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कुंडली के दशम भाव में स्थित सूर्य का फल एवं उपाय।।

कुंडली के दशम भाव में स्थित सूर्य का फल एवं उपाय।। Surya in Tenth House Effects and Remedies.

दशम भाव और सूर्य का संबंध।। Introduction.

मित्रों, दशम भाव को कर्म भाव, राजसत्ता भाव तथा प्रतिष्ठा भाव भी कहा जाता है। और यह केंद्र भाव होने के कारण जन्मकुंडली के चार अत्यंत बलशाली स्तंभों में से एक माना गया है। इसी से जातक के करियर, सरकारी क्षेत्र, सत्ता तथा सामाजिक प्रतिष्ठा का आँकलन किया जाता है। यह भाव जातक के जीवन का वह मंच है, जहाँ उसका पुरुषार्थ प्रत्यक्ष रूप से समाज के समक्ष प्रकट होता है।।

अब सूर्य की प्रकृति पर विचार करें तो यह शासन, अधिकार, आत्मबल तथा राजसी गुणों का सबसे तेजस्वी तथा प्रभावशाली ग्रह माना गया है। सूर्य जिस भी भाव में स्थित होता है, वहाँ अपने तेज तथा अधिकार का विशेष संचार करता है। रोचक बात यह है कि सूर्य स्वयं शासन तथा सत्ता का कारक ग्रह है। इसलिए जब यह करियर के भाव में आता है, तो जातक अपने कार्यक्षेत्र में स्वाभाविक रूप से आत्मबल, अधिकार तथा स्पष्ट दिशा के साथ कार्य करने लगता है।।

सूर्य सामान्यतः स्थायी पद का भी कारक माना जाता है। अर्थात जिस नौकरी में सुरक्षा तथा स्थायित्व की भावना सुनिश्चित होती है, वहाँ सूर्य का प्रभाव विशेष रूप से देखा जाता है। यही कारण है कि दशम भाव में सूर्य की यह स्थिति जातक को सरकारी सेवा, प्रशासनिक क्षेत्र अथवा स्वतंत्र व्यवसाय की ओर विशेष रूप से आकर्षित करती है। तथा जातक के करियर, नेतृत्व क्षमता तथा समाज में स्थान पर विशेष तथा गहरा प्रभाव देखने को मिलता है।।

सूर्य की स्थिति यदि बलवान एवं शुभ हो तो सरकारी पद, स्थायी करियर तथा सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदान करती है। वहीं पीड़ित अथवा अशुभ सूर्य अहंकार तथा पिता के स्वास्थ्य संबंधी चिंता भी उत्पन्न करता है। वैसे वास्तविक फल का निर्णय तो सदैव संपूर्ण जन्मकुंडली, ग्रहों की दशा और उनके गोचर आदि के आधार पर ही किया जाता है।।

दशम भाव में सूर्य का सामान्य स्वभाव।। General Nature of Sun in the Tenth House.

मित्रों, दशम भाव में सूर्य जातक को नेतृत्वप्रधान, अधिकारपूर्ण तथा अत्यंत महत्वाकांक्षी स्वभाव प्रदान करता है। ऐसे जातक अपने कार्यक्षेत्र में स्वयं निर्णय लेना पसंद करते हैं। तथा दूसरों के अधीन कार्य करने की अपेक्षा स्वतंत्र भूमिका निभाना अधिक उपयुक्त समझते हैं। इनकी कार्यशैली में आत्मविश्वास तथा स्पष्टता विशेष रूप से देखी जाती है।।

ऐसे जातकों में सत्ता तथा प्रतिष्ठा के प्रति स्वाभाविक आकर्षण होता है। और ये सामाजिक जीवन में एक प्रभावशाली स्थान प्राप्त करने की तीव्र इच्छा रखते हैं। इस दशम भाव में स्थित सूर्य की स्थिति की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि जातक अपनी ऊर्जा को सीधे अपने कर्मक्षेत्र पर ही केंद्रित कर पाता है। जिससे करियर में तीव्र प्रगति होने की योग्यता प्राप्त हो जाती है।।

परन्तु इसी के साथ एक चुनौती भी जुड़ी होती है। अर्थात अहंकार, मान-सम्मान तथा उत्तरदायित्व को संतुलित रूप से संभालना। ऐसे जातकों को अपने अधिकार का प्रयोग विनम्रता के साथ करना पड़ेगा। जीवन में यह विनम्रता बहुत कुछ देती है। अन्यथा यही गुण संबंधों में कठोरता का कारण भी कई बार बन जाता है। जो आपके आगे के कैरियर के अच्छा नही होता है।।

शुभ सूर्य का दशम भाव में फल।। Effects of an Auspicious Sun in the Tenth House.

मित्रों, यदि दशम भाव का सूर्य उच्च राशि (मेष) अथवा स्वराशि (सिंह) में स्थित होकर बलवान हो, तो जातक को सरकारी पद, प्रशासनिक सेवा तथा स्थायी करियर में विशेष सफलता प्राप्त होती है। ऐसे जातक किसी सरकारी पद पर प्रतिष्ठित होते हैं। सरकार द्वारा सम्मानित होते हैं। अथवा स्वयं सत्ता का एक महत्वपूर्ण अंग भी बन जाते हैं। ऐसा सूर्य की कुंडली के दशम भाव की अच्छी स्थिति के कारण संभव होता है।।

शुभ सूर्य से जातक को प्रशासनिक अधिकारी, नेतृत्वकारी पद अथवा स्वतंत्र व्यवसाय में भी एक विशिष्ट सफलता मिलती है। ऐसे जातक अपने पुरुषार्थ के बल पर समाज में उच्च से भी उच्च स्थान प्राप्त कर लेते हैं। तथा इनकी कार्यक्षमता तथा नेतृत्व क्षमता के कारण इन्हें विशेष सम्मान भी प्राप्त होता है। जो आगर चलकर इनके सम्मान को कई गुना बढ़ा देती है।।

यदि सूर्य के साथ राहु की युति हो और यह शुभ प्रभाव में हो, तो जातक को तीव्र बुद्धि तथा कठिन परिस्थितियों में असामान्य समाधान खोजने की क्षमता भी प्राप्त हो जाती है। जिससे वह पारंपरिक मार्ग की अपेक्षा भिन्न ढंग से भी असाधारण सफलता प्राप्त करता है। तथा ऐसे जातक अपने अनूठे दृष्टिकोण के कारण भीड़ से सदैव अलग पहचान बनाते हैं।।

अशुभ सूर्य का दशम भाव में फल।। Effects of an Inauspicious Sun in the Tenth House.

मित्रों,यदि दशम भाव का सूर्य नीच राशि (तुला) में, पापग्रहों से पीड़ित अथवा अस्त अवस्था में हो, तो जातक को करियर में बाधा, अहंकार के कारण वरिष्ठों से मतभेद अथवा पद-प्रतिष्ठा में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातकों में अत्यधिक अधिकार-भावना की प्रवृत्ति भी देखी जाती है। जिससे कार्यस्थल पर संबंध भी प्रभावित होते हैं।।

कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि यदि दशम भाव का सूर्य हानिकारक स्थिति में हो तथा साथ ही चतुर्थ भाव में शनि भी स्थित हो, तो जातक के पिता के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बताई गई है। इसी प्रकार यदि सूर्य दशम भाव में हो और चंद्रमा पंचम भाव में हो, तो जातक की आयु अपेक्षाकृत कम होने का संकेत भी परंपरागत ग्रंथों में मिलता है। हालाँकि ऐसे किसी भी निष्कर्ष के लिए अत्यंत सावधानीपूर्वक तथा संपूर्ण कुंडली का अध्ययन आवश्यक होता है।।

ऐसे जातकों को अपने अहंकार पर नियंत्रण रखना चाहिए तथा कर्म में ईमानदारी एवं उपलब्धियों में विनम्रता अपनानी चाहिए। क्योंकि यही दृष्टिकोण दीर्घकालिक सफलता को सुनिश्चित करता है। परन्तु अंतिम निष्कर्ष के लिए दशमेश तथा संपूर्ण जन्मकुंडली का अध्ययन अनिवार्य होता है।।

करियर, सत्ता तथा पिता पर विस्तृत प्रभाव।। Detailed Effects on Career, Authority and Father.

मित्रों, दशम भाव में स्थित सूर्य जातक को ऐसे करियर की ओर प्रेरित करता है, जिसमें अधिकार, नेतृत्व तथा सार्वजनिक दायित्व का महत्वपूर्ण स्थान हो। ऐसे जातक प्रायः प्रशासन, न्यायपालिका, राजनीति, चिकित्सा प्रबंधन अथवा बड़े संगठनों के नेतृत्व में विशेष रूप से सफलता प्राप्त करते हैं। क्योंकि इनकी उपस्थिति मात्र से ही एक अनुशासित तथा गरिमामय वातावरण का निर्माण होता है।।

पिता के साथ इनका संबंध करियर की दिशा में भी विशेष भूमिका निभाता है। अर्थात अनेक बार पिता ही जातक के करियर-चयन में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से प्रेरणास्रोत सिद्ध होते हैं। यदि सूर्य शुभ हो, तो पिता का सहयोग तथा मार्गदर्शन जातक के करियर को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में सहायक होता है। जबकि सूर्य के पीड़ित होने पर इस दिशा में भी कुछ तनाव अथवा असमंजस उत्पन्न होता है।।

दशमस्थ सूर्य का स्वास्थ्य पर प्रभाव।। Health Effects.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य का संबंध हृदय, अस्थियों तथा नेत्रों से माना गया है। जबकि दशम भाव का संबंध घुटनों तथा हड्डियों से होता है। दशम भाव में सूर्य के अशुभ होने पर घुटनों संबंधी विकार, हृदय संबंधी असंतुलन अथवा अत्यधिक कार्यभार के कारण मानसिक तनाव उत्पन्न हो जाता है। इसीलिए यहाँ सूर्य को ठीक करना आवश्यक हो जाता है।।

परन्तु इसके विपरीत यदि सूर्य शुभ हो, तो जातक में उत्तम कार्यक्षमता तथा दीर्घकालिक ऊर्जा बनी रहती है। ऐसी स्थिति में भी आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लेना चाहिए। विशेषकर अत्यधिक कार्यभार की स्थिति में। पिता के स्वास्थ्य के प्रति भी विशेष सजगता बरतनी चाहिए। विशेषकर जब सूर्य पीड़ित स्थिति में हो, तथा ऐसी स्थिति में नियमित स्वास्थ्य जाँच तथा संतुलित दिनचर्या सहायक सिद्ध होती है। और ज्योतिषीय उपायों को भी अपनाना चाहिए।।

सूर्य को बलवान बनाने के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies to Strengthen Sun in the Tenth House.

मित्रों, दशम भाव के सूर्य को शुभ अथवा बलवान बनाए रखने के लिए सूर्य देवता के मंत्र “ॐ सूर्याय नमः अथवा ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः” का श्रद्धापूर्वक जप करना चाहिए। प्रतिदिन प्रातःकाल ताम्र पात्र से सूर्य देवता को जल से सूर्यार्घ्य अवश्य देना चाहिए। यह उपाय ऐसा असरदार होता है, कि कभी-कभी देखा गया है जातक की जिंदगी को ही पूर्णतः बदल जाती है।।

रविवार के दिन व्रत रखना तथा गुड़, गेहूँ अथवा तांबे का दान करना भी शुभ फलदायी माना जाता है। कार्यस्थल पर अहंकार की बजाय विनम्रता तथा उत्तरदायित्व पूर्ण व्यवहार बनाए रखने का भी प्रयास करना चाहिए। क्योंकि यही आचरण सूर्य के शुभ प्रभाव को बढ़ाने वाला माना जाता है। आदित्य हृदय स्तोत्र का नियमित पाठ करना तथा पिता का सम्मान करना भी सूर्य की शुभता बनाए रखने के लिए पारंपरिक रूप से लाभकारी माना जाता है। और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि कर्म में ईमानदारी तथा उपलब्धियों में विनम्रता को कभी न छोड़ें।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में सूर्य को शासन, अधिकार तथा आत्मबल का प्रमुख कारक ग्रह बताया गया है। फलदीपिका के अनुसार केंद्र भाव में स्थित बलवान सूर्य जातक को सरकारी पद, स्थायी करियर तथा सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदान करता है। जबकि पीड़ित सूर्य अहंकार तथा करियर में बाधा उत्पन्न करता है।।

आधुनिक ज्योतिषीय विश्लेषण में भी यह स्पष्ट किया गया है कि दशम भाव में सूर्य व्यक्ति के पेशे, अधिकार तथा सार्वजनिक भूमिका को आत्मबल तथा स्पष्ट दिशा के रंग में सक्रिय बना देता है। परन्तु इसका अंतिम फलादेश दशमेश की स्थिति तथा संपूर्ण जन्मकुंडली के समन्वित अध्ययन के पश्चात ही निश्चित किया जाना चाहिए।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. दशम भाव में शुभ सूर्य क्या फल देता है।। What results does a beneficial Sun yield in the tenth house.

उत्तर:- दशम भाव का शुभ सूर्य सरकारी पद, स्थायी करियर, सामाजिक प्रतिष्ठा तथा नेतृत्वकारी सफलता जैसे उत्तम फल प्रदान करता है।।

प्रश्न 2. दशम भाव में अशुभ सूर्य क्या नुकसान देता है।। What harm does a malefic Sun in the tenth house cause.

उत्तर:- दशम भाव का अशुभ सूर्य करियर में बाधा, अहंकार के कारण वरिष्ठों से मतभेद तथा पिता के स्वास्थ्य संबंधी चिंता जैसी समस्याएँ उत्पन्न करता है।।

प्रश्न 3. दशम भाव के सूर्य से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ कौन-सी हैं।। What are the health issues associated with the Sun in the tenth house.

उत्तर:- वैदिक ज्योतिष में दशम भाव का संबंध घुटनों तथा हड्डियों से माना गया है। पीड़ित सूर्य इन क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं का संकेत देता है।।

प्रश्न 4. दशम भाव के सूर्य को बलवान बनाने का सबसे प्रभावी वैदिक उपाय क्या है।। What is the most effective Vedic remedy to strengthen the Sun in the tenth house.

उत्तर:- सूर्य देवता के मंत्र का जप, प्रातः सूर्यार्घ्य देना, रविवार को गुड़ एवं तांबे का दान तथा विनम्रतापूर्ण कार्यशैली ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।।

प्रश्न 5. क्या दशम भाव का सूर्य सरकारी नौकरी में सफलता दिलाता है।। Does the Sun in the tenth house bring success in a government job.

उत्तर:- हाँ, सूर्य को स्थायी पद तथा सरकारी सेवा का प्रमुख कारक माना जाता है। इसलिए यदि यह बलवान हो तो सरकारी क्षेत्र में विशेष सफलता की प्रबल संभावना बनती है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, कुंडली के दशम भाव में स्थित सूर्य शुभ हो तो जातक को सरकारी पद, स्थायी करियर, सामाजिक प्रतिष्ठा तथा नेतृत्वकारी सफलता प्रदान करता है। वहीं अशुभ होने पर करियर में बाधा, अहंकार के कारण वरिष्ठ जनों से मतभेद तथा पिता के स्वास्थ्य संबंधी चिंता जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न करता है। इस दशम भाव और सूर्य ग्रह के संयोग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह जातक की ऊर्जा को सीधे करियर में केंद्रित कर देता है। परन्तु इसी के साथ अहंकार को संयमित रखने की चुनौती भी सामने आती है।।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य देवता के मंत्र का जप, सूर्यार्घ्य देना, रविवार का व्रत करना तथा सूर्य से दान इसे संतुलित एवं बलवान बनाने में सहायक माना गया है। इसके साथ ही कार्यस्थल पर विनम्रता, ईमानदारी तथा उत्तरदायित्वपूर्ण व्यवहार बनाए रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण आचरण माना जाता है। क्योंकि यही आचरण करियर को दीर्घकालिक रूप से सुदृढ़ बनाता है।।

परन्तु किसी भी निर्णायक निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले किसी अनुभवी, योग्य तथा विद्वान ज्योतिषी से संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण अवश्य करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।

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