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कुंडली के नवम भाव में स्थित चंद्रमा का फल एवं उपाय।।

कुंडली के नवम भाव में स्थित चंद्रमा का फल एवं उपाय।। Chandra in Ninth House Effects and Remedies.

नवम भाव और चंद्रमा का संबंध।। Introduction.

मित्रों, नवम भाव को समस्त द्वादश भावों में सबसे शुभ त्रिकोण भाव माना गया है। क्योंकि इसी से जातक के भाग्य, धर्म, पूर्वजन्म के संचित पुण्य, उच्च शिक्षा, गुरुजनों का आशीर्वाद, पिता से संबंध तथा दूरगामी तीर्थ-यात्राओं का आँकलन किया जाता है। यह भाव मनुष्य के जीवन की उस अदृश्य किन्तु अत्यंत शक्तिशाली धारा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे हम भाग्य कहते हैं। और जो हमारे प्रयत्नों से भी बढ़कर हमें सफलता अथवा असफलता की ओर ले जाती है। इसी कारण इस भाव को अत्यंत पवित्र तथा सौभाग्यशाली भाव भी कहा गया है।।

अब चंद्रमा की प्रकृति पर विचार करें तो यह मन, भावनाओं, संवेदनशीलता तथा कल्पनाशीलता का सबसे कोमल एवं परिवर्तनशील ग्रह माना गया है। चंद्रमा जिस भी भाव में स्थित होता है, वहाँ अपनी चंचलता तथा भावुकता का विशेष रंग भर देता है। रोचक बात यह है कि चंद्रमा स्वयं मन का कारक ग्रह होता है। और जब यह भावुक ग्रह भाग्य के भाव में जाकर बैठ जाता है, तो जातक का भाग्य भी मन की अवस्था के साथ-साथ ऊपर-नीचे होता रहता है। यह एक अत्यंत रोचक तथा संवेदनशील संयोग बन जाता है।।

मित्रों, चंद्रमा सामान्यतः दया, करुणा तथा भावनात्मक गहराई का भी कारक ग्रह माना जाता है। अर्थात जिस विषय में सहानुभूति, श्रद्धा तथा भावनात्मक जुड़ाव की भावना सुनिश्चित होती है। वहाँ चंद्रमा का प्रभाव विशेष रूप से देखा जाता है। यही कारण है कि नवम भाव में चंद्रमा की यह स्थिति जातक को धर्म, दर्शन, तीर्थ-यात्रा अथवा परोपकार जैसे विषयों की ओर विशेष रूप से आकर्षित करती है। तथा जातक के भाग्य, पिता तथा गुरुजनों पर विशेष एवं गहरा प्रभाव देखने को मिलता है।।

चंद्रमा की स्थिति यदि बलवान एवं शुभ हो तो भाग्योदय, दयालु स्वभाव तथा तीर्थ-यात्रा से सुख प्रदान करती है। वहीं पीड़ित अथवा अशुभ चंद्रमा भाग्य में अस्थिरता, पिता से भावनात्मक दूरी तथा मानसिक चंचलता भी उत्पन्न करता है। वैसे वास्तविक फल का निर्णय तो सदैव संपूर्ण जन्मकुंडली, ग्रहों की दशा और उनके गोचर आदि के आधार पर ही किया जाता है।।

नवम भाव में चंद्रमा का सामान्य स्वभाव।। General Nature of Moon in the Ninth House.

मित्रों, नवम भाव में चंद्रमा जातक को अत्यंत भावुक, श्रद्धालु तथा दयालु स्वभाव प्रदान करता है। ऐसे जातक धर्म तथा आध्यात्म को केवल कर्मकांड की दृष्टि से नहीं, बल्कि हृदय की गहराई से अनुभव करते हैं। तथा सतही धार्मिकता की अपेक्षा जीवन के भावनात्मक तथा दार्शनिक पहलुओं को समझने में विशेष रुचि रखते हैं। इनकी सोचने की शैली में करुणा तथा सहजता विशेष रूप से देखी जाती है।।

ऐसे जातकों में स्वाभाविक रूप से उदारता, सहानुभूति तथा भावनात्मक बुद्धिमत्ता की प्रबल शक्ति पाई जाती है। जिस कारण इन्हें गुरुजनों तथा वरिष्ठजनों से सरलता से स्नेह प्राप्त होता है। दूरगामी तीर्थ-यात्राओं के प्रति भी इनकी विशेष रुचि होती है। विशेषकर जल-तत्व से जुड़े पवित्र स्थलों की यात्रा में। इस नवम भाव में स्थित चंद्रमा की स्थिति की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि जातक अपने हृदय की गहराई से जीवन के अनेक भावनात्मक तथा दार्शनिक प्रश्नों को सहजता से समझ पाता है। जिससे इनके भीतर एक स्वाभाविक करुणामयी प्रवृत्ति उत्पन्न होती है।।

परन्तु इसी के साथ एक चुनौती भी जुड़ी होती है। अर्थात मन की चंचलता, अत्यधिक भावुकता तथा मनोदशाओं के उतार-चढ़ाव को संतुलित रूप से संभालना। ऐसे जातकों को अपनी भावनाओं का प्रयोग स्थिरता के साथ करना पड़ेगा। जीवन में यह स्थिरता बहुत कुछ देती है। अन्यथा यही गुण भाग्य में अस्थिरता तथा अनावश्यक चिंताओं का कारण भी कई बार बन जाता है। जो आगे चलकर जातक के भविष्य के लिए अच्छा नहीं होता है।।

शुभ चंद्रमा का नवम भाव में फल।। Effects of an Auspicious Moon in the Ninth House.

मित्रों, यदि नवम भाव का चंद्रमा उच्च राशि (वृषभ) अथवा स्वराशि (कर्क) में स्थित होकर बलवान हो, तो जातक को असाधारण भाग्योदय, सुदृढ़ मानसिक शक्ति तथा धर्म एवं दर्शन में विशेष सफलता प्रदान करता है। ऐसे जातक अपनी भावनात्मक गहराई के बल पर जीवन की अनेक कठिन परिस्थितियों को भी सहजता से समझ लेते हैं। तथा इन्हें पिता तथा गुरुजनों से भी भावनात्मक सहयोग एवं आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसा चंद्रमा के कुंडली के नवम भाव की अच्छी स्थिति के कारण संभव होता है।।

शुभ चंद्रमा से जातक को धर्म-प्रचार, शिक्षण, परामर्श अथवा जल-तत्व से जुड़े व्यवसाय में भी एक विशिष्ट सफलता देता है। विशेषकर यदि यह क्षेत्र करुणा अथवा सेवा-भावना से जुड़ा हो तब। ऐसे जातकों को माता के माध्यम से तीर्थ-यात्रा, विदेश-यात्रा अथवा भाग्यशाली अवसरों की प्राप्ति भी होती है। तथा इनकी अंतर्ज्ञान शक्ति के कारण ये जीवन में आने वाले शुभ अवसरों को भी समय रहते पहचान लेते हैं।।

यदि चंद्रमा के साथ शुभ ग्रहों की युति अथवा दृष्टि हो, तो जातक को मानसिक शांति, गहन आध्यात्मिक अनुभव तथा दीर्घकालिक भाग्य-वृद्धि भी प्राप्त होती है। ऐसे जातकों का जीवन समय के साथ और अधिक स्थिर तथा भावनात्मक रूप से परिपक्व होता चला जाता है। जिससे इनके संपूर्ण जीवन में एक गहन आत्मिक संतुलन तथा भाग्य के प्रति गहरा विश्वास बना रहता है।।

अशुभ चंद्रमा का नवम भाव में फल।। Effects of an Inauspicious Moon in the Ninth House.

मित्रों, यदि नवम भाव का चंद्रमा नीच राशि (वृश्चिक) में, पापग्रहों से पीड़ित अथवा क्षीण अवस्था में हो, तो जातक को भाग्य में अस्थिरता, अकारण भय, पिता से भावनात्मक दूरी अथवा गुरुजनों से मतभेद का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातकों में अत्यधिक संवेदनशीलता तथा नकारात्मक विचारों की प्रवृत्ति भी देखी जाती है। जिससे भाग्य के प्रति दृष्टिकोण पर भी प्रतिकूल प्रभाव अनुभव होता है।।

कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि यदि नवम भाव का चंद्रमा पाप ग्रहों से युक्त अथवा दृष्ट हो, तो जातक को तीर्थ-यात्रा में विलंब, धार्मिक विषयों में भ्रम अथवा धन-हानि जैसी परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ता है। इसी प्रकार यदि चंद्रमा राहु अथवा केतु से पीड़ित हो, तो मानसिक उलझन, अनिद्रा अथवा अकारण चिंता जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न होती हैं। हालाँकि ऐसे किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए अत्यंत सावधानीपूर्वक तथा संपूर्ण जन्मकुंडली का अध्ययन अवश्य करवाना चाहिए।।

ऐसे जातकों को अपनी मनोदशाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। तथा भय एवं चिंता से मुक्त होकर धैर्यपूर्वक जीवन जीना चाहिए। क्योंकि यही दृष्टिकोण दीर्घकालिक भाग्य-स्थिरता को सुनिश्चित करता है। परन्तु अंतिम निष्कर्ष के लिए कभी भी नवमेश तथा संपूर्ण जन्मकुंडली का अध्ययन अनिवार्य होता है।।

भाग्य, धर्म तथा पिता पर विस्तृत प्रभाव।। Detailed Effects on Fortune, Dharma and Father.

मित्रों, नवम भाव में स्थित चंद्रमा जातक को ऐसे जीवन-दृष्टिकोण की ओर प्रेरित करता है। जिसमें भावनात्मक गहराई, करुणा तथा धर्म के प्रति स्वाभाविक श्रद्धा का महत्वपूर्ण स्थान हो। ऐसे जातक प्रायः धर्म-प्रचार, परामर्श, शिक्षण अथवा सेवा-कार्यों जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से सफलता प्राप्त करते हैं। क्योंकि इनकी उपस्थिति मात्र से ही एक शांत तथा श्रद्धामय वातावरण का निर्माण होता है।।

पिता के साथ इनका संबंध भी विशेष भूमिका निभाता है। अर्थात अनेक बार पिता से ही जातक को भावनात्मक सहयोग अथवा भाग्य-वृद्धि प्राप्त होती है। यदि चंद्रमा शुभ हो, तो यह सहयोग जातक के संपूर्ण जीवन को नई भाग्य-स्थिरता प्रदान करता है। जबकि चंद्रमा के पीड़ित होने पर इस दिशा में भी कुछ तनाव अथवा असमंजस उत्पन्न होता है।।

भाग्य के दृष्टिकोण से भी नवम भाव का चंद्रमा विशेष महत्व रखता है। शुभ स्थिति में यह भाग्योदय तथा मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। जबकि अशुभ स्थिति में भाग्य के प्रति अतिरिक्त सजगता बरतने की आवश्यकता होती है। परन्तु अंतिम निर्णय के लिए संपूर्ण जन्मकुंडली का समन्वित अध्ययन आवश्यक होता है।।

नवमस्थ चंद्रमा का स्वास्थ्य पर प्रभाव।। Health Effects.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा का संबंध मन, रक्त तथा जल-तत्व से माना गया है। जबकि नवम भाव का संबंध कूल्हों तथा जांघों से होता है। नवम भाव में चंद्रमा के शुभ होने पर मानसिक स्थिरता तथा दीर्घकालिक जीवनशक्ति स्वाभाविक रूप से बनी रहती है।।

इसके विपरीत यदि चंद्रमा पीड़ित हो, तो मानसिक तनाव, अनिद्रा, अकारण भय अथवा कूल्हों-जांघों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत मिलता है। अत्यधिक चिंता की प्रवृत्ति के कारण भी मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। विशेषकर जब चंद्रमा राहु अथवा शनि से पीड़ित हो तब ऐसा कुछ अधिक ही होता है। ऐसी स्थिति में संतुलित जीवनशैली तथा मानसिक शांति बनाए रखने के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श भी अवश्य लेना चाहिए। तथा चंद्रमा के बताए गए ज्योतिषीय उपायों को भी करना चाहिए।।

चंद्रमा को बलवान बनाने के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies to Strengthen Moon in the Ninth House.

मित्रों, नवम भाव के चंद्रमा को शुभ अथवा बलवान बनाए रखने के लिए चंद्र देवता के इन समस्त मंत्रों में से किसी एक अथवा एक से अधिक मंत्रों का श्रद्धापूर्वक नियमित जप करना चाहिए। बीज मंत्र “ॐ सों सोमाय नमः”, तांत्रिक मंत्र “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः”, वैदिक चंद्र गायत्री मंत्र “ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृत तत्त्वाय धीमहि तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्” तथा सरल नाम-मंत्र “ॐ चन्द्रमसे नमः” इन सभी का जप चंद्रमा को बलवान बनाने में विशेष रूप से सहायक सिद्ध होता है।।

सोमवार के दिन शिवजी का जलाभिषेक करना तथा चंद्रमा को प्रतिदिन रात्रि में जल से अर्घ्य देना भी शुभ फलदायी माना जाता है। क्योंकि चंद्रमा को स्वयं भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान माना गया है। सोमवार के दिन व्रत रखना तथा सफेद वस्तुओं जैसे चावल, दूध, चीनी अथवा सफेद वस्त्र आदि का दान करना भी शुभ फलदायी माना जाता है। माता तथा पिता दोनों का सम्मान करना चाहिए।।

मानसिक शांति के लिए ध्यान तथा योग का नियमित अभ्यास करना भी नवम भाव के चंद्रमा को संतुलित एवं बलवान बनाने में विशेष रूप से सहायक सिद्ध होता है। तीर्थ-यात्रा में सक्रिय भाग लेना तथा गुरुजनों के प्रति श्रद्धा बनाए रखना भी इस भाव-स्थिति के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि गूढ़ भावनाओं के प्रति अपनी संवेदनशीलता को अवश्य बनाए रखें। परन्तु मन की स्थिरता तथा भय से मुक्ति के प्रति भी उतनी ही सजगता रखें।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावना तथा अंतर्ज्ञान का प्रमुख कारक ग्रह बताया गया है। फलदीपिका के अनुसार त्रिकोण भाव में स्थित बलवान चंद्रमा जातक को भाग्योदय, दयालु स्वभाव तथा तीर्थ-यात्रा से सुख प्रदान करता है। जबकि पीड़ित चंद्रमा भाग्य में अस्थिरता तथा मानसिक चंचलता उत्पन्न करता है।।

सारावली में भी नवम भाव के चंद्रमा को भावनात्मक श्रद्धा तथा धर्म के प्रति गहरी समझ का प्रमुख कारक ग्रह स्वीकार किया गया है। तथा यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसका अंतिम फलादेश नवमेश की स्थिति तथा संपूर्ण जन्मकुंडली के समन्वित अध्ययन के पश्चात ही निश्चित किया जाना चाहिए।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. नवम भाव में शुभ चंद्रमा क्या फल देता है।। What results does a benefic Moon yield in the ninth house.

उत्तर:- नवम भाव का शुभ चंद्रमा भाग्योदय, दयालु स्वभाव, तीर्थ-यात्रा से सुख तथा पिता एवं गुरुजनों से भावनात्मक जुड़ाव जैसे उत्तम फल प्रदान करता है।।

प्रश्न 2. नवम भाव में अशुभ चंद्रमा क्या नुकसान देता है।। What harm does a malefic Moon in the ninth house cause.

उत्तर:- नवम भाव का अशुभ चंद्रमा भाग्य में अस्थिरता, पिता से भावनात्मक दूरी तथा मानसिक चंचलता जैसी बाधाएँ उत्पन्न करता है।।

प्रश्न 3. नवम भाव के चंद्रमा से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ कौन-सी हैं।। What are the health issues associated with the Moon in the ninth house.

उत्तर:- वैदिक ज्योतिष में नवम भाव का संबंध कूल्हों तथा जांघों से माना गया है। जबकि चंद्रमा का संबंध मन तथा रक्त से है। पीड़ित चंद्रमा इन क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं की ओर संकेत देता है।।

प्रश्न 4. नवम भाव के चंद्रमा को बलवान बनाने का सबसे प्रभावी वैदिक उपाय क्या है।। What is the most effective Vedic remedy to strengthen the Moon in the ninth house.

उत्तर:- चंद्र देवता के किसी एक मंत्र का जप, सोमवार को शिवजी का जलाभिषेक, सफेद वस्तुओं का दान तथा ध्यान-योग का नियमित अभ्यास ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।।

प्रश्न 5. क्या नवम भाव का चंद्रमा तीर्थ-यात्रा में रुचि उत्पन्न करता है।। Does the Moon in the ninth house create interest in pilgrimage.

उत्तर:- हाँ, नवम भाव में स्थित चंद्रमा जातक को धर्म, दर्शन तथा तीर्थ-यात्रा के प्रति स्वाभाविक रूप से आकर्षित करता है। परंतु अंतिम निर्णय संपूर्ण जन्म कुंडली देखकर ही किया जाता है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, कुंडली के नवम भाव में स्थित चंद्रमा शुभ हो तो जातक को भाग्योदय, दयालु स्वभाव, तीर्थ-यात्रा से सुख तथा पिता एवं गुरुजनों से भावनात्मक जुड़ाव प्रदान करता है। वहीं अशुभ होने पर भाग्य में अस्थिरता, मानसिक चंचलता तथा पिता से दूरी जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न करता है। यह नवम भाव एवं चंद्रमा ग्रह का संयोग हमें यह सिखाता है कि भावनाओं की गहराई तथा भाग्य के प्रति दृढ़ विश्वास का मेल जीवन को धर्म की गहन समझ के साथ ही समृद्ध बनाता है। बशर्ते जातक अपनी संवेदनशीलता को भय से मुक्त रखकर धैर्य के साथ अपने आप को संभाले।।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार चंद्र देवता के मंत्रों का जप, सोमवार का व्रत, शिवजी का जलाभिषेक तथा ध्यान साधना का नियमित अभ्यास इसे संतुलित एवं बलवान बनाने में सहायक माना गया है। और यहाँ मैं यही कहूँगा कि जो जातक अपने मन की गहराई तथा भाग्य के प्रति विश्वास के बीच सही संतुलन साध लेता है। उसी का जीवन नवम भाव के इस चंद्रमा से सर्वाधिक लाभान्वित होता है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि किसी भी विशेष उपाय अथवा निर्णायक निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले किसी अनुभवी, योग्य एवं विद्वान ज्योतिषी से संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण विधिपूर्वक अवश्य करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके। कुंडली के नवम भाव में स्थित चंद्रमा शुभ हो तो जातक को भाग्योदय, दयालु स्वभाव, तीर्थ-यात्रा से सुख तथा पिता एवं गुरुजनों से भावनात्मक जुड़ाव प्रदान करता है। वहीं अशुभ होने पर भाग्य में अस्थिरता, मानसिक चंचलता तथा पिता से दूरी भी उत्पन्न करता है।।

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