HomeChandra Grahaकुंडली के अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा का फल एवं उपाय।।

कुंडली के अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा का फल एवं उपाय।।

कुंडली के अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा का फल एवं उपाय।। Chandra in Eighth House Effects and Remedies.

अष्टम भाव और चंद्रमा का संबंध।। Introduction.

मित्रों, अष्टम भाव को आयु भाव, गूढ़ भाव तथा मोक्ष-त्रिकोण से जुड़ा भाव भी कहा जाता है। यह भाव अत्यंत रहस्यमयी तथा गहन प्रकृति का माना गया है। क्योंकि इसी से जातक की आयु, मृत्यु का कारण, गुप्त धन, ससुराल पक्ष की संपत्ति, आकस्मिक घटनाएँ तथा गूढ़ एवं तांत्रिक विद्याओं का आँकलन किया जाता है। यह भाव मनुष्य के जीवन की उस अदृश्य गहराई का प्रतिनिधित्व करता है, जो सतह पर सरलता से दिखाई नहीं देती, परन्तु संपूर्ण जीवन को भीतर से संचालित करती रहती है।।

अब चंद्रमा की प्रकृति पर विचार करें तो यह मन, भावनाओं, संवेदनशीलता तथा कल्पनाशीलता का सबसे कोमल एवं परिवर्तनशील ग्रह माना गया है। चंद्रमा जिस भी भाव में स्थित होता है, वहाँ अपनी चंचलता तथा भावुकता का विशेष रंग भर देता है। रोचक बात यह है कि चंद्रमा स्वयं मन का कारक ग्रह है। इसलिए जब यह गूढ़ता एवं रहस्य के भाव में आकर बैठ जाता है, तो जातक का मन स्वाभाविक रूप से गहन, अंतर्मुखी तथा गूढ़ विषयों की ओर आकर्षित होने लगता है।।

मित्रों, चंद्रमा सामान्यतः अंतर्ज्ञान तथा सूक्ष्म भावनाओं का भी कारक ग्रह माना जाता है। अर्थात जिस विषय में रहस्य, गहराई तथा अदृश्य सत्य को समझने की भावना सुनिश्चित होती है। वहाँ चंद्रमा का प्रभाव विशेष रूप से देखा जाता है। यही कारण है कि अष्टम भाव में चंद्रमा की यह स्थिति जातक को ज्योतिष, मनोविज्ञान, तंत्र-मंत्र अथवा शोध जैसे गूढ़ विषयों की ओर विशेष रूप से आकर्षित करती है। तथा जातक के मानसिक स्वभाव, आयु तथा गुप्त संपत्ति पर विशेष एवं गहरा प्रभाव देखने को मिलता है।।

चंद्रमा की स्थिति यदि बलवान एवं शुभ हो तो दीर्घायु, गूढ़ विषयों में सफलता तथा आकस्मिक धन-लाभ प्रदान करती है। वहीं पीड़ित अथवा अशुभ चंद्रमा मानसिक अस्थिरता, आयु संबंधी चिंता तथा गुप्त शत्रुओं से भय भी उत्पन्न करता है। वैसे वास्तविक फल का निर्णय तो सदैव संपूर्ण जन्मकुंडली, ग्रहों की दशा और उनके गोचर आदि के आधार पर ही किया जाता है।।

अष्टम भाव में चंद्रमा का सामान्य स्वभाव।। General Nature of Moon in the Eighth House.

मित्रों, अष्टम भाव में चंद्रमा जातक को अत्यंत भावुक, अंतर्मुखी तथा रहस्यप्रिय स्वभाव प्रदान करता है। ऐसे जातक अपने मन की गहराइयों में डूबकर सोचना पसंद करते हैं। तथा सतही विषयों की अपेक्षा जीवन के गूढ़ तथा अदृश्य पहलुओं को समझने में विशेष रुचि रखते हैं। इनकी सोचने की शैली में गहनता तथा सूक्ष्मता विशेष रूप से देखी जाती है।।

ऐसे जातकों में स्वाभाविक रूप से संवेदनशीलता, कल्पनाशीलता तथा अंतर्ज्ञान की प्रबल शक्ति पाई जाती है। जिस कारण इन्हें दूसरों की भावनाओं तथा छिपे हुए भावों को समझने की स्वाभाविक क्षमता प्राप्त होती है। गूढ़ विद्याओं, ज्योतिष अथवा मनोविज्ञान के प्रति भी इनकी विशेष रुचि होती है। इस अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा की स्थिति की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि जातक अपने मन की गहराई से जीवन के अनेक रहस्यों को सहजता से समझ पाता है। जिससे इनके भीतर एक स्वाभाविक शोध-प्रवृत्ति उत्पन्न होने की योग्यता होती है।।

परन्तु इसी के साथ एक चुनौती भी जुड़ी होती है। अर्थात मन की चंचलता, अत्यधिक भावुकता तथा मनोदशाओं के उतार-चढ़ाव को संतुलित रूप से संभालना। ऐसे जातकों को अपनी भावनाओं का प्रयोग स्थिरता के साथ करना पड़ेगा। जीवन में यह स्थिरता बहुत कुछ देती है। अन्यथा यही गुण मानसिक अस्थिरता तथा अनावश्यक चिंताओं का कारण भी कई बार बन जाता है। जो आगे चलकर जातक के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता है।।

शुभ चंद्रमा का अष्टम भाव में फल।। Effects of an Auspicious Moon in the Eighth House.

मित्रों, यदि अष्टम भाव का चंद्रमा उच्च राशि (वृषभ) अथवा स्वराशि (कर्क) में स्थित होकर बलवान हो, तो जातक को दीर्घायु, सुदृढ़ मानसिक शक्ति तथा गूढ़ विषयों में असाधारण सफलता प्रदान करता है। ऐसे जातक अपनी अंतर्ज्ञान की शक्ति के बल पर जीवन की अनेक कठिन परिस्थितियों को भी सहजता से समझ लेते हैं। तथा इन्हें ससुराल पक्ष से भी भावनात्मक सहयोग तथा धन-लाभ भी प्राप्त होता है। ऐसा चंद्रमा की कुंडली के अष्टम भाव की अच्छी स्थिति के कारण संभव होता है।।

शुभ चंद्रमा से जातक को ज्योतिष, मनोविज्ञान, अनुसंधान अथवा जल-तत्व से जुड़े व्यवसाय में भी एक विशिष्ट सफलता मिलती है। विशेषकर यदि यह क्षेत्र गूढ़ अथवा गुप्त प्रकृति का हो तब। ऐसे जातकों को आकस्मिक धन-लाभ, बीमा, विरासत अथवा साझी संपत्ति के माध्यम से भी अप्रत्याशित लाभ प्राप्त होता है। तथा इनकी अंतर्ज्ञान शक्ति के कारण ये जीवन में आने वाले संकटों से भी समय रहते सचेत हो जाते हैं।।

यदि चंद्रमा के साथ शुभ ग्रहों की युति अथवा दृष्टि हो, तो जातक को मानसिक शांति, गहन आध्यात्मिक अनुभव तथा दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होता है। ऐसे जातकों का जीवन समय के साथ और अधिक स्थिर तथा भावनात्मक रूप से परिपक्व होता चला जाता है। जिससे इनके संपूर्ण जीवन में एक गहन आत्मिक संतुलन की अनुभूति बनी रहती है।।

अशुभ चंद्रमा का अष्टम भाव में फल।। Effects of an Inauspicious Moon in the Eighth House.

मित्रों, यदि अष्टम भाव का चंद्रमा नीच राशि (वृश्चिक) में, पापग्रहों से पीड़ित अथवा क्षीण अवस्था में हो, तो जातक को मानसिक अस्थिरता, अकारण भय, आयु संबंधी चिंता अथवा गुप्त शत्रुओं से हानि का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातकों में अत्यधिक संवेदनशीलता तथा नकारात्मक विचारों की प्रवृत्ति भी देखी जाती है। जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव अनुभव होता है।।

कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि यदि अष्टम भाव का चंद्रमा पाप ग्रहों से युक्त अथवा दृष्ट हो, तो जातक को दुर्घटना का भय, गुप्त रोगों की आशंका अथवा धन-हानि जैसी परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ता है। इसी प्रकार यदि चंद्रमा राहु अथवा केतु से पीड़ित हो, तो मानसिक उलझन, अनिद्रा अथवा अकारण चिंता जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न होती हैं। हालाँकि ऐसे किसी भी निष्कर्ष के लिए अत्यंत सावधानीपूर्वक तथा संपूर्ण कुंडली का अध्ययन आवश्यक होता है।।

ऐसे जातकों को अपनी मनोदशाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए तथा भय एवं चिंता से मुक्त होकर धैर्यपूर्वक जीवन जीना चाहिए। क्योंकि यही दृष्टिकोण दीर्घकालिक मानसिक स्थिरता को सुनिश्चित करता है। परन्तु अंतिम निष्कर्ष के लिए अष्टमेश तथा संपूर्ण जन्मकुंडली का अध्ययन अनिवार्य होता है।।

आयु, गूढ़ विद्या तथा गुप्त धन पर विस्तृत प्रभाव।। Detailed Effects on Longevity, Occult Knowledge and Hidden Wealth.

मित्रों, अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा जातक को ऐसे जीवन-दृष्टिकोण की ओर प्रेरित करता है। जिसमें भावनात्मक गहराई, अंतर्ज्ञान तथा रहस्यों के प्रति स्वाभाविक जिज्ञासा का महत्वपूर्ण स्थान हो। ऐसे जातक प्रायः ज्योतिष, तंत्र-विद्या, मनोविज्ञान, अनुसंधान अथवा चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से सफलता प्राप्त करते हैं। क्योंकि इनकी उपस्थिति मात्र से ही एक गहन तथा चिंतनशील वातावरण का निर्माण होता है।।

ससुराल पक्ष के साथ इनका संबंध भी विशेष भूमिका निभाता है। अर्थात अनेक बार ससुराल पक्ष से ही जातक को भावनात्मक सहयोग अथवा धन-लाभ प्राप्त होता है। यदि चंद्रमा शुभ हो, तो यह सहयोग जातक के संपूर्ण जीवन को नई मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। जबकि चंद्रमा के पीड़ित होने पर इस दिशा में भी कुछ तनाव अथवा असमंजस उत्पन्न होता है।।

आयु के दृष्टिकोण से भी अष्टम भाव का चंद्रमा विशेष महत्व रखता है। शुभ स्थिति में यह दीर्घायु तथा मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। जबकि अशुभ स्थिति में स्वास्थ्य के प्रति अतिरिक्त सजगता बरतने की आवश्यकता होती है। परन्तु अंतिम निर्णय के लिए संपूर्ण जन्मकुंडली का समन्वित अध्ययन आवश्यक होता है।।

अष्टमस्थ चंद्रमा का स्वास्थ्य पर प्रभाव।। Health Effects.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा का संबंध मन, रक्त तथा जल-तत्व से माना गया है। जबकि अष्टम भाव का संबंध गुप्तांगों, मल द्वार तथा दीर्घकालिक रोगों से होता है। अष्टम भाव में चंद्रमा के शुभ होने पर मानसिक स्थिरता तथा दीर्घकालिक जीवनशक्ति स्वाभाविक रूप से बनी रहती है।।

इसके विपरीत यदि चंद्रमा पीड़ित हो, तो मानसिक तनाव, अनिद्रा, अकारण भय अथवा दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का अनुभव होता है। अत्यधिक चिंता की प्रवृत्ति के कारण भी मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। विशेषकर जब चंद्रमा राहु अथवा शनि से पीड़ित हो। ऐसी स्थिति में संतुलित जीवनशैली तथा मानसिक शांति बनाए रखने के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श भी अवश्य लेना चाहिए। तथा चंद्रमा के बताए गए ज्योतिषीय उपायों को भी करना चाहिए।।

चंद्रमा को बलवान बनाने के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies to Strengthen Moon in the Eighth House.

मित्रों, अष्टम भाव के चंद्रमा को शुभ अथवा बलवान बनाए रखने के लिए चंद्र देवता के मंत्र “ॐ सों सोमाय नमः” अथवा “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः” का श्रद्धापूर्वक जप करना चाहिए। सोमवार के दिन शिवजी का जलाभिषेक करना तथा चंद्रमा को प्रतिदिन रात्रि में जल से अर्घ्य देना भी शुभ फलदायी माना जाता है। क्योंकि चंद्रमा को स्वयं भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान माना गया है।।

सोमवार के दिन व्रत रखना तथा सफेद वस्तुओं जैसे चावल, दूध, चीनी अथवा सफेद वस्त्र आदि का दान करना भी शुभ फलदायी माना जाता है। माता का सम्मान करना चाहिए। मानसिक शांति के लिए ध्यान तथा योग का नियमित अभ्यास करना भी अष्टम भाव के चंद्रमा को संतुलित एवं बलवान बनाने में विशेष रूप से सहायक सिद्ध होता है।।

और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि गूढ़ विषयों के प्रति अपनी जिज्ञासा को अवश्य आगे बढ़ाएं। परन्तु मन की स्थिरता तथा भय से मुक्ति के प्रति भी उतनी ही सजगता बनाए रखें। क्योंकि यही संतुलन इस अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा की स्थिति का सबसे बड़ा उपाय भी है और सबसे बड़ा गुण भी है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावना तथा अंतर्ज्ञान का प्रमुख कारक ग्रह बताया गया है। फलदीपिका के अनुसार अष्टम भाव में स्थित बलवान चंद्रमा जातक को दीर्घायु, गूढ़ विद्या में सफलता तथा आकस्मिक धन-लाभ प्रदान करता है। जबकि पीड़ित चंद्रमा आयु संबंधी चिंता तथा मानसिक अस्थिरता उत्पन्न करता है।।

सारावली में भी अष्टम भाव के चंद्रमा को अंतर्ज्ञान तथा गूढ़ विषयों की गहरी समझ का प्रमुख कारक ग्रह स्वीकार किया गया है। तथा यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसका अंतिम फलादेश अष्टमेश की स्थिति तथा संपूर्ण जन्मकुंडली के समन्वित अध्ययन के पश्चात ही निश्चित किया जाना चाहिए।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. अष्टम भाव में शुभ चंद्रमा क्या फल देता है।। What results does a benefic Moon yield in the eighth house.

उत्तर:- अष्टम भाव का शुभ चंद्रमा दीर्घायु, गूढ़ विषयों में सफलता, आकस्मिक धन-लाभ तथा भावनात्मक गहराई जैसे उत्तम फल प्रदान करता है।।

प्रश्न 2. अष्टम भाव में अशुभ चंद्रमा क्या नुकसान देता है।। What harm does a malefic Moon in the eighth house cause.

उत्तर:- अष्टम भाव का अशुभ चंद्रमा मानसिक अस्थिरता, आयु संबंधी चिंता तथा गुप्त शत्रुओं से हानि जैसी बाधाएँ उत्पन्न करता है।।

प्रश्न 3. अष्टम भाव के चंद्रमा से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ कौन-सी हैं।। What are the health issues associated with the Moon in the eighth house.

उत्तर:- वैदिक ज्योतिष में अष्टम भाव का संबंध गुप्तांगों तथा दीर्घकालिक रोगों से माना गया है। जबकि चंद्रमा का संबंध मन तथा रक्त से है। पीड़ित चंद्रमा इन क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं की ओर संकेत देता है।।

प्रश्न 4. अष्टम भाव के चंद्रमा को बलवान बनाने का सबसे प्रभावी वैदिक उपाय क्या है।। What is the most effective Vedic remedy to strengthen the Moon in the eighth house.

उत्तर:- चंद्र देवता के मंत्र का जप, सोमवार को शिवजी का जलाभिषेक, सफेद वस्तुओं का दान तथा ध्यान-योग का नियमित अभ्यास ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।।

प्रश्न 5. क्या अष्टम भाव का चंद्रमा गूढ़ विद्याओं में रुचि उत्पन्न करता है।। Does the Moon in the eighth house create interest in occult sciences.

उत्तर:- हाँ, अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा जातक को ज्योतिष, मनोविज्ञान तथा गूढ़ विषयों के प्रति स्वाभाविक रूप से आकर्षित करता है। परंतु अंतिम निर्णय संपूर्ण जन्म कुंडली देखकर ही किया जाता है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, कुंडली के अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा शुभ हो तो जातक को दीर्घायु, गूढ़ विषयों में रुचि तथा सफलता, आकस्मिक धन-लाभ तथा भावनात्मक गहराई प्रदान करता है। वहीं अशुभ होने पर मानसिक अस्थिरता, आयु संबंधी चिंता तथा गुप्त शत्रुओं से भय जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न करता है। यह अष्टम भाव एवं चंद्रमा ग्रह का संयोग हमें यह सिखाता है कि भावनाओं की गहराई तथा मानसिक स्थिरता का मेल जीवन को रहस्यों की गहन समझ के साथ समृद्ध बनाता है। बशर्ते जातक अपनी संवेदनशीलता को भय से मुक्त रखकर धैर्य के साथ अपने आप को संभाले।।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार चंद्र देवता के मंत्र का जप, सोमवार का व्रत, शिवजी का जलाभिषेक तथा ध्यान साधना का नियमित अभ्यास इसे संतुलित एवं बलवान बनाने में सहायक माना गया है। और यहाँ मैं यही कहूँगा कि जो जातक अपने मन की गहराई तथा स्थिरता के बीच सही संतुलन साध लेता है। उसी का जीवन अष्टम भाव के इस चंद्रमा से सर्वाधिक लाभान्वित होता है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि किसी भी विशेष उपाय अथवा निर्णायक निष्कर्ष से पहले किसी अनुभवी, योग्य एवं विद्वान ज्योतिषी से संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण विधिपूर्वक अवश्य करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके। कुंडली के अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा शुभ हो तो जातक को दीर्घायु, गूढ़ विषयों में रुचि, आकस्मिक धन-लाभ तथा भावनात्मक गहराई प्रदान करता है। वहीं अशुभ होने पर मानसिक अस्थिरता, आयु संबंधी चिंता तथा गुप्त शत्रुओं से भय भी उत्पन्न करता है।।

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