ऋषि पंचमी व्रत कथा एवं पूजा विधि।। Rishi Panchami Vrat Katha Aur Vidhi.
जय श्रीमन्नारायण।।
मित्रों, ऋषि पंचमी का यह परम पावन व्रत हमारी सनातन संस्कृति की उस गहन कृतज्ञता की भावना का प्रतीक है। जिसके माध्यम से हम अपने सप्त ऋषियों के प्रति अपना श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हैं। यह व्रत प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। अर्थात गणेश चतुर्थी के ठीक अगले दिन, तथा इसी कारण इसे ऋषि पंचमी अथवा ऋषि पंचमी व्रत के नाम से जाना जाता है।।
यह व्रत विशेष रूप से स्त्रियों द्वारा रखा जाता है। तथा इसका मूल उद्देश्य अनजाने में हुए किसी भी प्रकार के दोष के शुद्धिकरण के साथ-साथ हमारी सभ्यता की नींव रखने वाले सप्त ऋषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है। ये सप्त ऋषि कश्यप, अत्रि, भरद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि तथा वशिष्ठ हैं। जिन्होंने अपने ज्ञान, तप तथा त्याग से संपूर्ण मानवता को धर्म का मार्ग दिखाया है।।
ऋषि पंचमी का महत्व एवं उद्देश्य।। Significance and Purpose of Rishi Panchami.
मित्रों, ऋषि पंचमी व्रत के पीछे यह मान्यता है कि प्रतिदिन के जीवन में जाने-अनजाने अनेक ऐसी भूलें हो जाती हैं। जिनके लिए विशेष रूप से क्षमा-याचना तथा शुद्धिकरण आवश्यक होता है। विशेषकर पुरातन काल में यह माना जाता था कि गृहस्थ जीवन में स्त्रियों से कुछ ऐसे अनजाने दोष हो जाते हैं। जिनका निवारण केवल सप्त ऋषियों की कृपा से ही संभव है। और इसी कारण इस व्रत को रखने की परंपरा आरंभ हुई।।
यह व्रत हमें यह भी सिखाता है कि ज्ञान तथा तपस्या के मार्ग पर चलने वाले ऋषि-मुनि ही समाज की वास्तविक नींव होते हैं। तथा उनके प्रति सम्मान तथा कृतज्ञता प्रकट करना प्रत्येक गृहस्थ का परम कर्तव्य है। सप्त ऋषियों को आकाश में सप्तर्षि मंडल के रूप में भी पूजा जाता है। तथा इस दिन उनका स्मरण करने से समस्त पापों का नाश होता है, ऐसी शास्त्रों में मान्यता है।।
ऋषि पंचमी से जुड़ी पौराणिक कथा।। The Traditional Story Associated with Rishi Panchami.
मित्रों, पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में विदर्भ देश में एक अत्यंत धर्मनिष्ठ ब्राह्मण उतंक अपनी पत्नी सुशीला के साथ निवास करता था। उनकी एक कन्या तथा एक पुत्र था, और उस ब्राह्मण की मृत्यु के पश्चात उसकी कन्या का विवाह एक सुयोग्य वर के साथ संपन्न हुआ। परन्तु कुछ समय पश्चात ही उस कन्या के पति की भी मृत्यु हो गई। जिससे वह अत्यंत दुखी होकर पुनः अपने पिता के घर लौट आई।।
एक रात्रि जब वह कन्या सोई हुई थी, तो उसके शरीर पर अनेक कीड़े रेंगते हुए दिखाई दिए। यह देखकर उसका भाई अत्यंत चिंतित हो गया। तथा उसने महर्षि गौतम के आश्रम में जाकर इसका कारण जानने का प्रयास किया। महर्षि गौतम ने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा कि पूर्वजन्म में इस कन्या ने रजस्वला अवस्था में अनजाने में ही रसोईघर के बर्तनों को स्पर्श कर लिया था। तथा इसी दोष के कारण उसे यह कष्ट भोगना पड़ रहा है।।
यह जानकर महर्षि गौतम ने उस कन्या को ऋषि पंचमी का व्रत विधिपूर्वक रखने का परामर्श दिया। जिससे उसके इस अनजाने दोष का शमन हो सके। कन्या ने पूर्ण श्रद्धा तथा विधि-विधान के साथ यह व्रत रखा। तथा सप्त ऋषियों की कृपा से उसका समस्त कष्ट दूर हो गया। तथा अगले जन्म में उसे सुखी दांपत्य जीवन की प्राप्ति हुई। इसी कथा के आधार पर आज भी स्त्रियाँ श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करती हैं।।
ऋषि पंचमी व्रत एवं पूजन की विधि।। Method of Rishi Panchami Vrat and Puja.
मित्रों, ऋषि पंचमी के दिन प्रातःकाल किसी पवित्र नदी अथवा जलाशय में स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। तथा जिन स्त्रियों के लिए यह संभव न हो, वे घर पर ही सामान्य जल में गंगाजल मिश्रित करके उस जल से स्नान कर सकती हैं। स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लिया जाता है।।
पूजन के लिए एक स्वच्छ स्थान पर सप्त ऋषियों की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित किया जाता है। तथा उन्हें रोली, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप तथा नैवेद्य अर्पित किया जाता है। इस दिन विशेष रूप से कंद-मूल तथा बिना जुते-बोए उगने वाले अन्न। जैसे समा के चावल, का ही सेवन करने की परंपरा है। तथा हल से जोती गई भूमि में उपजा अन्न इस दिन ग्रहण नहीं किया जाता।।
पूजन के पश्चात ऋषि पंचमी की कथा का श्रवण अथवा वाचन किया जाता है। तथा सप्त ऋषियों से अनजाने में हुई भूलों की क्षमा-याचना की जाती है। संध्या समय आरती करने के पश्चात व्रत का पारण किया जाता है। तथा इस पूरे दिन सत्य, संयम तथा पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है।।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions.
प्रश्न 1. ऋषि पंचमी कब मनाई जाती है।। When is Rishi Panchami celebrated.
उत्तर:- ऋषि पंचमी प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को। अर्थात गणेश चतुर्थी के अगले दिन मनाई जाती है।।
प्रश्न 2. ऋषि पंचमी व्रत में किन ऋषियों का पूजन किया जाता है।। Which sages are worshipped during the Rishi Panchami vrat.
उत्तर:- इस दिन सप्त ऋषि, अर्थात कश्यप, अत्रि, भरद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि तथा वशिष्ठ ऋषि का पूजन किया जाता है।।
प्रश्न 3. इस व्रत में क्या भोजन किया जाता है।। What food is eaten during this fast.
उत्तर:- इस दिन बिना जुते-बोए उगने वाले अन्न तथा कंद-मूल का ही सेवन किया जाता है। तथा हल से जोती गई भूमि में उपजा अन्न का सेवन वर्जित माना जाता है।।
प्रश्न 4. ऋषि पंचमी व्रत किसलिए रखा जाता है।। Why is the Rishi Panchami fast observed.
उत्तर:- यह व्रत अनजाने में हुए दोषों के शुद्धिकरण तथा सप्त ऋषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के उद्देश्य से रखा जाता है।।
प्रश्न 5. क्या ऋषि पंचमी व्रत केवल स्त्रियाँ ही रख सकती हैं।। Can only women observe the Rishi Panchami fast.
उत्तर:- यह व्रत मुख्यतः स्त्रियों द्वारा ही रखा जाता है। परन्तु सप्त ऋषियों के प्रति श्रद्धा-भाव से पुरुष भी इस दिन उनका पूजन तथा स्मरण कर सकते हैं।।
लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.
मित्रों, ऋषि पंचमी का यह परम पावन व्रत हमें अपने ऋषि-मुनियों के प्रति कृतज्ञता तथा सम्मान की भावना का स्मरण कराता है। जिन्होंने अपने ज्ञान तथा तपस्या से संपूर्ण मानवता को धर्म का मार्ग दिखाया। यह व्रत हमें यह भी सिखाता है कि जीवन में हुई अनजानी भूलों के लिए भी सच्चे हृदय से क्षमा-याचना तथा शुद्धिकरण करना अत्यंत आवश्यक होता है।।
जो स्त्री अथवा पुरुष इस व्रत को श्रद्धापूर्वक तथा विधि-विधान से रखता है। उसे सप्त ऋषियों की कृपा से समस्त दोषों से मुक्ति तथा जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है। ऐसी शास्त्रों में मान्यता है। यह पर्व हमें अपनी संस्कृति की उन जड़ों से जोड़े रखता है। जिनकी नींव पर संपूर्ण सनातन धर्म खड़ा है।।
इसी प्रकार के अन्य पावन व्रत-कथाओं, पर्वों तथा धार्मिक अनुष्ठानों की जानकारी के लिए हमारे ब्लॉग तथा वेबसाइट पर पधारें, तथा हमारे फेसबुक एवं यूट्यूब चैनल को भी अवश्य सब्सक्राइब करें।।
#ऋषि_पंचमी_व्रत_कथा #ऋषि_पंचमी_पूजा_विधि #ऋषि_पंचमी_व्रत_का_महत्व #ऋषि_पंचमी_व्रत_के_नियम #ऋषि_पंचमी_पूजा_सामग्री #Rishi_Panchami_Vrat_Katha #Rishi_Panchami_Puja_Vidhi #Rishi_Panchami_Vrat_Importance #Rishi_Panchami_Vrat_Rules #Rishi_Panchami_Puja_Samagri #ऋषिपंचमी, #ऋषिपंचमीव्रत, #सप्तऋषिपूजन, #ऋषिपंचमीकथा, #भाद्रपदपंचमी,
ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Click Here & Watch My YouTube Channel.
इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.
वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।
