राहु-केतु का विशेष काल सर्प योग।। Rahu-Ketu Ka Vishesh Kaal Sarp Yoga.
हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,
मित्रों, राहु और केतु से बनने वाला सबसे चर्चित, सबसे भयावह और सबसे रहस्यमय योग है — काल सर्प योग।। आज हम इसी विशेष योग के विषय में गहराई से बात करेंगे। यह योग जन्म कुण्डली के सर्वाधिक चर्चित योगों में से एक है और इसके विषय में समाज में अनेक भ्रान्तियाँ भी फैली हुई हैं।।
मित्रों, काल सर्प योग तब बनता है जब जन्म कुण्डली में सभी सात ग्रह — सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि — राहु और केतु के बीच में आ जाते हैं। अर्थात् सभी ग्रह राहु से केतु की दिशा में एक ही ओर स्थित हो जाते हैं।।
काल सर्प योग बारह प्रकार का होता है और प्रत्येक प्रकार का अपना अलग नाम और फल होता है। पहला है अनन्त काल सर्प योग जब राहु प्रथम भाव में हो। दूसरा है कुलिक जब राहु द्वितीय में हो। तीसरा वासुकि जब राहु तृतीय में हो। चौथा शंखपाल जब राहु चतुर्थ में हो। पाँचवाँ पद्म जब राहु पञ्चम में हो। छठा महापद्म जब राहु षष्ठ में हो। सातवाँ तक्षक जब राहु सप्तम में हो। आठवाँ कर्कोटक जब राहु अष्टम में हो। नवाँ शंखनाद जब राहु नवम में हो। दसवाँ पातक जब राहु दशम में हो। ग्यारहवाँ विषधर जब राहु एकादश में हो और बारहवाँ शेषनाग जब राहु द्वादश भाव में हो।।”
मित्रों, काल सर्प योग के विषय में सबसे पहले यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि यह योग केवल अशुभ नहीं है। इतिहास में अनेक महापुरुषों की कुण्डली में यह योग पाया गया है। पं. जवाहरलाल नेहरू, डॉ. भीमराव अम्बेडकर और अनेक महान् व्यक्तित्वों की कुण्डली में काल सर्प योग था।।
काल सर्प योग वाले जातकों के जीवन में संघर्ष अधिक होता है परन्तु जो इस संघर्ष से नहीं घबराता वह जीवन में असाधारण ऊँचाइयाँ प्राप्त करता है। ऐसे जातकों को जीवन में बार-बार एक ही प्रकार की बाधाएं आती हैं। यही इस योग की विशेषता है। परन्तु जब राहु-केतु की दशा में यह योग अनुकूल फल देता है तो जातक एकदम से आसमान छू लेता है।।”
मित्रों, काल सर्प योग वाले जातकों में सपने बहुत विचित्र और प्रभावशाली आते हैं। सर्प के स्वप्न, पूर्वजों के दर्शन और रहस्यमय अनुभव इन जातकों को प्रायः होते रहते हैं। कभी-कभी इन्हें ऐसा लगता है कि कोई अदृश्य शक्ति इन्हें आगे बढ़ने से रोक रही है।।
इस योग के निवारण हेतु नागपञ्चमी के दिन नाग देवता की पूजा अवश्य करें। त्र्यम्बकेश्वर, उज्जैन अथवा किसी सिद्ध तीर्थ पर जाकर काल सर्प दोष निवारण पूजा करवाएं। नित्य “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें। महामृत्युञ्जय मन्त्र का जाप भी अत्यन्त लाभकारी है। सोमवार का व्रत रखें और शिव जी पर दूध, बेलपत्र और जल का अभिषेक करें।।
मित्रों, अन्त में यह याद रखें कि कोई भी योग — चाहे वह शुभ हो या अशुभ — आपके भाग्य को पूर्णतः नहीं बदल सकता। आपका परिश्रम, आपकी लगन, आपकी सकारात्मक सोच और ईश्वर पर आपकी आस्था — ये सब मिलकर आपके जीवन की दिशा तय करते हैं। ज्योतिष केवल मार्गदर्शन करता है, जीवन का निर्माण तो आप स्वयं करते हैं।।
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