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कुंडली के षष्ठ भाव में बैठे सूर्य का शुभाशुभ फल एवं उपाय।।

कुंडली के षष्ठ भाव में बैठे सूर्य का शुभाशुभ फल एवं उपाय।। Sun in the Sixth House Effects
कुंडली के षष्ठ भाव में बैठे सूर्य का शुभाशुभ फल एवं उपाय।। Sun in the Sixth House Effects

कुंडली के षष्ठ भाव में बैठे सूर्य का शुभाशुभ फल एवं उपाय।। Sun in the Sixth House Effects.

षष्ठ भाव और सूर्य का संबंध।। Introduction.

मित्रों, जन्म कुंडली के षष्ठ भाव को शत्रु भाव, रोग भाव तथा ऋण भाव भी कहा जाता है। इसी छठे भाव से जातक के शत्रु, प्रतिस्पर्धा, रोग, ऋण, सेवा-कार्य तथा दैनिक संघर्षों का भी अनुमान लगाया जाता है। यह भाव कठिनाइयों का प्रतिनिधित्व अवश्य करता है, परन्तु ज्योतिष में इसे उपचय भाव भी माना गया है। अर्थात यहाँ छठे भाव में बैठा ग्रह समय के साथ अपने बल में वृद्धि भी करते हैं।।

अब सूर्य की प्रकृति पर विचार करें तो यह तेज, आत्मबल, नेतृत्व तथा राजसी गुणों का कारक ग्रह है। सामान्यतः क्रूर ग्रह होने के कारण सूर्य को कठिन भावों में विशेष रूप से सशक्त माना गया है। और षष्ठ भाव इन्हीं कठिन भावों में से एक है। इसीलिए यह संयोग एक विशेष रोचक स्थिति उत्पन्न करता है। जहाँ सूर्य अपनी तीक्ष्णता का उपयोग जातक के शत्रुओं तथा बाधाओं के विरुद्ध ही करने लगता है।।

यही कारण है कि प्राचीन ग्रंथों में षष्ठ भाव के सूर्य को सामान्यतः शुभ फलदायी माना गया है। क्योंकि क्रूर ग्रह उपचय एवं दुस्थान भावों में स्थित होकर जातक को संघर्षों पर विजय प्राप्त करने की शक्ति प्रदान करते हैं। परन्तु इसका अंतिम फल सूर्य के बल तथा अन्य ग्रहों के संबंध पर भी निर्भर करता है। जिसका विस्तृत विवेचन आगे किया जाएगा।।

षष्ठ भाव में सूर्य का सामान्य स्वभाव।। General Nature of Sun in the Sixth House.

ऐसे जातकों में स्वाभाविक रूप से संघर्षशील प्रवृत्ति, साहस तथा प्रतिस्पर्धा में आगे रहने की क्षमता पाई जाती है। ये लोग कठिन परिस्थितियों से घबराने के बजाय उनका सामना डटकर करते हैं। तथा किसी भी चुनौती को अवसर के रूप में देखने की मानसिकता रखते हैं। इनका स्वभाव अनुशासित तथा कर्मठ होता है। जिसके कारण ये सेवा-कार्यों अथवा प्रतिस्पर्धात्मक क्षेत्रों में स्वाभाविक रूप से सफल होते हैं।।

शत्रुओं तथा विरोधियों के प्रति इनका दृष्टिकोण भयभीत होने की बजाय दृढ़तापूर्ण होता है। ये अपनी मेहनत तथा आत्मबल के सहारे कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करना पसंद करते हैं। स्वास्थ्य के प्रति भी इनमें एक विशेष सजगता देखी जाती है। क्योंकि यह भाव प्रत्यक्ष रूप से रोग तथा शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता से भी जुड़ा हुआ है।।

शुभ सूर्य का षष्ठ भाव में फल।। Effects of an Auspicious Sun in the Sixth House.

यदि षष्ठ भाव का सूर्य बलवान अथवा शुभ ग्रहों की दृष्टि से युक्त हो, तो जातक को शत्रुओं पर विजय, प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं में सफलता तथा उत्तम रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी प्राप्त होती है। ऐसे जातक अपने विरोधियों की परवाह किए बिना, आत्मबल के सहारे उन पर विजय प्राप्त कर लेते हैं। और अनेक बार यही संघर्ष उन्हें प्रसिद्धि की ओर भी ले जाता है।।

शुभ सूर्य से जातक को प्रशासनिक क्षेत्रों, सरकारी सेवा तथा नेतृत्वकारी पदों में भी सफलता मिलती है। विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ प्रतिस्पर्धा तथा संघर्ष की प्रधानता हो। ऐसे जातक कानूनी विवादों में भी विजयी होते हैं। तथा अपने साहस एवं दृढ़ता के कारण समाज में विशेष सम्मान अर्जित करते हैं। मामा पक्ष से भी सामान्यतः शुभ संबंध बने रहते हैं।।

अशुभ सूर्य का षष्ठ भाव में फल।। Effects of an Inauspicious Sun in the Sixth House.

यदि षष्ठ भाव का सूर्य अत्यधिक पीड़ित, नीच राशि में अथवा अनेक पापग्रहों से घिरा हो, तो जातक को स्वास्थ्य संबंधी बार-बार परेशानियाँ, ऋण का भार अथवा शत्रुओं से निरंतर संघर्ष का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातकों में अहंकार अथवा अत्यधिक आक्रामकता की प्रवृत्ति भी देखी जाती है। जिससे अनावश्यक शत्रुता उत्पन्न होते रहती है।।

अशुभ सूर्य से जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। तथा जातक को उनके स्वास्थ्य पर अतिरिक्त धन खर्च करना पड़ता है। पाचन संबंधी विकार, मामा पक्ष से मतभेद अथवा कानूनी उलझनों में फँसने की प्रवृत्ति भी इसी पीड़ित स्थिति के लक्षण माने जाते हैं। परन्तु यह ध्यान रखना चाहिए कि षष्ठ भाव उपचय भाव भी है, इसलिए यहाँ का सूर्य पूर्णतः अशुभ नहीं माना जाता। अपितु संपूर्ण जन्मकुंडली के अध्ययन के पश्चात ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए।।

करियर एवं प्रतिस्पर्धा पर प्रभाव।। Effects on Career and Competition.

मित्रों, षष्ठ भाव प्रतिस्पर्धा, सेवा तथा दैनिक संघर्ष का भी भाव है। और सूर्य नेतृत्व तथा अधिकार का कारक ग्रह है। यह संयोग जातक को प्रशासनिक सेवा, सेना, पुलिस, चिकित्सा क्षेत्र तथा प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं में विशेष सफलता दिलाने में सक्षम माना जाता है। ऐसे जातक अपने कार्यक्षेत्र में अनुशासन तथा अधिकार-भावना के साथ कार्य करते हैं।।

शुभ सूर्य से जातक को अपने विरोधियों पर मनोवैज्ञानिक बढ़त प्राप्त होती है। जिसके कारण वह प्रतिस्पर्धा में सदैव आगे ही रहता है। यदि सूर्य पीड़ित हो, तो कार्यस्थल पर अनावश्यक विवाद अथवा वरिष्ठ अधिकारियों से भी मतभेद की संभावना बढ़ जाती है।।

स्वास्थ्य पर प्रभाव।। Health Effects.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष के अनुसार षष्ठ भाव का संबंध उदर, आंत तथा पाचन तंत्र से माना जाता है। जबकि सूर्य का संबंध हृदय, अस्थियों तथा नेत्रों से है। इस भाव में सूर्य के शुभ होने पर जातक में रोगों से लड़ने की असाधारण क्षमता तथा उत्तम जीवनशक्ति देखी जाती है। जिसके कारण कई गंभीर रोग भी शीघ्र ही ठीक हो जाते हैं।।

इसके विपरीत यदि सूर्य अत्यधिक पीड़ित हो, तो पाचन संबंधी विकार, हृदय संबंधी असंतुलन अथवा नेत्र दुर्बलता जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। ऐसी स्थिति में संयमित आहार तथा नियमित दिनचर्या के साथ ही सूर्य से सम्बंधित बताये गए ज्योतिषीय उपायों को करना चाहिए। साथ ही यदि आवश्यकता पडे तो चिकित्सकीय परामर्श भी अवश्य लेना चाहिए।।

सूर्य को संतुलित करने के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies to Balance Sun in the Sixth House.

मित्रों, षष्ठ भाव के सूर्य को शुभ अथवा संतुलित बनाए रखने के लिए सूर्य के मंत्र “ॐ सूर्याय नमः” अथवा “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः” का श्रद्धापूर्वक जप करना चाहिए। प्रतिदिन प्रातःकाल ताम्र पात्र से सूर्य को जल का अर्घ्य देना भी इस दिशा में विशेष लाभकारी सिद्ध होता है।।

रविवार के दिन व्रत रखना तथा गुड़, गेहूँ अथवा तांबे का दान करना भी शुभ फलदायी माना जाता है। शत्रु-बाधा तथा रोग-निवारण हेतु आदित्य हृदय स्तोत्र का नियमित पाठ करना चाहिए तथा जीवन में अनुशासन एवं संयम बनाए रखना भी अत्यंत लाभकारी आचरण माना जाता है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में क्रूर ग्रहों को उपचय भावों (तृतीय, षष्ठ, दशम, एकादश) में स्थित होने पर विशेष शुभ फलदायी बताया गया है। फलदीपिका के अनुसार षष्ठ भाव में स्थित बलवान सूर्य जातक को शत्रुओं पर विजय तथा उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करता है। विशेषकर जब यह शुभ ग्रहों की दृष्टि से युक्त हो।।

बृहज्जातक में भी षष्ठ भाव के सूर्य को संघर्ष पर विजय दिलाने वाला तथा प्रतिस्पर्धा में सफलता प्रदान करने वाला बताया गया है। परन्तु यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसका अंतिम फल षष्ठेश की स्थिति तथा संपूर्ण जन्मकुंडली के समन्वित अध्ययन के पश्चात ही निश्चित किया जाना चाहिए।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

1. षष्ठ भाव में सूर्य शुभ माना जाता है या अशुभ? Is Sun Considered Auspicious or Inauspicious in the Sixth House.

उत्तर:- षष्ठ भाव उपचय भाव होने के कारण यहाँ स्थित सूर्य को सामान्यतः शुभ माना जाता है। क्योंकि यह जातक को शत्रुओं तथा बाधाओं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति प्रदान करता है।।

2. षष्ठ भाव में अशुभ सूर्य क्या नुकसान देता है? What Problems Can an Inauspicious Sun Cause in the Sixth House.

उत्तर:- अत्यधिक पीड़ित सूर्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ, ऋण का भार तथा शत्रुओं से निरंतर संघर्ष जैसी बाधाएँ उत्पन्न करता है।।

3. षष्ठ भाव के सूर्य से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ कौन-सी हैं? Which Health Issues Are Associated with Sun in the Sixth House.

उत्तर:- वैदिक ज्योतिष में षष्ठ भाव का संबंध उदर तथा पाचन तंत्र से माना गया है। पीड़ित सूर्य इन क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं की ओर संकेत देता है।।

4. षष्ठ भाव के सूर्य को संतुलित करने का सबसे प्रभावी वैदिक उपाय क्या है? What Is the Most Effective Vedic Remedy to Balance Sun in the Sixth House.

उत्तर:- सूर्य के मंत्र का जप, सूर्य भगवान को जल से अर्घ्य देना तथा रविवार को गुड़ एवं तांबे का दान ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।।

5. क्या केवल षष्ठ भाव के सूर्य को देखकर भविष्य बताया जा सकता है? Can Predictions Be Made Based Only on Sun in the Sixth House.

उत्तर:- नहीं। वैदिक ज्योतिष में किसी भी निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए षष्ठेश, दशा, गोचर तथा संपूर्ण जन्मकुंडली का संयुक्त विश्लेषण आवश्यक माना जाता है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, कुंडली के षष्ठ भाव में स्थित सूर्य शुभ हो तो जातक को शत्रुओं पर विजय, प्रतिस्पर्धाओं में सफलता तथा उत्तम रोग-प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है। वहीं अत्यधिक पीड़ित होने पर ऋण, रोग तथा शत्रुओं से भय जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न करता है। वैदिक परंपरा के अनुसार सूर्य के मंत्र का जप, सूर्यार्घ्य, रविवार का व्रत तथा सूर्य से सम्बंधित दान इसे संतुलित एवं बलवान बनाये रखने में सहायक माना गया है।।

चूँकि षष्ठ भाव उपचय भाव भी होता है, इसलिए यहाँ बैठा सूर्य सामान्यतः जातक को संघर्षों में विजयी बनाता है। फिर भी किसी भी विशेष उपाय अथवा निर्णायक निष्कर्ष से पहले किसी योग्य, अनुभवी एवं विद्वान ज्योतिषी से संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण अवश्य कराना चाहिए।।

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