बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।
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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 29 अगस्त 2026 दिन शनिवार।।
मित्रों, तारीख 29 अगस्त 2026 दिन शनिवार को ही भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। आज से दही का त्याग करना चाहिए और पुरे भाद्रपद मास में दही नहीं खाना चाहिए। लिखा है:- दधिभाद्रपदेत्यजेत्। नात्रत्यागस्तक्रादीनाम्।। अर्थात भाद्रपद मास में केवल दही का सेवन वर्जित माना गया है, परन्तु छाछ, मट्ठा अथवा दही से बने अन्य पदार्थ इस निषेध में नहीं आते। आज अशून्यशयन 2 का (चंदोदय – रा. 06:59 PM होगा) पावन त्यौहार है। आज भगवान श्रीविष्णु को शय्या पर शयन किये हुए ही माता लक्ष्मी के साथ में पूजन करने से अक्षय धन-सम्पदा एवं दाम्पत्य सुख की भी प्राप्ति होती है। आज श्रीनारायण गुरुदेव (केरल) की जन्म जयन्ती है। आज त्रिपुष्करयोग भी है। आप सभी सनातनियों को “शय्या पर शयन किये भगवान श्रीविष्णु सहित माता लक्ष्मी के पूजन” की हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयां।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आप का आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 29 अगस्त 2026 दिन शनिवार।।
Aaj ka Panchang 29 August 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – वर्षा.
मास – भाद्रपद.
पक्ष – कृष्ण.
गुजराती पंचांग के अनुसार – भाद्रपद कृष्ण पक्ष.
#Panchang_29_August_2026
तिथि – प्रतिपदा 09:58 AM बजे तक उपरान्त द्वितीया तिथि है।।
नक्षत्र – शतभिषा 03:14 AM तक उपरान्त पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र है।।
योग – सुकर्मा 06:37 AM तक उपरान्त धृति योग है।।
करण – कौलव 09:58 AM तक उपरान्त तैतिल 21:51 PM तक उपरान्त गर करण है।।
चन्द्रमा – कुम्भ राशि पर 21:38 PM तक उपरान्त मीन राशि पर।।
सूर्य – सिंह राशि एवं मघा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:22:48
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:54:53
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 05:42:35
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 18:18:52
राहुकाल (अशुभ) – सुबह 09:31 बजे से 11:05 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.27 बजे से 12.51 बजे तक।।
#Panchang_29_August_2026
प्रतिपदा तिथि विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली अर्थात किसी भी कार्य को अथवा कार्यक्षेत्र को बढ़ाने वाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद अर्थात कोई भी कार्य को निर्विघ्नता पूर्वक चरम तक पहुंचाने अर्थात सिद्धि तक पहुंचाने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता को बताया गया है। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये। आज प्रतिपदा तिथि को इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है।।
मित्रों, यदि प्रतिपदा तिथि रविवार या मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित होता है। इसके अलावा प्रतिपदा तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय शुभ कार्य करने की सलाह दी जाती है। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा में भगवान शिव का पूजन नहीं करना चाहिए क्योंकि शिव का वास श्मशान में होता है। परन्तु कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा में भगवान शिव का पूजन करना चाहिए। शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि में विवाह, यात्रा, उपनयन, चौल कर्म, वास्तु कर्म व गृह प्रवेश आदि मॉगलिक कार्य नहीं करने चाहिए।।
मित्रों, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म प्रतिपदा तिथि में होता है वह व्यक्ति अनैतिक कार्यों में संलग्न रहने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति कानून के विरूद्ध जाकर काम करने वाला भी होता है। ऐसे लोगों को मांस मदिरा काफी पसंद होता है अर्थात ये तामसी भोजन के बहुत शौकीन होते हैं। आम तौर पर इनकी दोस्ती ऐसे लोगों से होती है जिन्हें समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता अर्थात बदमाश और ग़लत काम करने वाले लोग। कृष्ण पक्ष प्रतिपदा को जन्मा जातक धनी एवं बुद्धिमान होगा। उन पर माता की विशेष कृपा दृष्टि बनी रहती है। जातक चंद्रमा के बलवान होने के कारण मानसिक रूप से भी बलवान होते हैं। वहीं दूसरी ओर शुक्ल पक्ष प्रतिपदा में जन्मा जातक बुरी लोगों की संगति में पड़कर बुरी आदतों के शिकार हो सकते हैं। उनके द्वारा किए गए कार्य कभी कभार उनके परिवार को ही हानि पहुंचाते हैं। इसके विपरीत कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा में आप शुभ कार्य कर सकते हैं।।
#Panchang_29_August_2026
पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में हुआ है तो आप मानवता में विश्वास रखते हुए केवल दूसरों के भले के बारे में ही सोचते हैं। आप एक दयालु और नेक दिल होने के साथ-साथ खुले विचारों वाले व्यक्ति होंगे। आप बहुत साहसी होंगे तथा दूसरों की मदद करने में सदा आगे रहेंगे। आप वाणी और विचारों से नम्र अवश्य होते हैं परन्तु व्यक्तित्व से नहीं।।
पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्मे जातक अपने आदर्शो और सिद्धांतों पर ही आजीवन चलना पसंद करते हैं। आप जीवन में कभी पथभ्रष्ट नहीं होते क्योंकि आपका दृष्टिकोण सही और साफ़ होता है। आप एक शांति प्रिय व्यक्ति होंगे परन्तु शीघ्र ही किसी छोटी से छोटी बात पर भी क्रोध कर लेंगे। आपको क्रोध जितनी जल्दी आता है उतनी जल्दी चला भी जाता है।।
दूसरों के साथ आपका व्यवहार स्नेही और प्रेमपूर्ण होता है। आप एक संवेदनशील व्यक्ति होंगे जो शीघ्र ही प्रभावित हो जाते है। परन्तु न तो आप डरपोक हैं और न ही जल्दी हार मानते हैं। पूर्वाभाद्रपद में जन्मे जातक आध्यात्मिक स्वभाव वाले होते हैं। परन्तु बंद आँखों से किसी भी बात को मान लेना और उनका अनुसरण करना इनके स्वभाव में नहीं होता है। आप सही और गलत में निर्णय लेने के बाद ही दूसरों का अनुसरण करते हैं।।
आप धन के मामलों में कंजूस कहे जाते हैं। आप जीवन में कई कठिनाईयों को झेलते हुए समाज में आदर एवं सम्मान प्राप्त करते हैं। अपनी कुशाग्र बुद्धि के कारण आप किसी भी प्रकार के कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के योग्य बन जाते हैं। आप केवल स्वभाव से ही नहीं अपितु सामाजिक और आर्थिक रूप से भी स्वतंत्र जीवन पसंद करते हैं। व्यावसायिक रूप से 24 से 33 वर्ष की आयु में आप अपने जीवन में सर्वाधिक सफलता प्राप्त करेंगे।।
40 से 54 वर्ष के आयु में अपने करियर की ऊँचाईयों को छुएंगे। पूर्वाभाद्रपद के जातकों को सरकारी नौकरी, बैंक, शिक्षा और लेखन, व्यापार, ज्योतिष एवं अभिनय के क्षेत्र में कार्य करते देखा गया है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक अपनी माता के स्नेह से वंचित रहता है। कारण जो भी हो पिता का संरक्षण और प्रेम आपको सदा प्राप्त होता है। पिता की उच्च एवं सम्माननीय स्तिथि के कारण आप सदा गौरवान्वित रहेंगे।।
परन्तु कुछ वैचारिक मतभेदों के कारण आपसी तनाव रहेगा। पूर्वाभाद्रपद में जन्मा जातक अक्सर स्त्रियों के वश में रहता है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्मी जातिकायें जादू टोने में विश्वास रखती हैं। निराशा और शोक मग्न चेहरा पूर्वाभाद्रपद में जन्मे जातकों की निशानी बन जाती है। पैर की हड्डी का दर्द, पैर का टूटना, मधुमेह और लकवा जैसी बीमारियाँ ऐसे जातकों को परेशान करती रहती है।।
प्रथम चरण:- वैदिक ज्योतिष के अनुसार पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी गुरु ग्रह है। इस पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी मंगल हैं। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा जातक शूरवीर होता है। जो वस्तु विनम्रता, प्रार्थना एवं खरीद से प्राप्त नहीं हो पाती उसे हरण करने में रूचि रखता है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति शनि का शत्रु है परन्तु मंगल का मित्र है। अतः मंगल की दशा शुभ फल एवं भौतिक सम्पन्नता देती है। परन्तु बृहस्पति की दशा में अपेक्षित शुभ फल नहीं मिल पाएगा। साथ ही शनि की दशा-अन्तर्दशा शुभ फल देती है।।
द्वितीय चरण:- पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी गुरु ग्रह है। इस पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण में जन्मा जातक अति बुद्धिमान होता है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति शुक्र का शत्रु है तथा शुक्र शनि का भी शत्रु है। अतः शुक्र की दशा अपेक्षित शुभ फल नहीं दे पाएगी। बृहस्पति की स्वतंत्र दशा में पराक्रम बढेगा। शनि की दशा में जातक की उन्नत्ति होगी।।
तृतीय चरण:- पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी गुरु ग्रह है। इस पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी बुध हैं। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण में जन्मे जातक का विकास और उन्नत्ति बड़े शहर में रहने के कारण होती है। छोटे गाँव कस्बों में जातक उन्नत्ति नहीं कर पायेगा। बुध की नक्षत्र स्वामी बृहस्पति से शत्रुता है। परन्तु लग्नेश शनि से मित्रता है अतः बुध की दशा शुभ फलदायी होगी। बृहस्पति की स्वतंत्र दशा में पराक्रम बढेगा। शनि की दशा में जातक की उन्नत्ति होगी।।
चतुर्थ चरण:- वैदिक ज्योतिष के अनुसार पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी गुरु ग्रह है। इस पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी चन्द्रमा हैं। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मा जातक भोगी होता है। लग्न नक्षत्र स्वामी और नक्षत्र चरण स्वामी में परस्पर मित्रता है। अतः लग्नेश गुरु की दशा अति उत्तम फल देगी। गुरु की दशा में जातक को रोजगार के शुभ अवसर प्राप्त होंगे। चन्द्रमा की दशा धार्मिक यात्राएं एवं भाग्योदय के उत्तम अवसर प्रदान करेंगी। लग्न बली न होने के कारण जातक के विकास में अडचने आएँगी।।
#Panchang_29_August_2026
शनिवार को जूते-चप्पल, लोहे की बनी वस्तुयें, नया अथवा पुराना भी वाहन नहीं खरीदना चाहिये एवं नए कपड़े न खरीदना और ना ही पहली बार पहनना चाहिये।।
शनिवार का विशेष – शनिवार के दिन तेल मर्दन “मालिश” करने से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती हैं – (मुहूर्तगणपति)।।
शनिवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से आयुष्य की हानि होती है। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है।।
दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।।
#Panchang_29_August_2026
जिस व्यक्ति का जन्म शनिवार को होता है उस व्यक्ति का स्वभाव कठोर होता है। ये पराक्रमी एवं परिश्रमी होते हैं तथा इनके ऊपर दु:ख भी आये तो ये उसे भी सह लेना जानते हैं। ये न्यायी एवं गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा सेवा करना इन्हें काफी पसंद होता है।।
शनिवार को जन्म लेनेवाले जातक कुछ सांवले रंग के, साहसी, मैकेनिक अथवा चिकित्सक होते हैं। इनमें से कुछ अपने कार्य में सुस्त भी होते हैं, जैसे देर से जागना, देर तक सोना भी इनकी आदतों में शुमार होता है। पारिवारिक जिम्मेदारियां भी शुद्ध रहती है इसलिये ये एक मेहनतकश इंसान होते हैं। सफलता के मार्ग में रूकावटों का भी सामना करना पड़ता है।।
शनिवार को जन्मलेनेवाले जातकों के स्वभाव में साहस लक्षित होता है। सफलता के मार्ग में लाख रुकावटें आए, लेकिन ये इसे पार करके ही रहते हैं। ऐसे लोग अधिकांशतः सांवले रंग के होते हैं। इन जातकों को अपने कैरियर के लिये डॉक्टपर, इंजीनियर तथा मैकेनिक के क्षेत्र का चयन करना चाहिये। इनका शुभ अंक 3, 6 और 9 तथा इनका शुभ दिन शनिवार और मंगलवार होता है।।
आज का सुविचार – मित्रों, रात लम्बी और काली हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं होता कि सुबह होगी ही नहीं। ठीक उसी तरह असफलता का दौर लम्बा हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब ये कतई नहीं होता कि आपको अब कभी सफलता मिलेगी ही नहीं।।
#Panchang_29_August_2026
शनि देव मेहरबान हों तो इंजीनियर और चार्टर्ड एकाउंटेंट बनाते है।।…. आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें: