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पञ्चांग 17 अगस्त 2026 दिन सोमवार।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 17 अगस्त 2026 दिन सोमवार।।

मित्रों, तारीख 17 अगस्त 2026 दिन सोमवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पञ्चमी तिथि है। आज श्रावण मास (उत्तर भारतियों) का तीसरा श्रावण सोमवार का व्रत है। परन्तु गुजरात-महाराष्ट्र के लोगों के लिए पहला श्रावण सोमवार का व्रत है। श्रावण सोमवार का व्रत (सावन सोमवारी व्रत) करने एवं भगवान शिव का दर्शन-पूजन करने से प्रदोष व्रत के सामान फल की प्राप्ति होती है। आज नागपञ्चमी का पावन व्रत भी है। आज कही-कही लोग अपने घर के दीवारों पर नागदेवता का चित्र बनाकर उनकी पूजा करते हैं। अथवा मिट्टी के भी नागदेवता की प्रतिमा पर पूजन करने का कही-कही विधान है। आज महाकाल की सवारी एवं तक्षक पूजन का दिन भी है। आज काशी में नागकूप की यात्रा भी की जाती है। गाँवों में आज भी लोग व्यायाम का आयोजन करते हैं। आज उड़ीसा के लोग जागृत गौरी की पूजा करते हैं। आज भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र-जप, “ॐ नमः शिवाय” का जप तथा बिल्वपत्र अर्पण का विशेष फल बताया गया है। मान्यता है, कि आज श्रद्धापूर्वक व्रत एवं शिवपूजन करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। परिवार में सुख-शान्ति आती है। रोग एवं मानसिक कष्टों में कमी आती है। आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। विवाह एवं संतान सम्बन्धी बाधाओं के निवारण हेतु भी यह दिन शुभ होता है। आज सूर्य देवता कर्क राशी से चलकर सिंह राशी में (रात्रि 10:37 PM बजे) चले जायेंगे। इसका विवरण इस प्रकार है:- स्त्री. स्त्री. सू. चं. योग, चातक वाहन, वह्नि नाड़ी,इसके स्वामी मंगल हैं। इसमें सामान्य वर्षा का योग है। आज से बंगाल में होनेवाली मनसादेवी के पूजा का समाप्ति हो जायेगा। आज यायीजययोग एवं रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “श्रावण सोमवार व्रत एवं सूर्य देवता के सिंह के संक्रांति तथा नागपञ्चमी व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आपका आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।

वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

पञ्चांग 17 अगस्त 2026 दिन सोमवार।। Panchang 17 August 2026

आज का पञ्चांग 17 अगस्त 2026 दिन सोमवार।।
Aaj ka Panchang 17 August 2026.

विक्रम संवत् – 2083.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.

शक – 1948.

अयन – सौम्यायनम्.

गोल – याम्य.

ऋतु – ग्रीष्म.

मास – श्रावण.

पक्ष – शुक्ल.

गुजराती पंचांग के अनुसार – श्रावण शुक्ल पक्ष.

Panchang 17 August 2026

तिथि – पञ्चमी 17:01 PM बजे तक उपरान्त षष्ठी तिथि है।।

नक्षत्र – हस्त 03:51 AM तक उपरान्त चित्रा नक्षत्र है।।

योग – साध्य 04:08 AM तक उपरान्त शुभ योग है।।

करण – बव 04:52 AM तक उपरान्त बालव 17:01 PM तक उपरान्त कौलव करण है।।

चन्द्रमा – कन्या राशि पर 16:20 PM तक उपरान्त तुला राशि पर।।

सूर्य – कर्क राशि एवं आश्लेषा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।

मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:19:38

मुम्बई सूर्यास्त – सायं 19:04:20

वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 05:34:41

वाराणसी सूर्यास्त – सायं 06:26:37

राहुकाल (अशुभ) – सुबह 07:55 बजे से 09:31 बजे तक।।

विजय (शुभ) मुहूर्त – दोपहर 12.30 बजे से 12.54 बजे तक।।

Panchang 17 August 2026

पञ्चमी तिथि विशेष:- पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। पञ्चमी तिथि को पूर्णा संज्ञक तिथियों में स्थान प्राप्त है। नन्दा, भद्रा, जया, रिक्ता और पूर्णा—इन पाँच संज्ञाओं में पूर्णा संज्ञा की तिथि सभी प्रकार की सिद्धि, पूर्णता तथा समृद्धि प्रदान करने वाली मानी गई है। इस कारण इस पञ्चमी तिथि में प्रारम्भ किए गए कार्य प्रायः सफलता को प्राप्त होते हैं। शास्त्रों में पञ्चमी तिथि को विद्या, ज्ञान, औषधि, नागोपासना तथा ऋषि-पूजन के लिए विशेष प्रशस्त बताया गया है। विशेषतः यदि यह पञ्चमी तिथि शुभ नक्षत्र के साथ संयोग करे तो अध्ययन, दीक्षा, मन्त्र ग्रहण, शास्त्र अध्ययन तथा विद्यारम्भ के लिए अत्यन्त उत्तम मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।।

जन्मफल का विस्तृत वर्णन:- पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं।।

पञ्चमी तिथि में जन्म लेने वाला जातक सामान्यतः बुद्धिमान, मधुरभाषी, दयालु, धर्मप्रिय, माता-पिता का सेवक, गुरुजन का सम्मान करने वाला, आर्थिक दृष्टि से उन्नति करने वाला, उत्तम सलाहकार, समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखते हैं तथा जीवन में धीरे-धीरे उत्तम सफलता प्राप्त करते हैं। इनमें धार्मिक प्रवृत्ति, तीर्थाटन तथा देवपूजन के प्रति विशेष श्रद्धा देखने को मिलती है।।

“आज पञ्चमी तिथि में नागदेवता का श्रद्धापूर्वक पूजन, दुग्धाभिषेक (जहाँ परम्परा मान्य हो), हल्दी, कुश, दूर्वा तथा पुष्प अर्पित कर उनकी कृपा का प्रार्थना करने से भय, बाधा तथा सर्पदोषजनित कष्टों में शान्ति प्राप्त होती है।” कुछ आचार्यों की मान्यताओं के अनुसार “कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है”। वैसे शास्त्रों के अनुसार सामान्य नागपूजन को सीधे “कालसर्प दोष की पूर्ण शान्ति” का सार्वभौमिक उपाय नहीं कहा जा सकता। ऐसे भयंकर दोषों की शान्ति तो संतुलित और शास्त्रसम्मत रूप से ही होना चाहिए। “नागदेवता की उपासना से सर्पभय, नागसम्बन्धी दोषों की शान्ति तथा भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। यदि किसी ज्योतिषीय दोष के लिए विशेष शान्ति आवश्यक हो तो योग्य आचार्य के निर्देशन में विधिवत् अनुष्ठान करना चाहिए।।

Panchang 17 August 2026

चित्रा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- चित्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक शारीरिक रूप से मनमोहक एवं सुन्दर आँखों वाला होता है। आपको अनेक प्रकार की साज सज्जा का शौक होता है तथा अपने लिए नित नए आभूषण एवं वस्त्र आप खरीदते ही रहते हैं। आपका व्यक्तित्व आकर्षक एवं शारीरिक रूप से संतुलित होते हैं। व्यक्तित्व के यही गुण आपको भीड़ से अलग करते हैं। आपकी पसंद और सोंच में अनूठापन है जिससे अक्सर महिलाएं आकर्षित होती है। आप स्वभाव से कामुक एवं स्त्रियों में अधिक रूचि रखने वाले होते हैं।।

आप बेहद संवेदनशील होते हैं तथा अत्यधिक भावुक होते हैं। इसलिए आपकी बुद्धि अस्थिर रहती है और आपको निर्णय लेने में कठिनाई अक्सर आती है। आप एक शांतप्रिय व्यक्ति होंगे परन्तु अपनी स्पष्टवादिता के कारण विवादों में अक्सर फंस जाते हैं। आपमें सुन्दरता और गुणों का समावेश होता है। आप दयालु और गरीबों के मदद करने वालों में से होंगे। शत्रुओं को मुंहतोड़ जवाब देने की अपेक्षा आप अपने आप को बचाना बेहतर समझते हैं।।

चित्र नक्षत्र में जन्मा जातक परिश्रमी होता है और अपने इसी गुण के कारण अपने जीवन में आई कई कठिनाईयों को पार करते हुए उन्नति पाता है। कभी-कभी आपको अपने द्वारा की गई मेहनत से अधिक भी मिल जाता है। आपका जीवन 32 वर्ष तक उथल पुथल भरा रहता है परन्तु 32 से 52 वर्ष तक का समय आपके जीवन का बेहतर समय कहा जा सकता है।।

आप अपने पिता से अधिक माता के निकट होंगे। हालाँकि आपके पिता समाज में एक सम्माननीय व्यक्ति होंगे। परन्तु किसी कारणवश आपकी उनसे दूरी आजीवन बनी रहेगी। चित्रा नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति अपने जन्म स्थान से दूर जाकर ही सफल होता है। वैवाहिक जीवन में कुछ खटास रहती है परन्तु पारिवारिक जीवन में स्थिरता रहेगी। चित्रा नक्षत्र में जन्मी महिलाएं सफ़ेद वस्त्र पहनना पसंद करती हैं।।

सुंदर तथा हंसमुख स्वभाव वाली चित्रा नक्षत्र की जातिकाएं ईश्वर में विश्वास रखने वाली होती हैं। आप माता-पिता की प्रिय तथा आपके नेत्र विशेष रूप से सुंदर होते हैं। अर्थात इस नक्षत्र की जातिकाएं अत्यन्त सुंदर नेत्रों वाली होती हैं। चित्रा नक्षत्र में जन्मे जातक अल्सर, किडनी सम्बंधित रोग, दिमागी बुखार, अपेंडिक्स जैसे रोगों के शिकार होने की ज्यादातर संभावनायें होती हैं।।

प्रथम चरण:- चित्रा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य होता हैं। इस नक्षत्र चरण में पैदा हुए जातकों का झुकाव चोरी एवं तस्करी में अधिक होता है। लग्नेश बुध की दशा शुभ फल देगी। शुक्र की दशा में जातक का भाग्योदय होगा। परन्तु सूर्य की दशा अशुभ फलदायी होगी।।

द्वितीय चरण:- चित्रा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध होता हैं। इस नक्षत्र चरण में पैदा हुआ जातक सौंदर्य प्रेमी होता है। ऐसे जातकों की रूचि संगीत, कला, चित्रकारी या फोटोग्राफी जैसे विषयों में अधिक होती है। लग्नेश बुध की दशा माध्यम फलदायी होती है।।

तृतीय चरण:- चित्रा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र होता हैं। चित्रा नक्षत्र का स्वामी मंगल एवं लग्नेश तथा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र दोनों ही कामुक ग्रह हैं। फलतः जातक कामुक होगा तथा पराई स्त्री में रूचि रखने वाला होगा। लग्न बलि न होने के कारण जातक का विकास रुका हुआ रहेगा। लग्नेश शुक्र एवं मंगल की दशा में कोई काम नहीं बनेगा।।

चतुर्थ चरण:- चित्रा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी मंगल होता हैं। नक्षत्र स्वामी मंगल एवं नक्षत्र चरण स्वामी भी मंगल होने के कारण जातक के शरीर पर चोट अथवा पीड़ा का निशान रहेगा। लग्नेश शुक्र की दशा अच्छा फल देती है। मंगल की दशा-अन्तर्दशा भी उत्तम फलदायी होती है।।

Panchang 17 August 2026

सामान्यतया सोमवार शॉपिंग के लिए अच्छा दिन माना जाता है।।

सोमवार का विशेष – सोमवार के दिन तेल मर्दन अर्थात् तेल मालिश करने से चहरे और शरीर की कान्ति बढ़ती है – (मुहूर्तगणपति)।।

सोमवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से शिव भक्ति की हानि होती है। पुत्रवान पिता को तो कदापि नहीं करना चाहिये। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है।।

सोमवार के दिन ये विशेष उपाय करें – सोमवार को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।

Panchang 17 August 2026

मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म सोमवार को होता है, वो जातक शांत प्रवृत्ति के गौर वर्ण लिए हुये होते हैं। सोमवार चन्द्र प्रधान दिन होता है, इसलिये इस जातक में कल्पनाशीलता, दया भाव, नम्रता के गुण परिलक्षित होते हैं। माता के प्रिय एवं सद्गुणों से युक्त ये जातक कवि ह्रदय, सफेद वस्तुओं से लाभ पाने वाला, यात्रा का शौकीन, जलाशयों एवं प्रकृति का प्रेमी होता है।।

सोमवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है। इनकी प्रकृति यानी इनका स्वभाव शान्त होता है। इनकी वाणी मधुर और मोहित करने वाली होती है। ये स्थिर स्वभाव वाले होते हैं सुख हो या दु:ख सभी स्थिति में ये समान रहते हैं। धन के मामले में भी ये भाग्यशाली होते हैं तथा इन्हें सरकार एवं समाज से मान-सम्मान मिलता है।।

इस दिन जन्म लेने वाले जातक को पर्यावरण के क्षेत्र में, समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में, पानी से जुड़े रोजगार जैसे मत्य् क पालन या मछली का व्यवसाय, पत्थरों का व्यवसाय, कपड़े का व्यंवसाय शुद्ध फलता है। इनके लिए सफेद रंग सदा शुभकारी होता है इसलिए कैरियर के लिहाज से आप जहां भी जायें सफेद रुमाल अपनी जेब में रखें और उस क्षेत्र को ही चुने जिसमें सफेद रंग की प्रधानता हो, जैसे पानी, कपड़ा, फूल, पत्थयर आदि से जुड़ा व्यवसाय।।

आज का सुविचार – मित्रों, जीना हैं, तो उस दीपक की तरह जियो जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता हैं जितनी किसी गरीब की झोपड़ी में। जो भाग्य में हैं वह भाग कर आयेगा और जो भाग्य में नही हैं वह आकर भी भाग जायेगा। हँसते रहो तो दुनिया साथ हैं, वरना आँसुओं को तो आँखो में भी जगह नही मिलती।।

Panchang 17 August 2026

चन्द्रमा द्वारा निर्मित कुछ अतुलनीय धनदायक योग।।…… आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें:  & ब्लॉग पर पढ़ें:

ॐ अथ शिवप्रातः स्मरणस्तोत्रम् – यहाँ क्लिक करें और पढ़ें:

“क्या बाबा के सर सज रही है, UP का ताज? क्या बाबा फिर CM बन सकते हैं।।” – My Latest video.
“क्या कहती है अखिलेश यादव की कुंडली? क्या मिलेगी सत्ता?।।” – My Latest video.
“शुक्र की महादशा में सूर्य अन्तर्दशा फलम्” – My Latest video.
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Panchang 17 August 2026

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें।।
किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं।।

सिलवासा ऑफिस:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजू में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा।।

सिलवासा ऑफिस में प्रतिदिन मिलने का समय:-
10:00 AM to 02:00 PM And 04:30 PM to 08:30 PM.
WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
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