बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।
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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 30 सितम्बर 2026 दिन बुधवार।।
मित्रों, तारीख 30 सितम्बर 2026 दिन बुधवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। आज चौथे दिन का श्राद्ध किया जायेगा। जिनके पिता का देहावसान किसी भी महीने के चतुर्थी तिथि को हुआ है उनका आज ही तिथि मनाया जायेगा। आश्विन मास का पहला पक्ष पितरों के लिये आरक्षित है तथा बहुत महत्वपूर्ण है। २७ सितम्बर रविवार से ही पितृपक्ष आरम्भ हो चूका है। और इसमें पितरों का श्राद्ध एवं तर्पण करना हम सनातनियों के लिए प्रथम कार्य होना चाहिए। श्राद्ध-तर्पण के सम्बन्ध में एक सिद्धान्त होता है कि इस श्राद्ध पक्ष में पितरों का तर्पण करके मनुष्य अपने पितृगणों को तो तृप्त करते हैं। इसके साथ ही समस्त गतात्मा जीव-जगत को भी तृप्त करते हैं। पितृ पक्ष में श्राद्ध तो अपने स्वर्गीय पिता की मृत्यु तिथि को अथवा तिथि ज्ञात न होने पर अमावस्या तिथि को करना चाहिए। देव, ऋषि, मनुष्य तर्पण पूर्व एवं पश्चात् करना चाहिए। “देवकार्यादपि सदापितृकार्यं विशिष्यते।” अर्थात् देव कार्य से भी महत्वपूर्ण पितृकार्य को माना गया है। आज सर्वार्थसिद्धियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “चतुर्थ दिवस के पितृश्राद्ध” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता – स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आपका आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल – 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 30 सितम्बर 2026 दिन बुधवार।।
Aaj ka Panchang 30 September 2026.
विक्रम संवत् – 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – रौद्र.
शक – 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल – याम्य.
ऋतु – वर्षा.
मास – अश्विन.
पक्ष – कृष्ण.
गुजराती पंचांग के अनुसार – भाद्रपद कृष्ण पक्ष.
#Panchang_30_September_2026
तिथि – चतुर्थी 14:57 PM बजे तक उपरान्त पञ्चमी तिथि है।।
नक्षत्र – भरणी 07:37 AM तक उपरान्त कृत्तिका नक्षत्र है।।
योग – हर्षण 03:21 AM तक उपरान्त वज्र योग है।।
करण – बव 04:05 AM तक उपरान्त बालव 14:57 PM तक उपरान्त कौलव करण है।।
चन्द्रमा – मेष राशि पर 13:15 PM तक उपरान्त वृषभ राशि पर।।
सूर्य – कन्या राशि एवं हस्त नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय – प्रातः 06:29:57
मुम्बई सूर्यास्त – सायं 18:25:49
वाराणसी सूर्योदय – प्रातः 06:05:47
वाराणसी सूर्यास्त – सायं 15:55:35
राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 12:28 बजे से 13:58 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12:16 बजे से 12:40 बजे तक।।
#Panchang_30_September_2026
चतुर्थी तिथि विशेष:- चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी श्रीगणेश जी महाराज को बताया गया है। यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।।
इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज चतुर्थी तिथि में गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।।
मित्रों, ज्योतिष शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।।
#Panchang_30_September_2026
भरणी नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म भरणी नक्षत्र में हुआ है तो आप एक दृढ़ निश्चयी, चतुर एवं सदा सत्य बोलने वाले होंगे। शुक्र के कारण जहाँ आप सुखी एवं ऐश्वर्य पूर्ण जीवन जियेंगे वही शुक्र मंगल की राशि में आपकी काम वासना भी अधिक बढ़ाएगा। आपके अनेक मित्र होंगे और आप अपने मित्रों में बहुत अधिक लोकप्रिय भी होंगे। क्योंकि आप अपने मित्रों की सहायता करने में कभी पीछे नहीं हटते हैं।।
मित्रता करने में आप विशेष सावधानी भी बरतते हैं। चुगलखोर और छिछोरे मित्र आपको कतई पसंद नहीं है। आप जल्दी ही किसी से भी घुलना मिलना पसंद नहीं करते। स्वभाव से थोड़े स्थिर एवं योजनाबद्ध तरीके से काम करना आपको पसंद है। आप बिना सोचे समझे जीवन में कोई भी कदम नहीं उठाना चाहते हैं। परन्तु जो एक बार आप ठान लेते हैं तो आप किसी का हस्तक्षेप या सुझाव पसंद नहीं करते हैं।।
जो मार्ग आपके अनुसार सही है उससे आप कभी नहीं डगमगाते। आप अपने विचारों को प्रकट करने में नहीं हिचकिचाते। चाहे उन्हें कोई पसंद करे या नहीं। आप अपना नुक्सान करा सकते हैं परन्तु चापलूसी करना आपको कतई पसंद नहीं होगा। आप स्वयं के सिद्धांतों पर चलना पसंद करते हैं। साथ ही आप अपने नैतिक मूल्यों की रक्षा जीवन पर्यंत करतें हैं। ईश्वर ने आपको एक और विलक्षण गुण दिया हुआ है वह है दूरदर्शिता।।
इस कारण आप आने वाले संकट को पहले ही भांप जाते हैं और अपने आपको भविष्य में होने वाली घटनाओं के लिए तैयार भी कर लेते हैं। खर्चे के मामले में आप करीबी मित्रों और रिश्तेदारों में कंजूस के नाम से जाने जाते हैं परन्तु यह आपका स्वभाव है। आप बिना सोचे समझे धन खर्च नहीं करना चाहते हैं। फ़िज़ूल के खर्च और व्यर्थ के दिखावे आपको कतई पसंद नहीं हैं।।
आप एक हिम्मती व्यक्तित्व के स्वामी हैं छोटी मोटी घटनाएं आपके साहस को हिला नहीं पाती हैं। शारीरिक रूप से आप ऊँचे एवं मजबूत कद काठी के व्यक्ति होंगे। आपकी हड्डियां काफी मज़बूत और आँखें बहुत जोशीली होंगी। आपको घूमने का बहुत शौक होगा। खाने में आप तेज़, मसालेदार गर्म और चटपटे खाना पसंद करते हैं। आप अपने जीवन में कई बार सफलता की उंचाई पर पहुँच कर अचानक गिरते हैं।।
इन्ही उतार चढ़ाव के कारण जीवन 33 वर्ष तक अस्त व्यस्त रहता है। परन्तु उसके पश्चात समय और स्तिथियाँ आपके पक्ष में ही रहती हैं। भरणी नक्षत्र के जातक अपने परिवार से बहुत अधिक स्नेह रखते हैं। साथ ही उनके बिना बहुत अधिक समय तक नहीं रह पाते हैं। विवाह के उपरान्त पारिवारिक जीवन सुखमय रहता है। एक सुंदर एवं सुशील पत्नी का साथ आपको मिलता है।।
आपकी पत्नी का धन के मामले में लापरवाह होना आपके बीच मतभेद पैदा कर सकता है। भरणी नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ निडर एवं दृढ स्वभाव वाली होती हैं। भरणी नक्षत्र में जन्मी महिलाएं सफल राजनेता या समाजिक कार्यकर्ता होती हैं। आपका मन चंचल एवं सदा भटकने वाला होता है। भरणी नक्षत्र में जन्मी महिलाएं अनायास ही पुरुषों के प्रति आकर्षित हो जाती हैं।।
अन्य महिलाओं की भांति आपकी रूचि साज सज्जा में नहीं होती है। अपितु आप स्वभाव से कठोर होती हैं। स्वभाव से अडिग एवं स्थिर मनोवृत्ति के ऐसे जातक होते हैं। अग्नि द्वारा जलने से, अकस्मात गिरने से चोट का खतरा आपको हो सकता है। आपको नेत्र रोग, और स्त्रियों में गर्भ एवं गर्भाशय से सम्बंधित समस्याएं हो सकती है।।
प्रथम चरण:- भरणी नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह होता है। इसके प्रथम चरण का स्वामी ग्रह सूर्य हैं। भरणी नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्म होने के कारण जातक स्वभाव से संकोची होते हैं। आशावादी होते हुए भी कभी-कभी निराशावादी हो जाते हैं। जातक को मंगल एवं शुक्र की दशा शुभ फलदायी होगी। नक्षत्र चरण का स्वामी सूर्य शुक्र का शत्रु है। इस कारण सूर्य की दशा में जातक थोडा परेशान रहेगा।।
द्वितीय चरण:- भरणी नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह होता है। इसके द्वितीय चरण का स्वामी ग्रह चन्द्रमा हैं। भरणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में जन्म होने के कारण जातक स्वभाव चंचल एवं खुराफाती होता है। वह जीवन में सफल तो होगा परन्तु मानसिक रूप से परेशान एवं अशांत रहेगा। जातक को मंगल एवं शुक्र की दशा ठीक रहेगी। नक्षत्र चरण का स्वामी चन्द्रमा शुक्र का परम शत्रु है। इस कारण चन्द्र की दशा में जातक मानसिक रूप से परेशान रहेगा।।
तृतीय चरण:- भरणी नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह होता है। इसके तृतीय चरण का स्वामी ग्रह शुक्र हैं। भरणी नक्षत्र के तृतीय चरण में जन्म होने के कारण जातक स्वभाव से क्रूर एवं निर्दयी होते हैं। साहस पूर्ण एवं जोखिम भरे कार्य करने में सदा रूचि रखते हैं। लग्न नक्षत्र स्वामी और नक्षत्र चरण स्वामी शुक्र के होने के कारण जातक थोडा रंगीन मिजाज़ का भी होगा। जातक को मंगल एवं शुक्र की दशा उत्तम फलदायी होगी।।
चतुर्थ चरण:- भरणी नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह होता है। इसके चतुर्थ चरण का स्वामी ग्रह मंगल हैं। भरणी नक्षत्र के चौथे चरण में जन्म होने के कारण जातक बहादुर एवं साहसी होगा। परन्तु सब कुछ होते हुए भी जीवन भर धन की कमी महसूस करता रहेगा। लग्न नक्षत्र का स्वामी शुक्र लग्नेश मंगल से समभाव रखता है। इस कारण जातक की मंगल एवं शुक्र की दशा अच्छी जाएँगी।।
#Panchang_30_September_2026
आज बुधवार के दिन यह सावधानी अवश्य रखें:- बुधवार को बालों से संबंधित कोई भी वस्तु न खरीदें, टूथ ब्रश आदि भी नहीं खरीदना चाहिए। बुधवार के दिन दूध की खीर या अन्य कोई व्यंजन जिसमें दूध जलने की संभावना हो नहीं बनाना चाहिए। अगर हो सके तो आज के दिन दूध न उबालें। बुधवार के दिन किसी को उधार पैसे न दें। इससे आपको धन संबंधित परेशानी हो सकती है।।
आज बुधवार के दिन ये विशेष उपाय करें – बुधवार गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी का दिन है। इसलिये आज के दिन इनकी पूजा का विशेष महत्त्व होता है। आज के दिन गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।।
अगर आपकी कुण्डली में बुध अच्छा हो तो इन कार्य क्षेत्र में आपको सफलता सहजता से मिल सकती है। बुधवार को भी इन कामों को करना चाहिए। जिससे आपके जीवन में सफलता प्राप्त हो जाएगी।।
ज्योतिष, शेयर, दलाली जैसे कार्यों के लिए भी यह दिन शुभ माना गया है। सिंदूर का तिलक या टीका लगाएं। इस दिन पूर्व, दक्षिण और नैऋत्य दिशा में यात्रा कर सकते हैं। इस दिन धन जमा करने से धन में बरकत होती है। माता दुर्गा के मंदिर जाना चाहिए। इस दिन किसी कन्या को साबुत बादाम भी दान में देना चाहिए।।
बुधवार का विशेष – बुधवार के दिन तेल मर्दन अथवा मालिश करने से माता लक्ष्मी प्रशन्न होती हैं और धनलाभ होता है – (मुहूर्तगणपति)।।
बुधवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से धन एवं पूण्य का लाभ होता है।। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो, यात्रा करनी ही हो तो धनिया, तिल की वस्तु, ईलायची अथवा पिस्ता खाकर यात्रा कर सकते है।।
#Panchang_30_September_2026
मित्रों, बुधवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति मधुर वाणी बोलने वाले होते हैं। इस तिथि के जातक पठन पाठन में रूचि रखते हैं और ज्ञानी होते हैं। ऐसे लोगों का लेखन में अत्यधिक रूचि होती है और अधिकांशत: इसे अपनी जीवका का साधन भी बना लेते हैं। ये जिस विषय का चयन करते हैं उसके अच्छे जानकार होते हैं। इनके पास धन तो होता है परंतु ऐसे लोग धोखेबाज भी होते हैं।।
ऐसे जातक सामन्य रंग-रूप, बुद्धिमान, लेखक, पत्रकार, प्रकाशक एवं द्विस्वभाव के होते हैं। किसी एक कार्य को न कर अनेक कार्य में जुटे होते हैं। वैसे शान्तिप्रिय रहना इनका स्वभाव होता है। अधिकांशतः मार्केटिंग के क्षेत्र में ऐसे लोगों को उत्तम सफलता मिलती है। बुधवार को जन्म लेने वाले हमेशा असमंजस के शिकार रहते हैं। वह एक समय कई कार्यों पर हाथ आजमाने की कोशिश करते हैं, कई बार सफलता मिल भी जाती है और कई बार गिरते भी हैं।।
इनमें छल-कपट नहीं होता और कई बार तो ये दूसरों की गलतियां खुद पर तक ले लेते हैं। इनको लेखन, पत्रकारिता, प्रकाशन, बैंकिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में अपना किस्मत आजमाना चाहिये। इन क्षेत्रों में इन्हें अच्छी सफलता की संभावना होती है। इनके लिये बुधवार एवं शुक्रवार का दिन भाग्यवर्धक होता है तथा 3 और 6 इनका लकी नम्बर होता है।।
आज का सुविचार – मित्रों, यदि जीवन में लोकप्रिय होना हो तो सबसे ज्यादा “आप” शब्द का, उसके बाद “हम” शब्द का और सबसे कम “मैं” शब्द का प्रयोग करना चाहिए। इस संसार में कोई किसी का हमदर्द नहीं होता, लाश को शमशान में रखकर अपने लोग ही पुछ्ते हैं.. और कितना वक़्त लगेगा।।
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