HomeChandra Grahaचन्द्र प्रदत्त रोग एवं उनका इलाज।।

चन्द्र प्रदत्त रोग एवं उनका इलाज।।

मानव मन एवं शरीर पर चन्द्रमा का प्रभाव एवं रोग तथा उनका इलाज।। Chandra Pradatt Rog.

मित्रों,  अगर चन्द्रमा आपकी कुण्डली में शुभ न हो तो कौन-कौन सा रोग आपको दे सकता है तथा इन रोगों से बचने का उपाय क्या है । सामान्यतया सूर्य और चन्द्रमा एक-एक राशियों के स्वामी होते हैं और ये ज्यादातर परिस्थितियों में अशुभ फल जातक को नहीं देते हैं । आज सोमवार है, तो आइये आज चन्द्रमा से सम्बन्धित मानव जीवन में असर का विचार करने का प्रयत्न करते हैं । साथ ही आज इन सभी बातों पर आज हम गम्भीरता  से विचार करेंगे ।।

वैसे सूर्य के बाद धरती के उपग्रह चन्द्रमा का प्रभाव धरती के निवासियों पर पूर्णिमा के दिन सबसे ज्यादा होता है । मंगल के प्रभाव से समुद्र में मूंगे का पहाड़ बन जाता है और मानव का रक्त उबलने और दौड़ने लगता है, ठीक उसी तरह चन्द्रमा से समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पत्न होने लगता है । जितने भी दूध वाले वृक्ष हैं सभी चन्द्रमा के कारण ही उत्पन्न होते हैं । चन्द्रमा बीज, औषधि, जल, मोती, दूध, अश्व और मन का कारक अथवा मन पर राज करता है ।।

मित्रों, मनुष्य की बेचैनी और मानसिक शान्ति का कारण भी चन्द्रमा ही होता है । चन्द्रमा माता तथा मन का कारक ग्रह माना जाता है । जन्मकुण्डली में चन्द्रमा के अशुभ होने पर मन और माता पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है । ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जन्मकुण्डली में चन्द्रमा के दोषपूर्ण या खराब होने की स्थिति के बारे में विस्तार से बताया गया है । आइये हम उनमें से कुछ कारणों को जानने का प्रयास करते हैं, कि हमारे किस प्रकार के कर्मों से चन्द्रमा अशुभ फल हमें देता है ।।

अगर हमारे घर का वायव्य कोण दूषित हो तो कुण्डली का चन्द्रमा अशुभ हो जाता है और जातक को खराब फल देता है । घर में जल का स्थान जैसे पानी की टंकी आदि गलत दिशा में हो तो भी चन्द्रमा मंद फल देने लगता है । पूर्वजों का अपमान करने तथा घर के मृत व्यक्तियों का श्राद्ध कर्म न करने से भी चन्द्रमा दूषित हो जाता है और जातक को अपनी दशा में बहुत ही परेशान करता है ।।

मित्रों, माता या मातृ तुल्य स्त्रियों का अपमान करने या उससे विवाद करने पर भी चन्द्रमा अशुभ प्रभाव देने लगता है । गृह कलह करने अथवा पारिवार के किसी सदस्य को धोखा देने से भी चन्द्रमा अशुभ फल देता है । राहु, केतु या शनि के साथ होने से अथवा उनकी दृष्टि चन्द्रमा पर पड़े तो भी चन्द्रमा खराब फल देने लगता है । किसी भी कुण्डली में शुभ चन्द्रमा उस जातक को धनवान और दयालु बनाता है ।।

कुण्डली का शुभ चन्द्रमा जातक को भरपूर सुख और शांति देता है । कुण्डली में चन्द्रमा से चतुर्थ स्थान में शुभ ग्रह हो तो ऐसा चन्द्रमा जातक को ज्यादा-से-ज्यादा भूमि और सुन्दर भवन का मालिक बनाता है तथा और भी बहुत सा शुभ फल देता है । परन्तु घर का कोई दूध देने वाला जानवर मर जाए अथवा यदि आपने घोड़ा पाल रखा हो और उसकी मृत्यु हो जाय तो शुभ चन्द्रमा भी अशुभ फल देने लगता है ।।

मित्रों, अब आजकल तो बहुत कम लोग जानवर पालते हैं इसलिए चन्द्रमा के अशुभ होने के और अन्य संकेत भी ज्योतिष में बताये गये हैं । जैसे माता का बीमार होना या घर के जलस्रोतों का सूख जाना भी चन्द्रमा के अशुभ होने की निशानी है । इन्सान के महसूस करने की क्षमता का क्षीण होना अथवा राहु, केतु या शनि के साथ चन्द्रमा के होने से या फिर उनकी दृष्टि चन्द्रमा पर पड़ने से भी चन्द्रमा अशुभ हो जाता है ।।

मानसिक रोगों का कारण भी चन्द्रमा को ही माना गया है । चन्द्रमा मुख्य रूप से इन्सान के दिल तथा उसके बायें भाग से संबंध रखता है । मिर्गी का रोग, पागलपन, बेहोशी, फेफड़े सम्बन्धी रोग तथा स्त्रियों के मासिक धर्म का गड़बड़ाना भी अशुभ चन्द्रमा की पहचान है । चन्द्रमा के अशुभ होने के लक्षण ये हैं, कि आपकी स्मरण शक्ति का कमजोर होना और मानसिक तनाव तथा मन में घबराहट रहने लगती है ।।

मित्रों, मन में तरह-तरह की शंका और एक अनजाने से भय, सर्दी-जुकाम तथा व्यक्ति के मन में आत्महत्या करने के विचार तक बार-बार आते रहते हैं । अब आइये इस ग्रहदोष को दूर करने के कुछ सरल उपाय की चर्चा करते हैं । ऐसे कोई लक्षण आपको अनुभव हो तो प्रतिदिन अपनी माता के पैर छूना, भगवान शिव की पूजा तथा सोमवार का व्रत करना चाहिये । पानी या दूध को साफ पात्र में सिरहाने रखकर सोएं और सुबह कीकर के वृक्ष की जड़ में डाल दें ।।

चावल, सफेद वस्त्र, शंख, सफेद चंदन, श्वेत पुष्प, चीनी, बैल, दही और मोती आदि का दान करना चाहिए । मोती को चाँदी की अंगूठी में जड़वाकर धारण करें । दो मोती या दो चांदी के टुकड़े लेकर एक टुकड़ा पानी में बहा दें तथा दूसरे को अपने पास रखें । कुण्डली के छठे भाव में चन्द्रमा हो तो दूध या पानी का दान भूलकर भी नहीं करना चाहिये ।।

चन्द्रमा की शान्ति हेतु सोमवार को सफेद वस्तु जैसे दही, चीनी, चावल, सफेद वस्त्र, 1 जोड़ा जनेऊ, दक्षिणा के साथ दान करना चाहिये । “ॐ सोम सोमाय नमः” इस मन्त्र का कम-से-कम एक माला अर्थात 108 बार प्रतिदिन नित्य ही जप करना फायदेमन्द सिद्ध होता है । एक और विशेष बात का ध्यान रखें की यदि चन्द्रमा 12वां हो तो धर्मात्मा या साधु को भोजन नहीं करवाना चाहिये और न ही दूध पिलाना चाहिये । मित्रों, ये सभी उपाय सभी के लिये फायदेमन्द ही हों ये कोई गारन्टी नहीं है । इसलिये किसी विद्वान ज्योतिषी से सलाह लेकर ही किसी भी उपाय को आजमायें ।।

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