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कुंडली के द्वादश भाव में बैठे चंद्रमा का फल एवं उपाय।।

कुंडली के द्वादश भाव में बैठे चंद्रमा का फल एवं उपाय।। Chandra in Twelfth House Effects and Remedies.

द्वादश भाव और चंद्रमा का संबंध।। Introduction.

मित्रों, द्वादश भाव को व्यय भाव, मोक्ष भाव तथा विदेश-वास का भाव भी कहा जाता है। यह भाव अत्यंत सूक्ष्म एवं रहस्यमयी त्रिक भाव माना गया है। क्योंकि इसी से जातक के व्यय, शय्या-सुख, एकांतवास, विदेश-यात्रा, स्वप्न-अवस्था तथा मोक्ष-मार्ग का आँकलन किया जाता है। यह भाव मनुष्य के जीवन की उस अदृश्य गहराई का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ सांसारिक बंधन धीरे-धीरे शिथिल होकर अंतर्मन की ओर मुड़ने लगते हैं। यही कारण है कि इसे मोक्ष-त्रिकोण का द्वार भी कहा गया है।।

अब चंद्रमा की प्रकृति पर विचार करें तो यह मन, भावनाओं, संवेदनशीलता तथा कल्पनाशीलता का सबसे कोमल एवं परिवर्तनशील ग्रह माना गया है। चंद्रमा जिस भी भाव में स्थित होता है, वहाँ अपनी चंचलता तथा भावुकता का विशेष रंग भर देता है। रोचक बात यह है कि चंद्रमा स्वयं स्वप्न, कल्पना तथा अवचेतन मन का भी कारक ग्रह है। इसलिए जब यह भावुक ग्रह मोक्ष तथा एकांत के भाव में जाकर बैठ जाता है, तो जातक का मन स्वाभाविक रूप से अंतर्मुखी, कल्पनाशील तथा आध्यात्मिकता की ओर आकर्षित होने लगता है।।

मित्रों, चंद्रमा सामान्यतः अंतर्ज्ञान तथा सूक्ष्म भावनाओं का भी कारक ग्रह माना जाता है। अर्थात जिस विषय में एकांत, त्याग तथा सूक्ष्म चिंतन की भावना सुनिश्चित होती है, वहाँ चंद्रमा का प्रभाव विशेष रूप से देखा जाता है। यही कारण है कि द्वादश भाव में चंद्रमा की यह स्थिति जातक को ध्यान-साधना, स्वप्न-विश्लेषण, विदेश-वास अथवा गुप्त सेवा-कार्यों जैसे विषयों की ओर विशेष रूप से आकर्षित करती है। तथा जातक के व्यय, नींद तथा माता से संबंधों पर भी विशेष एवं गहरा प्रभाव देखने को मिलता है।।

चंद्रमा की स्थिति यदि बलवान एवं शुभ हो तो गहन ध्यान-साधना, विदेश-वास में सुख तथा माता से भावनात्मक जुड़ाव प्रदान करती है। वहीं पीड़ित अथवा अशुभ चंद्रमा एकाकीपन, अनिद्रा तथा अनावश्यक व्यय भी उत्पन्न करता है। वैसे वास्तविक फल का निर्णय तो सदैव संपूर्ण जन्मकुंडली, ग्रहों की दशा और उनके गोचर आदि के आधार पर ही किया जाता है।।

द्वादश भाव में चंद्रमा का सामान्य स्वभाव।। General Nature of Moon in the Twelfth House.

मित्रों, द्वादश भाव में चंद्रमा जातक को अत्यंत भावुक, अंतर्मुखी तथा कल्पनाशील स्वभाव प्रदान करता है। ऐसे जातक अपने मन की गहराइयों में डूबकर सोचना पसंद करते हैं। तथा सार्वजनिक जीवन की अपेक्षा एकांत तथा गोपनीय वातावरण में अधिक सहजता का अनुभव करते हैं। इनकी सोचने की शैली में गहनता तथा स्वप्निलता विशेष रूप से देखी जाती है।।

ऐसे जातकों में स्वाभाविक रूप से संवेदनशीलता, कल्पनाशीलता तथा अंतर्ज्ञान की प्रबल शक्ति पाई जाती है। जिस कारण इन्हें ध्यान, साधना अथवा स्वप्न-जगत की गूढ़ता को समझने की स्वाभाविक क्षमता प्राप्त होती है। विदेश-वास तथा एकांतवास के प्रति भी इनकी विशेष रुचि होती है। इस द्वादश भाव में स्थित चंद्रमा की स्थिति की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि जातक अपने मन की गहराई से जीवन के अनेक आध्यात्मिक रहस्यों को सहजता से समझ लेता है। जिससे इनके भीतर एक स्वाभाविक साधना की प्रवृत्ति उत्पन्न होने की योग्यता होती है।।

परन्तु इसी के साथ एक चुनौती भी जुड़ी होती है। अर्थात मन की चंचलता, अत्यधिक भावुकता तथा एकाकीपन की प्रवृत्ति को संतुलित रूप से संभालना। ऐसे जातकों को अपनी भावनाओं का प्रयोग स्थिरता के साथ करना पड़ेगा। जीवन में यह स्थिरता बहुत कुछ देती है। अन्यथा यही गुण मानसिक अस्थिरता तथा अनावश्यक व्यय का कारण भी कई बार बन जाता है। जो आगे चलकर जातक के आर्थिक जीवन के लिए अच्छा नहीं होता है।।

शुभ चंद्रमा का द्वादश भाव में फल।। Effects of an Auspicious Moon in the Twelfth House.

मित्रों, यदि द्वादश भाव का चंद्रमा उच्च राशि (वृषभ) अथवा स्वराशि (कर्क) में स्थित होकर बलवान हो, तो जातक को गहन ध्यान-साधना में सिद्धि, सुदृढ़ मानसिक शक्ति तथा विदेश-वास में विशेष सफलता प्रदान करता है। ऐसे जातक अपनी अंतर्ज्ञान की शक्ति के बल पर जीवन की अनेक कठिन परिस्थितियों को भी सहजता से समझ लेते हैं। तथा इन्हें माता से भी गहरा भावनात्मक जुड़ाव तथा आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसा चंद्रमा की कुंडली के द्वादश भाव की अच्छी स्थिति के कारण संभव होता है।।

शुभ चंद्रमा से जातक को आध्यात्मिक संस्थानों, विदेश से जुड़े कार्यों, गुप्त सेवा-कार्यों अथवा जल-तत्व से जुड़े व्यवसाय में भी एक विशिष्ट सफलता मिलती है। विशेषकर यदि यह क्षेत्र एकांत अथवा गोपनीय प्रकृति का हो तब। ऐसे जातकों को शय्या-सुख, गहरी तथा शांत निद्रा तथा स्वप्नों के माध्यम से भी विशेष मार्गदर्शन प्राप्त होता है। तथा इनकी अंतर्ज्ञान की शक्ति के कारण ये जीवन में आने वाले संकटों से भी समय रहते सचेत हो जाते हैं।।

यदि चंद्रमा के साथ शुभ ग्रहों की युति अथवा दृष्टि हो, तो जातक को मानसिक शांति, गहन आध्यात्मिक अनुभव तथा मोक्ष-मार्ग की ओर स्वाभाविक झुकाव भी प्राप्त होता है। ऐसे जातकों का जीवन समय के साथ और अधिक स्थिर तथा भावनात्मक रूप से परिपक्व होता चला जाता है। जिससे इनके संपूर्ण जीवन में एक गहन आत्मिक संतुलन की अनुभूति बनी रहती है।।

अशुभ चंद्रमा का द्वादश भाव में फल।। Effects of an Inauspicious Moon in the Twelfth House.

मित्रों, यदि द्वादश भाव का चंद्रमा नीच राशि (वृश्चिक) में, पापग्रहों से पीड़ित अथवा क्षीण अवस्था में हो, तो जातक को मानसिक अस्थिरता, एकाकीपन, अनिद्रा अथवा अनावश्यक व्यय का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातकों में अत्यधिक संवेदनशीलता तथा नकारात्मक विचारों की प्रवृत्ति भी देखी जाती है। जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव अनुभव होता है।।

कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि यदि द्वादश भाव का चंद्रमा पाप ग्रहों से युक्त अथवा दृष्ट हो, तो जातक को अस्पताल में भर्ती होने की आशंका, गुप्त शत्रुओं से भय अथवा धन-हानि जैसी परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ता है। इसी प्रकार यदि चंद्रमा राहु अथवा केतु से पीड़ित हो, तो मानसिक उलझन, बुरे स्वप्न अथवा अकारण चिंता जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न हो जाती हैं। हालाँकि ऐसे किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए अत्यंत सावधानीपूर्वक तथा संपूर्ण जन्मकुंडली का अध्ययन आवश्यक होता है।।

ऐसे जातकों को अपनी मनोदशाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। तथा भय एवं चिंता से मुक्त होकर धैर्यपूर्वक जीवन जीना चाहिए। क्योंकि यही दृष्टिकोण दीर्घकालिक मानसिक स्थिरता को सुनिश्चित करता है। परन्तु अंतिम निष्कर्ष के लिए द्वादशेश तथा संपूर्ण जन्मकुंडली का अध्ययन अनिवार्य होता है।।

व्यय, विदेश-वास तथा माता पर विस्तृत प्रभाव।। Detailed Effects on Expenditure, Foreign Settlement and Mother.

मित्रों, द्वादश भाव में स्थित चंद्रमा जातक को ऐसे जीवन के दृष्टिकोण की ओर प्रेरित करता है। जिसमें भावनात्मक गहराई, अंतर्ज्ञान तथा एकांत के प्रति स्वाभाविक जिज्ञासा का महत्वपूर्ण स्थान हो। ऐसे जातक प्रायः ध्यान-साधना, मनोविज्ञान, आश्रम-सेवा अथवा विदेश से जुड़े कार्यों में विशेष रूप से सफलता प्राप्त करते हैं। क्योंकि इनकी उपस्थिति मात्र से ही एक गहन तथा शांत वातावरण का निर्माण होता है।।

माता के साथ इनका संबंध भी विशेष भूमिका निभाता है। अर्थात अनेक बार माता से ही जातक को भावनात्मक सहयोग अथवा आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त होती है। भले ही यह जुड़ाव दूरी से ही क्यों न हो। यदि चंद्रमा शुभ हो, तो यह सहयोग जातक के संपूर्ण जीवन को नई मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। जबकि चंद्रमा के पीड़ित होने पर इस दिशा में भी कुछ तनाव अथवा असमंजस उत्पन्न होता है।।

व्यय के दृष्टिकोण से भी द्वादश भाव का चंद्रमा विशेष महत्व रखता है। शुभ स्थिति में यह आवश्यक तथा शुभ कार्यों में व्यय प्रदान करता है। जबकि अशुभ स्थिति में अनावश्यक तथा भावुकतापूर्ण व्यय के प्रति अतिरिक्त सजगता बरतने की आवश्यकता होती है। परन्तु अंतिम निर्णय के लिए संपूर्ण जन्मकुंडली का समन्वित अध्ययन आवश्यक होता है।।

द्वादशस्थ चंद्रमा का स्वास्थ्य पर प्रभाव।। Health Effects.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा का संबंध मन, रक्त तथा जल-तत्व से माना गया है। जबकि द्वादश भाव का संबंध नेत्र, नींद तथा शय्या-सुख से होता है। द्वादश भाव में चंद्रमा के शुभ होने पर गहरी तथा शांत निद्रा एवं मानसिक स्थिरता स्वाभाविक रूप से बनी रहती है।।

परन्तु इसके विपरीत यदि चंद्रमा पीड़ित हो, तो अनिद्रा, नेत्र संबंधी विकार अथवा दीर्घकालिक मानसिक थकान का अनुभव होता है। अत्यधिक चिंता की प्रवृत्ति के कारण भी मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। विशेषकर जब चंद्रमा राहु अथवा शनि से पीड़ित हो तब। ऐसी स्थिति में संतुलित जीवनशैली तथा मानसिक शांति बनाए रखने के साथ ही आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श भी लेना चाहिए। तथा चंद्रमा के बताए गए ज्योतिषीय उपायों को भी अवश्य ही अपनाना चाहिए।।

चंद्रमा को बलवान बनाने के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies to Strengthen Moon in the Twelfth House.

मित्रों, द्वादश भाव के चंद्रमा को शुभ अथवा बलवान बनाए रखने के लिए चंद्र देवता के इन समस्त मंत्रों में से किसी एक अथवा एक से अधिक मंत्रों का श्रद्धापूर्वक नियमित जप करना चाहिए। बीज मंत्र “ॐ सों सोमाय नमः”, तांत्रिक मंत्र “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः”, वैदिक चंद्र गायत्री मंत्र “ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृत तत्त्वाय धीमहि तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्” तथा सरल नाम-मंत्र “ॐ चन्द्राय नमः” इन सभी का जप द्वादश भाव के चंद्रमा को बलवान बनाने में विशेष रूप से सहायक सिद्ध होता है। अथवा किसी एक मन्त्र का भी जप किया जा सकता है।।

सोमवार के दिन शिवजी का जलाभिषेक अथवा दुग्धाभिषेक करना तथा चंद्रमा को प्रतिदिन रात्रि में जल से अर्घ्य देना भी शुभ फलदायी माना जाता है। क्योंकि चंद्रमा को स्वयं भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान माना गया है। सोमवार के दिन व्रत रखना तथा सफेद वस्तुओं जैसे चावल, दूध, चीनी अथवा सफेद वस्त्र आदि का दान करना भी शुभ फलदायी माना जाता है। साथ ही माता तथा माता के समान स्त्रियों का सम्मान करना चाहिए।।

मानसिक शांति के लिए ध्यान तथा योग का नियमित अभ्यास करना भी द्वादश भाव के चंद्रमा को संतुलित एवं बलवान बनाने में विशेष रूप से सहायक सिद्ध होता है। अनावश्यक व्यय से बचना तथा सोने से पूर्व मन को शांत रखने का अभ्यास करना भी इस भाव-स्थिति के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि गूढ़ तथा आध्यात्मिक विषयों के प्रति अपनी जिज्ञासा को अवश्य आगे बढ़ाएं। परन्तु मन की स्थिरता तथा भय से मुक्ति के प्रति भी उतनी ही सजगता बनाए रखें।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में द्वादशस्थ चंद्रमा को मन, भावना तथा अंतर्ज्ञान का प्रमुख कारक ग्रह बताया गया है। फलदीपिका के अनुसार द्वादश भाव में स्थित बलवान चंद्रमा जातक को ध्यान-साधना में सिद्धि, विदेश निवास में सुख तथा माता से गहरा जुड़ाव प्रदान करता है। जबकि पीड़ित चंद्रमा एकाकीपन तथा मानसिक अस्थिरता उत्पन्न करता है।।

सारावली में भी द्वादश भाव के चंद्रमा को अंतर्मुखता तथा आध्यात्मिक गहराई का प्रमुख कारक ग्रह स्वीकार किया गया है। तथा यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसका अंतिम फलादेश द्वादशेश की स्थिति तथा संपूर्ण जन्मकुंडली के समन्वित अध्ययन के पश्चात ही निश्चित किया जाना चाहिए।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. द्वादश भाव में शुभ चंद्रमा क्या फल देता है।। What results does a benefic Moon yield in the twelfth house.

उत्तर:- द्वादश भाव का शुभ चंद्रमा गहन ध्यान-साधना, विदेश-वास में सुख तथा माता से भावनात्मक जुड़ाव जैसे उत्तम फल प्रदान करता है।।

प्रश्न 2. द्वादश भाव में अशुभ चंद्रमा क्या नुकसान देता है।। What harm does a malefic Moon in the twelfth house cause.

उत्तर:- द्वादश भाव का अशुभ चंद्रमा एकाकीपन, अनिद्रा तथा अनावश्यक व्यय जैसी बाधाएँ उत्पन्न करता है।।

प्रश्न 3. द्वादश भाव के चंद्रमा से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ कौन-सी हैं।। What are the health issues associated with the Moon in the twelfth house.

उत्तर:- वैदिक ज्योतिष में द्वादश भाव का संबंध नेत्र तथा नींद से माना गया है। जबकि चंद्रमा का संबंध मन तथा रक्त से है। पीड़ित चंद्रमा इन क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं की ओर संकेत देता है।।

प्रश्न 4. द्वादश भाव के चंद्रमा को बलवान बनाने का सबसे प्रभावी वैदिक उपाय क्या है।। What is the most effective Vedic remedy to strengthen the Moon in the twelfth house.

उत्तर:- चंद्र देवता के समस्त मंत्रों अथवा किसी एक मन्त्र का जप, सोमवार को शिवजी का जलाभिषेक अथवा दुग्धाभिषेक करना, सफेद वस्तुओं का दान तथा ध्यान-योग का नियमित अभ्यास ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।।

प्रश्न 5. क्या द्वादश भाव का चंद्रमा विदेश-वास में सहायक होता है।। Does the Moon in the twelfth house help in foreign settlement.

उत्तर:- हाँ, द्वादश भाव में बैठा चंद्रमा जातक को विदेश में निवास तथा एकांतप्रिय जीवनशैली के प्रति स्वाभाविक रूप से आकर्षित करता है। परंतु अंतिम निर्णय संपूर्ण जन्मकुंडली देखकर ही किया जाता है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, कुंडली के द्वादश भाव में बैठा चंद्रमा शुभ हो तो जातक को गहन ध्यान-साधना, विदेश-वास में सुख तथा माता से भावनात्मक जुड़ाव प्रदान करता है। वहीं अशुभ होने पर एकाकीपन, अनिद्रा तथा अनावश्यक व्यय जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न करता है। यह द्वादश भाव एवं चंद्रमा ग्रह का संयोग हमें ये सिखाता है कि भावनाओं की गहराई तथा मानसिक स्थिरता का मेल जीवन को आध्यात्मिकता की गहन समझ के साथ समृद्ध बनाता है। बशर्ते जातक अपनी संवेदनशीलता को भय से मुक्त रखकर धैर्य के साथ अपने आप को संभाले।।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार चंद्र देवता के मंत्र का जप, सोमवार का व्रत, शिवजी का जलाभिषेक-दुग्धाभिषेक तथा ध्यान साधना का नियमित अभ्यास इसे संतुलित एवं बलवान बनाने में सहायक माना गया है। और यहाँ मैं यही कहूँगा कि जो जातक अपने मन की गहराई तथा स्थिरता के बीच सही संतुलन साध लेता है। उसी का जीवन द्वादश भाव के इस चंद्रमा से सर्वाधिक लाभान्वित होता है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि किसी भी विशेष उपाय अथवा निर्णायक निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले किसी अनुभवी, योग्य एवं विद्वान ज्योतिषी से संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण विधिपूर्वक अवश्य करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।

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