कमी ये होती है, कि ये सदैव परायी स्त्रियों पर मोहित रहते हैं।।
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शतभिषा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- शतभिषा नक्षत्र में जन्मा जातक बहुत साहसी एवं मजबूत विचारों वाला होता है। अत्यधिक सामर्थ्य एवं स्थिर बुद्धि के होते हुए भी कभी-कभी जिद्दी और संवेदनहीन प्रतीत होते हैं। सभी प्रकार से ज्ञानी होते हुए भी आप आत्म केन्द्रित होते हैं। आप अधिक संतान वाले एवं दीर्घायु होते हैं। शतभिषा नक्षत्र के जातक रहस्यमय एवं समृद्धशाली व्यक्ति होते हैं। इनको अपने आस-पास के लोगों से सम्मान प्राप्त होता है।।
यदि आपका जन्म शतभिषा नक्षत्र में हुआ है तो आप अत्यंत आकर्षक और मजबूत व्यक्तित्व के स्वामी होंगे। आपकी उपस्थिति गरिमामय और प्रभावशाली होती है जो कि दूसरों को आपकी ओर आकर्षित होने को विवश कर देती हैं। चौड़ा माथा, तीखी नाक और सुंदर नेत्रों के कारण आप और भी आकर्षक दिखते हैं। तेज़ स्मरण शक्ति आपके व्यक्तित्व को और मजबूती देती है।।
शतभिषा नक्षत्र के जातकों में सकारात्मक और नकारात्मक पहलू का संतुलित समावेश रहता है। आप अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं और किसी भी कीमत पर उनसे समझौता नहीं करते। जिस कार्य को आप उचित नहीं समझते वह कार्य करने के लिए आपको कोई बाध्य नहीं कर सकता। आप सहृदय व्यक्ति होंगे जो कोमल स्वभाव के कारण सदा ही दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते हैं।।
आप किसी को हानि नहीं पहुंचाते जब तक की सामने वाला आपको नुक्सान न पहुंचाए। आप एक बुद्धिमान व्यक्ति हे जो इश्वर में पूर्ण आस्था रखते हैं। आप सादा जीवन ब्यतित करने में ही विश्वास रखते हैं। परन्तु आपके व्यक्तित्व से आकर्षित हुए बिना कोई नहीं रह सकता। आप जीवन में खूब प्रशंसा और सम्मान पाते हैं। अपने कार्यक्षेत्र में आप पूरी लगन और मेहनत के साथ काम करते हैं और निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहते हैं।।
अच्छी शिक्षा के कारण आप जीवन में बहुत पहले ही अपने करियर का आरंभ कर लेते हैं। 34 वर्ष तक आप संघर्षरत रहते हैं परन्तु उसके बाद का समय बिना किसी बड़ी रुकावट के आपको उन्नति देता है। आपका पारिवारिक जीवन आपके व्यावसायिक जीवन की भांति सुखपूर्वक नहीं होता है। आप अपने परिजनों के कारण जीवन में बहुत कठिनाइयाँ झेलते हैं। हालाँकि आपका व्यवहार उनके प्रति प्रेमपूर्ण ही रहता है।।
इस कारण शतभिषा नक्षत्र के जातक मानसिक रूप से अशांत रहते हैं। पिता की अपेक्षा माता से आपको अधिक लगाव रहता है। साथ ही आपको भी उनसे बहुत स्नेह भी मिलता है। शतभिषा के जातकों का दांपत्य जीवन सुखमय नहीं होता है। सब कुछ होते हुए भी आपका अपने जीवन साथी के साथ सदा ही मतभेद रहता है। शतभिषा नक्षत्र में जन्मी जातिकायें कर्मपरायण एवं परोपकारी होती हैं।।
शतभिषा नक्षत्र में जन्मी जातिकायें सादे किन्तु आकर्षक व्यक्तित्व के कारण लम्बे अरसे तक स्मरण रखी जाती है। शतभिषा नक्षत्र में जन्मे जातक बिगड़े हुए काम को भी बड़े सूझ-बूझ के साथ बना देते हैं। शतभिषा नक्षत्र के जातक ह्रदय रोग, उच्च रक्तचाप, मुख से सम्बंधित अथवा गुप्त रोगों के शिकार हो ही जाते हैं।।
प्रथम चरण:- शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। शतभिषा नक्षत्र में जन्म होने पर जन्म राशि कुंभ तथा राशि का स्वामी शनि, वर्ण शूद्र, वश्य नर, योनि अश्व, योनि महिष, गण राक्षस तथा नाड़ी आदि हैं। ऐसे जातक पर राहु और शनि का प्रभाव रहता है। इस शतभिषा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी बृहस्पति हैं। शतभिषा नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा जातक कुशल वक्ता होता है। शतभिषा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी बृहस्पति शनि का शत्रु है और राहु का भी शत्रु है। अतः बृहस्पति की दशा अपेक्षित फल नहीं देती है। बृहस्पति में राहु एवं शनि की अंतरदशा कष्टदायी होगा। परन्तु राहु की दशा उत्तम फल देती है।।
द्वितीय चरण:- शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस शतभिषा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शनि हैं। शतभिषा नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मा जातक अपने समाज के अग्रगण्य धनवानों में गिने जाते हैं। शतभिषा नक्षत्र के दूसरे चरण का स्वामी शनि लग्नेश भी है। अतः शनि की दशा शुभ फलदायी होती है। राहु की स्वतंत्र दशा उत्तम फल देगी, परन्तु राहु में शनि या शनि में राहु की अन्तर्दशा शत्रु तुल्य कष्ट देगी।।
तृतीय चरण:- शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस शतभिषा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शनि हैं। शतभिषा नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा जातक अपने समाज में सुखी एवं संपन्न व्यक्ति होता है। शतभिषा नक्षत्र के तीसरे चरण का स्वामी शनि लग्नेश भी है। अतः शनि की दशा शुभ फल देती है। राहु की स्वतंत्र दशा उत्तम फल देती है परन्तु राहु में शनि या शनि में राहु की अन्तर्दशा शत्रु तुल्य कष्ट देती है।।
चतुर्थ चरण:- शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस शतभिषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी बृहस्पति हैं। शतभिषा नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मे जातक का पुत्र योग प्रबल होता है। शतभिषा नक्षत्र के चौथे चरण का स्वामी बृहस्पति शनि का शत्रु है और राहु का भी शत्रु है। अतः बृहस्पति की दशा अपेक्षित फल नहीं देती है। लग्नेश शनि की दशा-अन्तर्दशा जातक को उत्तम स्वस्थ्य एवं उन्नत्ति देती है।।
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शुक्रवार का विशेष – शुक्रवार के दिन तेल मर्दन अर्थात तेल शरीर में मालिश करने से बिघ्न बाधायें आती हैं – (मुहूर्तगणपति)।।
शुक्रवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से लाभ और यश की प्राप्ति होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खाकर यात्रा कर सकते है।।
शुक्र के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए यह उपाय करना चाहिए। शुक्र की अशुभता दूर करने के लिए अपने सामर्थ्य के अनुसार रुई और दही किसी मंदिर में दान करना चाहिए। किसी भी स्त्री एवं अपनी पत्नी का भी कभी भी अपमान या निरादर नहीं करना चाहिए। उन्हें सदैव आदर और सम्मान देने का प्रयास करना चाहिए।।
शुक्रवार को सफ़ेद वस्त्र धारण करना चाहिए। इत्र एवं परफ्यूम लगाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। किसी नेत्रहीन व्यक्ति को सफ़ेद वस्त्र या मिठाई दान करने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। दश वर्ष से कम आयु की कुवांरी कन्याओं को गाय के दूध से बने खीर खिलाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। मछलियों को आटे की गोलियां खिलाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। चाँदी का कड़ा पहनने एवं श्रीसूक्त का पाठ करने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है।।
शुक्रवार का विशेष टिप्स – मित्रों, आज शुक्रवार को दक्षिणावर्ती शंख से भगवान नारायण (शालिग्राम भगवान) का अभिषेक करें। यथोपचार से पूजन करें और पूजन के उपरान्त अथवा मध्य में ही श्वेत चन्दन में केशर मिलाकर भगवान को श्रद्धापूर्वक तिलक लगायें। शुक्रवार को इस प्रकार किया गया भगवान नारायण का पूजन माता महालक्ष्मी को बलात आपके घर की ओर खिंच लाता है। आज लक्ष्मी घर में आयें इसके लिये घर के ईशान कोण में देशी गाय के घी से रुई के जगह लाल धागे की बत्ती का एक दीपक जलायें।।
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शुक्रवार को भूलकर भी ये काम न करें:- हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी-देवता का होता है। जिसके अनुसार शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी का होता है। शुक्रवार के दिन जो भक्त मां लक्ष्मी की पूजा विधिपूर्वक करते हैं, उन्हें संसार के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में लक्ष्मी मां को धन की देवी माना गया है। मान्यता अनुसार शुक्रवार के दिन माँ की पूजा-आराधना करने से उनका आशीर्वाद सदैव बना रहता है।।
लेकिन इस दिन कुछ काम जिसे कभी भूलकर भी नहीं करना चाहिए। दैनिक जीवन में भी कुछ ऐसे काम होते हैं, जैसे भूलकर भी कभी किसी को भी शुक्रवार के दिन धन ना दें और ना ही उधार लें। मान्यता है, कि शुक्रवार के दिन दिया गया धन वापस लौटकर नहीं आता है। इसदिन किसी को कर्ज देने से मां लक्ष्मी नाराज होती हैं और संबंध भी खराब होते हैं।।
वैसे तो आपको कभी किसी का अपमान नहीं करना चाहिए, लेकिन शुक्रवार के दिन इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन भूलकर भी महिलाओं, कन्याओं और किन्नरों का अपमान नहीं करना चाहिए। उनके बारे में अपशब्द नहीं बोलने चाहिए। महिलाओं में मां लक्ष्मी का वास होता है और उनके अपमान करने से मां लक्ष्मी भी नाराज हो जाती हैं।।
शुक्रवार के दिन अगर आप व्रत-पूजन नहीं भी करते हैं तो तामसिक भोजन खासतौर पर मांसाहार और मदिरा के सेवन से परहेज रखना चाहिए। इस दिन पूर्ण सात्विक भोजन करना चाहिए। अगर संभव हो सके तो इसको आप अपनी आदत भी बना लें।।
शुक्रवार के दिन भूलकर भी किसी को भी शक्कर नहीं देनी चाहिए। क्योंकि ज्योतिष में शक्कर का संबंध शुक्र और चंद्र दोनो से हैं। इसलिए शुक्रवार के दिन शक्कर देने से आपका शुक्र कमजोर होता है और शुक्र भौतिक सुखों का स्वामी है। शुक्र के नाराज होने से भौतिक सुख-सुवधिओं में कमी आती है और आर्थिक स्थिति भी खराब होती है।।
शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी के साथ नारायण की भी पूजा करनी चाहिए। लक्ष्मी के साथ नारायण की पूजा करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और दोनों का आशीर्वाद भी बना रहता है। अगर संभव हो सके तो सुबह या शाम किसी भी एक समय मीठा घर में जरूर बनाना चाहिए और उसको सबसे पहले घर की सबसे बड़ी स्त्री को देना चाहिए।।
शुक्रवार के दिन किसी से अपशब्दन न बोलें। ऐसा करने से माता लक्ष्मी आप से अप्रसन्नम हो जाती हैं और फिर आपके साथ धन संबंधी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। घर में अपव्यमय बढ़ जाता है। लोग बीमार रहने लगते हैं। व्यापार धंधे में नुकसान होने लगता है।
साफ-सुथरे रसोईघर में मां लक्ष्मी का वास होता है। इससे घर में वैभव और सुख-शांति का प्रवाह निरंतर होता रहता है। भूलकर भी रात के समय किचन में गंदे बर्तन छोड़ना चाहिए, इससे लक्ष्मी माता रूठ जाती है और घर में अशांति फैल जाती है। साथ ही स्वास्थ्य के खराब रहने की आशंका बनी रहती है।।
#Panchang_28_August_2026
मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म शुक्रवार को होता है वह व्यक्ति चंचल स्वभाव का होता है। ये सांसारिक सुखों में लिप्त रहने वाले होते हैं तथा तर्क करने में निपुण और नैतिकता में बढ़ चढ कर होते हैं। ऐसे लोग धनवान और कामदेव के गुणों से प्रभावित रहते हैं और इनकी बुद्धि अत्यन्त तीक्ष्ण होती है। ये ईश्वर की सत्ता में अंधविश्वास नहीं रखते हैं तथा कला के प्रति रूचि रखने वाले, सुन्दर एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं।।
ऐसे लोग सौंदर्यप्रेमी, मधुरभाषी, यात्राओं के शौकिन, सुंदर स्थानों पर घुमने वाले एवं कलाकार स्वभाव के होते हैं। इनमें सेक्स की भावना अन्यों के मुकाबले अधिक होती है। सुन्दर कपडे़ पहनने के शौकिन तथा आभूषण अर्थात ज्वेलरी प्रिय होते हैं। इनको अपना कैरियर पर्यटन से जुडे क्षेत्र, फैशन डिजायनर, कलाकार, सेक्स विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक अथवा ज्वेलरी से सम्बन्धित व्यदवसायों में आजमाना चाहिये। इनका शुभ अंक 7 होता है तथा इनका शुभ दिन बुधवार और शुक्रवार होता है।।
आज का सुविचार – मित्रों, अगर कोई आपको नीचा दिखाना चाहता हैं तो इसका मतलब हैं आप उससे ऊपर हैं। जिनमें आत्मविश्वास की कमी होती हैं वही दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। मुझे कौन याद करेगा इस भरी दुनिया में, हे प्रभु! बिना मतल़ब के तो लोग तुझे भी याद नही करते।।
#Panchang_28_August_2026
विवाह में हो रहे विलम्ब के लिये इन साधारण उपायों से अपने जीवन को रसमय बनायें।।…. आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें….. वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
रक्षाबन्धन का मुहूर्त कथा माहात्म्य एवं पूजन विधि।।
