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पञ्चांग 27 अगस्त 2026 दिन गुरुवार।।

पञ्चांग 27 अगस्त 2026 दिन गुरुवार।। Panchang 27 August 2026

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 27 अगस्त 2026 दिन गुरुवार।।

मित्रों, तारीख 27 अगस्त 2026 दिन गुरुवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष कि चतुर्दशी तिथि है। परंतु व्रत की पुर्णिमा आज ही है। आज तैतिरीय उपनिषद के उपासक (दक्षिण भारतीय ब्राह्मण) लोगों का उपाकर्म अर्थात श्रावणी कर्म करने का दिन है। आज भगवान का हयग्रीव रूप में अवतरण हुआ था, इसलिए आज सायंकाल में हयग्रीव जयन्ती मनायी जाएगी। आज काशी में भदैनी स्थित मंदिर में पूजन-दर्शन का बहुत महत्त्व बताया गया है। आज से (दिन में 02:14 PM के उपरान्त से) पंचक (पचखा) आरम्भ हो जायेगा। आज यायिजययोग भी है। आप सभी सनातनियों को “हयग्रीव जयन्ती” की हार्दिक शुभकामनायेँ।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आप का आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।

वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

पञ्चांग 27 अगस्त 2026 दिन गुरुवार।। Panchang 27 August 2026

आज का पञ्चांग 27 अगस्त 2026 दिन गुरुवार।।
Aaj ka Panchang 27 August 2026.

विक्रम संवत् – 2083.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.

शक – 1948.

अयन – सौम्यायनम्.

गोल – याम्य.

ऋतु – वर्षा.

मास – श्रावण.

पक्ष – शुक्ल.

गुजराती पंचांग के अनुसार – श्रावण शुक्ल पक्ष.

#Panchang_27_August_2026

तिथि – चतुर्दशी 09:10 AM बजे तक उपरान्त पूर्णिमा तिथि है।।

नक्षत्र – श्रवण 00:48 AM तक उपरान्त धनिष्ठा नक्षत्र है।।

योग – शोभन 07:56 AM तक उपरान्त अतिगण्ड योग है।।

करण – वणिज 09:10 AM तक उपरान्त विष्टि 21:33 PM तक उपरान्त बव करण है।।

चन्द्रमा – मकर राशि पर 13:36 PM तक उपरान्त कुम्भ राशि पर।।

सूर्य – सिंह राशि एवं मघा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।

मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:22:19

मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:56:34

वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 05:41:39

वाराणसी सूर्यास्त – सायं 18:19:45

राहुकाल (अशुभ) – सुबह 14:14 बजे से 15:49 बजे तक।।

विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.27 बजे से 12.51 बजे तक।।

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चतुर्दशी तिथि विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।।

इसीलिये चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।।

जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है। इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है। इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है। ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं। देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।।

#Panchang_27_August_2026

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मे जातकों का गुण एवं स्वभाव:- धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मा जातक सभी गुणों से संपन्न होकर जीवन में सम्मान और प्रतिष्ठा पाता है। आप स्वभाव से बहुत ही नरम दिल एवं संवेदनशील व्यक्ति होते हैं। आप दानी और अध्यात्मिक व्यक्ति हैं परन्तु अपनी इच्छाओं के विरुद्ध जाना आपके बस में नहीं होता है। आपका रवैया अपने प्रियजनों के प्रति बेहद सुरक्षात्मक होता है। परन्तु फिर भी आप दूसरों के लिए जिद्दी और गुस्सैल ही रहते हैं।।

आप एक ज्ञानी व्यक्ति होंगे जो किसी भी आयु में ज्ञान अर्जन करने में संकोच नहीं करेंगे। अपने इसी गुण के कारण आप किसी भी प्रकार के कार्य को निपुणता के साथ पूर्ण करने में सक्षम रहते हैं। आप संवेदनशील तो हैं परन्तु कमज़ोर नहीं हैं। आप मानवता में विश्वास रखने वाले व्यक्ति होंगे जो दूसरों को कडवे वचन कभी नहीं बोल सकते। धनिष्ठा नक्षत्र का जातक कभी विरोध की भावना नहीं रखते परन्तु अपने साथ हुए दुर्व्यवहार को कभी भूलते भी नहीं।।

आप सही समय आने पर अपने तरीके से बदला लेते हैं। अत्यधिक ज्ञान और तीक्ष्ण बुद्धि के कारण आप जीवन में नयी ऊचाईयों को छूते हैं। अधिकतर घनिष्ठा के जातकों को इतिहास या विज्ञान के क्षेत्रों में कार्यरत देखा गया है। रिसर्च और वकालत के क्षेत्रों में आप तरक्की करते हैं। घनिष्ठा नक्षत्र में जन्मे जातक किसी भी बात को छुपा कर रखने में सक्षम होते हैं। यह अपने भेद जल्दी ही किसी को नहीं बताते।।

आप अपने कार्य के प्रति बेहद सजग एवं वफादार होते हैं। अपने जीवन के 24 वर्ष के बाद आपको अपने करियर में स्थिरता मिलेगी। आप अपने कार्य को लगन और निष्ठापूर्वक करने में विश्वास रखते हैं। परन्तु व्यवसायिक कार्यक्षेत्र में अपने अधिनस्त कर्मचारियों से आपको सावधान रहने की आवश्यकता है। धनिष्ठा के जातकों का जीवन बचपन से ही सभी सुख सुविधाओं से परिपूर्ण होता है।।

आप अपने भाई बहनों से बेहद लगाव रखते हैं। समाज और परिवार में आप का स्थान अति सम्मानीय होता है। परन्तु जीवन में कई बार आपको अपने रिश्तेदारों द्वारा परेशानी और रुकावटें झेलनी पड़ती हैं। आपको अपने पूर्वजों की धन सम्पदा भी प्राप्त होती है। आपको अपने जीवन में ससुराल पक्ष से अधिक सहयोग प्राप्त नहीं होता है और न ही आपके सम्बन्ध उनसे मधुर होते हैं। परन्तु एक गुणी एवं सुयोग्य पत्नी के कारण आपका दांपत्य जीवन ठीक चलता है।।

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मी जातिकाओं को साज श्रृंगार में अधिक रूचि होती है। परन्तु जीवन में धन की कमी को झेलने के कारण इनमें सन्यासियों जैसी प्रवृत्ति जन्म ले लेती है। धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मी जातिकाओं का वैवाहिक जीवन दुःख एवं अनेक प्रकार के कष्टों से भरा होता है। धनिष्ठा नक्षत्र के जातक किसी से भी नहीं घबराते हैं। ऐसे जातकों के हाथ पैर की हड्डी टूटना, रक्तचाप अथवा ह्रदय से सम्बंधित रोग होने की आशंका होती है।।

प्रथम चरण:- धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह मंगल है, वहीं इसका राशि स्वामी शनि है। इस धनिष्ठा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य हैं। धनिष्ठा नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा जातक लम्बी आयु वाला होता है। धनिष्ठा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य शनि का शत्रु है। परन्तु मंगल का मित्र है अतः सूर्य की दशा अशुभ फल देगी शनि की दशा में जातक को उत्तम स्वस्थ्य एवं धन की प्राप्ति होती है। मंगल की दशा में जातक को भौतिक उपलब्धियां प्राप्त होंगी।।

द्वितीय चरण:- धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह मंगल है, वहीं इसका राशि स्वामी शनि है। इस धनिष्ठा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध हैं। धनिष्ठा नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मे जातक की गिनती समाज के विद्वानों में होती है। धनिष्ठा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध शनि का शत्रु है और मंगल का भी शत्रु है। अतः बुध की दशा जातक को अपेक्षित फल नहीं दे पाती परन्तु शनि की दशा उत्तम फलदायी होती है।।

तृतीय चरण:- धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह मंगल है, वहीं इसका राशि स्वामी शनि है। इस धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण में जन्मा जातक थोडा डरपोक होता है। धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण का स्वामी शुक्र शनि का शत्रु है और मंगल का भी शत्रु है। अतः शुक्र की दशा जातक को अपेक्षित फल नहीं देगी परन्तु शनि की दशा-अन्तर्दशा उत्तम फलदायी होगी।।

चतुर्थ चरण:- धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह मंगल है, वहीं इसका राशि स्वामी शनि है। इस धनिष्ठा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी मंगल हैं। धनिष्ठा नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मा जातक महान नारी का पति होता है। धनिष्ठा नक्षत्र के चौथे चरण का स्वामी मंगल है और नक्षत्र स्वामी भी मंगल है। अतः मंगल की दशा जातक को राजयोग प्रदान करती है। शनि की दशा में जातक को उत्तम स्वस्थ्य एवं धन की प्राप्ति होगी।।

#Panchang_27_August_2026

गुरुवार शॉपिंग के लिये अच्छा दिन माना जाता है।।

गुरुवार का विशेष – गुरुवार के दिन तेल मर्दन करने से धन एवं यश की हानि होती है – (मुहूर्तगणपति)।।

गुरुवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से तथा सर के बाल धोना, कपड़े धुलना अथवा धोबी के घर डालना, घर-आँगन की गोबर आदि से लिपाई करना इस प्रकार के कार्य नहीं करने चाहियें इससे धन एवं पूण्य की हानी होती है और लक्ष्मी घर छोड़कर चली जाती है।। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति का कारक ग्रह होता है। साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक ग्रह भी होता है। इसलिये बृहस्पति ग्रह अकेले ही स्त्री के संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है। अतः बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है जिससे कि बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी आती है। इसी कारण से इस दिन बाल धोना या कटवाना भी नहीं चाहिए। इसका असर संतान और पति के जीवन पर पड़ता है और उनकी उन्नति बाधित होती है।।

वास्तु अनुसार घर के ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है। ईशान कोण का संबंध परिवार के नन्हे सदस्यों यानी कि बच्चों से होता है। साथ ही घर के पुत्र संतान का संबंध भी इसी कोण से ही होता है। ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है इसलिये घर में शुद्ध वजन वाले कपड़ों को धोना, कबाड़ घर से बाहर निकालना, घर को धोना या पोछा लगाना इत्यादि घर के ईशान कोण को कमजोर करता है। उससे घर के बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर गुरु का शुभ प्रभाव कम होता है।।

#Panchang_27_August_2026

गुरुवार भगवान लक्ष्मी नारायण का दिन होता है। इसलिये इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से जीवन में अपार खुशियाँ आती है। इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से पति-पत्नी के बीच कभी दूरियाँ नहीं आती है साथ ही धन की वृद्धि भी होती है। जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से उन्नति के रास्ते आसानी से खुलते हैं। परन्तु यदि गुरु ग्रह को कमजोर करने वाले कार्य किए जाए तो प्रमोशन होने में भी रुकावटें आती है।।

गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है। जैसे – सिर के बाल धोना, भारी कपड़े धोना, बाल कटवाना, शेविंग करवाना, शरीर के बालों को साफ करना, फेशियल करवाना, नाखून काटना, घर से मकड़ी के जाले साफ करना, घर के उन कोनों की सफाई करना जिन कोनों की रोज सफाई नहीं की जाती हो। ये सभी काम गुरुवार को करने से धन हानि होता है तथा तरक्की रुक जाती है।।

दिशाशूल – गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है।।

गुरुवार के दिन ये विशेष उपाय करें – गुरु धन एवं प्रतिष्ठा का कारक ग्रह होता है। जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है। गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें बिगड़े काम भी बन जायेंगे।।

#Panchang_27_August_2026

बृहस्पतिवार को जिनका जन्म होता है, वह व्यक्ति विद्या एवं धन से युक्त होता है अर्थात ये ज्ञानी और धनवान होते हैं। ये विवेकशील होते हैं और शिक्षण को अपना पेशा बनाते हैं। ये लोगों के सम्मुख आदर और सम्मान के साथ प्रस्तुत होते हैं तथा उच्च स्तर के सलाहकार भी होते हैं। गुरुवार में जन्मे जातक सभ्य, खिलते रंग के, सुशील एवं मधुर स्वभाव के होते हैं तथा धर्म के प्रति सचेत होते हैं।।

ये सभी सद्गुणों से संपन्न होने के वजह से किसी के साथ विश्वासघात नहीं करते हैं। ऐसे लोग किसी का हक नहीं मारते तथा न्याय के प्रति सजग होते हैं। यह सफल राजनीतिज्ञ, न्यायधीश, क्लर्क, प्रकाशक एवं धर्मगुरु आदि के रूप में सफल होते हैं। गुरुवार को जन्मं लेने वाले व्यसक्ति बेहद मिलनसार और मधुर स्वभाव के होते हैं। ये जीवन को उत्सफव की तरह जीते हैं इसलिए हमेशा खिले-खिले रहते हैं।।

ऐसे व्यक्ति धर्म में विशेष रुचि रखने वाले होते हैं। धार्मिक प्रवृत्ति के कारण ये कभी किसी के साथ विश्वाससघात नहीं कर सकते हैं। यह किसी का हक भी नहीं मारते, न्याय के प्रति सजग होते हैं। इनको अपने जीवन में सफलता हेतु धर्मगुरु, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, प्रकाशक एवं न्यायधीश आदि के क्षेत्र में भाग्य आजमाना चाहिये। इनका शुभ दिन मंगलवार और बृहस्पितिवार तथा शुभ अंक 4 होता है।।

आज का विचार – मित्रों, हम अपनी पिछली गलतियों से सबक लेकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। परन्तु याद रहे कि होशियार लोग अपनी गलती से लेते हैं, जबकि ज्यादा होशियार लोग दूसरों की गलतियों से गलतियों को दुहराना सीखते हैं। इसलिये अपनी गलतियों को सुधारना ही व्यक्ति में इंसानियत लाता है।।

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जन्मकुण्डली के अनुसार आपके जीवन में धन कैसे और कब आयेगा?।।…. आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें….. वेबसाईट पर पढ़ें:  & ब्लॉग पर पढ़ें:

“क्या बाबा के सर सज रही है, UP का ताज? क्या बाबा फिर CM बन सकते हैं।।” – My Latest video.
“क्या कहती है अखिलेश यादव की कुंडली? क्या मिलेगी सत्ता?।।” – My Latest video.
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सिलवासा ऑफिस:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजू में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा।।

सिलवासा ऑफिस में प्रतिदिन मिलने का समय:-
10:00 AM to 02:00 PM And 04:30 PM to 08:30 PM.
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